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Ladies Tailor Sex Kahani

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मैंने शैलजा के मन में वासना के बीज तो बो दिए थे, अब देखते हैं क्या गुल खिलते है। आज उसके घर जाना है ब्लाउज देने, उम्मीद है की कुछ हो.. इस मस्त tailor sex kahani का अगला भाग.
Hindi Sex Stories के अन्य भाग-. पार्ट 1. पार्ट 2. पार्ट 3. पार्ट 4. पार्ट 5. अगली सुबह मैं करीब ११ बजे उसके घर पहुँचा और घन्टी बजाई। एक आदमी ने दरवाज़ा खोला जो सम्भवतः उसका पति था। जब मैने बताया कि मैं दर्जी हूँ तो उसने आवाज़ लगाई शैलजा और मुझको अन्दर आने के लिये बोला। शैलजा आयी. और मैने उसे ब्लाउज़ दे दिया। जैसे ही मैं जाने लगा उसके पति ने बोला “शैलजा तुम इसे पहन कर फ़िटिंग देख क्यों नहीं लेतीं, अभी देख लो अगर कुछ कमी हो, नहीं तो पार्टी के लिये बहुत देर हो जायेगी”। वो बोली ठीक है और अन्दर कमरे में चली गयी। उसका पति भी दूसरे कमरे में कुछ काम से चला गया।. मैं वहीं उसके आने का इन्तज़ार करने लगा। कुछ देर बाद वह बाहर आयी बोली “मास्टर जी, यह नीचे से थोड़ा ढीला है”। लेकिन उसने ब्लाउज़ पहन नहीं रखा था इसलिये मैनें पूछा “मैडम, कितना ढीला है?” तभी उसका पति बाहर आया और बोला “शैलजा, तुम इसे ब्लाउज़ पहन कर फ़िटिंग दिखा क्यों नहीं देतीं और हाँ मैं बाहर जा रहा हूँ शाम की पार्टी के लिये कुछ ठंडा लाना है”। उसने जाने से पहले मुझे बाहर ही इन्तज़ार करने को कहा जबकि शैलजा फ़िर से ब्लाउज़ बदलने अन्दर कमरे में चली गयी।. शायद उसे अपनी पत्नी पर कुछ ज़्यादा ही भरोसा था। जब शैलजा ब्लाउज़ पहन कर बाहर आयी तो पहले उसने जाकर बाहर का दरवाज़ा बन्द किया, फ़िर मुड़ी और मुस्कुराकर बोली “देखिये न कितना ढीला है”। वह काली साड़ी और काले ब्लाउज़ में बहुत ही कामुक लग रही थी। मैं उसके पास गया और उसकी नज़रों में नज़रें डाले उसकी साड़ी का पल्लू हटा दिया। वह कुछ नहीं बोली। मेरी आँखों के सामने एक अद्भुत नज़ारा था। उसकी क्लीवेज दिख रही थी और उसके. स्तनों के ऊपरी उभार मुझे उकसा रहे थे। दरअसल ब्लाउज़ ज़रा भी ढीला नहीं था एकदम फ़िट था। मैनें ब्लाउज़ के नीचे से अपनी दो उंगलियाँ घुसा दीं और पूछा “शैलजा जी, कहाँ से ढीला है?” अब तक मेरा दिल अन्दर ही अन्दर खुशी और उत्तेजना से जोरों से धड़कने लगा था। एक खूबसूरत और कामुक घरेलू औरत मेरे सामने बहकने को तैयार खड़ी थी। उसका पति घर से बाहर था और वह मेरे आगोश में आने को बेताब थी।. मेरी दोनों उंगलियाँ नीचे से उसके स्तनों को ब्रा सहित स्पर्श कर रही थीं और वह मुझसे नज़रें चुराती हुयी नीचे देख रही थी।. मुझे पता था कि आज समय कम है इसलिये मैं बिना समय गँवाए बहुत कुछ करना चाहता था। मैनें अपनी उंगलियाँ एक एक करके उसके दोनों स्तनों पर फ़िरायीं और बोला “शैलजा जी, ये ब्लाउज़ बस इतना ही ढीला है कि मेरी उंगलियाँ अन्दर जा सकें”। वह थोड़ा मुस्कुराई पर शर्म के मारे नीचे ही देखती रही। अब मैने हिम्मत जुटाके एक और कदम आगे बढ़ाते हुये अपना दूसरा हाथ उसकी जांघों के बीच ले गया और उसकी योनि को साड़ी के ऊपर से ही. सहलाते हुये बोला “आपका ब्लाउज़ भी बस इतना ही ढीला है जिसमें मेरी दो उंगलियाँ जा सकें”।. वह मुस्कुराई और शर्माते हुये जल्दी से मुझसे लिपट गयी। मैं एक एक करके उसकी पीठ, नितम्ब और योनि को कपड़ों के ऊपर से ही सहला रहा था। उसके दोनों स्तन मेरी छाती से दबे हुये थे और उसकी साँस भी तेज़ हो गयी थी क्योंकि मेरा लंड उसकी योनि से बार बार रगड़ खा रहा था। शैलजा मुझसे लिपटे हुये अपनी पीठ और कूल्हों पर मेरी मसाज़ का भरपूर आनन्द ले रही थी और मेरे पूर्णतया उत्तेजित लंड को महसूस कर रही थी।. तभी अचानक दरवाजे की घन्टी बजी और हमदोनों जल्दी से अलग हो गये, शैलजा ने अपना पल्लू सही किया और दरवाज़ा खोलने चली गयी। दरवाज़े पर अपनी पड़ोसी सोनिया को देखकर उसने राहत की साँस ली। उन्होनें धीमी आवाज़ में कुछ बात करी और जल्द ही वह वापस लौट गयी। जैसे ही शैलजा ने फ़िर से दरवाज़े का कुण्डा लगाया मैने आँख मारते हुये उससे बोला ” शैलजा जी, अपने पतिदेव को फ़ोन करके कुछ और ज़रूरी सामान लाने के लिये बोल दीजिये ताकि उन्हें बाज़ार से आने में एकाध घन्टा और लग जाय”।. शैलजा भी थोड़ा सा हँसी और फ़िर फ़ोन लगा कर अपने पति से बात करने लगी। जब वह अपने पति से बात कर रही थी मैने पीछे से जाकर उसे अपनी बाँहों मे ले लिया और उसकी नंगी कमर को सहलाने लगा। वह थोड़ा हड़बड़ाई पर फ़िर. सामान्य होकर अपने पति से बात करते हुये मेरी हरकतों का आनन्द लेने लगी। मैं उसकी नाभि में उंगली डालकर दूसरे हाथ से उसके स्तनों को दबाते हुये सोच रहा था कि क्या किस्मत पायी है मैनें कि एक औरत मुझसे. सम्बन्ध बनाने के लिये अपने पति को बेवकूफ़ बना रही है। यह सोच कर मैं और भी कामोत्तेजित हो गया और उसकी योनि को पीछे से सहलाने लगा।. इस हालत में वह चाहकर भी अपने पति से ठीक से बात नहीं कर पा रही थी इसलिये उसने यह कहते हुये फ़ोन रख दिया कि टेलर ब्लाउज़ देने के लिये उसका इन्तज़ार कर रहा है।मैं अबतक काफ़ी उत्तेजित हो गया था और अब इस बेवफ़ा. पत्नी से अशिष्ट भाषा में बात करना चाहता था। मैं बोला “क्यों शैलजा जी, गीली हो गयी है क्या?” वो कुछ नहीं बोली और आँखें बन्द किये हुये अपना चेहरा मेरे सीने पर रखकर मेरे हाथों से आनन्द लेती रही। मैं चाहता था कि वह मेरी अभद्र बातों का उत्तर दे इसलिये मैनें और जोरों से उसकी योनि और स्तनों को मसलना शुरू कर दिया और बोला “शैलजा जी आप बहुत मस्त हैं, क्या मैं आपको रानी कह सकता हूँ?” उसने सिर हिला कर अपनी सहमति जताई। मैने फ़िर खुशी से देर तक उसके गर्दन और कानों को चूमा और इस बीच अपने हाथों को उसके बदन की मसाज़ में व्यस्त रखा। फ़िर मैने बात शुरू करते हुये पूछा “शैलजा रानी, बताओ ना अब तो, गीली हुयी या नहीं”। उसने अनजान बनते हुये भारी आवाज़ में पूछा “क्या गीली हुयी?”. मैं इसी मौके की तलाश में था, मैने उसकी योनि को थपथपाते हुये कहा “आपकी चूत, ये जिसकी मैं इतनी देर से मालिश कर रहा हूँ”। वह चूत का मतलब जानती थी इसीलिये बस सिर हिला कर हाँ बोल दिया और आँखें बन्द किये हुये आनन्द उठाती रही। मैनें उसके शरीर के कामोत्तेजक भागों को छेड़ना जारी रखा जबकि मेरा पूरी तरह से खड़ा हुआ लंड उसके शरीर से टकराता रहा। उसकी साँस बड़ी तेजी से चल रही थी, उसके दोनों हाथ मेरे कंधों पर थे और वह कामोत्तेजना की वज़ह से अपने होठों को चबा रही थी। मेरी मसाज़ के साथ अपने नितम्बों को हिलाते हुये आखिरकार वह बोल पड़ी “ओह मास्टर जी, आप ये क्या कर रहे हैं, आपने मुझे कामवासना में पागल कर दिया है, प्लीज़्… वो अभी आते ही होंगे”।. पर जिस तरह से वह शरीर हिला हिला कर मेरा साथ दे रही थी मैं जानता था कि वह चाहती है कि मैं यह सब जारी रखूँ। फ़िर मैनें अपना एक हाथ उसके ब्लाउज़ और ब्रा के अन्दर डाल दिया। पहली बार उसके नंगे मखमली स्तनों. के स्पर्श से मैं और उत्तेजित हो गया और उसके निप्पलों को चुटकी में दबाते हुये बोला “रानी, ये तो बस शुरुआत है किसी और दिन दिखाऊँगा कि मैं तुम्हारे इस सुन्दर बदन के साथ क्या क्या कर सकता हूँ”।
स्रोत:इंटरनेट