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थोड़ा और दबाने के बाद मैं इस बार उनकी टांग दबाता दबाता उनकी कमर तक ही पहुँच गया, जब मैंने उनकी कमर को छूआ तो मैडम जी ने एक लंबा सांस ले कर छोड़ा। मैं उठ खड़ा हुआ और उठ कर उनकी टांगें दबाने लगा, इस बार घुटनों से कमर तक, बस! बार बार दोनों टांगें दबाते दबाते मैंने उनके सूट का पल्ला उनकी दोनों टाँगों के बीच में घुसा दिया, और सलवार का कपड़ा नीचे खिसकने से उनकी दोनों जांघों का पूरा आकार बन चुका था, काफी मोटी जांघें थी, मैडम जी की।
मैडम के तेज़ी से चलने वाली सांस की आवाज़ मैं साफ सुन रहा था। मैंने थोड़ा और हिम्मत की और मैडम के सूट का पल्ला उठा कर उलट दिया। जिससे उनकी पेट पर बांधी सलवार, सलवार का नाड़ा और थोड़ा सा गोरा पेट मुझे साफ दिखने लगा।. इस बार मैंने उनके पेट को ही सहला दिया तो मैडम ने एक दम से मेरा हाथ पकड़ लिया। मैंने मैडम की और देखा, मैडम का चाँदनी में नहाया हुआ गोरा मुखड़ा, बड़ी बड़ी आँखें मेरी और ही देख रही थी।
मैडम कुछ पल मेरी ओर देखा, और फिर मेरा हाथ अपने सीने पे रख लिया।
“उफ़्फ़…” मेरी तो सांस ही रुक गई। फूल सा नर्म, मोटा मम्मा मेरे हाथ के नीचे था। दूसरा हाथ मैंने बढ़ा कर खुद मैडम जी के दूसरे मम्मे पर रख दिया और दोनों मम्मों को अपने हाथों में कैद कर लिया।
बिना मैडम से कुछ पूछे मैंने मैडम के मम्मों को हल्के से दबाया, तो मैडम ने भी अपना हाथ आगे बढ़ा कर मेरे लंड को मेरे लोअर के ऊपर से ही पकड़ लिया।
मैंने मैडम के दोनों मम्मे छोड़े और अपना लोअर और चड्डी दोनों उतार दिये, मेरा 23 साल का नौजवान 8 इंच लंबा काला, पूरा तना हुआ लंड, आज़ाद हो गया। मेरा लंड देख कर मैडम जी उठ बैठी और अपने दोनों हाथों से मेरा लंड पकड़ लिया- विजय, तू तो कमाल है यार, क्या बढ़िया औज़ार है तेरे पास!
मैंने कहा- मैडम जी आपका ही है, जैसे चाहे इस्तेमाल कर लो।
मैडम जी उठ कर खड़ी हुई, और खुद अपनी सलवार उतारी, चड्डी तो उन्होंने पहनी ही नहीं थी, फिर कमीज़ और ब्रा भी उतार दी, बिल्कुल नंगी होकर बेड पे लेट गई। उनको कपड़े उतारते देख कर मैंने भी अपनी कमीज़ उतार दी।
बेड पे लेट कर मैडम जी ने मेरी तरफ अपनी दोनों बाहें उठा कर अपने हाथों से इशारा किया और बोली- आ जाओ।. मैं उनके ऊपर गया तो उन्होंने खुद मेरा लंड पकड़ कर अपनी चूत पर रख लिया, मेरे हल्के से दबाव से मेरा लंड उनकी गीली चूत में घुसता हुआ ही चला गया। सिर्फ 2 बार आगे पीछे करने से मेरा सारा लंड उनकी चूत की गहराई में खो गया।. मैडम जी मुझे कस कर अपने से लिपटा लिया और अपनी टांगें मेरी टाँगों से लिपटा ली। मैंने अपनी कमर हिला कर मैडम जी को चोदना शुरू किया। पहले भी मैंने बहुत बार चूत मारी थी, मगर तब ये था कि जो मिली, उसकी मार ली।. मगर आज तो मैं उसकी मार रहा था, जिसकी लेने की मेरे दिल में बहुत ही ख़्वाहिश थी। मैंने मैडम जी के गाल, होंठ, माथा, नाक, आँखें सब चूमा। मैडम जी ने खुद अपने हाथ में पकड़ का अपना मुम्मा मेरे आगे किया, मैंने उनका निप्पल अपने मुँह में लेकर चूसा। हर झटके के साथ मैडम जैसे चाहती थी कि मैं और अंदर तक उनके जिस्म में घुस जाऊँ।. मैंने पूछा- मैडम जी, आपके मन में ये मेरे साथ सेक्स करने का विचार कब आया?
वो बोली- जब तू आकर मेरे सामने खड़ा हुआ था न, तो सबसे पहले मुझे तेरे लोअर में तेरे लंड का आभास हुआ, फिर तेरी बात याद आई कि यहाँ न मेरा मायका है, न मेरा ससुराल, और जब मैंने अपनी खुशी से चिकन खाया, दारू भी पी, तो फिर अपनी मरवाने में भी क्या दिक्कत थी। मैंने तभी सोच लिया, अगर तुम थोड़ी देर और शराफत का दिखावा करते तो मैंने तुमसे खुद पूछ लेना था, या हो सकता है, मैं तुम पर टूट ही पड़ती।
मैंने पूछा- आप में इतनी आग है कि आप मुझ पर टूट पड़ती?. वो बोली- अरे यार, जब चूत में आग लगती है न तो दिल करता है बस कोई ऐसे पेल दे इसे कि मजा आ जाए, चाहे अपना पति हो, प्रेमी हो, या तुम्हारे जैसा कोई मौका परस्त इंसान। पर तू बता, तूने कब सोचा मेरे बारे में?
मैंने कहा- सच बताऊँ तो जब पहली बार आपको देखा था, परसों, तभी आप मुझे बहुत सुंदर लगी। इसी लिए मैंने सबसे पहले आपकी कॉफी में दारू का एक पेग मिला कर दिया था।
मैडम जी मेरी बात सुन कर हंस पड़ी- अबे साले तू तो बड़ा हरामी है। बड़े तरीके से पटाया तूने मुझे।. मैंने कहा- सच कहूँ, मैडम जी, आप तो न मुझे इतनी अच्छी लगती हो कि मैं सारी उम्र आपका गुलाम बन के रहना को भी तैयार हूँ।
मैडम बोली- गुलाम नहीं सेक्स गुलाम ताकि मैं तुम्हें जब चाहे इस्तेमाल कर सकूँ।. अगले 5 मिनट की चुदाई में ही मैडम जी की चूत पानी पानी हो गई। थोड़ा सा तड़प कर ही मैडम जी शांत हो गई। उसके बाद मैंने भी अपना पानी उनके पेट गिरा दिया।. मेरे झड़ने के बाद मैडम जी बोली- आज रात यहीं रुक जा, और करेंगे।
मैंने कहा- मैं कहाँ एक बार करके भागने वाला हूँ, आज तो सारी रात आपको सोने नहीं दूँगा।
मैडम जी मेरा मुँह चूम लिया और मुझसे लिपट कर लेट गई।. मैंने भी अपनी टांग उनकी दोनों मुलायम जांघों के बीच में फंसा ली और अपनी जांघ से उनकी चूत को घिसने लगा। मैडम जी ने मेरा लंड पकड़ रखा था और मैं उनके मम्मों से खेल रहा था।. 10-15 मिनट के प्रेमालाप के बाद मैंने मैडम जी से कहा- मैडम जी, मैं एक बार और करना चाहता हूँ।
मैडम जी सीधी हो कर लेट गई और अपनी टांगें चौड़ी करके बोली- तो आ जाओ, मैंने कब मना किया है।
मैंने कहा- नहीं ऐसे नहीं, ऐसे तो मैं कर चुका, इस बार आपको घोड़ी बना कर चोदने का मन है।
मैडम जी झट से घोड़ी बन गई। कसम से क्या मस्त गोलाईदार गांड थी मैडम जी की! मैंने पूछा- मैडम जी. वो बोली- हाँ, मेरे पति अक्सर मारते हैं।
मैंने कहा- मैं भी मारूँगा।. वो बोली- नहीं, अभी नहीं पहले मुझे चूत में मजा दो, फिर गांड में करना!
मैंने कहा- मैडम जी, आप तो बहुत खुल्ला खुल्ला बोलती हो, बहुत बिंदास हो आप, एक दम मस्त!
वो बोली- जब मस्ती कर ही रहे हैं, तो खुल्लम खुल्ला होने में क्या दिक्कत है। मैं तो अपने पति से भी ऐसे ही बोलती हूँ।
मैंने अपना लंड थोड़ा सा हिलाया तो वो भी तन गया, मैंने मैडम जी की चूत पे लंड रखा और अंदर पेल दिया। अभी उनकी चूत सूखी थी, तो लंड का टोपा अंदर घुसने पर उन्होंने हल्की सी “आह, सी…” की आवाज़ निकाली। मगर लंड तो होता ही ढीठ और बेशर्म है, जैसा मर्ज़ी सुराख हो घुस ही जाता है।
2 मिनट की चुदाई में ही मैडम जी की चूत फिर से पानी पानी हो गई।. मैंने कहा- मैडम जी आप पानी बहुत छोड़ती हो?. वो बोली- औरत को जितना मजा आता है, वो उतना पानी छोड़ती है, जितनी गर्म औरत होती जाती है, उतना पानी ज़्यादा आता है।
मैंने पूछा- तो इस वक़्त आप पूरी गर्म हो?. वो बोली- आग जल रही है मेरे बदन में आग….
स्रोत:इंटरनेट