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Main Didi Aur Mastram Story 2

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जैसे ही मैंने अपने कान लगाये मुझे निधि के साथ वो दूसरी आवाज़ भी सुनाई दी। गौर से सुना तो वो आशिमा दीदी थी। वो दोनों कुछ बातें कर रहे थे। मैंने ध्यान से सुनने की कोशिश की, और जो सुना तो मेरे कान ही खड़े हो गए।. आशिमा दीदी निधि से पूछ रही थी,” हाय निधि, ये कहाँ से मिली तुझे? ऐसी किताबें तो तेरे जीजा जी लाते थे पहले, जब हमारी नई-नई शादी हुई थी !” “अच्छा तो आप पहले भी इस तरह की किताबें पढ़ चुकी हैं ?”. “हाँ, मुझे तो बहुत मज़ा आता है। लेकिन अब तेरे जीजू ने लाना बंद कर दिया है। और तुझे तो पता है कि मैं थोड़ी शर्मीली हूँ इसलिए उन्हें फिर से लाने को नहीं कह सकती, और वो हैं कि कुछ समझते ही नहीं।” “कोई बात नहीं दीदी, जब भी आपको पढ़ने का मन करे तो मुझसे कहना, मैं आपको दे दूंगी।” “लेकिन तेरे पास ये आई कहाँ से ?”. “अब छोड़ो भी न दीदी, तुम बस आम खाओ, पेड़ मत गिनो।” “पर मुझे बता तो सही !”. “लगता है तुम नहीं मानोगी !”. “मैं कितनी जिद्दी हूँ, तुझे पता है न। चल जल्दी से बता !” “तुम पहले वादा करो कि तुम किसी को भी नहीं बताओगी !”. “अरे बाबा, मुझ पर भरोसा रखो, मैं किसी को भी नहीं बताउंगी।” “ये किताबें रिंकू लेकर आता है।’. ” हे भगवान् ..” आशिमा दीदी के मुँह से एक हल्की सी चीख निकल गई,” तू सच कह रही है ? रिंकू लेकर आता है ?” निधि उनकी शकल देख रही थी,”तुम इतना चौंक क्यूँ रही हो दीदी ?” आशिमा दीदी ने एक लम्बी साँस ली और कहा,” यार, मैं तो रिंकू को बिलकुल सीधा-साधा और शरीफ समझती थी। मुझे तो यकीन ही नहीं हो रहा कि वो ऐसी किताबें भी पढ़ता है।” ” इसमें कौन सी बुराइ है दीदी, आखिर वो भी मर्द है, उसका भी मन करता होगा !” ” हाँ यह तो सही बात है !” दीदी ने मुस्कुराते हुए कहा,” लेकिन एक बात बता, ये किताब पढ़कर तो सारे बदन में हलचल मच जाती है, फिर तुम लोग क्या करते हो ? कहीं तुम दोनों आपस में ही तो…….
??” आशिमा दीदी की आवाज़ में एक अजीब सा उतावलापन था। उन्हें शायद ऐसा लग रहा था कि हम भाई-बहन आपस में ही चुदाई का खेल न खेलते हों।. इधर उन दोनों की बातें सुनकर मेरी आँखों की नींद ही गायब हो गई। मैंने अब हौले से अन्दर झांका और उन्हें देखने लगा। वो दोनों बिस्तर पर एक दूसरे के साथ लेटी हुई थी और दोनों पेट के बल लेट कर एक साथ किताब को. देख रही थीं।. तभी दीदी ने फिर पूछा,” बोल न निधि, क्या करते हो तुम दोनों ?” आशिमा दीदी ने निधि की बड़ी बड़ी चूचियों को अपने हाथो से मसल डाला। ” ऊंह, दीदी….
क्या कर रही हो ? दर्द होता है..” निधि ने अपने उरोजों को अपने हाथों से सहलाया और आशिमा दीदी की तरफ देख कर मुस्कारने लगी। आशिमा दीदी की आँखों में एक शरारत भरी चमक थी और एक सवाल था….
निधि ने उनकी तरफ देखा और कहा,” आप जैसा सोच रही हैं वैसा नहीं है दीदी। हम भाई-बहन चाहे जितने भी खुले विचार के हों, पर हमने आज तक अपनी मर्यादा को नहीं लांघा है। हमारा रिश्ता आज भी वैसे ही पवित्र है जैसे एक भा बहन का होता है।”. यह सच भी है, हम भाई-बहन ने कभी भी अपनी सीमा को लांघने की कोशिश नहीं की थी। खैर, आशिमा दीदी ने निधि के गलों पर एक चुम्बन लिया और कहा,” मैं जानती हूँ निधि, तुम दोनों कभी भी ऐसी हरकत नहीं करोगे।” “अच्छा निधि एक बात बता, जब तू यह किताब पढ़ती है तो तुझे मन नहीं करता कि कोई तेरे साथ कुछ करे और तेरी चूत को चोद-चोद कर शांत करे, उसकी गर्मी निकाले ?” आशिमा दीदी के चेहरे पर अजीब से भाव आ रहे थे जो मैंने कभी भी नहीं देखा था। उनकी आँखे लाल हो गई थीं।. “हाय दीदी, क्या पूछ लिया तुमने, मैं तो पागल ही हो जाती हूँ। ऐसा लगता है जैसे कहीं से भी कोई लंड मिल जाये और मैं उसे अपनी चूत में डाल कर सारी रात चुदवाती रहूँ !” “फिर क्या करती हो तुम ?”. निधि ने एक गहरी सांस ली और कहा,” बस दीदी, कभी कभी ऊँगली या मोमबत्ती से काम चला लेती हूँ !” दीदी ने निधि को अपने पास खींच लिया और उसके होठों पर एक चुम्मा धर दिया। निधि को भी अच्छा लगा। दोनों ने एक दूसरे को पकड़ लिया और सहलाना शुरू कर दिया।. यहाँ बाहर मेरी हालत ऐसी हो रही थी जैसे मैं तेज़ धूप में खडा हूँ, मैं पसीने पसीने हो गया था और मेरे लंड की तो बात ही मत करो एक दम खड़ा होकर सलामी दे रहा था। मैंने फिर उनकी बातें सुननी शुरू कर दी। तभी अचानक मैंने देखा कि आशिमा दीदी ने निधि की टी-शर्ट के अन्दर अपना हाथ डाल दिया और उसकी चूचियों को पकड़ लिया और धीरे धीरे सहलाने लगी। निधि को बहुत मज़ा आ रहा था। उसके मुँह से प्यार भरी सिस्कारियां. निकल रही थी।. “ऊफ दीदी….
मुझे कुछ हो रहा है……आपकी उँगलियों में तो जादू है।” फिर आशिमा दीदी ने पूछा,” अच्छा निधि एक बात बता, तूने कभी किसी लण्ड से अपनी चूत की चुदाई करवाई है क्या ?” “नहीं दीदी, आज तक तो मौका नहीं मिला है। आगे भगवान् जाने कौन सा लण्ड लिखा है मेरे चूत की किस्मत में।” निधि अपनी आँखें बंद करके बाते किये जा रही थी,” दीदी, तुमने तो खूब चुदाई करवाई होगी अपनी, बहुत मज़े लिए होंगे जीजाजी के साथ….
बताओ न दीदी कैसा मज़ा आता है जब सचमुच का लण्ड अन्दर जाता है तो ….
?” “यह तो तुझे खुद ही महसूस करना पड़ेगा मेरी बन्नो रानी….
इस एहसास को शब्दों में बताना बहुत मुश्किल है…” “हाय दीदी मुझे तो सच में जानना है कि कैसा मज़ा आता है इस चूत की चुदाई में ….
तुमने तो बहुत मज़े किये है जीजाजी के साथ, बोलो न कैसे करते हो आप लोग? क्या जीजा जी आपको रोज़ चोदते हैं?” तभी आशिमा दीदी थोड़ा सा उदास हो गई और निधि की तरफ देख कर कहा,”अब तुझे क्या बताऊँ, तेरे जीजा जी तो पहले बहुत रोमांटिक थे । मुझे एक मिनट भी अकेला नहीं छोड़ते थे। जब भी मन किया मुझे जहाँ मर्ज़ी वहा पटक कर मेरी चूत में अपना लंड डाल देते थे और मेरी जमकर धुनाई करते थे।”. “क्या अब नहीं करते ?” निधि ने पूछा।. “अब वो पहले वाली बात नहीं रही, अब तो तेरे जिज्जाजी को टाइम ही नहीं मिलता और मैं भी अपने बच्चों में खोई रहती हूँ। आज कल तेरे जिज्जाजी मुझे बस हफ़्ते एक या दो बार ही चोदते हैं वो भी जल्दी जल्दी से, मेरी नाइटी उठा कर अपना लंड मेरी चूत में डाल कर बस १० मिनट में ही लंड का माल चूत में झाड़ देते हैं।”. यह बात सुनकर मेरा दिमाग ठनका। मैंने पहले कभी भी आशिमा दीदी को सेक्स की नज़रों से नहीं देखा था। अब मेरे दिमाग में कुछ शैतानी घूमने लगी। मैं मन ही मन उनके बारे में सोचने लगा….
। ऐसा सोचने से ही मेरा लंड अब बिल्कुल स्टील की रॉड की तरह खड़ा हो गया।.
स्रोत:इंटरनेट