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Main Didi Aur Mastram Sex Story

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अपनी आँखों के सामने अपनी 2 बहनों को लेस्बियन सेक्स करते देख मेरा तो दिमाग ख़राब हो गया था, मेरी mastram sex story के चक्कर में साक्षात् lesbian sex के दर्शन हो रहे थे.. इस hindi sex kahani का आखिरी भाग-. Hindi Sex Story के अन्य भाग-. पार्ट 1. पार्ट 2. आशिमा दीदी को उदास देख कर निधि ने उनके गालों पर एक चुम्मा लिया और कहा,” उदास न हो दीदी, अगर मैं कुछ मदद कर सकूँ तो बोलो। मैं तुम्हारे लिए कुछ भी करुँगी, मेरा वादा है तुमसे।” दीदी हल्के से मुस्कुराई और कहा,” मेरी प्यारी बन्नो, जब जरूरत होगी तो तुझसे ही तो कहूँगी, फिलहाल अगर तू मेरी मदद करना चाहती है तो बोल !” “हाँ हाँ दीदी, तुम बोलो मैं क्या कर सकती हूँ ?” “चल आज हम एक दूसरे को खुश करते हैं और एक दूसरे का मज़ा लेते हैं….
” निधि थोड़ा सा मुस्कुराई और आशिमा दीदी को चूम लिया। आशिमा दीदी ने निधि को बिस्तर से उठने के लिए कहा और खुद भी उठ गई। दोनों बिस्तर पर खड़े होकर एक दूसरे के कपड़े उतारने लगी। निधि की पीठ मेरी तरफ थी और आशिमा दीदी का चेहरा मेरी तरफ। निधि ने आशिमा दीदी की. नाईटी उतार दी और दीदी ने उसकी टी-शर्ट।. हे भगवान् ! मेरे मुँह से तो सिसकारी ही निकल गई, आज से पहले मैंने आशिमा दीदी को इतना खूबसूरत नहीं समझा था। वो बिस्तर पर सिर्फ अपनी ब्रा और पैंटी में खड़ी थी। दूधिया बदन , सुराहीदार गर्दन, बड़ी बड़ी आँखें, खुले हुए बाल और गोरे गोरे जिस्म पर काली ब्रा जिसमे उनके 36 साइज़ के दो बड़े बड़े उरोज ऐसे लग रहे थे जैसे किसी ने दो सफेद कबूतरों को जबरदस्त कैद कर दिया हो। उनकी चूचियां बाहर निकलने के लिए तड़प रही थीं। चूचियों से नीचे उनका सपाट पेट और उसके थोड़ा सा नीचे गहरी नाभि, ऐसा लग रहा था जैसे कोई गहरा कुँआ हो। उनकी कमर २६ से ज्यादा किसी भी कीमत पर नहीं हो सकती। बिल्कुल ऐसी जैसे दोनों पंजो में समां जाये। कमर के नीचे का भाग देखते ही मेरे तो होंठ और गला सूख गया। उनकी गांड का साइज़ ३६-३७ के लगभग था। बिल्कुल गोल और इतना ख़ूबसूरत कि उन्हें तुंरत जाकर पकड़ लेने का मन हो रहा था। कुल मिलाकर वो पूरी. सेक्स की देवी लग रही थीं….. हे भगवान् मैंने आज से पहले उनके बारे में कभी भी नहीं सोचा था।. इधर निधि के कपड़े भी उतार चुकी थी और वो भी ब्रा और पैंटी में आ चुकी थी। उसका बदन भी कम सेक्सी नहीं था। 32 / 26/ 34…वो भी ऐसी थी किसी भी मर्द के लंड को खड़े खड़े ही झाड़ दे।. “हाय निधि, तू तो बड़ी खूबसूरत है रे, आज तक किसी ने भी तुझे चोदा कैसे नहीं। अगर मैं लड़का होती तो तुझे जबरदस्ती पटक कर तुझे चोद देती।” “ओह दीदी, आप के सामने तो मैं कुछ भी नहीं, पता नहीं जिज्जाजी आपको क्यूँ नहीं चोदते ..” “उनकी बातें छोडो, वो तो हैं ही बेवकूफ !” आशिमा दीदी ने निधि की ब्रा खोल दी और निधि ने भी हाथ बढ़ा कर दीदी की ब्रा का हुक खोल दिया। मेरी तो सांस ही रुक गई, इतने सुन्दर और प्यारे उरोज मैंने आज तक नहीं देखे थे। आशिमा दीदी के दो बच्चे थे पर कहीं से भी उन्हें देख कर ऐसा नहीं लगता था कि दो-दो बच्चों ने उनकी चूचियों से दूध पिया होगा….
खैर, अब निधि की बारी थी तो दीदी ने उसकी ब्रा का हुक भी खोल दिया और साथ ही साथ उसकी पैंटी को भी उसके बदन से नीचे खिसकाने लगी। दीदी का उतावलापन देख कर ऐसा लग रहा था जैसे उन्हें कई जन्मों की प्यास हो। निधि ने भी वैसी ही फुर्ती दिखाई और आशिमा दीदी के पैंटी को हाथों से निकालने के लिए खींच दिया।. संगेमरमर जैसी चिकनी जांघों के बीच में फूले हुए पावरोटी के जैसे बिल्कुल चिकनी और गोरी चूत को देखते ही मेरे लंड ने अपना माल छोड़ दिया…….. मेरे होठों से एक सेक्सी सिसकारी निकली आर मैंने दरवाज़े पर ही अपना सारा माल गिरा दिया…….
मेरे मुँह से निकली सिसकारी थोड़ी तेज़ थी । शायद उन लोगों ने सुन ली थी, मैं जल्दी से आकर अपने कमरे में लेट गया और सोने का नाटक करने लगा। कमरे की लाइट बंद थी और दरवाज़ा थोड़ा सा खुला ही था। बाहर हॉल में हल्की सी लाइट जल रही थी जिसमें मैंने एक साया देखा। मैं पहचान गया। यह निधि थी जो अपने बदन पर चादर डाल कर मेरे. कमरे की तरफ ये देखने आई थी कि मैं क्या कर रहा हूँ और वो सिसकारी किसकी थी।. थोड़ी देर वहीं खड़े रहने के बाद निधि अपने कमरे में चली गई और उसके कमरे का दरवाजा बंद हो गया, जिसकी आवाज़ मुझे अपने कमरे तक सुनाई दी। शायद जोर से बंद किया गया था। मुझे कुछ अजीब सा लगा, क्यूंकि आमतौर पर ऐसे काम करते वक़्त लोग सारे काम धीरे धीरे और शांति से करते हैं। लेकिन यह ऐसा था जैसे जानबूझ कर दरवाजे को जोर से बंद किया गया था। खैर जो भी हो, उस वक़्त मेरा दिमाग ज्यादा चल नहीं पा रहा था। मेरे दिमाग में तो बस आशिमा दीदी की मस्त चिकनी चूत ही घूम रही थी।. थोड़ी देर के बाद मैं धीरे से उठा और वापस उनके दरवाज़े के पास गया, और जैसे ही मैंने अन्दर झाँका …….
हाय ….
बूर चाटू…..राजा….
हाय सच में तू तो कमाल कर रहा है….
एक दम एक्सपर्ट हो गया है….
अँधेरे में भी सूंघ लिया….
सीईईईइ बहनचोद….
साला बहुत उस्ताद हो गया….
है…..है मेरे राजा…..सीईईईइ” मैं पूरी चुत को अपने मुंह में भरने के चक्कर में सलवार की म्यानी को और फार दिया, यहाँ तक तक की दीदी की गांड तक म्यानी फट चुकी थी और मैं चुत पर जीभ चलाते हुए बीच-बीच में उनकी गांड को भी चाट रहा था और उसकी खाई में भी जीभ चला रहा था.
तभी लाइट वापस आ गई.
मैंने मुंह उठाया तो देखा मैं और दीदी दोनों पसीने से लथपथ हो चुके थे.
होंठो पर से चुत का पानी पोछते हुए मैं बोला “हाय दीदी देखो आपको कितना पसीना आ रहा है…जल्दी से कपरे खोलो….
” दीदी भी उठ के बैठते हुए बोली “हाँ बहुत गर्मी है….
उफ्फ्फ्फ्फ्फ….
लाइट आ जाने से ठीक रहा नहीं तो मैं सोच रही थी…..साली …” कहते हुए अपने समीज को खोलने लगी.
समीज खुलते ही दीदी कमर के ऊपर से पूरी नंगी हो गई.
उन्होंने ब्रा नहीं पहन रखी थी ये बात मुझे पहले से पता थी.
क्यों की दिन भर उनकी समीज के ऊपर से उनके चुचियों के निप्पल को मैं देखता रहा था.
फिर दीदी ने मेरा बरमुडा निकाल के अलग कर दिया, मैंने दीदी को बेड पे ही खड़ा कर दिया और दीदी का टी-शर्ट निकाला, फिर जीन्स ! अब दीदी ब्रा और पैन्टी में थी। दीदी पैन्टी-ब्रा में क्या गज़ब की मस्त लग रही थी, क्योंकि दीदी का फ़िगर 36 28 36 था, बड़े बड़े स्तन और गांड बड़ी बड़ी थी। दीदी को नंगी देख मैं बहुत खुश हो रहा था और सोच रहा था कि आज तो दीदी मस्त चुदाई करुंगा क्योंकि ये सब मैं जिन्दगी में पहली बार देख रहा था और इन सब चीज़ों के लिये कब से तड़प रहा था।. मैंने दीदी दे स्तनों को ब्रा के ऊपर से खूब दबाया। फिर मैंने दीदी की पैन्टी नीचे खिसका दी। दीदी की बुर तो देखते ही बनती थी क्योंकि दीदी की बुर बिल्कुल साफ़ और डबलरोटी की तरह फूली हुई थी।.
स्रोत:इंटरनेट