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Mahima Ka Anutha Sasural Biwi Ki Chudai

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ये hindi sex story महिमा के जीवन की अन्यी शुरुआत की है.
शादी के बाद उसे अपने नए परिवार में किस किस से चुदना पड़ता है.
पढ़िए इस मस्त desi kahani में.
आगाज़ होता सुहागरात में biwi ki chudai से.. Hindi Sex Stories के अन्य भाग-. पार्ट 1. पार्ट 2. पार्ट 3. महिमा अपने गाँव छोड़ कर अपनी ससुराल भरतपुर आयी थी, उसके कई सपने थे जैसे कि एक बड़ा घर हो बड़ा परिवार हो.
ससुराल में सब लोग उसे प्यार करें, उसका पति उसे इज्ज़त दे.
और वैसा ही हुआ भी – उसके पति के तीन भाई और दो बहने थी.
उसके पति दीपक शहर में एक फैक्ट्री में कार्यरत थे.
उसके दो देवर थे – विजय और करण.
विजय एमएससी कर रहा था और करण बारहवीं कक्षा का छात्र था और इंजीनियरिंग कि तैयारी कर रहा था.
उसकी पति की बड़ी बहन श्रेया शहर में ब्याही थी.
और छोटी बहन दिया बी ए कर रही थी.
श्रेया का विवाह हो चुका था और उसके दो बच्चे थे.
जब महिमा घर से चली उसकी माँ ने उसे सारे घर को जोड़ कर रखने की सीख दी.
उसे ये भी बताया कि वो घर कि सबसे बड़ी बहु है और उसे घर चलाने के लिए काफी मेहनत करनी होगी.
कई समझौते करने होंगे.
उसे कुछ ऐसा करना होगा कि तीनों भाई मिल जुल के रहें और उसे बहुत माने.
अ.
महिमा घूघट संभाले इस घर में आयी.
जैसा होता है उसे शुरू शुरू में कुछ समझ में आ नहीं रहा था.
उसकी सास उसे जिसके पैर छूने को कहती वो छु लेती.
जिससे बात करने को कहती वो कर लेती इतना बड़ा परिवार था इतने रिश्तेदार थे कि कुछ ठीक से समझ नहीं आ रहा था कि कौन क्या है.
उसे उसकी सास ने समझाया कि घबराने कि कोई बात नहीं है.
धीरे धीरे सब समझ आने लगेगा.
और फिर उसकी जिन्दागी में वो रात आई जिसका हर लडकी को इंतज़ार रहता है.
वो काफी घबराई हुई थी.
उसे उसकी ननदों ने उसे सुहागरात के बिस्तर पर बिठा दिया.
रात उसके पति दीपक कमरे में आया.
दीपक काफी हैण्डसम जवान था – गोरा रंग मंझला कद अनिल कपूर जैसी मून्छे और आवाज दमदार.
दूध वगैरह कि रस्म होने के बाद कुछ तनाव का सा माहौल था.
दीपक ने चुप्पी तोडी और बोला, “अब हम पूरे जीवन के साथी हैं हमें जो भी करना है साथ में करना है.
” महिमा ने बस हाँ में सर हिला दिया.
दीपक ने मुस्कुराते हुए बोला, “चलो अब हम वो कर लें जो शादीशुदा लोग आज कि रात करते हैं” मामता को समझ आ गया कि दीपक उसकी जवानी के मजे लूटने कि बात कर रहा है.
उसने एक बार फिर शर्माते हुए हाँ में सर हिला दिया.
दीपक को महिमा कि ये शर्मीली अदा बड़ी भाई.
वो उसे बाहोँ में भरने लगा, उसे गाल पे चूमने लगा और अपने हाथों से उसके पीठ और पेट का भाग सहलाने लगा.
महिमा के लिए ये नया अनुभव था.
उसे अभी भी डर लग रहा था पर मज़ा आ रहा था.
पाठकों को बता देना चाहता हूँ कि, महिमा एक बहुत सुन्दर चेहरे कि मालिक थी.
उसका कद पांच फूट तीन इंच था.
वह गोरी चिट्टी थी.
चेहरा गोल था.
होठ सुन्दर थे.
आँखें सुन्दर और बड़ी बड़ी थीं.
उसकी चुंचियां सुडौल और गांड भारतीय नारियों की तरह थोडा बड़ी थी.
कुल मिला कर अगर आपको वो नग्नावस्था में मिल मिल जाएँ तो आप उसे चोद कर खुद को बड़ा भाग्यवान समझेंगे.
उसके गाँव में कई लौंडे उसके बड़े दीवाने थे.
कई ने बड़ी कोशिश की, कई कार्ड भेजे, छोटे बच्चों से पर्चियां भिजवाईं, कि एक बार उसकी चूत चोदने को मिल जाए.
पर महिमा तो मानों जैसे किसी और मिट्टी कि बनी थी.
उसने किसी को कभी ज्यादा भाव कभी नहीं दिया.
वो अपने आप को अपने जीवन साथी के लिए बचा कर रखना चाहती थी.
और आज इस पल वो जीवन साथी उसके सामने था.
दीपक अपने हाथ उसकी चुन्चियों पर ले आया और लगा सहलाने.
उसने अपने होंठ महिमा के होंठों पर रख दिये और लगा महिमा के यौवन का रसपान करने.
दीपक उसके चुन्चियों को धीरे धीरे दबाने लगा.
वो अपना दूसरा हाथ उसके चूत के ऊपर था.
दीपक महिमा कि चूत को कपडे के ऊपर से ही सहलाने लगा.
महिमा दीपक कि इस करतूत से बेहद गर्म हो चुकी थी.
उसने अभी तक चुदाई नहीं की थी पर उसकी शासिशुदा सहेलियां थीं जिन्होंने उसे शादी के बाद क्या होता है इसका बड़ा ज्ञान दिया था उसे.
महिमा दीपक का पूरा साथ दे रही थी और उसके होठों पर होंठ रख के उसे पूरा चुम्मा दे रही थी.
उसने अपनी आँखे बंद कर रखीं थी, उसे होश नहीं था बिलकुल.
इसी बीच उसने ध्यान दिया कि दीपक बाबू ने उसकी साड़ी उतार दी है और वह बस पेटीकोट और ब्लाउज में बिस्तर मे लेटी हुई है.
दीपक ने उसका पेटीकोट उठा दिया.
उसकी केले के खम्भें जैसी जांघे पूरी साफ़ सामने थीं.
दीपक ने अपना हाथ उसकी चड्ढी के अन्दर डाल दिया और उसकी मखमली झांटें सहलाने लगा.
दीपक कि एक उंगली कि गीली हो चुकी चूत में कब घुसी महिमा को बिलकुल पता नहीं चला.
महिमा को बड़ा मज़ा आ रहा था इसका अंदाजा दीपक को इस बात से लगा गया कि वो अपनी गांड हिला हिला कर उसकी उंगली का अपनी चूत में स्वागत कर रही थी.
दीपक ने अपने स्कूल के दिनों में मस्तराम कि सभी किताबें पढीं थीं.
उन किताबों से जो ज्ञान प्राप्त हुआ था आज उसका वो पूरा प्रयोग अपनी नयी नवेली पत्नी पर कर रहा था.
महिमा की गर्मी को हुये दीपक ने उसकी चड्ढी उतार फेंकी.
ब्लाउज और ब्रा के उतरने में भी कोई भी समय नहीं लगा.
अब महिमा केवल एक पेटीकोट में उसके सामने लेटी हुई थी.
उसके मम्मे बड़े ही सुन्दर थे.
दीपक ने कहां, “जब सामने इतनी सुन्दर नारी कपडे उतार के लेटी हो, तो मुझ जैसे मर्द का कपडे पहन कर रहना बड़े ही शर्म कि बात है”.
महिमा इस बात पर मुस्करा दी.
दीपक ने अपन सारे कपडे उतार फेंके.
महिमा ने दीपक के सुडौल शरीर को देखा.
दीपक का लैंड ६ इंच से कम नहीं होगा.
वो एकदम तना हुआ था.
महिमा की चूत दीपक के आसमान कि तरफ तने लौंडे को देख कर उत्तेजना में बजबजा सी गयी.
मन हुआ कि बस पूरा एक कि झटके में पेल ले अपनी गीली चूत में और जम के चुदाई करे, पर नयी नवेली दुल्हन के संस्कारों ने उसे रोक लिया.
दीपक उसके पास आया और उसे एक बार होठों पर होठ रख के जोर से चुम्मा लिया.
फिर बड़े शरारती अंदाज़ में बोला, “इतनी बात इन होठों को चूमा है इस शाम.
अगर दुसरे होठों को नहीं चूमा तो बुरा माँ जायेंगे जानेमन.
” महिमा बड़ी कशमकश में थी कि उसके दुसरे होंठ कहाँ हैं.
पर जब दीपक ने उसकी पेटीकोट उठा के उसकी चूत पर जब अपना मुंह रखा तो उसे साफ़ समझ आ गया कि दीपक का क्या मतलब था.
उसने अपनी सहेली के साथ ब्लू फिल्म देखी थी जिसमें एक काला नीग्रो एक अंग्रेज़ औरत कि चूत को चाटता है.
पर उसे ये नहीं गुमान था कि हिन्दुस्तानी मर्द ऐसा करते होंगे.
वो ये सब याद ही कर रही थी कि दीपक ने उसकी चूत का भागनाशा अपने मुंह में ले कर उसे चूसना चुरू कर दिया.
फिर वो चूत कि दोनों तरफ की फाँकें चाटने लगा.
फिर अपनी जीभ उसकी चूत के छेद में दाल कर अपनी जीभ से उसे चोदने लगा.
महिमा इस समय सातवें आसमान पर थी.
उसने सपने में भी कल्पना नहीं की थी कि ये सब इतना आनंद दायक होगा.
उसकी चूत से प्रेम रस बह कर बाहर आने लगा और उसकी गांड के छेद के ऊपर से बहने लगा.
दीपक अपनी जीभ को महिमा के अन्दर बाहर कर रहा था साथ ही उसने अपनी छोटी उंगली को गीला कर के महिमा की गांड में डाल दिया.
महिमा आनंदातिरेक में सीत्कारें भर रही थी.
उसे यह सब एक सपने जैसा लग रहा था.

स्रोत:इंटरनेट