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Maa Ki Gahri Pyaas Hot Mother Sex Story

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पापा माँ को छोड़कर शहर से बाहर जा रहे है, तो अब माँ की प्यास कौन बुझाएगा? बिलकुल, सही सोचा है आपने, उनका लायक बेटा! इस hot mother sex story का नेक्स्ट पार्ट.. Hindi Sex Stories के अन्य भाग-. पार्ट 1. पार्ट 2. पापा मम्मी को चोद रहे थे। वो अब मेकअप करके किसी अप्सरा से कम नहीं लग रही थी। मैं यह सब बाहर दरवाजे के बगल में खड़ा होकर देख रहा था। क्या लग रही थी वो ! पापा मम्मी के बोबों को ऐसे दबा रहे थे कि आज ही. सारा दूध निकाल लेना चाहते हो !.  . वो कह रहे थे- रुपाली , आजा मेरी जान ! अब तो महीने भर बाद ही मौका मिलेगा तुझे चोदने का !  . शायद वो ऑफिस के काम से बाहर जा रहे थे।.  . माँ ने कहा- तो जा क्यों रहे हो ? इस जान को छोड़कर मत जाओ न ! मेरा दिल नहीं लगेगा, इतने दिन में मैं तो पागल ही हो जाऊँगी तुम्हारे बिना ! अरे, रुपाली क्यों चिंता करती हो? एक महीने बाद आ तो रहा हूँ मैं ! फिर से चोदूँगा तुझे मेरी जान ! पर काम तो काम है न ! वो तो करना ही पड़ेगा।  . माँ बोली- हम्म ! वो तो है मेरे राजा !.  . पापा ने कहा- रुपाली ,चल अब घोड़ी बन जा ! काफी देर हो गई चूत मारते हुए !  . तो माँ बोली- तुम मर्द लोगो को गाण्ड में ऐसा क्या मजा आता है?.  . और पापा ने मम्मी को घोड़ी बनाया और चोदने लगे।.  . क्या आवाजें निकाल रही थी माँ चुदते हुए ! मेरा लंड तो फनफनाने लगा था उनकी अवस्था देख कर !.  . मैं मन ही मन सोच रहा था कि काश मैं अपनी माँ को चोद पाता ! क्या माल है वो ! आधे घंटे भर तक वो चुदाई-कार्यक्रम चला होगा और फिर पापा रात को ही मुंबई के लिए चले गए और माँ से कह गए कि मेरा ख्याल रखे।.  . मैंने उस शाम का दृश्य देख कर कसम खाई कि एक बार तो माँ को जरुर चोदूँगा।.  . दिन ऐसे ही निकलने लगे और माँ भी थोड़ा उदास सी रहने लगी। क्या करे, उन्हें लंड ही नहीं मिला था इतने दिनों से !  . मुझसे माँ की यह बेचैनी देखी नहीं जा रही थी पर मैं उनसे कह भी तो नहीं सकता था।.  . मैंने उनसे पूछा- माँ, इतनी उदास क्यों रहती हो तुम आजकल?  .  . तो वो बोली- कुछ नहीं धीरज, तेरे पापा की बहुत याद आ रही है, इतनी दिन हो गए न !  .  . तो मैंने कहा- माँ मैं हूँ न पापा की जगह ! बोलो क्या हुआ ?.  .  . तो वो बोली- र वि तू क्या जाने एक औरत की मज़बूरी ! तू तो अभी बच्चा है।.  .  . तो मैंने कहा- हाँ माँ ! मैं समझ सकता हूँ कि आप पर क्या बीत रही है ! पर मैं एक बात बता दूँ कि मैं बच्चा नहीं रहा अब ! पूरे 19 साल का हो गया हूँ ! और मेरा पप्पू भी।.  .  . वो बोली- क्या कहा तूने र वि?.  .  . मैं सकपका गया और कहा- सॉरी माँ, गलती से मुँह से निकल गया।  .  .  . और वो मेरे लंड को देखने लगी। मैं उस समय माँ से सॉरी बोलकर कॉलेज़ चला गया और काफी सोचता रहा कि यह मैंने क्या कह दिया ! माँ क्या सोचेगी मेरे बारे में….. की धीरज कैसी बात बोल कर गया है ?  .  . पर माँ ने तो शाम के लिए कुछ और ही योजना बना रखी थी।.  .  . कॉलेज़ खत्म करके जैसे ही मैंने घर के अन्दर कदम रखा, वैसे ही बारिश चालू हो गई। माँ ने मुझे देख कर कहा- आ गया मेरा राजा बेटा !  .  . और यह कह कर वो छत पर कपड़े उठाने चली गई। उन्होंने उस समय वही गुलाबी सिल्की गाउन पहन रखा था। मैं भी उनके पीछे पीछे ऊपर चला गया तो वो मुझे देख कर बोली- तू ऊपर क्यों आ गया? भीग जायेगा ! चल नीचे जा !.  . मैं बोला- अरे माँ, मैं तो आपकी मदद करने के लिए ऊपर आया हूँ !  .  . और आधे कपड़े उन्होंने उठाये, आधे मैंने, और नीचे आ गए।  .  . सीढ़ी उतरते वक़्त माँ मेरे आगे चल रही थी, मैं उनके पीछे !  .  . उनके भीगे हुए मादक चूतड़ क्या लग रहे थे ! भीगने की वजह से उनका गाउन बिल्कुल उनके शरीर से चिपक गया था। मन तो कर रहा थ कि उनको गोदी में उठा कर उनकी इतनी गांड मारूँ कि सारा वीर्य ही निकाल दूँ !.  .  . नीचे आकर माँ कहने लगी- इस बारिश को भी आज ही आना था ! एक तो यह ठण्ड, ऊपर से बारिश ! चल कपड़े बदल ले, नहीं तो ठण्ड लग जाएगी।  .  . उस समय मैं माँ के दोनों स्तन देख रहा था जो गाउन में से झांक रहे थे। क्या संतरे थे- मानो कि अभी दबाओ तो कई ग्लास भर कर जूस निकलेगा उसमें से !उन्होंने मुझे देख कर कहा- क्या देख रहा है तू इधर मेरे उभारों. को घूर कर ?.  .  . मैं डर गया और कहा- कुछ भी तो नहीं !.  .  . तो वो बोली- मैं सब समझती हूँ बेटा ! माँ हूँ तेरी !.  .  . और यह कह कर वो बाथरूम की तरफ जाने लगी और कहने लगी- तू भी अपने कपड़े बदल ले, मैं भी अब नहा लेती हूँ !  .  . क्या गाण्ड लग रही थी चलते हुए उनकी ! मैं मन ही मन तो उन्हें चोद ही चुका था और आज अच्छा मौका था उन्हें सचमुच में चोदने का !.  . मैं उनसे जाकर पीछे से लिपट गया। माँ एकदम से घबरा गई। मैंने कहा- माँ सॉरी ! मैं ऐसा कुछ नहीं देख रहा था जो आप सोच रही हो !.  .  . माँ से चिपकते ही मेरा लंड फुन्कारे मारने लगा था और इसका एहसास मेरी माँ को भी हो गया था क्योंकि उस समय मेरा लंड उनकी दरार में रगड़ मारने लगा था। शायद माँ समझ गई थी कि मैं उन्हें चोदना चाहता हूँ।.  .  . उन्होंने कहा- चल छोड़ मुझको ! मैं तो बस मजाक कर रही थी !.  .  . शायद वो भी काफी दिनों से चुदासी थी इसलिए चुदवाना भी चाहती थी और उन्होंने मुझे पीछे से हटाकर अपनी छाती में समा लिया। मैं तो उनके वक्ष में खो ही गया था।.  .  . क्या स्तन थे उनके ! मन तो कर रहा था कि दबा कर सारा दूध निकल लूँ !.  .  . फिर वो बोली- चल, अब जा ! कपड़े बदल ले ! मैं भी नहा लूँ !  .  . तब वो बाथरूम में चली गई।.  .  . मैं कहाँ मानने वाला था, उनके बाथरूम में जाने के बाद मैं उन्हें बाथरूम में देखने लगा दरवाज़े के छेद मैं से !  .  . उन्होंने अपने धीरे-धीरे कपड़े उतारे। शायद उन्हें पता लग गया था कि मैं उन्हें छेद में से देख रहा हूँ और वो धीरे धीरे अपनी चूचियाँ दबाने लगी और सिसकारी भरने लगी- उह्ह्ह ह्म्म्मम्म ओह माय गोशह्ह्ह्ह. आह्ह्ह अहा ओह्ह्ह और अपनी चूत में भी ऊँगली डालने लगी। वो यह सब कुछ मुझे दिखा रही थी जानबूझ कर !.
स्रोत:इंटरनेट