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शादी के बाद मेरे सारे अरमान ढह गए, मेरे गे पति से लाचार होके अब मुझे एक तगड़े लंड की तलाश थी जो मेरी प्यास बुझाए.
उसके लिए मुझे किसी को सेड्युस करना पड़ेगा.
पढ़िए मस्त seducing sex kahani.. शादी कर के मुझे अभी केवल दो महीने ही हुए थे और मेरे सारे अरमान ख़ाक में मिल चुके थे.
मैंने एक राजकुमार के सपने देखे थे लेकिन पति की गोरी चमड़ी के निचे एक राजकुमारी रहती थी क्यूंकि वह पुरुष के शरीर में महिला का दिल थे.
मुझे गे समाज से कोई गिला नहीं है, भगवन ने उन्हें ऐसा बनाया है वह क्या करे, लेकिन शादी कर के मेरी जिन्दगी भी तो ख़राब न करते.
जिस हिम्मत से वह मुझे कह सकते है की तुम अपने लिए कुछ देख लेना मैं तुम्हारी चूत के लिए योग्य नहीं हूँ.
मेरे उपर तो जैसे की आभ फटा था उस दिन…पर जैसे उपर वाले की मरजी, मैं इसे छोड़ भी नहीं सकती थी क्यूंकि मेरे घरवालो के उपर शरम का पहाड़ लदा था जो मेरी जिन्दगी से भी बड़ा था.
मैंने कुछ दिन तक पति को चुदाई के लिए राजी करने की कोशिश की लेकिन एक दिन उस ने मुझे साफ़ कह दिया की वह चुदाई के लायक ही नहीं है, उसे केवल मर्द अच्छे लगते हैं.
मैं मनोमन अपने चूत के लिए एक योग्य लंड की तलाश में लग गई.
मेरी नजर तभी राजीव के उपर पड़ी, राजीव मेरे पति के साडी के शो रूम पर काम करता था और उसकी उम्र होंगी केवल 20, लेकिन वह एकदम तगड़ा और सशक्त था.
उसके बाजू में मुझे वह दम लगा जो मेरी चूत को शांत कर सके.
मैंने अब धीरे धीरे राजीव को लाइन देना चालू कर दिया.
राजीव पहेले खचक रहा था लेकिन एकाद महीने में वह भी मुझे स्माइल देने लगा.
एक दिन जब वोह घर पति का टिफिन लेने आया तो मैंने टिफिन पकडाते हुए उसके हाथ का लम्बा स्पर्श किया, उसने मेरी तरफ देखा और मैंने उसे आँख मारी.
वह हंस पड़ा और चला गया.
मैंने अपने पति को साफ़ कह दिया के मैं राजीव से चुदाई करवाउंगी.
पति को इससे कोई एतराज नहीं था क्यूंकि उसे भी एक बच्चा चाहिए था जो उसके बस की बात नहीं थी.
मैंने उसे कह दिया की जब मैं कहूँ वह राजीव को घर भेज दें बाकी मैं सब संभाल लुंगी.
एक दिन सास, ससुर और मेरी जेठानी कोमल खरीदी के लिए बाजू के शहर जा रहे थे, मुझे भी जाना था लेकिन मैंने बीमारी का बहाना करके जाना केंसल कर दिया.
मैंने दोपहर के 12 बजे पति को फोन किया की वह कुछ भी बहाना कर के राजीव को घर भेज दें.
मेरे पति गिरीश ने कहाँ ठीक है.
राजीव कुछ 15 मिनिट के बाद ही बेल बजा रहा था घर के बहार.
मैंने उसे लुभाने के लिए पारदर्शक साडी, और काली ब्रा पहन रखी थी.
राजीव को मैंने हस्ते हुए घर के अंदर लिया और उसने तुरंत पुछा मेडम साब ने बोला है की आप को कुछ काम है.
मैंने कहाँ हां क्या आप मेरी मदद करोंगे.
उसने कहा हां बोलिए ना.
मैंने कहा गिरीश बता रहे थे की आप मोच वगेरह के लिए मसाज करते है.
राजीव बोला हां मेडम वोह तो ऐसे ही कभी कभी दुकान पर कर देते है हम.
मेरी चूत के अंदर चुदाई का कीड़ा सलवटे ले रहा था, मेरी नजर राजीव के तगड़े बाजुओ पर ही थी और मैं खुली आँखों से उन बाजुओ से कस के जकड़ कर चुदाई करवाने के सपने देख रही थी.
राजीव बोला, बीबीजी आपको कहाँ मोच आई है, उसके बोलते ही मैं अपने चुदाई के दिन-स्वप्न से बहार आई.
मैंने उसे कहा पहले आप चाय तो लो, मालिक का टेंशन मत लो, उनको मैंने बोला है की आप को देर भी हुई तो दिक्कत नहीं है.
मैंने उसे ठंडा पानी और रूहअफज़ा पिलाया.
राजीव को मैंने तिरछी नजर से देखा था आर वह मेरी गांड की तरफ नजरे गडाए हुआ था.
उसके लंड को चूस कर मैं भी उससे चुदाई करवाना चाहती थी लेकिन अभी एकदम से नहीं कहे सकती थी के राजीव लाओ तुम्हारा लंड…..! ठंडा पिलाने के बाद मैंने राजीव को बेडरूम में बुलाया और मैं खुद पलंग के उपर उलटी लेट गई.
मैंने साडी हटाई और उसको मेरी चिकनी कमर दिखाते हुए कहाँ यहाँ पर मोच आई है.
मैंने उसे कमर के और गांड के बिच का हिस्सा दिखाया था.
राजीव बोला ठीक है मेडम आप आँखे बंध करके लेटे रहें.
वो पलंग के उपर चढ़ गया और उकडू बैठ गया.
मैंने उसे कहाँ आप मेरे पाँव पर बैठ जाओना तो मुझे पैर के दर्द में भी राहत होगी.
वोह मेरी गांड के थोड़े उपर पाँव के उपर बैठ कर मसाज करने लगा.
मैं जानबूझ कर कराहने की एक्टिंग करने लगी.
राजीव के घुटने मेरे जांघो को साइड से छू रहे थे.
वोह मेरे कमर के निचले हिस्से को दबा रहा था और मुझे पुरुष स्पर्श से एक अलग ही नशा चढ़ रहा था.
मैंने राजीव को कहा, और निचे…..! राजीव के हाथ लगभग मेरे कूलों को छू रहे थे और मैंने तभी उसे कहा, मजा आ रहा है..आपके हाथों में तो जान है राजीव.
यह शायद राजीव को चुदाई के लिए उकसाने के लिए काफी था.
वह मेरे कूलों के करीब अपना लंड ले आया, मुझे उसके लंड की गर्मी अपनी गांड पर महसूस हो रही थी.
वो अभी भी कूलों के सिर्फ थोड़ी उपर मसाज कर रहा था.
मैंने आँखे खोली और पलट के उसकी तरफ देख के हंस दिया, राजीव पसीने में डूबा था.
यह जवान इंडियन लड़का शायद पहेली बार किसी भाभी की गांड के इतने करीब पहुंचा था.
मैंने जैसे उसकी तरफ देख हंस दिया उसकी हिम्मत खुलने लगी और वह लौड़े को और भी जोर से गांड के उपर गडाने लगा.
राजीव बोला, मेडम आपकी साडी बिच में आ रही है इसलिए मसाज सही नहीं हो रहा, मैंने कहा उतार दो ना फिर.
राजीव के हाथ मेरे पल्लू को हटाने लगे.
उसने धीमे से पल्लू हटा दिया.
अब में केवल ब्लाउज में उसके सामने पड़ी थी.
मैंने आगे होते हुए कहा, राजीव ब्लाउज भी उतार दो ना मुझे कमर पे भी अच्छेवाला मसाज करवाना है.
राजीव का लंड गांड को बेहद खुसी दे रहा था.
उसने जैसे ही ब्लाउज उतारा मैंने बिना रुके उसके लंड को हाथ में भर लिया.
राजीव का लंड हाथ में लेते ही वह एंठने लगा और मैंने उसे कहा, राजीव मुझ से रहा नहीं जाता, प्लीज़ अपने कपडे उतार दो और मुझे भी नंगा कर दो.
राजीव ने मेरे कपडे फट से उतारे और वह खुद भी पेंट और शर्ट निकाल के चड्डी में आ गया.
मैंने अपने हाथ से उसकी लंगोट निकाली और उसके कड़े लंड की आँखों से ही चुदाई करने लगी.
मेरी चूत एकदम गीली हो चुकी थी और मुझे चुदाई की एक तलब सी लगी पड़ी थी.
मैंने उसके लंड को हाथ से तोला, बिलकुल जवान लंड था और मेरी चूत के लिए बिलकुल सही साइज़ था इसका.
मैंने राजीव को पलंग की उपर लिटा दिया और खुद उसकी जांघो के बिच बैठ गई.
राजीव अभी भी एंठ रहा था.
मैंने अपना मुख चलाया और उसके लंड के सुपाडे को मुहं में दबाया.
राजीव के मुहं से आह ओह निकलने लगा और मैं अब उसके लंड को क्रमश: और मुहंके अंदर घुसाने लगी.
तक़रीबन आधे से ज्यादा लंड मुहं में घुसते ही वह जैसे की मेरे गले तक पहुँच चूका था और मुझ से और आगे लिया भी नहीं गया.
मैंने लौड़े को मस्त चुसना चालू किया और राजीव लंड को मेरे मुहं में धकेलने लगा.
मैंने उसके जांघ पर हाथ रख उसके झटको को अंकुशीत किया.
राजीव भी चुदाई के लिए उत्सुक था बिलकुल मेरी तरह.
राजीव मेरे चुंचे और गाल, कंधे पर हाथ फेर रहा था.
मैं भी उसके हाथों का स्पर्श मस्त मजे से भोग रही थी.

स्रोत:इंटरनेट