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Mere Bhole Bapu Seduction Sex Story

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गाँव में जब लड़की जवान होती है तो उसकी इच्छाएं तो शहरी लड़कियों जितनी ही होती है पर आज़ादी नहीं होती.
ऐसे में बेचारियों को घर में ही केला ढूंढना पड़ता है, भले वो उसके बापू का ही क्यूँ न हो.
एक जबरदस्त seduction sex story पेश है.. के अन्य भाग-. पार्ट 1. पार्ट 2. पार्ट 3. मैं अपने मा बापू की प्यारी रजनी, देखते देखते 16 वें बसंत में आ गयी.
मा तो हर काम में मुझे डान्टती रहती थी पर बापू बहुत प्यार करता था.
बात बात में मेरी प्यारी बेटी मेरी रज्जो कहते थकता न था.
मैं अपने मा-बाप की अकेली औलाद हूँ.
हम गावं में रहते थे.
मेरे बापू खेती बाड़ी करते हैं | बापू तो अब तक मुझे बच्ची ही समझता है.
जब की मेरी छाती के अमरूद बड़े होने लगे और मेरी चूत के इरद गिरद काफ़ी बाल उग आए.
आज से करीब साल भर पहले एक रात अचानक मेरी चूत से ढेर सारा खून बाहर आया था और मेरी पैंटी खून से तर बतर हो गयी थी तो मैं तो घबरा कर रोने लगी और रोते रोते मा के पास पाहूंची थी.
कुछ शर्माते हुए जब मा को पूरी बात बताई तो मा ने मुझे कई हिदायते दी.
मा ने अपना सॅनिटरी नॅपकिन दिया था.
अब मा मेरे चलने उठने और घर में फुदकते रहने पर डान्टने लगी.
जब मैं छोटी थी तो बापू ने मुझे गावं के स्कूल में डाल दिया.
वो स्कूल 10th तक था.
अभी एक महीने पहले ही मैने दसवीं की परीक्षा दी है पर रिज़ल्ट आने में देर है.
मैं आगे पढ़ना चाह रही थी पर मा ने शहर जा के पढ़ने के लिए साफ मना कर दिया.
मैं बापू के सामने बहुत रोई गिडगिड़ाई पर मा के आगे बापू की भी नहीं चलती थी.
बापू ज़्यादा पढ़े-लिखे नहीं हैं इसलिए उन्होने मुझे कहा था कि पढ़ाई के मामले में मैं जैसे ठीक समझू करलूँ.
इसी बीच दो दिन के लिए मेरे शहर वाले चाचाजी गावं आए.
चाचा की मेरी हम उम्र एक लड़की जिसका नाम महिमा और एक लड़का था जो कि मुझसे 5 साल छ्होटा था.
घर में और बातों के साथ मेरी शहर में पढ़ाई की भी बात चली और चाचा ने कहा भी था कि दोनों बहनें यानी कि मैं और महिमा साथ साथ कॉलेज चली जाया करेगी पर मा ने बात टाल दी.
मैं आगे पढ़ना चाह रही थी बापू भी राज़ी था पर हम दोनों की मा के आगे न चली.
मुझे काफ़ी मायूस देख चाचा ने कहा कि कुछ दिन इसे मेरे साथ शहर भेज दो, महिमा के साथ इसका बहुत मन लग जाएगा और मैं चाचा के साथ शहर चली आई.
शहर आ कर मैं तो हकि-बकी रह गयी.
शहर की लड़कियों के कपड़े देख कर मुझे लगा कि मुझे वापस गावं चले जाना चाहिए.
कहीं मैं शहर के माहौल में बिगड़ ना जाऊं.
हमारे गावं में लड़कियाँ सिर्फ़ सलवार सूट ही पेहेन्ती थी और वो भी काफ़ी लूज.
शहर में तो किसी लड़की को लूज का मतलब ही नहीं पता था.
जिसे देखो टाइट जीन्स, टाइट टी-शर्ट, स्लीव्ले शर्ट, स्कर्ट, और अगर सलवार कमीज़ तो वो भी बहुत टाइट.
महिमा मुझ से बहुत ही मॉडर्न थी पर हम उम्र होने के कारण हम दोनों बहुत जल्द घुल मिल गये.
रात में मैं और महिमा साथ साथ सोते.
कुछ ही दिनों में हम पक्की सहेलियाँ बन गयी.
शहर का महॉल, मेरी नादान उमारिया और महिमा के साथ ने मुझे जल्द ही मॉडर्न बना दिया.
महिमा के पास कंप्यूटर भी था.
रात में अब महिमा मुझे वेबसाइट के बारे में बताने लगी | इन्टरनेट पर My Hindi Sex Stories लिख कर सर्च करने पर सबसे पहले यही वेबसाइट दिखेगी जो की गूगल का एक हिन्दी की कहानियों के लिए फेमस ब्लॉग है उसकी. वह मेंबर थी.
की कहानियाँ पढ़ के तो में हक्की बक्की रह गयी.
मुझे विश्वास नहीं हो रहा था कि हक़ीक़त में कुछ ऐसा भी हो सकता है क्या.
फिर एक दिन महिमा ने एक दूसरी वेबसाइट पर मुझे कुछ और कहानियां दिखाई.
मज़े की बात ये थी कि इन ब्लोग्स पर कोई भी कहानी लिख कर भेज सकता है |. यह सब देख कर मेरी हालत खराब हो गयी.
ऐसी फिल्म रोज़ आती थी और मैं रोज़ ही देखती थी.
मैने नोटीस किया की यह सब देखने में मुझे मज़ा आता है और सोचने लगी कि असली में सेक्स करने में कितना मज़ा आता होगा.
अब मुझे पता चला कि शहर की लड़कियाँ एरॉटिक कपड़े क्यों पहनती हैं.
असल में उन्हे सेक्स में मज़ा आता है और वो उससे बुरा नहीं मानती.
इसी बीच मैने महिमा के साथ बाज़ार जाके काई नये कपड़े सिलवाए.
मैने कमीज़ को टाइट सिलवाया और सलवार को भी.
मैने कमीज़ को काफ़ी डीप-कट सिलवाया और सामने कुछ बटन रखवाए.
फिर मैने एक शॉप पर जाकर एक स्कर्ट , टाइट और छ्होटा टॉप और एक मॅक्सी (फुल्ली कवर्ड नाइटी) ली.
महिमा के साथ ने मुझे सेक्स के रंग में भी रंग दिया.
के ब्लॉग की वासनात्मक कहानियाँ पढ़के तो में सेक्स के बारे में काफ़ी कुछ जान गयी थी.
रात में मैं और महिमा एक दूसरे के जवान होते अंगों से खेलने लगे.
फिर एक दिन मैं गावं वापस आ गयी, हालाँकि महिमा का साथ छोड़ते वक़्त मेरी आँखों में आँसू आ गये |  मा और बापू मुझे देख बहुत खुस हुए.
बापू ने कुछ शहर का हाल चाल पूछा और फिर खेत में काम करने निकल पड़े.
मा कुछ देर बाद रसोई में चली गयी.
मैने मा के साथ रसोई में ही आ गयी और मा को शहर की बातें बताने लगी.
लगभग 2 घन्टे बाद मा ने बापू का खाना एक पोट्ली में बाँधा और बोली की मैं खेत जा रही हूँ.
मैं : लाओ मम्मी, मैं दे आती हूँ, बहुत दीनो से अपना खेत भी नहीं देखी, खेतों की भी बहुत याद आती है.
मम्मी : ठीक है, तू ही दे आ, पहले भी तो तू ही जाती थी मैं बापू का रोटी का टिफिन लेकर खेत में चल्दि.
बापू खेत में सिर्फ़ लूँगी पहनते थे.
बापू को मैने पहेले भी ऐसे देखा था लेकिन आज पता नहीं मुझे अंदर से कुछ हो रहा था.
बापू की अच्छी- ख़ासी मसल्स थी और चेस्ट चौड़ी.
बापू का चेहरा मासूम था.
बापू ने लूँगी अपनी नेवेल के नीचे बाँधी हुई थी और उनका पूरा बदन पसीने से भरा था.
बापू ज़मीन में फावड़ा(टूल टू डिग ग्राउंड) चला रहे थे.
बापू ने मुझे देखते ही कहा, अर्रे रज्जो, तू.
अपनी मम्मी को ही आने देती, तू सफ़र करके आई है, थक गयी होगी.
मैं : नहीं तो फिर बापू रोटी खाने लगे.
मैं बापू के बदन को देख रही थी.
पहली बार मुझे एहसास हुआ कि मेरे बापू कितने मस्क्युलर हैं, कितनी चौड़ी चेस्ट है और चेस्ट पे बाल कितने अच्छे लगते हैं और नेवेल भी प्यारी है.
मैं सोचने लगी यह मुझे क्या हो गया है, भला कोई बेटी अपने बापू को इस आंगल से देखती है, पर क्या करूँ, कंट्रोल नहीं होता.
जब बापू रोटी खा चुके तो मैं खेत से वापस आते वक़्त यह ही सोचती रही कि यह मुझे क्या हो गया है, मेरा दिल कुछ करना चाहता, पर क्या करना चाहता है मैं यह ना समझ पाई.
रात को हम लोग ज़मीन पर ही चादर बिछा कर सोते थे.
मेरी आँखों के सामने बार बार बापू की बॉडी आ रही थी.
मैं बापू और मम्मी के बीच सोती थी, अभी मैं उनके लिए बची थी.

स्रोत:इंटरनेट