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Mahila Adhikari Ki Chudai Desi Sex Kahani 2

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मैंने पूछा- आपके घर में कोई नहीं पीता मैडम जी?. वो बोली- नहीं, मायके में तो खा पी लेते हैं, मगर मेरे ससुराल के घर में सब शुद्ध शाकाहारी हैं। मैं भी अपने ससुराल में नहीं खाती पर जब मायके जाती हूँ, या बाहर कहीं जाती हूँ, तो नॉन वेज खा लेती हूँ। मैंने देखा, मैडम जी को बातें आने लगी थी, मैंने पूछा- तो मैडम जी, कॉफी और लाऊं, या सीधा ही एक पेग बना दूँ? वो मुझे हल्की सी झिड़की देकर बोली- चल हट बदमाश, मैं क्या दारू पियूँगी। मैंने कहा- देखो मैडम जी, ससुराल से बाहर जा कर आप चिकन खाती हो, यहाँ तो न आपका ससुराल है, न मायका, यहाँ तो कोई भी बंधन नहीं है। मैडम ने मना किया मगर मैंने फिर एक पेग बना कर मैडम के सामने रख दिया और दौड़ कर जाकर एक प्लेट में चिकन की सब्जी डाल लाया।. मैडम मेरी तरफ देखने लगी- तू नहीं पीता?. मैंने कहा- जी कभी कभी, पर आज मैं आपकी सेवा में हूँ। आप जो कहोगी, मैं करूंगा। मैंने एक गिलास में एक और पेग बनाया और मैडम को दिखा कर एक ही सांस में अंदर फेंक लिया।. मुझे देख कर मैडम ने भी गिलास उठाया, पहले हल्का सा होंठों को लगाया, और फिर मेरी नकल करते हुये एक ही घूंट में पूरा गिलास खाली कर दिया। फिर चिकन का पीस खाते हुये बोली- तू बहुत हरामी है, मुझे दारू पिला दी।. मैंने कहा- मैडम जी, बस इस बात को यहीं पर रखो, हम दोनों के बीच, अगर आप कहो तो मैं आपकी और भी सेवा कर सकता हूँ। मैडम बोली- और क्या सेवा करेगा बे?. मैंने कहा- मैडम जी, आपकी टाँगें दबा सकता हूँ, मैं मालिश बहुत अच्छी करता हूँ। मैडम ने मेरी तरफ देखा और फिर हंस कर बोली- मैं तुझसे मालिश करवाऊँगी क्या?. मुझे लगा कि मैडम जी को एक पेग भी चढ़ गया है। मैंने उनके लिए खाना ला कर दिया, अपने सामने उनको खाना खाते हुये देखने लगा। उन्होंने बड़े मज़े ले लेकर चिकन खाया। मगर मेरे मन में हलचल सी उठ रही थी, मेरा मन बार बार कर रहा था कि मैं आगे बढ़ूँ और मैडम जी को पकड़ लूँ, इन्हें चूम लूँ, चूस लूँ, चोद दूँ… मगर मैं ऐसा नहीं कर सकता था। खाना खाने के बाद मैं मैडम जी के लिए स्पेशल गुलाब जामुन ले कर आया। मगर दुकान से गुलाब जामुन लाते वक़्त मेरे मन में एक विचार कौंधा, मैंने एक एक गुलाब जामुन लिफाफे से निकाला और उस पर अपना लंड फिरा दिया। मेरा लंड, उसका टोपा सब मीठे शीरे से सरोबार हो गए। लंड घुमाए हुये गुलाब जामुन ले कर मैं मैडम जी के पास गया। मैंने मैडम जी को गुलाब जामुन दिये, जब मैं मैडम जी के सामने जा कर खड़ा हुआ, तो मैडम जी ने बड़े ध्यान से मेरे लंड की तरफ घूर के देखा।. गुलाब जामुन पे फेरते वक्त और मैडम जी के बारे में सोचने से वो थोड़ा अकड़ सा गया था और मेरे लोअर में थोड़ा उभरा हुआ दिख रहा था।. मैंने मैडम जी को गुलाब जामुन दिये और वो दो तीन गुलाब जामुन मजे से खा गई। मेरे दिल को बड़ी तसल्ली मिली के जिस चीज़ को मेरे लंड ने छुआ था, वो मैडम जी के खूबसूरत होंठों को छू कर, उनके मुँह के अंदर जा कर, उनके पेट में पहुँच गई है। काश मेरे लंड का टोपा भी मैडम जी के मुँह में घुसा होता। मैं ऐसा सोच रहा था, मैडम जी पता नहीं क्या सोच रही थी। उस रात मेरा घर जाने को मन नहीं कर रहा था। अगले दिन चुनाव थे, तो मैडम जी ने बहुत बिज़ी रहना था और शायद चुनाव के बाद मैडम जी चले भी जाएँ। गुलाब जामुन खाने के बाद मैडम जी वहीं बिस्तर पे पसर गई। मैंने पहले बर्तन उठाए, फिर वापिस मैडम जी के पास आ गया। बिना दुपट्टे के वो बेड पे लेटी थी। मैं जाकर उनके पास खड़ा हो गया। उनकी आँखें बंद थी, गहरे हरे रंग के सूट के नीचे से दिख रही उनकी गोरी गर्दन, बहुत ही प्यारी लग रही थी, और सांस लेने से ऊपर नीचे हो रहे उनके दो मोटे मोटे मम्मे, जिन्हें देख देख कर मैं मचला जा रहा था। तभी मैडम जी ने अपनी आँखें खोली, मुझे देखा और पूछा- क्या देख रहा है? मैं कुछ बोल न पाया, दिल तो चाहा कि कह दूँ कि आपके मम्मे देख रहा था मगर चुप रहा। “आपको कुछ और चाहिए?” मैंने पूछा।. वो पहले तो उठ बैठी, फिर मेरी तरफ सर कर करके बेड पे अधलेटी सी लेट गई। इस पोजीशन में उनकी कमीज़ के गले से उनकी गोरे गोरे मम्मे जैसे बाहर ही आ गए हों। मेरी निगाह उनकी वक्ष रेखा में ही फंस कर रह गई। वो मेरी तरफ देख रही थी और उनको पता था कि मैं उनके मम्मे घूर रहा हूँ, वो बोली- और क्या दे सकता है मुझे? मैंने कहा- जो आप कहो?. अब स्थिति थोड़ी असमंजस में थी, न मैं खुल के कह पा रहा था, न वो खुल के कह पा रही थी, पर मुझे उनकी आँखों के लाल डोरे देख कर लग रहा था कि उनके मन में भी कोई शैतानी ज़रूर है, और उनके चेहरे पर आने वाली मुस्कान इस बात का इशारा भी कर रही थी।. और कुछ न सूझा तो मैंने कह दिया- मैं आपकी टांगें दबा दूँ, या सर? वो थोड़ा और खुल कर मुस्कुराई और बोली- पहले दरवाजा बंद करके आ!. मैं भाग कर गया और कमरे का दरवाजा बंद करके, सिटकनी लगा के उनके पास आ गया। “विजय, बत्ती बंद कर दे.
” उन्होंने हौले से कहा। मैंने बत्ती भी बंद कर दी।. खिड़की से कमरे में चाँदनी आ रही थी जो उनके बदन पर भी पड़ रही थी। उनकी आँखें बंद थी और चुपचाप लेटी थी।.  . मैंने उनके बिना पूछे ही उनके पाँव दबाने शुरू कर दिये। उन्होंने नहीं रोका, मैंने पहले एक पाँव दबाया, फिर वो पाँव अपनी गोद में रख लिया और दूसरा पाँव दबाने लगा। उनके पाँव की एड़ी बिल्कुल मेरे लंड को छू रही थी।. मैंने पहले पाँव दबाया, फिर पाँव से ऊपर की टांग और उनके घुटने तक जा पहुंचा। टांगें दबाते दबाते मैं उनकी सलवार को भी ऊपर को खिसका रहा था, टखने से थोड़ा सा ऊपर सलवार सरकते ही मैंने पाया कि मैडम जी की टाँगों पर एक भी बाल नहीं है, बिल्कुल चिकनी टांग। मैंने दूसरी टांग की सलवार ऊपर को करी, दोनों टांगें दूधिया चाँदनी में नहा उठी। मैंने सिर्फ उनकी टाँगों के नंगे हिस्से को हो दबाना और सहलाना शुरू कर दिया। मैडम जी मस्त हुई लेटी रही, न कुछ बोली, न मुझे रोका।. उनकी टांगें सहलाते हुये मेरा लंड ताव खाने लगा। मैं खिसक कर थोड़ा सा आगे को हुआ, और अब मैंने उनकी टांग पाँव से लेकर घुटने से ऊपर तक दबानी शुरू की, घुटने से ऊपर मतलब जांघ तक, मगर उनकी आधी जांघ से ही मैं अपने हाथ वापिस ले आता, मुझे डर था कहीं मैं उनकी चूत को न छू लूँ। मगर जांघों को सहलाने, दबाने पर भी मैडम जी ने मुझे नहीं रोका। मेरा दिल धक धक कर रहा था, एक तरफ मेरी घबराहट बढ़ रही थी, दूसरी तरफ मेरा हौंसला बढ़ता जा रहा था। मैं सोच रहा था, अब क्या करूँ, क्या करूँ।
स्रोत:इंटरनेट