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Mere Bhole Bapu Seduction Sex Story 2

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रात को सोते वक़्त मुझे लगा कोई मेरे स्तन्नो (ब्रेस्ट) पर हाथ फेर रहा है.
फिर धीरे धीरे वो हाथ मेरे स्तन्नो को दबाने लगे.
मुझे भी मज़ा आने लगा.
फिर वो हाथ मेरे टाँगों (लेग्स) के बीच में रब करने लगे, मुझे लगा कि यह मेरे बापू ही हैं.
मैं उनकी छाति पर हाथ फेरने लगी और उनकी लूँगी उतारने लगी.
उन्होने मेरी सलवार निकाल दी.
फिर मेरी कछि (पैंटी) .
और मेरी चूत को जैसे ही उन्होने किस किया .
मेरी आँख खुल गयी.
देखा तो यह मेरा सपना था.
बापू तो एक तरफ सो रहे थे.
लेकिन मेरी टाँगों के बीच में सच में आग लगी हुई थी.
क्या एक बेटी अपने बाप से सेक्स का सपना भी देख सकती है ? एक तरफ तो मुझे गिल्टी फील हो रही थी तो दूसरी तरफ मुझे मज़ा भी आ रहा था.
एक तो मेरा महिमा का साथ छुट गया था और अब इस गावं के माहॉल में मेरा मन नहीं लग रहा था.
लेकिन इंसान निराशा में भी कोई न कोई आशा की किरण ढून्ढ लेता है और इस घर में जहाँ केवल मा और बापू थे मुझे वह आशा की किरण बापू में दिखाई पादने लगी.
पता नहीं क्यों मम्मी मुझे सौत लगने लगी.
दूसरे दिन फिर में बापू का खाना लेके खेत पहून्ची.
बापू : ले आई खाना.
 मैं : हां बापू, चलो काम छ्चोड़ो और पहले खा लो बापू खाने लगे.
मैं : बापू आपकी शहर में मुझे कितनी याद आ रहे थी और आप हो की मुझे पहले की तरह प्यार ही नहीं करते हो.
बापू : बेटी याद तो हूमें भी बहुत आती है तुम्हारी.
तुम शहर क्या चली गयी मेरा तो मन ही नहीं लग रहा था.
अब तक बापू खाना खा चुके थे.
बापू खड़े हुए तो मैं बापू के गले से लिपट गयी.
मैं : बापू तुम्हारे बिना मुझे शहर में कुछ भी अच्च्छा नहीं लग रहा था.
यह कहते कहते मैं बापू की खुली छाति से अपनी संतरे सी चूचियाँ रगड़ने लगी.
बापू : बेटी मेरे पसीने से तेरे कपड़े कहराब हो जाएँगे मैं बापू से और कस के लिपट गयी और हल्के हल्के अपने ब्रेस्ट बापू की चेस्ट से रगड़ने लगी मैं : बापू अगर मुझे आपकी बहुत याद आए तो मैं क्या किया करूँ ? इस रगदाई में मुझे बहुत मज़ा आ रहा था.
बापू क्या समझते.
वो बहुत भोले थे बापू : जब भी तुम्हे बहुत याद आए तो यहाँ खेत में आ जाया करो.
अब मैं बापू से अलग हुई लेकिन अपने हाथ मैने बापू की चेस्ट पर फेरने लगी.
फिर मैं बापू से इजाज़त लेकर घर को चल दी.
मेरे प्यारे बाबुल मुझे सच्च में बहुत प्यार करते थे पर यह प्यार वो प्यार नहीं था जो मैं बापू से चाहती थी.
मैने फ़ैसला कर लिया कि मेरी प्यास को मेरे बापू ही बुझाएँगे.
उस रात मैं सो नहीं सकी.
महिमा के साथ कंप्यूटर पर जो वीडियोज देखे थे उनके सीन मेरी आँखों के आगे घूमने लगे.
बापू मुझे सॅपनों का राजकुमार लगने लगा.
दूसरे दिन जब बापू खेत पर चले गये तो पल पल मेरे लिए भारी होने लगा.
मैं बात देख रही थी कि कब खेत मैं खाना पाहूंचाने का समय आए और मैं अपने प्यारे बाबुल के पास पहून्च जाऊं.
इन दिनों खेत की फसल मेरी हाइट से ऊँची हो गयी थी इसलिए कोई खेत में आसानी से दिखता नहीं था.
मैने सोचा यह भी तो अच्छा ही है.
मैं : बापू.
मैं आ गयी मैं बापू से जाकर लिपट गयी.
और हां, बापू सिर्फ़ लूँगी में थे.
बापू : अर्रे बेटी, तू कब आई मैं : अभी अभी, मैं अपने ब्रेस्ट बापू की चेस्ट से रगड़ने लगी.
मज़ा आ रहा था.
बापू : रज्जो तुम तो कुछ ज़्यादा ही उदास रहने लगी हो मैने सोचा सब कुछ अभी करने से काम बिगड़ सकता है.
आख़िर एक बाप अपनी बेटी को इतनी आसानी से नही चोदेगा.
मुझे अपने बापू के डंडे को अपनी चूत की तरफ धीरे धीरे आकर्षित करना होगा.
मुझे पता था कि अगर मैं एक दम से ओपन हो गयी तो बात बिगड़ सकती है.
मैं चाहती थी के बापू खुद ही बेबुस हो जाए और उन्हे लगे कि इस काम के वो खुद भी रेस्पॉन्सिबल हैं.
मैने सोचा सारा काम कल से शुरू किया जाए.
रात को हम बाप-बेटी एक साथ तो सोए लेकिन मैने कुछ नहीं किया.
और बापू ने क्या करना था, उनके लिए तो मैं बेटी के अलावा और कुछ ना थी.
मैं रात को भी वही पुराने सलवार-कमीज़ में सोई.
अगला दिन मेरे लिए आशा की नयी किरण लिए हुए उगा.
मेरे मामा के गावं का एक आदमी सुबह ही घर पहून्च गया था.
रात में मेरे नाना की अचानक तबीयत बहुत खराब हो गयी और मा तुरंत उस आदमी के साथ मेरे नाना के घर जाने वाली थी.
सुबेह मैने ही सब के लिए नाश्ता बनाया.
नास्ता करते ही मा तो उस आदमी के साथ मेरे मामा के गावं चली गयी.
मैं : बापू मैं दोप-हर को खेत पर रोटी ले आऊँगी.
बापू : अच्छा.
बापू के जाने के बाद मैं नहाई और अपना शहर में सिलवाया हुआ टाइट , डीप-कट सूट पहना.
दोप-हर हुई तो बापू का खाना खेत पर लेकर चल्दि.
मैं तो एग्ज़ाइट्मेंट से मरी जेया रही थी.
मेरे डीप-कट कमीज़ में से मेरे उभार (ब्रेस्ट) काफ़ी एक्सपोज़्ड थे.
बटन खोलने की देर थी की उभार सॉफ दिखते.
ब्रा तो आज मैने पहनी ही नहीं थी.
मैं : बापू बापू : ले आई रोटी मेरा सूट फ्लोरोस्सेंट ग्रीन कलर का था.
जब बापू ने मुझे देखा तो वो थोड़े हैरान से हुए.
आख़िर अपनी बेटी के उभारों की झलक पहली बार मिली थी.
मैं : चलो पहले खा लो बापू : तूने खा लिया ? मैं : मुझे अभी भूक नहीं है बापू रोटी खाने लगे.
मैं : बापू, आपने मेरा सूट नहीं देखा बापू : हां, रंग अच्छा है.
पर क्या यह थोड़ा टाइट और छ्होटा नहीं है.
मैं : छ्होटा.
कहाँ से ? बापू : सामने से.
मैं : सामने से ? कहाँ सामने से ? बापू : सामने से.
मेरा मतलब है छाति से.
मैं : ओह छाति से, नहीं तो, यह तो शहर में आम है.
बापू : क्या शहर में तुम्हारी उम्र की छ्हॉकरियाँ ऐसे ही सूट पहनती है? मैं : सब ऐसे पहनते हैं.
बल्कि यह तो कुछ भी नहीं.
बापू : कोई मुझे बता रहा था कि शहर का माहौल ऐसा ही है मैं : हां वो तो है.
लेकिन मुझे तो अपने पर कंट्रोल है बापू : अच्छी बात है बेटी.
तुझे अपने आप को ऐसे माहौल से बच के रहना चाहिए बापू ने रोटी खा ली तो मैं घर जाने के लिए चली, दो तीन कदम पर ही मैने पैर (फुट) मुड़ने (स्प्रेन) का बहाना किया और गिर गयी.
मैं : ओह.
बापू.
बापू भागते हुए आए बापू : क्या हुआ बेटी ? मैं : बापू.
पैर मूड (स्प्रेन) गया.
बहुत दर्द हो रहा है बापू ने मेरा सॅंडल निकाला और देखने लगे बापू : कहाँ से मुड़ा है.
कहाँ दर्द हो रहा है ? मैं : ऊ.
बापू.
बहुत दर्द हो रहा है | बापू : चल घर चल.
कोई दावा लगा ले.
चल बेटी खड़ी हो मैं जैसे ही खड़ी हो कर थोड़ा चलने की कोशिश की तो फिरसे गिर गयी बापू : अर्रे, क्या हुआ बेटी.
चला नहीं जा रहा मैं : नहीं बापू.
चलने में तो और भी दुख़्ता है बापू : बेटी, थोड़ी कोशिश कर, घर जा कर दावा लगा कर ही दर्द ख़तम होगा, घर तो जाना ही है, हेना.
मैं फिरसे उठी , थोड़ा चली पर फिर गिर पड़ी मैं : नहीं बापू, मुझसे बिल्कुल नहीं चला जा रहा बापू : फिर तो तुझे उठा के ही ले जाना पड़ेगा यही तो मैं चाहती थी.
बापू मुझे उठाएं.
उनका एक हाथ मेरी टाँगों के नीचे और दूसरा हाथ मेरी पीठ के नीचे और मैं उनके नंगे जिस्म से चिपकी हुई.
जब बापू मुझे उठा रहे थे तो मैने जल्दी से अपने सूट के सामने के बटन खोल दिए और मेरे आधे से ज़्यादा उभार बाहर आ गये.
अब मैं बापू की गोद में थी और मेरी छाति खुला दरबार बनी हुई थी.
मेरे बेचारे भोले बापू को क्या मालूम की उनकी बेटी उनको चुदाई के लिए सेड्युस करने में लगी हुई है.
मैं तो ये सोच के गीली हो रही हूँ की उनको पता चलेगा तब कितना मज़ा आएगा.
इस seduction sex story का अगला भाग जल्द ही..
स्रोत:इंटरनेट