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Masterji Shishya Sex Story In Hindi

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एक टीचर अपने शिष्यों के बहुत करीब होता है, पर अगर वो ही मास्टर का दिल अपनी कुंवारी शिष्या पे आ जाए तो उसे हासिल करने के लिए उसके पास बहुत तरीके होते है.. पढ़िए एक मस्त sex story in hindi.. Sex Kahani के अन्य भाग-. पार्ट 1. पार्ट 2. पार्ट 3. नव्या का जन्म एक गरीब परिवार में हुआ था।. उसके पिता बागवानीका काम करते थे और माँ घरों. में काम करती थी। ज्यादातर देखा गया है कि समाज केबुरे लोगों की नज़र गरीब घरों की कमसिन लड़कियों पर होती. है। वे सोचते हैंकि गरीब लड़की की कोई आकांक्षा. ही नहीं होती और वे उसके साथ मनमर्ज़ी करसकते हैं।. नव्या जैसे जैसे बड़ी हो रही थी, आस पास के लड़कों और आदमियोंकी उस पर नज़र पड़ रही थी। वे उसको तंग करने और छूने का मौका ढूँढ़ते रहतेथे। नव्या शर्म के. मारे अपने माँ बाप को कुछ नहीं कह पाती थी।एक दिन. स्कूल में जब वह फीस भर रही थी, तो गुरूजी ने उसे अकेले में लेजाकर कहा कि अगर वह चाहे तो वे उसकी फीस माफ़ करवा सकते. हैं। नव्या खुश होगई और गुरूजी. को धन्यवाद देते हुए बोली कि इससे उसके पिताजी. को बहुतराहत मिलेगी। गुरूजी ने कहा पर इसके लिए उसे कुछ करना होगा। नव्या प्रश्न मुद्रा में गुरूजी. की तरफ देखने लगी तो गुरूजी ने उसे स्कूल केबाद अपने घर आने के लिए कहा और बोला कि वहीं पर सब समझा. देंगे।चलते चलते. गुरूजी ने नव्या को आगाह. किया कि इस बारे में किसी और को नबताये नहीं. तो बाकी बच्चे भी फीस माफ़ करवाना चाहेंगे !! नव्या समझ गई औरकिसी को न बताने का आश्वासन दे दिया। गुरूजी क्लास में नव्या पर ज्यादाध्यान दे रहे थे और उसकी पढ़ाई की तारीफ़ भी कर रहे थे।. नव्या गुरूजी सेखुश थी। जब स्कूल की घंटी बजी तो गुरूजी ने उसे आँख से इशारा किया औरअपने घर को चल दिए। नव्या भी अपना. बस्ता घर में छोड़ कर और अपनी बहन कोबता कर. कि वह पढ़ने जा रही है, गुरूजी के घर को चल दी। गुरूजी घर में अकेले ही थे, नव्या को देख कर खुश हो गए और उसकी पढ़ाई की तारीफ़ करने लगे। नव्या अपनी तारीफ़ सुन कर खुश हो गई और मुस्कराने लगी। गुरूजी ने उसे सोफे पर अपने पास बैठने को कहा और उसके परिवार वालों के बारे में पूछने लगे। इधर उधर की बातों के बाद उन्होंने नव्या को कुछ ठंडा पीने को दिया और कहा कि वह अगर इसी तरह मेहनत करती रहेगी और अपने गुरूजी को खुश रखेगी तो उसके बहुत अच्छे नंबर आयेंगे और वह. आगे चलकर बहुत नाम कमाएगी। नव्या को यह सब अच्छा लग रहा था और उसने गुरूजी को बोला कि वह उनकी उम्मीदों पर खरा उतरेगी !! गुरूजी ने उसके सर पर हाथ रखा और प्यार से उसकी पीठ सहलाने लगे। गुरूजी ने नव्या को. हाथ दिखाने को कहा और उसके हाथ अपनी गोदी में लेकर मानो उसका भविष्य देखने लगे। नव्या बेचारी को क्या पता था कि उसका भविष्य अँधेरे की तरफ जा रहा है !. हाथ देखते देखते गुरूजी अपनी ऊँगली जगह जगह पर उसकी हथेली के बीच में लगा रहे थे और उस भोली लड़की को उसके भविष्य के बारे में मन गढ़ंत बातें बता रहे थे। उसे राजकुमार सा वर मिलेगा, अमीर घर में शादी होगी वगैरह वगैरह !!. दोनों हाथ अच्छी तरह देखने के बाद उन्होंने उसकी बाहों को इस तरह देखना शुरू किया मानो वहां भी कोई रेखाएं हैं। उसके कुर्ते की बाजुओं को ऊपर कर दिया जिससे पूरी बाहों को पढ़ सकें। गुरूजी थोड़ी थोड़ी देर. में कुछ न कुछ ऐसा बोल देते जैसे कि वे कुछ पढ़ कर बोल रहे हों। अब उन्होंने नव्या को अपनी टाँगें सोफे के ऊपर रखने को कहा और उसके तलवे पढ़ने लगे। यहाँ वहां उसके पांव और तलवों पर हाथ और ऊँगली का ज़ोर. लगाने लगे जिससे नव्या को गुदगुदी होने लगती। वह अजीब कौतूहल से अपना सुन्दर भविष्य सुन रही थी तथा गुदगुदी का मज़ा भी ले रही थी। जिस तरह गुरूजी ने उसके कुर्ते की बाजुएँ ऊपर कर दी थी ठीक उसी प्रकार. उन्होंने बिना हिचक के नव्या की सलवार भी ऊपर को चढ़ा दी और रेखाएं ढूँढने लगे। उसके सुन्दर भविष्य की कोई न कोई बात वे बोलते जा रहे थे।. अचानक उन्होंने नव्या से पूछा कि क्या वह वाकई में अपना और अपने परिवार वालों का संपूर्ण भविष्य जानना चाहती है? अगर हाँ, तो इसके लिए उसे अपनी पीठ और पेट दिखाने होंगे। नव्या समझ नहीं पाई कि क्या करे तो गुरूजी बोले कि गुरु तो पिता सामान होता है और पिता से शर्म कैसी? तो नव्या मान गई और अपना कुर्ता ऊपर कर लिया। गुरूजी ने कहा इस मुद्रा में तो तुम्हारे हाथ थक जायेंगे, बेहतर होगा कि कुर्ता उतार ही दो। यह कहते हुए उन्होंने उसका कुर्ता उतारना शुरू कर दिया। नव्या कुछ कहती इससे पहले ही उसका कुर्ता उतर चुका था।. नव्या ने कुर्ते के नीचे ब्रा पहन रखी थी। गुरूजी ने उसे सोफे पर उल्टा लेटने को कहा और उसके पास आकर बैठ गए। उनके बैठने से सोफा उनकी तरफ झुक गया जिससे नव्या सरक कर उनके समीप आ गई। उसका मुँह सोफे के अन्दर. था और शर्म के मारे उसने अपनी आँखों को अपने हाथों से ढक लिया था। पर गुरूजी ने उसकी पीठ पर अपनी एक ऊँगली से कोई नक्शा सा बनाया मानो कोई हिसाब कर रहे हों या कोई रेखाचित्र खींच रहे हों। ऐसा करते हुए वे. बार बार ऊँगली को उसकी ब्रा के हुक के टकरा रहे थे मानो ब्रा का फीता उनको कोई बाधा पहुंचा रहा था। उन्होंने आखिर नव्या को बोला कि वे एक मंत्र उसकी पीठ पर लिख रहे हैं जिससे उसके परिवार की सेहत अच्छी रहेगी. और उसे भी लाभ होगा। यह कहते हुए उन्होंने उसकी ब्रा का हुक खोल दिया। नव्या घबरा कर उठने लगी तो गुरूजी ने उसे दबा दिया और बोले घबराने और शरमाने की कोई बात नहीं है। यहाँ पर तुम बिल्कुल सुरक्षित हो !!. उस गाँव में बहुत कम लोगों को पता था कि गुरूजी , यहाँ आने से पहले, आंध्र प्रदेश के ओंगोल शहर में शिक्षक थे और वहां से उन्हें बच्चों के साथ यौन शोषण के आरोप के कारण निकाल दिया था। इस आरोप के कारण उनकी सगाई भी टूट गई थी और उनके घरवालों तथा दोस्तों ने उनसे मुँह मोड़ लिया था। अब वे अकेले रह गए थे। उन्होंने अपना प्रांत छोड़ कर यहाँ नौकरी कर ली थी जहाँ उनके पिछले जीवन के बारे में कोई नहीं जानता था।. उन्हें यह भी पता था कि उन्हें होशियारी से काम करना होगा वरना न केवल नौकरी से हाथ धोना पड़ेगा, हो सकता है जेल भी जाना पड़ जाये। उन्होंने नव्या की पीठ पर प्यार से हाथ फेरते हुए उसे सांत्वना दी कि वे उसकी मर्ज़ी के खिलाफ कुछ नहीं करेंगे। अचानक, गुरूजी चोंकने का नाटक करते हुए बोले,”तुम्हारी पीठ पर यह सफ़ेद दाग कब से हैं?”. नव्या ने पूछा,”कौन से दाग?” तो गुरूजी ने पीठ पर 2-3 जगह ऊँगली लगाते हुए बोला,” यहाँ यहाँ पर !” फिर 1-2 जगह और बता दी। नव्या को यह नहीं पता था, बोली,”मुझे नहीं मालूम गुरूजी , कैसे दाग हैं?” गुरूजी ने चिंता जताते हुए कहा,”यह तो आगे चल कर नुकसान कर सकते हैं और पूरे शरीर पर फैल सकते हैं। इनका इलाज करना होगा।”
स्रोत:इंटरनेट