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मैं जी, हरियाणा का रहने वाला हूँ। मेरी उम्र 23 साल की है, गाँव में रहता हूँ, घर की अपनी खेती बाड़ी है। अपनी हवेली, अपना ट्रेक्टर है। 10वीं तक पढ़ा हूँ, अब अपनी खेती खुद संभालता हूँ। अभी शादी नहीं हुई है। घर में सब हैं, माँ बाप भाई बहन.
दो चाचा भी हमारे साथ ही अपने पूरे परिवार के साथ रहते हैं। बहुत भरा पूरा परिवार है। पढ़िए मस्त desi sex kahani –
. यह बात 4 महीने पहले की है, जब हमारे गाँव में चुनाव के लिए मतदान केंद्र बना। हमारे गाँव के प्राइमरी स्कूल को चुनाव के लिए तैयार किया गया। बच्चों को छुट्टी कर दी गई। स्कूल के एक कमरे में अधिकारियों के रहने के लिए, एक में मतदान के लिए और कमरे में मत पेटियाँ रखने के लिए इंतजाम किया गया। हमारे आस पास के 7 गाँव के चुनाव का सामान हमारे ही गाँव में रखा जाना था।
सरपंच साहब ने गाँव के कुछ चुनिन्दा लोगों की पहले से ड्यूटियां लगा दी थी। उन लोगों में मैं और मेरे चाचा का लड़का तरसेम भी था। हम दोनों भाई सरपंच साहब के दिये हर काम को बड़ी जिम्मेवारी से करते।. शाम को सभी चुनाव पर्यवेक्षक आ गए। जब वो गाड़ी से उतरे तो सरपंच साहब ने उनका स्वागत किया। जो उन सब की इंचार्ज थी, वो एक महिला था। कद सिर्फ 5 फुट होगा, रंग बेहद गोरा, भारी गदराया हुया बदन। उम्र होगी, 40 के आस पास, मगर बहुत ही सुंदर गोल चेहरा, तीखा नाक, मोटी मोटी आँखें, बड़ी कमानदार भवें, गोल चमकदार गाल, सुंदर होंठ, सुंदर दाँत, और बहुत ही सुंदर मुस्कान।
सच कहूँ तो मुझे वो पहली ही नज़र में भा गई, बेशक मेरे अपने गाँव में बहुत सी औरतें और लड़कियां हैं, आस पास के गाँव में भी हैं, पर वो सबसे अलग, देखने में ही पढ़ी लिखी, समझदार औरत लग रही थी।
पहले तो सबके चाय नाश्ते का इंतजाम किया हम ने। फिर शाम को 7 बजे के करीब सरपंच साहब ने जो मर्द अफसर आए थे, उनसे पूछा, तो वो सब भी खाने पीने वाले थे। मगर दिक्कत ये थी कि चुनाव के कारण दारू के ठेके बंद थे।. मैंने कहा- तलछेड़ा गाँव के बाहर भी एक ठेका है देसी का, वहाँ का मुलाजिम मेरा दोस्त है, अगर कहो तो उस से इंतजाम हो सकता है।
एक साहब मेरे साथ आ गए और दोनों मेरे ही स्कूटर पे बैठ कर पास के गाँव गए। वहाँ ठेका बंद था, मगर गाँव में कौन पूछता है, दरवाजे के नीचे से उसने मुझे दारू की दो बोतलें निकाल कर दे दी।
मैंने एक और छोटा सा अद्धा भी लिया, सौंफिया देसी दारू का। उसका फायदा यह है कि न तो उसकी बदबू आए, न स्वाद आए, बस हल्का सा नशा होता है। मैं कभी कभी वही पीता हूँ, तो वो तो मैंने अपने लिए लिया था।
दारू लेकर हम वापिस आए, एक कमरे में मर्द अफसरों की महफिल जम गई, चिकन सरपंच साहब के घर से बन कर आया था। सरपंच साहब, नंबरदार, स्कूल के हेड मास्टर साहब, 5-6 लोग मिल कर बैठ गए, और महफिल चालू हो गई। मैंने अपने अद्धे से एक पेग लगाया और मस्त हो कर बैठा उनकी बातें सुनता रहा।. थोड़ी देर बाद मैं पेशाब करने बाहर गया, तो वापिस आते रास्ते में मुझे ख्याल आया, मैं मैडम जी कमरे में गया, और मैंने उनसे पूछा- मैडम जी आप कुछ लेंगी, आपके लिए लाऊं कुछ?
उन्होंने मेरी तरफ देखा और पूछा- बाकी सब क्या कर रहे हैं?. मैंने कहा- जी वो सब तो पीने पिलाने के चक्कर में हैं, महफिल जमा कर बैठे हैं।
उन्होंने थोड़ा असहज हो कर कहा- हाँ यहाँ तक उनकी आवाज़ें आ रही हैं।. मैंने कहा- आप उनका छोड़ो मैडम जी, आप मुझे हुकुम करो, मैं आपकी क्या सेवा करूँ?
मैडम ने मुसकुरा कर मेरी तरफ देखा और बोली- मेरी क्या सेवा करेगा तू?. मैंने थोड़ा चहक कर कहा- आप जो बोलो? क्या खाना है, क्या पीना है, चाय, कॉफी, दूध, दारू, चिकन, पकोड़े, सब हाजिर हैं।
दारू और चिकन मैंने जानबूझ कर बोला ताकि पता चल सके कि मैडम को भी दारू चिकन का शौक है या नहीं।. वो बोली- अरे बस बस, दारू वारु नहीं पीती मैं, हाँ खाने में चिकन खा लूँगी। और अभी तो खाने में टाइम है, तो एक कप चाय या कॉफी मिल जाती तो मजा आ जाता।
मैंने कहा- मैडम तो क्या बना कर लाऊं, चाय या कॉफी?
मैडम ने हंस कर पूछा- तू बनाएगा?. मैंने कहा- हां जी, मैं चाय और कॉफी दोनों बहुत बढ़िया बनाता हूँ।
मैडम बोली- तो ठीक है, बढ़िया सी कॉफी बना कर ला।
मैं दौड़ कर गया, अपने घर की रसोई में कॉफी बनाने लगा, जब कॉफी को उबाल आया तो मेरे मेरे दिमाग में भी एक विचार उबला। मैंने अपनी जेब से वो सोंफिया दारू का अद्धा निकाला और उसमें से एक पेग के बराबर दारू कॉफी में ही डाल दी। अच्छी तरह कॉफी उबाल कर मैंने थर्मस में डाली और मैडम जी के पास ले गया।. उन्होंने बड़े मज़े से कॉफी पी और एक कप पीने के बाद आधा कप और लिया। उसके बाद करीब 9 बजे सबने खाना खाया, और जैसे जैसे उन सब का इंतजाम किया था, सब सो गए।
अगले दिन सुबह जब मैं चाय ले कर गया, तो सबसे पहले मैं मैडम जी के कमरे में गया। वो उठी हुई थी, मैंने उनको नमस्ते करके चाय दी। मगर उन्होंने जो मुझे मुस्कुरा कर देखा, सच कहता हूँ, मेरा दिल किया, चाहे ये 45 की है और मैं 23 का, पर अगर ये मान जाए तो मैं इस से शादी करके सारी ज़िंदगी बिता सकता हूँ।
चलो उसके बाद सबको भी मैं चाय पिला कर आया।. करीब 11 बजे मैं फिर से चाय ले कर गया, तो मैडम जी बाहर पेड़ के नीचे अकेली कुर्सी पर बैठी थी। मैं उनके पास गया तो वो बोली- विजय, चाय दे कर मेरे पास आना।
जब मैं वापिस आया, तो उन्होंने पूछा- रात तुमने कॉफी में क्या मिलाया था?
मेरे तो टट्टे सूख गए के लो भाई… भैणचोद मारे गए।. तो मैंने झट से कहानी सी बना कर बता दी कि जब कॉफी बना रहा था, तो ऊपर कानस पर देसी दारू का आधा पड़ा था, वो मेरा हाथ लगने से दूध में गिर गया, अब दूध उबल चुका तो फेंक भी नहीं सकते थे, तो वैसे ही कॉफी बना लाया कि आप तो पीती नहीं हो, तो आप को कौन सा पता चलेगा।
मैंने डरते डरते उनको बात बताई।. मगर वो हंस पड़ी- अरे इतना डरते क्यों हो, कुछ नहीं कहूँगी मैं तुम्हें, पर एक बात कहूँगी, रात नींद बहुत अच्छी आई मुझे, आज भी वैसी ही कॉफी मिलेगी क्या?
मैं तो खुश हो गया, मैंने कहा- मैडम जी, आज तो कल से भी अच्छी कॉफी बना कर दूँगा।
दिन में वो लोग अपना काम करते रहे। शाम को मैंने 7 बजे के करीब फिर से कॉफी बनाई और लेकर गया। आज मेरे पास दो कप थे, मैंने भी अपने लिए कॉफी डाली और दोनों बैठ कर कॉफी पीने लगे।
मर्दों की जिम्मेवारी मैंने अपने भाई को सौंप दी।. एक एक कप कॉफी पीने के बाद मैंने मैडम के कप में और कॉफी डाली।. मैडम ने पूछा- जो लोग दारू पीते हैं, उनकी दारू में से तो इतनी बदबू आती है, इसमें से तो कोई स्मेल नहीं आ रही?
मैंने अपनी जेब से वही दारू का अद्धा निकाल कर मैडम को दिखाया- ये सूंघ कर देखिये मैडम जी, सिर्फ सौंफ की खुशबू आती है।
मैडम ने अद्धे को नाक से लगा कर देखा- अरे हाँ, इसमें से तो खुशबू आ रही है, सौंफ की।
स्रोत:इंटरनेट