वह एक होटल का बार हाल था, सैकङॉ टेबुलें लगी थी, वहाँ लोग अपनी प्रेमिकाओं अथवा पत्नियों के साथ मौजूद थे, कुछ अकेले लोग भी थे, सभी के सामने शराब थी,औरतें और लड़कियां भी पि रही थी, और एक खूबी यह थी की बिच मैं डांस करने वालों के लिए बड़ी सी जगह रिक्त रक्खी गई थी, उस हाल मैं हलकी – हलकी रंगीन बत्तियां जल रही थी, माहौल अँधेरे के समान ही था,
हम दोनों हाँथ मैं हाँथ डाले एक खाली जगह बैठ गए,
. मैने हरमन से पूछा, “तुम शराब पीते हो क्या?”
. “शराब पीने की आदत नहीं है लेकिन इस माहौल का आनंद उठानें के लिए थोडी-थोडी पीने मैं क्या हर्ज है,”
. मैने मुस्कुराकर सहमती जाहिर कर दी, थोडी देर मैं हरमन खुद जाकर दो गिलाशों मैं शराब ले आया, मैने न आश्चर्य किया और न ही कुछ पूछा, एक गिलाश मैने थाम लिया,
. कई जोड़े नशे मैं झूम रहे थे और नाच रहे थे,दो घूँट पीने के बाद मैने उत्सुकता दिखाई, ” चलो हम भी डांस करें”
. हरमन तुंरत उठ पड़ा, मेरी कमर मैं हाँथ डाल कर नाचने लगा, मैं भी उसके सिने से लग कर थिरकने लगी,नाचते नाचते ही उसने मेरी थोडी पर हाँथ लगा कर चेहरा उपर उठाया और चुम्बन भी लेने लगा,उसका एक हाँथ मेरी कमर मैं लिपटा था दूसरा हाँथ मेरे वक्ष पर रख कर उरोजों को धीरे-धीरे दबाने सहलाने लगा, जैसे-जैसे शराब का शरूर चढ़ता गया, हरमन के साथ नाचने का आनंद बढ़ता गया, हम वहाँ पूरे एक घंटे रहे,धरती का सबसे उत्तम नज़ारा देखा,
. . वहाँ से निकालने के पहले हमने एक दुसरे का दिल टटोला, छेड़ छाड़ के कारण मेरा मन और मेरे यौनांग उत्तेजित हो उठे थे,काम-भावना जाग जाना स्वभाविक ही था, हरमन भी काम-भावना मैं गोते लगा रहा था, हम दोनों का एक जैसा ही मानना था की शादी से पहले सम्भोग- आनंद करना अपराध नहीं है, इसलिए हमने तय किया की किसी होटल मैं मैं चल कर कमरा लिया जाय और अनमोल क्षणॉ का आनंद लिया जाए,
. आधे घंटे बाद हम दोनों होटल के बंद कमरे मैं थे, सारा खर्च हरमन ही वहन कर रहा था, इसलिए मुझे बहुत अच्छा लग रहा था,
. बिस्तर पर बैठते ही वह बोला, “तुम्हारी योनी तो उत्तेजना के कारण इतनी फूल गई है की जींस के उपर से दोनों फांकें स्पष्ट जाहिर हो रही है,”
. मैने भी गर्दन झुका कर देखा और मुस्करा कर कहा, “तुम्हारे लिए चुनौती है, हिम्मत हो तो सामना करो, देखूं तुम्हारे मुन्ने का क्या हाल है?” कह कर जींस के उपर से ही उसका लिंग पकडने की चेष्टा करने लगी,
. उसने पूछा ” क्या हाल है ”. . मैं बोली, “जिन उतारो, तब तो देखूं, कैद तो कर रखा है बेचारे को,”
. उसने फटाफट जिन के साथ नेकर भी उतार दिया,
. “हाय” मैने दोनों हांथों को गाल पर रख कर फटी-फटी आँखों से लिंग को देखते हुवे कहा,
. “क्या हुआ’. मैने कहा ” इन्हे देख देख कर तो मेरी योनी मैदान छोड़ कर भागने की तैयारी करने लगी है,”
. वह हंसते हुवे बोला, “चुनौती दी है तो भागने नहीं पाएगी, चलो जिन उतार कर उसे “इनके” सामने करो,”
. ” ना – ना, यह पीठ दिखाने को तैयार है, छोड़ दो, जाने दो,”
. “नहीं, समर्पण करना पडेगा, छोडूंगा नहीं,” कह कर उसने मेरी नाभि के पास जिन के अन्दर चार उंगुलियां डाल कर पकड़ ली
. “जल्दी खोलो,” उसने कहा,
. वहाँ मेरी आधुनिक विचारधारा लुप्त हो गई, मुझे शर्म आने लगी, मैने कहा, ” अभी नहीं, थोडी देर बाद,”
. “थोडी देर बाद क्यों?” उसने मेरे हाँथ मैं अपना विकराल लिंग थमा कर कहा, “तुम इसे संभालो, मैं तुम्हारी योनी को मैदान मैं लाता हूँ,” कह कर वह मेरी बेल्ट और बटनें खोलता चला गया,
. ” देखो… देखो..अभी भी तनी पड़ी है, तुम कहती हो भागने की तैयारी कर रही है, तुमसे ज्यादा दिलदार तुम्हारी योनी है, भागेगी नहीं, युद्ध करगी,”
. मैने फिर मुस्कुराते हुवे गर्दन झुका कर देखा वास्तव मैं मेरी योनी फुल कर कठोर हो गई थी, दोनों फांके आपस मैं सटी ऐसी लग रही थी जैसे ऊँट का बंद मुह हो, ” मैने पूछा, ” तुम्हारा क्या ख़याल है, यह जीतेगी या हारेगी?”. . “यह तो युद्ध की समाप्ति पर ही नज़र आयेगा,” कह कर वह शर्त की बटनें खोलने लगा, ” देखूं यह कितने ताकतवर हैं? ”
. मेरे वछ के उभारों को देख कर वह बोला, ” ये तो फुल की तरह कोमल है, बेचारे” कहने के साथ ही उसने दोनों को सख्ती से दबोच लिया,
. . “ऊई…ई …ई!” चीख कर मैं उसकी और खिंच गई, उसने चेहरा बढा कर मेरे होंठों को अपने होंठों से दबोच लिया और चूसने लगा,
. उसकी साँसों की महक मिली तो जैसे सारा बदन जलने लगा, उसने उरोजों पर पकड़ ढीली कर दी तो मैं बाँहों का हार उसके गले मैं डाल कर एकदम से लिपट गई,
. “हाय डियर! तुमने तो मेरे अंदर आग लगा दी,”
. उसने मुझे खीच कर अपनी पालथी पर बिठा लिया, मेरे दोनों पांव उसकी कमर को छुते हुवे उसके पीछे तक फ़ैल गए थे, वह होंठों को छोड़ कर मेरे दायें उभार पर अपना मुंह लगा दिया और बच्चों की तरह चूसने लगा, मेरे रोम-रोम पुलक उठे, उत्तेजनावश मेरे होंठों पर सिस्कारियां फूटने लगी, उस अपार आनंद की मैं शब्दों से ब्याख्या नहीं कर सकती,
. अत्तिउत्तेजना के कारण मैं छटपटाने लगी, झटके से हरमन ने मुझे काबू मैं कर लिया ओर दुसरे उभार को चूसने लगा, सिस्कारियों की जगह “आह ” “उफ” ने ले ली, मैं सोच भी नहीं सकती थी की कामाग्नि इतनी तेज होती होगी, कामाग्नि मैं जलना भी कितना आनंद दायक होता है, यह मुझे उसी समय पता चला,
. अत्ति आनंदित होकर हरमन ने मेरे नितम्बों पर हाँथ लगा कर अपनी और खिंच लिया तो उसका कठोर लिंग घिसट कर मेरी नाभि तक आ गया, मैने एक लम्बी सांस छोड़ कर उसके गले मैं से बांहें निकाल ली, ओर दोनों के पेट के बिच हाँथ डाल कर लिंग को पकड़ कर कहा, “ठहरो मुझे भी तो कुछ देखने करने दो, जानी”
. उसने हाँथ हटाया ही था की मैं पिछड़ कर उसकी पालथी पर से उतर गई और उसके लिंग का अवलोकन करने लगी,
. मैने कहा, “लिंग इतने सुंदर होते हैं? क्या सबके इतने ही सुंदर होते हैं?”
. उसने कहा, “जो जैसा सुंदर होता है वैसा ही उसका लिंग भी सुंदर लगता है,तुम्हे मेरा लिंग कैसा लग रहा है?”
मैने कहा, ” तुम्हारा तो तुमसे भी ज्यदा हसीं है, जी चाहता है चूम लूँ”
. “जरूर चूमो डार्लिंग” कह कर उसने मुझे पीछे की और धकेल कर चित लिटा दीया और उछल कर. मेरे वछ आ बैठा, “चूमो और चुसोगी, अब मुंह खोलो तो तुम्हारी तमन्ना पूरी करूँ,”
. मैने मुहं खोल दिया, वह लिंग होंठों पर रगडने लगा, बहुत मोटा था, इसलिए मुंह मैं नहीं जा रहा था, मेरे मुंह का दरवाजा भी कुछ छोटा था, मैने कहा ” होंठ फट जाएंगे,”
. वह बोला ” नहीं फटेंगे जरा मुंह पूरा खोलो,”
. मैने थोडी कोशिश और की तो लिन्ग-मुंड प्रविष्ट हो गया,लेकिन होंठों के मध्य वह इतना कसा हुआ था की मुझसे चूसते ही नहीं बना, जैसे तैसे उसके सुंदर लिन्ग-मुंड को हच देर जीभ से सहलाया, वह घर्षण सा करने लगा तो मैने जीभ पीछे हटा ली, मैं पलकों को बंद कर के मस्त हो गई, उसे भी शायद ध्यान नहीं रहा की मुंह मैं ज्यादा जगह नहीं होती, इसलिए दो तीन बार उसने लिन्ग को आगे तक बढा दिया, जिससे मेरे गले मैं चोट सी पहुंची,मैने झटके से मुंह हटा लिया, लिन्ग मुंह से निकल गया, मज़ा के साथ- साथ मेरी आँखों मैं पानी आ गया,देर तक गले मैं चोट महसूस करती रही,
स्रोत:इंटरनेट