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Maa Ki Kahani Sex Stories Hindi

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Hindi Sex Story के अन्य भाग-. पार्ट 1. पार्ट 2. पार्ट 3. पार्ट 4. पार्ट 5. पार्ट 6. पार्ट 7. पार्ट 9. अब उछल ने की बरी मेरी थी. माँ ने अपनी उंगली मेरे पीछे घुसा दी.. में- ओ.
माँ । मम्मी..निकालो..एसा न..करो.. माँ-क्यों बेटा जी .. में- माँ जब आपनी फटती हे हो मम्मी,तो क्या नानी भी याद आ जाती हे.. माँ- तो मुझे केसा होता होगा?. में -तुजे तो मजा आएगा .
मम्मी तू मोर बनाने की बात कर रही थी.
वोकेसे? माँ – तेरी गांड मे झाड़ू घुसा दूंगी,फिर मोर की तरह घूमते रहना..मुझे हंसी आ गई..माँ भी हंसने लगी.
मेने फिर उंगली डाली.. मेने कहा – मम्मी तुम्हे मेरा ऊँगली डालना अच्छा तो लगता ही हे..सच हे ना? माँ- पर तेरे लोडे से डर लगता हे.
बहुत बड़ा और मोटा हे ..मेरी फाड़ देगा.. में- तु कुछ भी कहे लेकिन में एक दिन जरुर तेरी गांड में अपना लंड डाल के रहूंगा?.. माँ-बेटा ऐसा ख्वाब में भी मत सोचना..की में तेरे लोडे से गांड मरवाउंगी..ये ऊँगली डाल देता हे तब तक ठीक हे.. में- तू कुछ भी कहे में तेरी गांड मार के ही रहूँगा.. माँ- ये तेरा ख्वाब ,ख्वाब ही रहेगा मेरे लाले.. में -मम्मी आज नहीं तो फिर कभी लेकिन तेरी गांड में अपना लंड नहीं पेला तो में तेरा बेटा नहीं।. माँ-नहीं पेल सका तो भी तू मेरा ही बेटा रहेगा.
माँ का प्यारा मादरचोद.. नहाकर हम बदन को पोछ रहे थे, माँ झुक कर पेरो को पोंछ रही थी.
गांड मेरी तरफ थी में देखता ही रह गया पहलीबार में माँ की गांड देख रहाथा.
खिले हुए गेंदे के फुल जेसी.
मस्त..भूरे रंग की ..मेने अपने लोडे से टच किया..माँ ने मुझे धक्का दिया.
में बाहर चला गया.. दादाजी दुकान से आ गये थे.
सब ने साथ में खाना खाया.
दादाजी ने थोड़ी देर बाद टीवी देखा फिर ऊपर अपने कमरे में चले गये.
माँ ने अपना कम निपटा लिया.
और मेरे पास आ गई रात भर हम चुदाई करते रहे लेकिन माँ ने गांड नहीं दी.. आ गई रात भर हम चुदाई करते रहे लेकिन माँ ने गांड नहीं दी..सिर्फ उंगली से ही मजा लिया.. सुबह में सो रहा था.
माँ आई और लंड को सहलाने लगी.
में उठ गया में नंगा ही था.
माँ को बाहो में भर कर किस किया और ऐसे ही खड़ा रहा.
माँ भी मेरे लंड को सहलाने लगी.
माँ-चल अब छोड़ मुझे देखा कितने बजे हे?. में-अभी तो सिर्फ १०:३० बजे हे.. माँ-तेरे दादाजी दुकान चले गये.
तेरे पापा भी गाँव से आने के लिए निकल गये हे। और.. में-और यहाँ हम चुदाई करेंगे.. माँ-करनी हे तो जल्दी कर क्योकि आज दादी भी आ ने वाली हे.. में -दादी..????? माँ-हाँ दादी भी अहमदाबाद से निकल गई हे।  दादी का नाम सुनते ही मेरा लंड ढीला हो गया.. दादी../। नाम-जशोदा.. रंग-सांवला.. हाईट-५ फुट,६ इंच..मतलब लंबा कद.. वेइट-शायद ९५ kg.
चहेरा -स्मार्ट..नजर हटाने को दिल न करे।  सीना(चुचे)-बड़े,बड़े नारियल जितने.. पिछवाडा-हदसे ज्यादा बाहर उभरा हुआ.
और बहूत बड़ा..मान लीजिए porn फ़िल्ममे दिखाई जाने वाली BBW जेसी ओरत.
जो हंमेशा साडी ब्लाउज ही पहनती हे.
उम्र-५१ साल (क्योकि मेरे दादाजी की वो दूसरी बीवी हे.
मेरे पापा की माँ के अवसान के बाद दादाजी ने दुबारा शादी की.
मेरे चाचा उनके सगे पुत्र हे.
) परिवार में दादी का रूतबा ऐसा हे की उनको पूछे बगेर कोई काम नहीं होता.
धंधे का सारा हिसाब उनके पास ही रहता हे.
दादी जब घर पर होती हे तो हंमेशा माके साथ होती हे.
सब उनकी इज्जत करते हे..डरते भी हे..ऐसी दादी आ रही थी तो लाजमी हे मेरा लंड ढीला हो जाये। माँ- क्यों तुजे शोक लग गया?. में – मम्मी अब हमारे खेलने के दिन गये.. माँ-जो वक्त उसमे थोडा मजा कर ले आगे की जो होगा सो होगा.. माँ ने लंद्को मुह में डाल दिया और चूसने लगी..मेने माँ को आईने के सामने खड़ा किया उनका गाउन उतार दिया माँ ने उंदर कुछ नहीं पहना था.
में मम्मो को दबाने लगा.
और माँ का एक पैर स्टूल पे रखवा दिया पीची चुत्तड़ो के बीचा से लंड को चूत में घुसाने लगा..माँ ने हेल्प की और लंड पूरा घुस गया अब में इसी पोज में चुदाई करने लगा.
सामने आईने में दोनों देख रहे थे। मजा आरहा था.. में-मम्मी में झड ने वाला हु .. माँ- ला मेरे मुहमे चूस लू जाने फिर कब तेरा माल पिने को मिलेगा ?? माँ सामने बेठ गई और लोडा चूसने लगी..मेने सारा माल मुहमे छोड़ दिया माँ पि गई और लंड को भी चाट कर साफ़ कर दिया.
में नहाने चला गया.
माँ भी अब नोर्मल हो गई मुझे दादाजी के पास दुकान पे भेज दिया.. मुझे दादाजी के पास दुकान पे भेज दिया.. दो पहर पापा आ गये उन्होंने दादा जी को बताया दादी घर पर आ गई हे.
और दादाजी को खाने के लिए घर भेज दिया.
में और पापा शाम तक दुकान पर रहे..फिर घर गये..खाना खाया.
देर तक बाते होती रही.
चाचा जिस मकान में रहते थे उसके मालिक कने उस मकान को रिपेर करना था.
तो चाचाजी दुसरे मकान में रहते थे जो तिन छोटे-छोटे रूम वाला था.
एक रूम्मे सारा सामन भर दिया था.
दुस्रेमे रसोई बनाते थे.
बचा एक कमरा वो भी छोटासा उसमे ही सब सो जाते थे.
पर अब उस बड़े मकान का काम पूरा हो गया था.
और उसके मालिकने चाचाजी को वही सिफ्ट हो जाने के लिए कहाथा .
दादा-दादी उपर अपने कमरे में चले गये,माँ पापा अपने कमरे में और में अपने कमरे में.
चार दिनों तक एसा ही चलता रहा था.
बीच में एक दिन माँ पापा के साथ गाँव की दुकान पर भी गई.
लेकिन आज चाचाजी का फोन आया था.
लेकिन आज चाचाजी का फोन आया था.
रात को खाने के बाद सब बेठे थे.
दादी- छोटे का फोन आया था.
कहता था.
की एक-दो दिन में घर का सामान सिफ्ट करना पडेगा.
तो मुझे और साथ मे हेल्प केलिए मयंक को भी बुलाया हे.
दादाजी -ठीक हे तुम दोनों चले जाना.
अगर जरूरत हो तो मनीष को भी ले जाइए.
दादी-नहीं, वहां वो रहता हे उस मकान मे उठने-बेठने जगह ही नहीं हे.. और वेसे भी मयंक आ रहा हे..जो कुछ कम करेगा.
में माँ की और देखा रहा था.
में सोचता था माँ मुझे यहाँ रुकने के लिए कहेंगी.
पर । माँ-तो कब जाना हे?।  दादी- दोपहर के बाद निकलेंगे..बस से ही जायेंगे.
दोपहर के बाद में और दादी बस स्टेशन आ गये..लेकिन शादियों का मोसम था.
बहुत ही भीड़ थी हमने दो बसों को जाने भी दिया लकिन कोई फायदा नहीं भीड़ एसी ही हो जाती.
अब जो बस आई उसमे में और दादी चढ़ गये। बेठने को जगह नहीं थी तो हम खड़े थे..मेरे आगे एक आदमी खडा था.
उससे आगे दादी खड़ी थी.
दादी किआगे भी ओरते खड़ी थी.
बस फुल हो गई थी । और चलने लगी.
वो आदमी दादी से बिलकुल चिपक कर खड़ा था.
जब बस का जटका लगता तो वो दादी के बड़े चुत्तड़ो पे धक्के दे देता.
मुझे लगा दादी उसे डाटेगी और झगडा होगा.
लेकिन एसा कुछ नहीं हुआ.
उल्टा दादी ने मुड़कर भी नहीं देखा की पीछे कोण हे?में सोचने लगा इतने बड़े चुत्तड़ो पर दादी को पता भी नहीं लगता होगा की क्या हो रहा हे?में मुस्करा दिया..कुछ देर बाद उसका स्टेंड आ गया वो उतर गया.
अब दादी के चुत्तड़ो को में छु रहा था.
लेकिन मुझे बहुत डर लग रहा था.
पर डर के आगे ही तो जित हे?। मेने सोचा कुछ होगा तो बोल दूंगा भीड़ की वजह से हुआ। । ..अब में भी चुत्तड़ो पर अपना लंड दबाने लगा.
मजा आ रहाथा.
मेने पेंट में हाथ डाला और लंड को सेट किया ताकि चुत्तड़ो की दरार को छू सके। और सेट कर के चुत्तड़ो की दरार में दबाने और घिसने लगा.
कभी-कभी दादी भी लंड को दबा देती..तो बहुत मजा आता..बस में जब भीड़ बढ़ गई तो में ऐसे ही लंड सटाए खड़ा रहा.
मुझे गांड की गर्मी महसूस हो रही थी तो दादी कोभी मेरे लंड की गर्माहट लग रही होगी..लेकिन फिर भी..दादी ने मुड़कर भी नहीं देखा । ऐसा काफी देर तक चला हमारा स्टेंड आया तो दादी पीछे कोण ये देखे बगेर ही उतर गई ,मेभी एक-दो पेसेंजर का उतरने बाद उतर गया ताकि दादी को शक ना हो..स्टेंड से रिक्सा किया और चाचाजी के घर पंहुच गये।. स्टेंड से रिक्सा किया और चाचाजी के घर पंहुच गये।. जब घर पहुंचे चची घर पर थी । दादी सीधा बाथरूम चली गई चची ने मुझे पानी दिया..में कुर्सी पे बेठा गया.. कुछ देर बाद दादी आई ..मुझे कहा तू भी हाथ पैर धो ले ..अच्छा लगेगा.. में भी बाथरूम चला गया.
आया तो दादी पंखे के निचे बेठी थी साड़ी घुटनों तक चढ़ा रखी थी.
में वही सामने बेठा गया.
दादी के साड़ी ऊपर करने की वजह से उनकी बड़ी-बड़ी सांवली जांगे दिख रही थी.
दादी बे फ़िक्र थी.
में नज़ारे चुरा कर देख लेता था.
चची हाय ले कर आई.. और चाय पीते-पीते बातें करने लगे ..शाम होने को आई थी .
चाची और दादी रसोई के काम में लग गई..में टीवी देखने लगा.
चाचाजी आ गये मुझे देख कर खुश हो गये.
बोले अब तू कुछ दिन यही रुकना बहुत दिनों के बाद आया हे..और में चाचा के साथ गप्पे मरने लगा मेरी चाचा के साथ अच्छी बनती हे क्यों की चाचाजी मुझसे करीब १० साल बड़े हे..मेरे बड़े होने के बाद ..हमारे बीच जनरेशन गेप नहीं हे दोस्तों जेसा व्यवहार रहा हे..रसोई तेयार हो गई..सबने खाना खाया में और चाचा ठंडा पिने बाहर चले गये आया तो दादी और चची टीवी देख रहे थे.
रूममे बिस्तर लगा दिए थे.
मेने कपडे बदले..लोअर पहन लिया ..और रुममे दीवार के पास लेट गया.
सबने थोड़ी देर टीवी देखा और सो गये..दादी मेरे पास में सोई ..चची उस दिवर्की और लेटी थी चाचा उनके पास सो गये.
चाचा ने कहा माँ लाईट बंधा कर दू?दादी हाँ..बंधा कर दे। सब सो गये.
चाचा ने कहा माँ लाईट बंध कर दू?दादी हाँ..बंध कर दे। सब सो गये.
जगह बदलने की वजह से मुझे नींद नहीं आ रही थी.
और बस वाली घटना से दादी के चुत्तड नाम से हट नहीं रहे थे.
में चान्स मारने की सोच रहा था.
इतने में चाचू की फुसफुसाहट किआवाज आई. चाची-क्या कर रहे हो घर में माजी और मयंक हे?। चाचा-सब सो गये हे..ट्रावेलिंग से थके हे बेचारे.
चाची- ठीक से देखा लो। बाद में..चाचा ने मोबाईल ओन किया और हमारी तरफ देखा हम सो रहे थे.
चाचा ने मुझे हलकी सी आवाज दी पर में कुछ नहीं बोला.. चाचा- तेरे चूचो का सारा दूध पि जाउंगा..कितने मस्त हे..छोटे-छोटे.
बहुत मजा आ रहा हे .. चाची-जानू इसे ज्यादा मत दबाओ बड़े हो जायेंगे..सिर्फ..दुदू पिओ..और.. ऐसे उंगली चूत में मत डालो..मुझे अन्दर तुम्हारे नाख़ून चुभ रहे हे। चाचा-ठीक हे रानी..ऊपर से सहला देता हु..तू लंड पकड़ कर क्यो बेठी हे थोडा सहलाना। चाची-ओह मेरे रा जा। ये तो रेडी हे चलो इसे चूत मे डालो और मुझे आसमान की सेर कराओ.. चाचा-हाँ मेरी रानी मेरा ये रोकेट तुजे आसमान में ले जाने को बेताब हे.. चाची-स्स्स्स..डालो ना। देखो..चूत से कितना पानी निकल रहा हे। सस..स्स्स्स.
चाचा-ले मेरी चुत रानी..ले.
ले..पूरा। चाचा ने जोर से धक्का मारा । चाची- उईईई। मम्मी..कितनी बार कहा धीरे डालो ये छोटी सी चूत हे बड़ा भोसड़ा नहीं हे । चाचा-दो साल से चोद रहा हूँ फिर भी इसे उछलती हे जेसे पहली बार हो.. चाची- देखो जल्दी मत को हल्के- हलके धक्के देते रहो में कहि भागी नहीं जा रही। चाचा चची की चूत आराम से चोद रहे थे..मेरी नींद उड़ गई थी.. चाची-जानू..थोया फ़ास्ट..प्लीज घर में सब हे जल्दी करो। चाचा-। हाँ..ले। ले..मेरा..पूरा.
लंड ..ले..ले..अपनी चूत में। चाची-आने दो ऐसे ही..स्स्स्स.
आह्ह्ह.
आह्ह.
कम ओन राजा फास्ट..और तेजज। ओह्ह्ह्ह..हाय। आह्ह्ह। चाचा-ले मेरी रानी..मेरा लोडा..तेरे लिए ही तो हे। .
हलकी सी तपाक-तपाक की आवाजे आ रही थी। चाची की साँसे..तेज हो गई थी.. चाची-ओ..स्स्स्स। आह्ह्ह। ओ..जानू..चो..द। दो.
मुझे..में.
आह्ह्ह। आह्ह्हह्ह.
ओ.
ओ.
ओ। । स्टॉप..प्लीज..स्टॉप। लगा..चाची का खेल ख़त्म हो चुका था.
चाचा रुक गए..चाची हांफ रही थी उनकी साँसों की आवाज स्पष्ट सुनाइ दे रही थी। कु छ देर बाद. चाची-अब निकाल भी लो अपने रोकेट को और ठीक अपनी जगह रख दो..मुझे सोने दो.
चाचा-तू आसमान की सेर कर आई पर अभी ये फटा नहीं हे। .
चाची- मेने कितनी बार कहा..हंमेशा साथ में चला करो जानू तुम हो की पीछे ही छुट जाते हो। चाचा- तू तो जानती हे मुझे घोड़ी पे सवार होना अच्छा लगता हे.. चाची-आज घर में सब हे। आज के लिए तो साथ चल देते..अब जल्दी करो.. चाचा-देर तो तू कर रही हे डार्लिंग।. चाची-राजा तुम देर कर रहे हो..देखो में कब से पिछवाडा उठाये बेठी हूँ.. चाचा- ओह..सोरी.
अँधेरे में कुछ नहीं दिखता..लो में आ..गया.. चाची – रुको पहले मेरे हाथ में दो..कही अँधेरे में गांड मे डाल दोगे..तो.. मे ..तो मर ही.
जाउंगी..अब पीछे से धीरे डालना..एक ही धक्के में डाला तो..में चिलाउंगी..सब जग जायेंगे..और ऐसे ही बिना माल निकाले सोना पडेगा.
चाचा- नहीं मेरी रानी..देखो मेरा सुपाड़ा चला गया..पता चला..और ये पूरा लोडा..भी डाल दिया। चाची- देखो मेरा हो गया हे.
आप भी ..थोदी जल्दी करना.. चाचा -ओके रानी । में गाडी तेज चलाऊंगा..ले मेरी जान। चाची-ठोको मेरे राजा मगर प्यार से..जान.. मेने कहाँ न मेरा हो गया हे। चुचे छोडो..ठुकाई करो.. चाचा-लो मेरी चूत रानी। आअह्ह..आअह्ह ..और कमरे में थपाक-थपाक की आवाजे आने लगी.. चाची-रुको ..ये क्या कर रहे हो पुरे मुहल्ले को बताओ गे। की तुम मुझे घोड़ी बना के चोद रहे हो। चाचा-अब आवाज तो आएगी..न..जानू.. चाची-नहीं..रजा। कोई जग गया तो क्या सोचेगा हलके से और तेज करो.. चाचा-दोनों केसे..हो सकता हे..जान। चाची-जेसा तुम मेरे घर पर अपने ससुराल में चुपके से चोद देते हो..ऐ से.. चाचा-वहां तो सब होते हे ..इस्लिलिए.
चाची-तो यहाँ कोई नहीं हे क्या??.
चाचा-में भूल गया..सोरी ..तुम..हेल्प करोना। चाची- देखो तुम चूत में पूरा लोडा मत जाने दो..अपना सुपाडा और आधा लंड ही डालो..और फ़ास्ट अन्दर-बाहर करो.. चाचा-यु जीनियस माय डार्लिंग। आह्ह अहह। ओ..ओ..आह्ह्ह। चाची-आने दो ..कम ओंन फ़ास्ट..डार्लिंग चो.
दो .. मुझे । हाय ..कितना मजा आ रहा हे..प्लीज..में दुबारा आसमान में जा रही हूँ..मेरे चुचे दबाओ ओह। स्स्स्स। आअह्ह्ह्ह । .
ओह्ह्ह्ह..ओ..ओ..ओ.. चाचा-चलो मेरी जान मेभी साथ मे..ही.. हु..आअह्ह..ओ..ओ..ओ.
ओ.
ओ.
ओ..ह.
नो..ओह.
नो।  हलकी सी पच-पच की आवाज आरही थी..अब वोभी बंद..हो गई.
लगता था.
दोनों धरती पर आ गये..कुछ देर बाद चाचा- थेंक्स एण्ड गुड नाईट डार्लिंग ..चाची-गुड नाईट..मोरे रंगीले सैया.. लगता था.
दोनों धरती पर आ गये..कुछ देर बाद चाचा- थेंक्स एण्ड गुड नाईट डार्लिंग ..चाची-गुड नाईट..मोरे रंगीले सैया.. सब कुछ शांत हो गया था.
लेकिन मेरे मन में शेतान जाग रहा था.
में सोच रहाथा.
इतना घमासान होने बाद भी दादी चेन से सो रही हे? अजीब लगता था.
क्योकि मेने दादी में दबी हुई जवानी का बस में अहसास किया था.
क्या करूँ..कुछ समज में नहीं आ रहाथा.
तो मेने अपना पैर दादी के पैर पर रख दिया,और क्या होता हे ..इन्तजार करने लगा.
दादी ने मेरे पैर को जटक दिया.
मेरा अंदाजा गलत हुआ.
फिर भी थोड़ी देरबाद ट्राय किया.
इसबार दादीने खुदका पैर हटा लिया..में काफी निराश हुआ क्योकि मेरा प्लान दादी को चोद ने का था.
अगर आज दादी को चोद लू तो फिर बरोडा जाकर माँ की चुदाई दादी के हो ने पर भी आसान हो जाये.
पर यहाँ तो कुछ सेट नहीं होरहा था.
अब आखरी बार किस्मत अजमाई..दादी के चुत्तड मेरी तरफ थे। उन पर हाथ रखा दादीने कुछ नहीं किया..धीरेधीरे सहलाने लगा..थोड़ी सेर बाद में उनसे सट गया। अब..दादी। के मन में भी जवानी ने अंगडाई ली..उन में भी कामाग्नि जल रही थी.
इसबार तो उन्होंने भी पिछवाडा लंड पे दबा दिया.
मेरे लिए ग्रीन सिंग्नल था तो मेने देर नहीं की दादी की साड़ी को उपर किया और चुत्तड़ो को सहलाने लगा.
दादी कभी पेंटी नहीं पहनती..सो चुत्तड नंगे ही थे। कितने बड़े-बड़े थे चुत्तड..बड़े थे पर एकदम मुलायम लिससे थे.
मेरा हाथ अपने आप फिसल रहाथा.
दादी गरम थी में उन्हें ओऊ गरम कर रहा था..आब दादी ने मेरे लोअर में हाथ डाला और लंड को बाहर निकाला दबाने और सहलाने लगी.
मेने अपना हाथ उनके चूचो पर ले गया ब्लाउज के ऊपर से ही दबाने लगा.
दादी ने निचेके हुक खोल दिए और बड़े-बड़े चूचो को आझाद कर दिया.
मेरे हाथमे तो पूरा नहीं समा रहा था.
फिर भी में दबाता रहा..सहलाता रहा..दादी मेरी तरफ घूम गई और मेरे लंड को चूत में घुसाने की कोशिश करने लगी..लेकिन दादी के मोटापे की वजह से लंड चूत तक नहीं पहुचपाता था.
दादी लंड को खीच कर चूत के पास ले जाती..पर नहीं हो पाया.
दादी ने एक पैर मेरे ऊपर रखा दिया और कोशिश की लेकिन इसबार लंड सिर्फ चूत को छु पाया.
पर गुस नहीं पाया.
में हेरान था.
दादी पलट गई,चुत्तड़ो को मेरी तरफ कर दिया अब मेने ट्राय किया लेकिन गांड तक पहुच पाया..अब दादी भी हेरान थी। उन्होंने अपना एक पैर आगे मोड़ दिया और लंड को चूत पर खिच लिया.. लेकिन इसबार भी लंड का सुपाड़ा चूत के फोंको तक ही पंहुच पाया। हम दोनों परेशान थे.. यार, एसा तो कभी होता हे..जब चूत लंड लेने को रेडी हो और लंड भी खड़ा होने बावजूद चूत में ना जा सके..?? अपने लोडे को में फांके ऊपर ही घिस रहा था.
दादी ने फिर ट्राय किया लंड को खीचा..लेकिन असफल..अब तो मुझे अपने आप पर गुस्सा भी आ रहा था.
की सारा दिन जिस चूत को चोद ने की सोच रहा था.
वो चुत चुदने को तेयार थी और में चोद नहीं पाता था..दादी ने फिर एक बार ट्राय किया । लेकिन व्यर्थ..अब शायद दादी को भी गुस्सा आया उन्होंने मुझे धक्का दे दिया.
मुझे लगा गया काम से बेटे..दादी ने तुजे रिजेक्ट कर दिया..पर ये क्या अगले ही पल दादी,उठी और मेरे लंड पर बेठ गई..पूरा लंड चूत में एक हि झटकेमें घुस गया..दादी उछल पड़ी..लंड बाहर निकल गया..में समज गया था.
दादी ने मेरे लंड का अंदाजा गलत लगाया था.
उन्होंने सोचा होगा की घुस नहीं रहा इसलिए छोटा होगा..पर ये तो पुरे 21 cm.
का था.
तो झटका लगना मुनासिब था.
तो ..अब दादी मेरी जांगो के उपर थी..और लंड के सुपाडे को चुत पर मसल रही थी.
चूत पानी निकाल रही थी.
उन्होंने धीरे से सुपाडे को अंदर किया फिर आधा लंड घुसाया ..और धीरे-धीरे करके पूरा लंड अपनी चूत में लेलिया..मुझे मजा आ गया.. में निचे लेटा हुआ था.
और दादी मेरी चुदाई कर रही थी..में उनके बड़े-बड़े स्तनों को सहला-दबा रहा था.
दादी उछल-उछल कर लंड लेरही थी..कभी में उनके चुत्तड़ो को भी दबा लेता.
और आदत के मुताबिक़ गांड पर भी उंगली फेर देता.
थोड़ी देर बाद दादी पलट गई..अब उन के चुत्तड मेरी तरफ थे.
और वो उछल रही ही। मुझे बहुत मजा आ रहा था। अब मेने अपनी ऊँगली मुह में डाली थूंक लगाया और दादी की गांड पर रगड़ ने लगा। फिर मेने उंगली दादी की गांड पे दबा दी..दादी ने अपनी स्पीड बढ़ा दी.
में समज गया दादी आउट होने वाली हे..उनकी सांसे तेज चल रही थी पर मुहसे कोई आवाज नहीं निकल रही थी..मेरे लंड पर उनकी चूत का मार भी तेज हो गया। अब वो रुक गई में समज गया.. वो आसमान की सेर कर आई थी.
बाकि में रहा था.
अब कमरे में सब आसमान की सेर किये हुए थे.
में ही बाकी रह गयाथा। लेकिन मुझे यकीं था दादी जरुर मुझे भी आसमान की सेर करा एगी। अब दादी लंड पर बेठे-बेठे ही फिरकनी घूम गई..उनके मम्मे मेरे सामने थे.
में उन्हें दबा ने लगा और वो मेरे लंड को उपर से चोद ने लगी। थी थोड़ी ही पच-पच की आवाज आई तो उन्होंने लंड निकाल दिया चूत और लंड दोनों को पेटीकोट से साफ़ कर दिया.
फिर अन्दर धीरे से घुसा दिया और चोद ने लगी। अब तो वो चुत्तड़ो को एसा घुमाती की मेरा लंड पानी छोड़ने को तेयार हो गया था.
मेभी बिना आवाज किये निचे से कूद-कूद कर ठोक ने लगा..ओये..क्या मस्तानी चुदाई होरही थी..दादी को समज ते देर नहीं लगी में भी आसमान पर पहुचने वाला हु..उन्होंने लंड चूत से निकाल दिया..और जांगो पर बेठ गई लंड मुह में लेलिया.
चूसने लगी क्या । लंड चूसती थी। बापरे ..एसी चुसाई मेने कभी देखि हे ना सुनी हे। मेरा लंड उनके हाथो में था आधा उनके मुहमे..होठों को ऐसे सिकुड़ा था.. की बता नहीं सकता..वो आधे लोडे को ही चूस रही थी पर बहुत जोरदार चुसाई थी। मुझसे रहा नही गया मेने पानी छोड़ दिया। वो सारा माल पि गई..और लंड को पेटीकोट से साफ़ करदिया। खड़ी हुई साडी को ठीक किया,ब्लाउज को बी बंद किया और मेरे पास लेट गई..में भी दादी के पेट पर हाथ रख कर सो गया। ..
स्रोत:इंटरनेट