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Masterji Shishya Sex Story In Hindi 3

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नव्या संकोच में थी फिर भी लेट गई। किसी के सामने नंगेपन का अहसास एक मानसिक लक्ष्मण रेखा की तरह होता है। बस एक बार ही इसकी सीमा पार करनी होती है। उसके बाद उस व्यक्ति के सामने नंगापन नंगापन नहीं लगता।. नव्या को अपने ऊपर शर्म आ रही थी कि अपनी बेवकूफी के कारण उसने अपने आप को गुरूजी के सामने नंगा कर दिया था। यह तो अच्छा है, उसने सोचा, कि गुरूजी एक अच्छे इंसान हैं और बुरी नज़र नहीं रखते। कोई और तो उसे दबोच देता। यह सोच कर नव्या सहम गई।. उधर गुरूजी ने तलवों के बाद नव्या की दोनों टांगों की पिंडलियों को दबाना शुरू किया। नव्या को लगा मानो उसकी सालों की थकान दूर हो रही थी। उसे ऐसा अनुभव कभी नहीं हुआ था। किसी ने कभी इस तरह उसकी सेवा नहीं. की थी। वह गुरूजी की कृतज्ञ हो रही थी। तो जब गुरूजी ने उसकी टांगें थोड़ी और खोलने की कोशिश की तो नव्या ने उनका सहयोग करते हुए अच्छी तरह अपनी टांगें खोल दीं। गुरूजी अब पिंडलियों से नव्या करते हुए घुटने. और जांघों तक आ गए। अच्छे से तेल लगा कर हाथ चला रहे थे जिस से हाथ में खूब फिसलन हो और वे “गलती से” इधर उधर छू लें। अब नव्या अपनी मालिश करवाने में पूरी तरह लीन थी। उसे बहुत मज़ा आ रहा था।. नव्या के ऊपर रखी चादर उसके नितंब तक उघड़ गई थी।.  . गुरूजी ने अब देखा कि नव्या पूरी नंगी नहीं है और उसने चड्डी पहन रखी है। मन ही मन उन्हें गुस्सा आया पर गुस्सा दबा कर प्यार से बोले,”तुम्हें यह चड्डी भी उतारनी होगी नहीं तो शरीर के ज़रूरी भाग इस उपचार से वंचित रह जायेंगे। बाद में तुम्हें पछतावा हो सकता है। लेकिन अगर तुम्हें संकोच है तो जैसा तुम ठीक समझो !!”.  . गुरूजी ने अपना तीर छोड़ दिया था और वे आशा कर रहे थे कि नव्या उनके जाल में फँस जायेगी। ऐसा ही हुआ।. नव्या ने कहा,” गुरूजी , जैसा आप ठीक समझें !!” तो गुरूजी ने उसको चादर से ढक दिया और कमरे के बाहर यह कहते हुए चले गए कि वे बाथरूम हो कर आते हैं। तब तक नव्या चड्डी उतार कर लेट जाये।. गुरूजी को थोड़ा समय वैसे भी चाहिए था क्योंकि उनका भाला अपनी क़ैद से मुक्त होना चाहता था। इतनी देर से वह अपने आप को संभाले हुए था। गुरूजी को डर था कहीं ज्वालामुखी लंगोट में ही न फट जाए। बाथरूम में जाकर. गुरूजी ने अपनी लंगोट खोली और अपने लिंग को आजाद किया। इससे उन्हें बहुत राहत मिली क्योंकि उनके लिंग में हल्का सा दर्द होने लगा था। उसके अन्दर का लावा बाहर आने को तड़प रहा था। इतनी कमसिन और प्यारी लड़की. के इतना नजदीक होने के कारण उनका लंड अति उत्तेजित था और कुछ न कर पाने के कारण बहुत विवश महसूस कर रहा था। उसके लावे को छुटकारा चाहिए था। गुरूजी ने इसी में भलाई समझी कि अपने लिंग को शांत करके ही नव्या के. पास जाना चाहिए। वरना करे कराये पर पानी फिर सकता है। यह सोच उन्होंने अपने लंड को तेल युक्त हाथ में लिया और नव्या के स्तनों का स्मरण कर मैथुन करने लगे। लिंगराज तो पहले से ही उत्तेजित थे, थोड़ी सी देर ही में चरमोत्कर्ष को पा गए। गुरूजी ने सोचा अब लंगोट की क्या ज़रुरत सो सिर्फ निकर ही पहन कर बाहर आ गए।. वहां नव्या चड्डी उतार कर चादर के नीचे लेटी हुई थी। चड्डी में थोड़ा गीलापन था सो उसने चड्डी को गद्दे के नीचे छुपा दिया।. गुरूजी ने जहाँ छोड़ा था वहीं से आगे मसाज शुरू किया। चादर को पाँव की तरफ से ऊपर लपेट कर नव्या की जांघों तक उठा दिया और उसकी टांगें अच्छे से खोल दीं क्योंकि नव्या अब नंगी थी, टांगें खुलने से उसे शर्म आ रही थी सो उसने अपनी टांगें थोड़ी सी बंद कर लीं। गुरूजी ने कुछ नहीं कहा और पीछे से घुटनों और जांघों पर तेल लगाने लगे। उनके हाथ धीरे धीरे ऊपर की तरफ जाने लगे और चूतडों पर पहुँच गए। गुरूजी नव्या की. टांगों के बीच वज्रासन में बैठ गए और नव्या के घुटने से ऊपर की टांगों की मालिश करने लगे। चादर को उन्होंने उसकी पीठ तक उघाड़ दिया और वह उलटी, नंगी और असहाय उनके सामने लेटी हुई थी। गुरूजी अपने जीवन में सिर्फ लड़कियां ही नहीं लड़कों का यौन शोषण भी कर चुके थे सो उन्हें गांड से बेहद प्यार था और उन्हें गांड मारने में मज़ा भी ज्यादा आता था। इस अवस्था में नव्या की कुंवारी गांड को देख कर गुरूजी की लार. टपकने लगी। उनका मन कर रहा था इसी वक़्त वे नव्या की गांड भेद दें पर अपने ही इरादे से मजबूर थे।. उनके हाथ नव्या के चूतडों पर सरपट फिर रहे थे। रह रह कर उनकी उंगलियाँ चूतडों के पाट के बीच चली जातीं। जब ऐसा होता, नव्या हिल हिल कर आपत्ति जताती। वज्रासन से थक कर गुरूजी अपने घुटनों के बल बैठ गए और मालिश जारी रखी। उनकी उंगलियाँ नव्या की योनि के द्वार तक दस्तक देने लगीं। ऐसे में भी नव्या हिलडुल कर मनाही कर देती।. अब गुरूजी ने नव्या के ऊपर से पूरी चादर हटा दी और मालिश का वार पिंडलियों से लेकर पीठ और कन्धों तक करने लगे। जब वे आगे को जाते तो उनकी निकर नव्या के चूतडों से छू जाती।. मास्टरजी अपनी कुंवारी मासूम शिष्या की ऊपर से नीचे तक मसाज कर रहे है, देखते है वो बेचारी लड़की कब तक अपने आप पे काबू रख पायेगी.. इस sex story in hindi का अगला भाग जल्द ही.. और भी शानदार पढ़िए My Hindi Sex Stories पर.. Sex Kahani के अन्य भाग-. पार्ट 1. पार्ट 2. पार्ट 3.
स्रोत:इंटरनेट