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Mahima Ka Anootha Sasural Desi Adult Story

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पहले भाग में आपने पढ़ा कि महिमा अपने गाँव छोड़ कर अपनी ससुराल मगतपुर आयी और सुहागरात पर उसने वैवाहिक जीवन का नया आनंद कैसे लिया.
Desi adult story के इस पार्ट में महिमा अपने ससुराल की नयी हकीक़त जानने वाली है.
Hindi Sex Stories के अन्य भाग-. पार्ट 1. पार्ट 2. पार्ट 3. महिमा सुहागरात के बिस्तर पर पूरी नंगी हो कर अपने पति दीपक कि बाहो में मस्त सो रही थी.
सुहागरात की रात दीपक ने उससे पहले आगे से चोदा और फिर कुतिया बना के पीछे से चोदा.
इस चुदाई के प्रोग्राम के दौरान महिमा तीन बार झड़ी.
उसकी शादीशुदा सहेलियों ने उसे बताया था कि सेक्स में बड़ा बजा है, पर इसमें इतना मज़ा होगा ये उसे आज रात पता चला.
चुदाई की थकान से नींद इतनी गहरी आयी कि सुबह के पांच बज कब गए थे पता ही नहीं चला.
महिमा की सास का अलार्म बजा और महिमा की नींद खुल गयी.
सो कर उठी तो उसने देखा कि वो ऊपर से नीचे तक पूरी कि पूरी नंगी है और बगल में दीपक भी नंग धडंग लेटा हुआ है.
उसे बड़ी शर्म सी आयी.
वो उठी और उसने जल्दी जल्दी अपने कपडे पहने और कमरे से बाहर निकल गयी.
महिमा किचेन में गए और अपनी सासु माँ के पैर छु लिए.
सासु माँ ने उसे आशीर्वाद दिया.
महिमा चाय बनाने में अपनी सास कि मदद करने लगी.
बीच बीच में रात की चुदाई की याद सी आ जाती थी और उस याद से उसकी चूत में बड़ा अजीब सा ही अहसास हो रहा था.
“मैं तेरे पापा जी के लिए चाय ले जाती हूँ, तू दीपक के लिए चाय ले जा.
” उसकी सास सुजाता देवी ने कहा.
“जी मम्मी जी”, महिमा ने जवाब दिया.
महिमा चाय ले कर अपने बेडरूम में आई.
दीपक अभी भी बिस्तर पर नंगा हो कर मस्त सो रहा था.
महिमा ने दीपक को हिलाया.
दीपक ने अपनी आँखे खोलीं तो देखा कि महिमा उसके लिए चाय ले कर आई है.
महिमा को देखते ही दीपक रात की चुदाई याद आ गयी.
महिमा कि गोल और चौड़ी गांड कि याद करते ही उसका लंड झट से खड़ा हो गया.
महिमा खड़े लंड को देख कर वक्त का इशारा समझ गयी.
सास ससुर जगे हुए थे.
मामला थोडा रिस्की था.
महिमा ने कमरे कि सिटकनी बंद कर दी.
और दीपक के ऊपर बैठ गयी.
उसने अपनी साड़ी ऊपर उठा ली और अपनी जवान चूत को दीपक के लंड के ऊपर भिड़ा दिया.
महिमा ने अपनी चूत को दीपक के लंड के ऊपर रख कर आपने शरीर का वज़न जैसे ही छोड़ा दीपक का पूरा का पूरा लंड उसकी चूत में समा गया.
“रात में आपने मेरे ऊपर चढ़ कर जो किया न आज उसका बदला मैं निकालूंगी.
” महिमा फुस्गुसाते हुए बोली.
“पिलवाओ रानी पिलवाओ”, दीपक बोला.
महिमा को अपने बेशर्मी पर हैरानी हो रही थी.
पर समय कम था.
इसलिए जल्दी जल्दी अपने गुन्दाज़ चुतड दीपक के लंड को अपनी चूत में पेले हुए ऊपर नीचे करने लगी.
दीपक का लंड महिमा कि गीली चूत में समा रहा था.
जब महिमा अपनी गांड उठाती, दीपक का चमकता हुआ लंड उसे नज़र आता.
दीपक महिमा के मम्मे दबा देता.
उसकी गांड पर चपत रसीद देता.
महिमा कि चौडी गांड दीपक के लंड के ऊपर नीचे हो रही थी.
दीपक ने उठ कर महिमा को पटक दिया और महिमा के ऊपर चढ़ कर उसकी चूत में अपना लंड जल्दी जल्दी पेलने लगा.
“आह… आह.. जल्दी करो मेरे राजा मम्मी पापा जाग रहे हैं….
पेलो पेलो ..” थोड़ी ही देर का दीपक का लंड फूल कर महिमा की चिकनी एवं गरम चूत में पिचकारी छोड़ने लगा.
महिमा भी बहुत जोर से अपने चूत का पानी छोड़ने लगी.
“ये ले मेरी जान …मेरा लंड ..इस की क्रीम अपनी चूत.
में ले ..ए …ए ….
” कहते हुए दीपक महिमा की चूत में झड गया.
महिमा भी इस चुदाई के मजे से झड गयी.
“चलो अब चाय पी लें.
” महिमा ने हँसते हुए बोला.
और वो दोनों अपनी शादीशुदा जिन्दगी की सुबह कि पहली चाय साथ में पीने लगे.
उधर राजेश्वारी देवी अपने पति राजनाथ के संग चाय कि चुस्कियां ले रहीं थी.
घर में नया मेहमान आया है इसकी खुशी उन दोनों को थी.
अगले एक हफ्ते के अन्दर सारे मेहमान अपने घर चले गए.
और घर में जीवन सामान्य दिनचर्या में चलने लगा.
दीपक सुबह जल्दी काम पर निकल जाता था और शाम को अँधेरा होने के बाद ही वापस आता था.
पर रात में दोनों जम के जवानी के खेल खेलते थे.
कैसे कैसे लगभग एक साल गुज़र गया पता ही नहीं चला.
एक दिन दोपहर में घर का काम करने के बाद महिमा को समझ नहीं आ रहा था कि शाम को खाने में क्या बनया जाए.
वो सास से ये पूछने के लिए उनके कमरे कि तरफ जाने लगी.
जैसे ही उसकी सास सुजाता देवी का कमरा करीब आ रहा था वहां से कुछ अजीब सी आवाजें आ रहीं थीं.
उसे लगा सासू माँ कोई टीवी सरियल देख रही हैं.
उसने रूम का दरवाजा खोल दिया.
अन्दर का नज़ारा देख कर उसके हालत फाख्ता हो गयी.
उसकी सास सुजाता देवी अपने घुटनों के बल हो कर पर कुतिया के पोस में बिस्तर पर थीं.
पीछे से उसके ससुर उनकी चुदाई कर रहे थे.
सासू माँ अपनी गोरी और मोटी गांड ऊपर उठा उठा कर लंड अपनी चूत में ले रही थीं.
आह आह कि आवाजें पूरे कमरे में गूँज रहीं थीं.
हर धक्के पर गांड पर पक पक की आवाज आती थी सासु मन के बड़े बड़े मम्मे हवा में झूल से जाते थे.
कमरे में लाइट पूरी नहीं जल रही थी और खिड़की के परदे भी बंद थे इसलिए सारा दृश्य महिमा कि साफ़ नहीं दिख रहा था.
वो डर था कि अगर सास ससुर ने उसे इस समय देख लिया तो सबकी स्थिति थोडा खराब हो जायेगी.
इस लिए महिमा दबे पाँव उस कमरे से बाहर निकल आयी.
उसके पैरो में एक अजीब सी झुरझुरी हो रही थी.
अन्दर कि चुदाई को देख कर उसे लग रहा था कि काश दीपक यहाँ होता.
वो लिविंग रूम में आ कर सोफे पर बैठ गयी.
उसने टेबल पर से एक गृहशोभा उठाई और पढने के लिए जैसे ही पेज पलटती.
उसने देखा उसके ससुर सामने के सोफे पर बैठ कर अखवार पढ़ रहे हैं.
उसके मुंह से चीख निकल गयी.
वो डर के मारे एकदम से खडी हो गयी.
ससुर ने उसे देखा.
“क्या हुआ बहु.
तुम इतना डरी डरी क्यों हो… क्या हुआ?” ससुर ने पूछा.
“पापा जी वो उधर …उधर …” महिमा को कुछ समझ नहीं आ रहा था कि वो क्या बोले.
वो सासु मन के कमरे की तरफ देख रही थी.
और जैसे काँप रही थी.
“आप तो मम्मी जी के साथ थे न?……” महिमा हकलाते हुए बोल रही थी.
राजनाथ को समझ में आ चुका था की महिमा ने उनकी पत्नी सुजाता को उनके भाई कैलाशनाथ के साथ रंगरेलियां मनाते देख लिया है.
राजनाथ और कैलाशनाथ ने शुरू से अपने बीच में कोई पर्दा नहीं रखा, जवानी में नौकरानी से ले कर कॉलेज में रत्ना तक,जब भी किसी एक को चूत मिली तो उसने दुसरे के साथ मिल बाँट कर उसे चोदा.
यहाँ तक शादी कि सुहागरात तक में दोनों नयी दुल्हन के साथ रहे.
और आज भी दोनों एक दुसरे के घर जा कर एक दुसरे कि पत्नियों को नियमित रूप से चोदते थे.

स्रोत:इंटरनेट