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मेरी सगाई एक हैण्डसम लड़के से हो गयी, मैं अब तक की सारी कमीनी कामनाएं उसके साथ पूरी करनी चाहती थी.
पर वो नाकारा निकला, पर अब इस आग का जय करूँ मैं?? एक गरमा गरम fiance sex story पढ़िए
मेरी उम्र २० साल है, मै मैट्रिक तक हे शिक्षित हूं, हलाँकि मैं बहूत साधारण परिवार की लड़की हू, लेकिन मुझे आधुनिकता पसंद है, तीन बहनों मे मैं सबसे छोटी हूं, दोनों बड़ी बहनों की शादी हो चुकी है, मैं सबसे छोटी होने के कारन पूरे परिवार की लाडली हूं, मैं पहनावे और बनाव श्रृंगार से बहूत ऊँचे घराने की लगती हूँ, जबकि असलियत यह है की खर्च की तंगी के कारण मुझे पढाई छोड़नी पडी,
. मेरी बहने भी अल्प शिक्षित हैं, उनमे से एक की शादी पेट्रोल पम्प पर गाडीयों मैं तेल भरने वाले युवक से हुई है, और दूसरी की शादी पोस्ट ऑफिस के एक निम्नवर्गीय कर्मचारी के साथ हुई है,
. मेरे घर के सभी लोग सामान्य जीवन गुजारते हैं, जबकि भले ही मेरे पास भी दो ही जोड़े कपडे हों, लेकीन आधुनिक बन कर ही घर से निकलती हूँ, घर मे भी मैं जींस-शर्ट पहना करती हूँ, लाडली बेटी होने के कारन कोई टोकता नहीं है,
. आधुनिक जीवन जीने का मज़ा ही कुछ और है.
जिसे मैं ही मह्शुश करती हूँ, सबसे ज्यादा मज़ा तो मुझे इसमे आता है जब हर ब्यक्ति आकर्षित होकर मुझे देखने लगता है, यह बात मुझसे छीपी नहीं रह गई है की मेरा रूप ज्यादा ही सुंदर है, आधुनिक वेश-भूषा पहनने पर मेरा चेहरा और चमकता है, मेरी सुन्दरता मैं स्वाभाविक चार चाँद लगे हुवे हैं, जैसे की मेरे गालों पर सुर्खी है और होंठ बिना लीपिस्टीक के ही लाल हुवे रहते हैं, गले मैं आस – पास ही दो छोटे छोटे तील हैं जो मेरे गोरेपन को ज्यादा ही उभारते हैं, मेरी हथेलियाँ और पाओं की एडियां भी शुर्ख हैं,
. मैं खुशबूदार क्रीम लगाती हूँ, जिसकी महक मेरे पीछे हवा मैं छूटती जाती है, मेरे एकदम समीप से गुजरने वाला आदमी महक पा कर ठीठक जाता है और दूर तक उसकी निगाह मेरा पीछा करती है,
. मुझे दोनों ही जीजा पसंद नहीं है, सूरत शक्ल से बुरे नहीं है, लेकिन उनका रहन-सहन, बात-ब्यवहार और पहनावा ऐसा है की उनके साथ चलते हुवे मुझे शर्म आती है, मैने तो सोच लिया है की उन लोगों की तरह किसी लड़के को माँ-बाप ने पसंद किया तो शादी से इनकार कर दूंगी,
. मैं घर से बाहर निकल कर देखती हूँ की मुझे चाहने वाले और पसंद करने वाले एक नहीं हजारों हैं, वैसे मैं लव मेरेज को ही प्राथमिकता देती रही हूँ, कम से कम वह मेरे ख्यालों से के अनुरूप तो होगा, लेकिन यह सौभाग्य मुझे अभी प्राप्त नहीं हुआ है, मैं अपने हजारों दीवानों मैं से एक भी चेहरा चुन नहीं पाई हूँ, खोज मैं सदेव रहती हूँ, ईसमें संदेह नहीं है,
.
एक रोज किसी कार्यवश पिताजी से मिलने उनके ऑफिस मैं जाना पड़ा, वहाँ मुझे “कीचड मैं कमल” नज़र आ गया, वह युवक बहुत ही हेन्डसम नज़र आया, फैशनेबल कपडे पहने हुवे थे, बालों को क्रीम से सेट कर रखा था, चेहारा बहुत सुंदर, अदायें किसी फिल्मी हीरो जैसी थीं,पिताजी के पास बैठी बैठी मैं उसे कई बार देख चुकी थी,पर मन है की भर ही नहीं रहा था,
. उसने भी मुझे देखा था, वह क्या सोच रहा था यह तो मैं नहीं जान सकी, लेकिन मुझसे उसकी नज़रै दो ही बार टकराई, वह कुछ ऐसे पेश आ रहा था मनो मेरे रूप पर मुग्ध नहीं हुआ हो, लेकिन मुझे विश्वाश था की मुझे देख कर मेरी समीपता पाने की लालशा ना जागे ऐसा हो ही नहीं सकता, मुझे भी वही एक ऐसा आकर्षक युवक नज़र आया था की मैं उसकी समीपता पाने को बेताब हो उठी, मेरा काम हो गया तो मजबूरन मुझे ऑफिस से बाहर निकलना पड़ा, उस युवक के लिये मेरे दिल मैं अजीब हलचल सी मच गई थी, हालांकि मै जानती थी की उस युवक की पत्नी बननें के लिए मेरे मां बाप को दहेज़ का प्रबंध करना पड़ेगा, जोकि असम्भव था,फीर भी मैने उम्मीद नहीं छोड़ी– “आखिर मेरा रूप क्या कम दहेज़ था,”
मन मैं ठान लिया की उस युवक का दिल जीतना है, तरकीबें सोचने लगी की उससे मुलाकातें कैसे की जाएं, चार दिन गए गुजर गए, उससे मिलने की बेताबी बढ़ गई थी, तरीका यही सोच पाई की पिताजी से ही मिलने के बहाने ऑफिस जाना होगा,
. उसी शाम पिताजी ने घर आकर मम्मी से मेरी शादी की चर्चा की,मेरे कान मैं भनक पड़ गई, “मम्मी मैं ऐरे गैरे से शादी नहीं करुँगी, जैसे दीदी ने किया है,”
मम्मी ने बताया “अरे तेरी तो किश्मत चमक गई है, लड़का बहूत सुंदर और होनहार है, तुझे उसने ऑफिस मैं देखा था,घर जा कर फरमाइश रख दी, उसके पिता आज ऑफिस मैं आये थे, तेरे पापा से बात कर गएँ हैं लड़के को तूँ बहुत पसंद आई है”. . “ऑफिस मैं”? कौन लड़का है पापा?. . “वही जो मेरी बगल मैं बैठा था”.
मै समझ गई वो उसी लड़के की बात कर रहे थे, जीस पर मेरा दिल फिदा हो उठा था,फीर भी अनजान बन कर पुछा “मैने तो ध्यान नहीं दीया, मैं ऑफिस मैं आ जाऊँ आप मुझे देखा देंगे?’
“अरी ऑफिस जाने की क्या जरुरत है,संडे को वे लोग यहीं आ रहे हैं सगाई के लिये” मम्मी बोली
. “लो बुला भी लिया” मैने कहा “अगर मुझे पसंद नहीं आया तो मैं अंगुठी नहीं पहनूंगी , बैरंग जाना पड़ेगा बताये देती हूँ,” मैं आधुनिक बन चुकी हूँ, इसलिए मम्मी पापा से किसी भी विषय पर खुल कर बातें कर लेती हूँ, वे मेरे स्वभाव से भली भांति परिचित हैं,
. मैने पुछा “दहेज़ कहाँ से आएगा मम्मी?’. . मम्मी ने कहा “इस मामले मे ही तो तेरी किश्मत अच्छी है, वे लोग दहेज़ मैं बस केवल मेरी लाडली बिटिया मांग रहे हैं, अभी थोडे ही दिनों पहले तो नौकरी पर लगा है,अच्छा कमाता है,अछे ढंग से रहता है, तेरे लायक हीरो जैसा है, तुजे भी वो पसंद आएगा, उसका नाम साहिल है,”
. सन्डे को साहिल अपने मां बाप और तीन-चार रिश्तेदारों के साथ मेरे घर आया,वही लड़का था, मेरे सपनों का राजकुमार जिसकी समीपता पाने के लिए मैं बेताब हो उठी थी, मम्मी पापा के बहूत अनुरोध करने पर उस दिन मैने जींस शर्ट त्याग कर सूट पहन लिया था. . साहिल को तो मैं पसंद थी ही, उसके परिवार के लोगों ने भी मेरी सुन्दरता की दाद दी, सगाई की रश्म खुशी के माहौल मैं संपन्न हो गई,खुशी के मारे मैं फूली नहीं समा रही थी, जिसे मैने जीवन साथी के रूप मैं चुना वह खुद भी मेरे रूप सौन्दर्य पर मुग्ध था,
. जीवन साथी के रूप मैं जैसा लड़का चाहती थी साहिल उससे भी दो कदम आगे था, सगाई हो जाने के बाद मैं अपने भावी जीवन के प्रति संतुष्ट हो गई थी,
. पिताजी के ऑफिस का फ़ोन नंबर मुझे मालूम था, फिर भी मैने उनसे पूछ लिया था, “पापा, साहिल का फोन नंबर क्या है”, पिताजी ने अपना ही नंबर बता दिया
. . मैने जब फोन किया तो पापाजी ने ही फोन उठाया “हेल्लो, पापाजी, जरा साहिल को फोन दीजिये,”
जल्दी ही साहिल की आवाज सुनाई पड़ी, “हेल्लो, साहिल स्पीकिंग.
”
मैने कहा “मेरी आवाज आपके लिए नई है, फिर भी पहचानिये मैं कौन बोल रही हूँ,”
स्रोत:इंटरनेट