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Main Tangewale Ki Randi Bani 3

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सूरत-ए-हाल अब बिल्कुल बदल चुके थे। उसे अपने हुस्न और अदाओं से दीवाना बनाने की जगह अब वो मुझे ही अपने बड़े लण्ड के जलवे दिखा कर ललचा रहा था। मैं अब और आगे बढ़ने से खुद को रोक नहीं सकी और अपनी चोली का एक. और हुक खोल दिया।वैसे भी मेरी चोली में तीन ही हुक थे और उसमें से एक तो पहले ही खुला हुआ था और अब दूसरा हुक खुलते ही मेरे दोनों मम्मे चोली में से करीब-करीब बाहर ही कूद पड़े और अब खुली हवा में ऐसे थिरक. रहे थे जैसे अपनी आज़ादी का जश्न मना रहे हों।. टाँगेवाले ने ये नज़ारा देखा तो शरारत से मेरे कान में धीरे से फुसफुसा कर बोला, “अरे मेमसाब! ये क्या… आपने तो अपने मम्मों को पूरा ही खुला छोड़ दिया, क्या हुआ आपको?” मैंने कहा, “क्या करूँ! गर्मी बहुत है ना… इन बेचारों को भी तो रात की थोड़ी ठंडी हवा मिलनी चाहिये… बेचारे दिन भर तो कैद में रहते हैं!” सच कहूँ तो रात की ठंडक में अपने नंगे मम्मे को टाँगे के हिचकोलों के साथ झुलाते हुए उस ठरकी की बगल में बैठना बेहद अच्छा लग रहा था।. लहंगे में छुपी मेरी चूत की तरफ देखते हुए टाँगेवाला बोला, “तो फिर तो मेमसाब नीचे वाली को भी तो थोड़ी हवा लगने दो ना! उसे क्यों बंद कर रखा है!”ये कहते हुए उसने अपने हाथ मेरी जाँघों पर रख दिये और मेरी मुलायम और गोरी सुडौल टाँगों को नामूदार करते हुए लहंगा मेरी जाँघों के ऊपर खिसकने लगा – जैसे कि इशारा कर रहा हो कि मैं अपना लहंगा पूरा ऊपर खिसका कर अपनी चूत का नज़ारा उसे करा दूँ।. लेकिन मैंने उसे ऐसा करने से रोक दिया क्योंकि मैं उसे थोड़ा और तड़पाना चाहती थी। मैं बोली, “अरे पहले ऊपर का काम तो मुकम्मल कर लें! नीचे की बात बाद में सोचेंगे ना!” टाँगेवाला मेरे करीब-करीब नंगे मम्मों को देख रहा था जो चोली में से बाहर झाँक रहे थे। वैसे तो चोली का आखिरी हुक खोलना बाकी था लेकिन अमलन तौर पे तीसरे हुक का कोई फायदा नहीं था क्योंकि मेरे मम्मे तो झिनी. चुनरी में से पूरे नंगे नुमाया हो ही रहे थे। टाँगेवाले से और सब्र नहीं हुआ और मेरे मम्मों को अपने हाथों में लेकर मसलने लगा। उसके मजबूत और खुरदरे हाथों के दबाव से मैं कंपकंपा गयी। मैं सोचने लगी कि जब. इसके हाथों से मुझे इतनी लज़्ज़त मिल रही है तो अपने लंड से वो मुझे कितना मज़ा देगा।. फिर वो बोला, “मेमसाब आप अपने मम्मों का दीदार हमें छलनी में से छान कर क्यों करा रही हैं… ज़रा इस पर्दे को हटा दीजिये!” वो मेरी चुनरी की तरफ इशारा कर रहा था लेकिन इस दिल्चस्प शायराना अंदाज़ में उसे अपनी ख्वाहिश का इज़हार करते देख मैं मुस्कुराये बिना नहीं रह सकी।. बरहाल उसकी गुज़ारिश मानते हुए मैं अपनी चोली का आखिरी हुक खोलते हुए बोली, “तुम्हारी तमन्ना भी पूरी कर देते हैं… लो अब तुम दिल भर के मेरे मम्मों से खेल लो… पर तुम सिर्फ़ अपने बारे में ही सोचते रहोगे या हमारा भी कुछ ख्याल रखोगे?” मैं उसके बड़े लंड की तरफ देखते हुए बोली जो अब तक बेहद बड़ा हो चुका था और पहला मौका मिलते ही मेरी चूत फाड़ने के लिये तैयार था। मैं उस हैवान को हाथों में लेने के लिये इस कदर तड़प. रही थी कि एक पल भी और इंतज़ार ना कर सकी और उसे अपनी लुंगी खोलने का भी मौका नहीं दिया और झपट कर उसका लौड़ा अपने हाथों में ले लिया।. ऊऊऊहहह मेरे खुदा! या भगवानऽऽ… वो इतना गरम था जैसे अभी तंदूर में से निकला हो! मुझे लगा जैसे मेरी हथेलियाँ उसपे चिपक गयी हों। मैं वो लौड़ा हाथों में दबान लगी जैसे कि मैं उसके कड़ेपन का मुआयना कर रही. होऊँ।मेरी चूत भी उस लंड को लेने के लिये बिलबिला रही थी। उस पल मैंने फैसला किया कि जिस्म की सिर्फ नुमाईश और ये छेड़छाड़ और मसलना काफी हो गया… आज की रात तो मैं इस लौड़े से अपनी चूत की आग ठंडी करके रहुँगी।. अब मैं उससे चुदवाये बगैर नहीं रह सकती थी। इस दौरान टाँगेवाला एक हाथ से मेरे मम्मों से खेलने में मसरूफ था। वो मेरे निप्पलों को मरोड़ रहा था और झुक कर उन्हें चूसने की कोशिश भी कर रहा था लेकिन टाँगे के. हिचकोलों की वजह से ठीक से चूस नहीं पा रहा था। मैं उसके लण्ड को इतनी ज़ोर-ज़ोर से मसल रही थी जैसे कि ज़िंदगी में फिर दोबारा मुझे दूसरा लण्ड नसीब नहीं होगा। फिर कमीने लण्ड का ज़ुबानी एहतराम करने के लिये मैं. उसे अपने मुँह में लेने के लिये झुक गयी।. उस शानदार लौड़े को मुँह में लेकर चूसने के लिये मैं झुकी। या मेरे खुदा… उसका लंड इतना गरम महसूस दे रहा था कि मुझे लगा अगर मैंने उसे थोड़ी और देर पकड़े रखा तो मेरी हथेलियाँ जल जायेंगी। रात के अंधेरे में. लण्ड का सुपाड़ा ज़ीरो-वाट के लाल बल्ब की तरह चमक रहा था। लेकिन जैसे ही मेरे प्यासे होंठ टाँगेवाले के लंड को छुए, उसने मेरा चेहरा दूर हटा दिया और बोला, “मेमसाब… रुकिये तो सही… आप ही ने तो कहा था कि पहले ऊपर का मामला निबटा लेते हैं फिर नीचे की सोचेंगे! तो फिर आप मेरे लौड़े को मुँह में लेने से पहले मुझे भी तो अपनी चूत के दर्शन करा दीजिये!”. हर गुज़रते लम्हे के साथ-साथ मैं और ज्यादा बेसब्री हुई जा रही थी। अब तक मैं इस कदर गरम और उसकी दीवानी हो चुकी थी कि मैं समझ गयी कि वो मुझसे जो चाहे करवा सकता है।सच कहूँ तो मुझे इतना मज़ा आ रहा था कि मैं. बस उस बहाव के साथ बह जाना चाहती थी। बिल्कुल बेखुद हो कर मैं उससे बोली, “तुम्हें जो करना है कर लो लेकिन अपने इस मुसटंडे लण्ड से मुझे दिल भर कर प्यार कर लेने दो!” तकरीबन मुकम्मल तौर पे मैं अब उसके लंड की गुलाम थी। वो बोला,“तो फिर पहले अपना घाघरा ऊपर करके मुझे अपनी चूत दिखाओ!” मैंने उसके हुक्म की तामील की और धीरे-धीरे थोड़ी दिलफरेबी करते हुए अपना लहंगा ऊपर उठा दिया। नीचे मैंने पैंटी भी नहीं पहनी थी। वैसे तो अंधेरा काफी था लेकिन लालटेन की मद्धम रोशनी में मेरी चिकनी सफाचट चूत. उसे साफ नज़र आ रही थी जिसपे रो*ओं तक का नामोनिशान नहीं था। मुझे और मेरे पति को भी बिल्कुल साफ-चिकनी चूत पसंद है। मैं टाँगेवाले के चेहरे की तरफ देख रही थी कि मेरी चूत देखकर उसपे क्या असर होता है। वो तो. बिल्कुल बेखुद सा हुआ नज़र आ रहा था जैसे कि उसे कुछ बोलने के लिये अल्फाज़ ही नहीं मिल रहे हों।. आखिरकार मैंने ही पूछा, “क्या हुआ! बोलती क्यों बंद हो गयी तुम्हारी? क्या सिर्फ देखते ही रहने का इरादा है मेरी चूत को!” वो जैसे वापिस होश में आते हुए बोला, “मेमसाब! राम कसम हमने अभी तक १५-१६ चूतें देखी हैं और चोदी भी हैं पर ऐसी चूत उफफफ… क्या कहें… इसके लिये… ऐसी देसी कचोरी की तरह फुली हुई चूत तो आज मैं पहली बार देख रहा हूँ! आपके पति तो दुनिया के सबसे ज्यादा किस्मत वाले आदमी हैं… जिन्हें इस चूत का उद्घाटन करने को मिला होगा! अब तो बस इस चूत को चोदे बिना मैं आपको अपनी घोड़ा-गाड़ी से उतरने नहीं दूँगा… चाहे जो हो. जाये!”. मैं बोली, “चाहती तो मैं भी ये ही हूँ… पर इस चलती घोड़ा-गाड़ी में ये कैसे मुमकीन है… तुम ही बताओ!”
स्रोत:इंटरनेट