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Mami Hindi Sex Kahani

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मामी को चुदाई की आशंका तो थी पर पहली बार एक पराये लंड के करीब जाने से थोड़ी घबरा भी रही थी.. मामी की धुआंधार चुदाई होगी इस mami hindi sex kahani काआखिरी भाग.. Hindi Sex Kahani के अन्य भाग-. पार्ट 1. पार्ट 2. “ज्यादा देर नहीं लगेगी,और में आपको आपके गाव ही छोड़ दूंगा, तो आपका टाइम भी बचेगा, और आगे अच्छा ढाबा नहीं मिला तो मेरे खाने के वांधे हो जायेंगे।” ऐसा कहके चाचा ने खाना खाने रूकने केलिए मामी को मना लिया।. वो पंजाबी टाइप ढाबा था। थोडे बहुत ही फॅमिली लेकर आये थे लोग, बाकि सब ड्राईवर लोग ही थे” मामी अब परेशान हो रही थी।जल्दी नहीं पहुंची मायके तो सब लोग परेशान हो जाते, इस्सलिये वो जल्दबाजी कर रही थी। उसमे चाचा ने व्हिस्की मंगा ली ।मामी अब वाकई चिंतित होने लगी। “अरे भाईसाब, दारु पीके ड्राइव करेंगे क्या?” “उतना तो चलता है, अब आदत सी होगई है,नहीं पी तो प्रॉब्लम हो जाएगी” मामीजी पहली बार ही ऐसे माहोल में आयी थी, उनको समझ नहीं आ रहा था जो कर रही है उससे उन्हें आगे पछतावा तो नहीं होगा? “जल्दी की जिए भाईसाब,जल्दी निकलते है यहासे” “हाँ, बस थोड़ी ही देर में, आप भी कुछ लेंगी क्या, कोल्ड्रिंक या बियर ली जिए, बियर कोल्ड्रिंक जैसी ही होती है ” “छि छि, मैं नहीं लुंगी” “कुछ नहीं होगा भाभिजान थोड़ी पि लेने से, थोडा आराम मिल जायेगा इस टेम्पो के सफ़र में,नहीं तो हालत बुरी हो जाती है” ऐसा ही कुछ भी कहके चाचा ने मामीजी की लिए भी बियर मंगवा ली।बियर का पहलाही घुट लेकर ही मामी ने वो थूक दी। एरंडी के तेल को पीने जैसा लगा उनको। जब पेट सी थी तो डिलीवरी आराम से और टाइम पे होने केलिए बहोत. सारा एरंडी का तेल पिने पड़ा था उन्हें।और उनके पास करने के लिए भी कुछ नहीं था।चाचा भी व्हिस्की मारते मारते ‘भाभीजान भाभीजान’ ही किये जा रहे थे।इस्सलिये एक घुट एक घुट करते करते उन्होंने पूरी. बियर की पाइंट ख़तम कर दी और, और एक मंगवा ली।अब थोडा थोडा मजेदार लग रहा था मामी को।रिलैक्स फील करने लगी वो।और हम सबको पता है बियर का जब स्वाद आने लगता है तो वो कितनी मीठी लगने लगती है। चाचा ने भी धीरे धीरे करके 2 लार्ज पेग मार लिए थे। लेकिन होश में थे अभीभी, सिर्फ बडबड़ाये जा रहे थे। मामी ने जब एक पाइंट ख़तम कर दिया था बियर का तो चाचा जो उनके सामने बैठे थे मामी के,उनके पास जाकर बैठ गये। छोटासा बेंच ही था बैठने केलिए, इस्सलिये दोनोंको सटे हुए बेठना पड़ रहा था। चाचा अब मामीजी के गदराये बदन से खेलने लग गए थे। उनके कमर में हाथ डालके उनके मोटी मोटी जांघो को सहला रहे थे। “थोड़ी व्हिस्की भी ट्राय कर लो मेरी जान” ऐसा कहके चाचा ने अपना ग्लास उनके आगे कर दिया।. “नहीं नहीं, मुझे झूठा खाना-पीना अच्छा नहीं लगता” चाचा इस बात पर हसने लगे और बोले,” दोपहर को तो मजे लेकर मेरा लंड चूस रही थी, अब झूठा खाने में क्या शरमाना मेरी जान, पिलो थोड़ी सी व्हिस्की” मामीजी ने बात को आगे न बढ़ाते हुए, चाचा ने सामने की हुई ग्लास से थोड़ी व्हिस्की पी ली। व्हिस्की के साथ साथ खाने के लिए चाचा ने तंदूरी चिकन मंगवाया था, और वो जान बुझकर मामी जो पीस खाके रखती थी वही खाते थे और मामीको अपना खाया हुआ खाने को मजबूर कर रहे थे। मामीने कभी मामा का भी झूठा नहीं खाया था अब तक लेकिन आज अरमान चाचा का झूठा खा रही थी।एक ही दिन में मामीने जो जो किया था उस्सपर उनका भी यकीन नहीं हो रहा था। किसीने उनका भविष्य बता दिया होता की वो ये सब करनेवाली है तो मामी उसपे सपने. में भी यकीन नहीं करती। लेकिन किसीने सच ही कहा है “Truth is always stranger than the fiction”.
ढाबे का सीन ख़तम होने के बाद दोनों फिर टेम्पो में आगये।लेकिन चाचा का मन ड्राइविंग करने का नहीं था।उनका तो मामी के ऊपर राइडिंग करने का दिल कर रहा था। ढाबे के पास ही थोड़ी सुनसान जगह चाचा ने टेम्पो. पार्क करा हुआ था।मामी भी बियर की बजह से अलग ही एहसास कर रही थी।ऐसे में दोनों टेम्पो में पीछे चढ़ गए और चाचा ने पडदा भी पैक कर दिया जो टेम्पो के पीछे होता है। बाहर से थोड़ी रौशनी अंदर आ रही थी पूनम की. रात होने की बजहसे। चाचा अब मामी को देखके बहोत ही उत्तेजित हो रहे थे। उन्होंने उनको अपनी मजबूत बाहोमे जखड के उनको किस करने की कोशिश करने लगे।लेकिन मामी अब उनकी “सदसद्विवेकबुद्धि” जागृत होने. की बजहसे थोडा नखरा कर रही थी। लेकिन अब चाचा भी मानने वाले नहीं थी। उन्होंने उनके साड़ी के प्लेट्स में हाथ डालके सारी प्लेट्स निकाल दी और मामी को गोल गोल घुमाके पूरी साड़ी उतार दी उनके कमर से।अब सिर्फ. पेटीकोट और ब्लाउज में खड़ी मामी अपना बदन झाकने की बुरी तरह कोशिश कर रही थी। चाचा ने अब अपने सारे कपडे उतार के नंगे हो कर मामीको पीछे से अपने बाहोमे जखड लिया। अब उनका तना हुआ लंड मामी के पेटीकोट में. लपटे डेरेदार गांडको घूर रहा था।मामीको पता चल गया अब क्या होने वाला है, लेकिन वो ऐसा होगा उनको अंदाजा नहीं था। मामी चाचा का बड़ा और चौड़ा लंड अपने चूत में लेने के लिए तैयार थी लेकिन उन्हें अब घर पोहोचना था जल्दी, वरना सारी गड़बड़ हो जाती और किये कराये पर पानी फेर जाता,ये सोचकर वो डर रही थी(उनको unprotected सेक्स भी नहीं करना था चाचा जैसे ड्राईवर के साथ)। मामी ने जल्दी ही मन में कुछ सोचकर हालात पे काबू पा लिया। वो मुस्कराकर बोली ….
“हाय राम! क्या फुल गया है आपका लंड, जी करता है इसे ऐसे ही खा जाऊं” “खा जाओ ना भाभी जी, वही तो कह रहे है हम भी” मामी को एक ही रास्ता नजर आ रहा था अब उनको उनकी चुदाई करने से रोकने का, उनका जल्द ही पानी निकाल देना और मुस्कराकर प्यार से यहाँ से निकलने के लिए उन्हें मजबूर करना। उधर चाँद की रौशनी की बजह से मामीका का जो भी अंग दिख रहा था वो चमक रहा था। और चाचा की हालत बुरी कर रहा था। मामी भी अब मुंह चाचा की तरफ कर के उनके बाहोमे समां गयी.
उनके पीठ को एक हाथ से सहलाते हुए वो उनके लंड को. दुसरे हाथ से मसलने लगी। उनका सर चाचा के छाती पे टिका हुआ था।धीरे धीरे अब मामी चाचा के निप्पल पर अपनी जबान की टिप से सर्किल बनाने लग गयी। थोडा निचे उतरकर उनके बड़े पेट को चूमने लगी। चाचा के नाभि में. अपनी जुबान को अंदर बाहर करने लगी। और धीरे धीरे वो चाचा के बड़े लंड की तरफ बढ़ने लगी।मामी को आते देखकर ही चाचा का लंड उंस भरने लगा। लेकिन मामीजीने लंड को बाईपास ही कर दिया। वो उनके लंड के निचले गोटियों. को कुसल कर चाचा के गांड की तरफ बढ़ गयी। चाचा के गांड में मामीने अपना मुंह छुपा लिया और उनके दरार में अपनी नाक रगड़ ली। ये देखके चाचा तो बहोत नरम पड़ गए और मामीके गुलाम बनने ही बाकी रह गए। थोड़ी देर. चाचा के गांड से खेलकर वो फिरसे आगे आके अपने घुटनों के बल चाचा के पैरों में बैठ गयी और लंड को अपने हाथोंसे मसलने लग गयी। सुबह की मस्ती सब उतर गयी थी चाचा के लंड की।सुबह जिसने आधा घंटे मुश्किल से बाद. अपना पानी छोडा था,अभी वो दस मिनट में ही मामी के काबू आगया और धीरे धीरे, उंस उंस कर अपना पानी छोड़ने लगा। मामीने वो पूरा चाचा के लंड से निकला गाढ़ा वीर्य अपने मुंह पे फैला दिया। अपने वीर्य से लतपत मामी को देखके चाचा तो अब ख़ुशी से पागल होने ही बाकी रह गए थे।.
स्रोत:इंटरनेट