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Majdoor Ki Bahan Tour Sex Kahani 2

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अब नीति उसकी वो बातें सुनकर बिल्कुल चकित होकर उससे पूछने लगी कि क्या वाकई में उसका लंड इतना मोटा और लंबा था, जैसा तू मुझे बता रही है और कहीं तू मुझसे झूठ तो नहीं बोल रही है ना? अब रीमा कहने लगी कि खुदा की कसम में आपसे एकदम सच सच कह रही हूँ और मैंने भी आज तक ऐसा दमदार लंड अपने अब तक के इस जीवन में कभी नहीं देखा.
एक बार तो उसको देखकर मेरा मन हुआ था कि में उसको उसी समय अपने मुहं में लेकर आईसक्रीम की तरह चूस लूँ, लेकिन थोड़ा सा डर और संकोच की वजह से में आगे नहीं बढ़ी.
अब नीति पूछने लगी कि क्या उसको पता है कि तू उसके लंड को निहार रही थी.
उसने तुझे यह सब करते हुए देखा कि नहीं? तो रीमा बोली कि नहीं वो तो उस समय बड़ी गहरी नींद में घोड़े बेचकर सो रहा था और उसका लंड उसकी लुंगी के अंदर से उठकर सवेरे की सलामी ठोक रहा था.
जिसको में देखकर ललचा रही थी और में करती भी क्या? दोस्तों जब में रसोई के अंदर घुसा तो वो दोनों शायद मेरी आहट को सुनकर चुप हो गई और फिर जब में नाश्ता कर रहा था तब वो दोनों मेरी तरफ अपनी ललचाई नज़रों से देख रही थी और में उनके मन में चल रही सभी बातें. उनके मेरे लिए अब बदले हुए विचार को पूरी तरह से समझ चुका था कि वो मेरे बारे के क्या और कैसा सोचती है? और फिर मैंने गौर किया कि उन दोनों का व्यहवार अब मेरे लिए धीरे धीरे बहुत बदलता जा रहा था, जिसका साफ मतलब यह था कि उनको अब मेरे लंड से अपनी चुदाई की बहुत ज्यादा जरूरत है, जिसके लिए वो दोनों अब मरी जा रही थी.
फिर अगले सप्ताह रात में जब में पेशाब करने उठा तो मैंने देखा कि किशोर भाई उस समय नशे में बिल्कुल धुत होकर आँगन में पड़ी खाट पर पड़े हुए खर्राटे भर रहे थे और जब में नीति के कमरे के पास से गुज़रा तो मुझे. उनके कमरे से सिसकियों की आवाज सुनाई देने लगी, लेकिन उस समय मुझे इतनी ज़ोर से पेशाब लगा था कि में इसलिए बिना देर किए तुरंत सीधा बाथरूम में जाकर हल्का हुआ और जब में वापस उनके कमरे के पास से गुजर रहा था, तो मुझे कुछ फुसफुसाहट और साथ में सिसकियों की आवाज़े सुनाई दी.
अब में उनके कमरे की खिड़की से जो कि उस समय थोड़ी सी खुली हुई थी, उससे मैंने अंदर की तरफ झाँककर देखा तो में वो सब कुछ देखकर एकदम दंग रह गया, क्योंकि मैंने देखा कि वो दोनों बहनें उस समय एकदम नंग धड़ंग थी.
नीति उस समय अपनी पीठ के बल लेटी हुई थी और रीमा उसकी चूत को अपनी जीभ से चाट रही थी, जिसकी वजह से नीति जोश में आकर सिसकियां भर रही थी.
वैसे मुझे उन दोनों की चूत बहुत ध्यान से देखने पर भी साफ नहीं दिखाई दे रही, लेकिन हाँ मुझे रीमा की काली काली गांड के दर्शन हो गए थे और कुछ देर तक देखने के बाद में वापस अपने कमरे में आकर सो गया.
दोस्तों दूसरे दिन में सुबह उठने के बाद से ही उनकी उस दुकान पर था और फिर दोपहर को ही अचानक से जोरदार बारिश होने लगी, जो कि बहुत देर तक चलने के बाद भी रुकने का नाम नहीं ले रही थी और उस समय मैंने दुकान पर में लुंगी और महीन कॉटन की आधी बाहँ की शर्ट पहन रखी थी.
फिर इतने में रीमा मेरे लिए दोपहर का खाना लेकर आ गई वो पूरी तरह से भीग गयी थी और उसकी सलवार कमीज़ जो कि सफेद रंग की थी वो पानी में भीगने की वजह से उसके बदन पर चिपक गई थी, जिससे उसके कूल्हे और बूब्स बहुत ही मस्त शानदार और जानलेवा दिखाई दे रहे थे और जिसकी वजह से में बहुत चकित था.
फिर मैंने उससे कहा कि रीमा जी आप इतनी तेज बारिश में क्यों चली आई? आपको थोड़ा समय रुक जाना था? वो कहने लगी कि जब में घर से निकली तो उस समय बिल्कुल भी बारिश नहीं हो रही थी और तभी अचानक से आते समय रास्ते में ज़ोर से बारिश होने लगी.
में बहुत देर तक बारिश रुकने का इंतज़ार करती रही, लेकिन जब मैंने इतना इंतजार करने के बाद देखा कि बारिश अब रुकने का नाम नहीं ले रही है तो में यहाँ पर चली आई.
फिर मैंने कहा कि खेर चलो अब सबसे पहले तुम यह गीले कपड़े बदल लो नहीं तो तुम्हे जुकाम हो जाएगा और फिर वो दुकान के अंदर वाले कमरे में चली गयी.
वहाँ पर उसको कोई कपड़े नहीं मिले, इसलिए वो वापस आ गई और बोली कि संजय भाई अंदर तो मेरे पहनने के लिए कोई भी कपड़े नहीं है.
तब मैंने उससे कहा कि तुम एक काम करो अंदर से टावल लेकर आ जाओ, वो मेरे कहने पर टावल लेकर आई और मैंने उसको अपनी लुंगी और अपनी महीन कॉटन की शर्ट को उतारकर दे दिया और मैंने खुद ने वो टावल लपेट लिया.
अब में टावल और बनियान में था.
वो लूंगी और उसने मेरी महीन शर्ट पहन रखी थी और उस महीन शर्ट से उसकी काले काले बूब्स मुझे साफ साफ दिख रहे थे और उस पर गहरे रंग के निप्पल भी मुझे साफ साफ दिखाई दे रहे थे और वो कुछ देर बाद मुझे खाना परोसने लगी.
फिर में उससे कहने लगा कि हम खाना बाद में खाएँगे पहले थोड़ा चाय पत्ती पेक कर लेते है और वो बोली कि हाँ ठीक है.
फिर वो मेरे पास खड़ी होकर चाय पत्ती पेक करने लगी और में वजन करके थेली में चाय को भरने लगा.
साथ में वो मोमबत्ती से प्लास्टिक की उन थेलियों को पेक करने लगी और इस दरमियाँ मेरा हाथ उसके कूल्हों पर करीब चार पांच बार लगा, लेकिन वो मुझसे कुछ नहीं बोली केवल वो मेरी तरफ देखकर मुस्कुरा रही थी.
फिर मैंने जानबूझ कर एक बार अपनी तरफ से उसके एक कूल्हे पर दबाव डालते हुए उसको दबोच लिया, लेकिन वो फिर भी कुछ नहीं बोली.
फिर हम दोनों ने खाना खाया.
इतने में एक कोने से बारिश का पानी नीचे तपक रहा था, जिसको देखकर रीमा मद्रासी की तरह अपनी लूंगी को ऊपर उठाकर वो पास में रखे एक स्टूल पर चड़ गयी और वो वहाँ पर सीमेंट लगाने लगी.
तब मुझे उसकी काली काली जांघे बहुत उत्तेजित करने लगी, जिसकी वजह से मेरा लंड तो अब टावल के अंदर ही हरकते करने लगा था और फिर में कुछ देर बाद मौका देखकर धीरे से अपनी अंदरवियर को खोलकर केवल टावल में ही चटाई को बिछाकर लेट गया और थोड़ी देर के बाद रीमा भी मेरे पास में आकर लेट गयी, लेकिन कुछ देर बाद उसके बारे में सोच सोचकर अब मेरी हालत खराब होने लगी थी, क्योंकि रीमा उस समय मेरी तरफ अपनी पीठ को करके लेटी हुई थी और नींद में उसकी लूंगी खुल गयी थी और वो शर्ट भी उसकी कमर से बहुत ऊपर सरक गई थी और यह सब मनमोहक नजारा देखकर मेरा लंड पूरा खड़ा हो चुका था.
फिर बहुत देर तक में सिर्फ़ रीमा के बारे में ही सोच रहा था, लेकिन फिर मुझसे रहा ना गया और में अपना एक हाथ रीमा की गांड की तरफ सरकाते हुए अपनी दो उंगलियों से रीमा की उस शर्ट को मैंने हल्के से पकड़कर एक तरफ से उसकी कमर से और भी ज्यादा ऊपर तक कर दिया, जिसकी वजह से अब रीमा की काली काली मोटी गांड और बूब्स की झलक साफ दिखाई देने लगी थी.
अब मेरी हालत कुछ ऐसी हो गयी थी कि में हिम्मत करके अपने पूरी हथेली से धीरे से रीमा की गांड को सहलाने लगा, लेकिन उसकी तरफ से कोई भी प्रतिक्रिया कोई भी विरोध हलचल नहीं होने से मेरी हिम्मत और भी ज्यादा बढ़ गयी.

स्रोत:इंटरनेट