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Mere Lesbian Jeevan Ki Shuruat 2

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चारू ने मुझे थोड़ी देर के लिए अलग किया और वह दरवाजे की तरफ भागी.
उसने दरवाजे की कुण्डी अच्छी तरह से बंद कर दी और फिर भाग के मेरे पास आते हुए. मुझे जोर से अपनी बाहों में भीच लिया .
मैं उसे देखती ही रही ….. मेरी समझ में कुछ भी नहीं आ रहा था .
मैं बोली ” ये क्या कर रही हो चारू….
दरवाजा क्यों बंद किया….. क्या हूवा है तुझे ” चारू ने बड़े प्यार से मेर तरफ देखा और बोली “आज मैं मेरी भोली बन्नो को ….
जवानी का अद्भुत खेल समझाने वाली हूँ .
” मैं : “जवानी का अद्भुत खेल? ये क्या है..” उसने फिर एक बार अपने होटो से मेरे होट बंद किये….. और मेरी उभरती हुयी छातियो को अपने हाथो से भीचना शुरू किया.
जैसे ही चारू के हाथ मेरी छातियो से लगे ….
मैंने एक अजीब सा रोमांच महसूस किया ….
एक नशा सा होने लगा था ….
चारू ने मेरे निचले होट पर अपनी जुबान फिराना शुरू किया ….
उसके हाथ अब मेरी टॉप के अन्दर जाने की कोशिश कर रहे थे ….. मुझे थोडा अजीब लगा पर ना जाने क्यों मैंने उसे रोकने का प्रयास भी नहीं किया.
जल्द ही उसके हाथ मेरी टॉप के अन्दर थे …….
लेकिन उन हाथो की मंझिल कुछ और थी…….
उसने फिर थोड़ी मेहनत कर के अपनी मंझिल को पा ही लिया….
उसने मेरी समिज के अन्दर हाथ डालते हुए मेरे नग्न स्तनों को छु लिया….
उफ़…… मेरी तो साँस जैसे थम गई…एक पल के लिए मुझे ऐसा लगा की ….. मैं हवा में हूँ….
मैं उड़ रही हूँ.
चारू ने मझे जमीं पर उतरने का मौका ही नहीं दिया , और वो मेरे स्तनों को जोर से दबाने लगी… दोस्तों मेरी जिन्दगी का पहेला स्तन मर्दन हो रहा था.
एक अजीब सा …मीठा सा दर्द महसूस कर रही थी मैं….. मैंने आज तक ऐसा कभी अनुभव ही नहीं किया था .
चारू ने तो जैसे मुझे पागल करने की ठान ली थी , उसने मेरे स्तानाग्रो को चुटकी में भर कर उमेठा ….. स्स स्स स्स स्स स्स…….. हाय मेरी तो जान ही निकल गई …… मैं चीखना चाहती थी…….
मगर चीख नहीं सकती थी ….
क्योंकि मेरे होट तो चारू ने अपने होटो से बंद किये थे.
पर हुआ ये के मेरा मुह थोडा सा खुल गया …….
चारू ने इसी मौके का फायदा लेते हूए अपनी जीभ को मेरे होटो से अन्दर की और सरका दिया ….
अब उसकी जीभ मैं अपने जीभ से टकराती महसूस कर रही थी…….
मुझे एक अजीब सा मजा आ रहा था …… मैंने अपने जीभ से चारू की जीभ को धकेलना चाहा…….
मेरी इस कोशिश में मेरी जीभ चारू के मुह में चली गई …….. अब चारू मेरी जीभ को अपने मुह में लेकर चूस रही थी ….. मेरे निप्पल अब पूरी तरह से कठोर हो गए थे .
चारू का दबाना, उमेठना और मेरे होटो को चूसना जारी था और मुझे पूरी तरह से पागल कर रहा था.
न जाने कितनी देर तक हम वैसे ही रहे …… अचानक चारू ने चुम्बन तोडा और अपने हाथ खीच कर अलग खड़ी हो गई .
जैसे उसने मुझे आसमान से उठाकर जमीं पर पटक दिया. मैं चारू की तरफ असंजस भरी नजरो से देखने लगी.
चारू मंद मंद मुस्कुरा रही थी .
मेरी कुछ समझ में नहीं आ रहा था .
चारू धीमे कदमो से चलते हुए मेरे पास आई , मेरी पीठ सहलाते हूए मुजे पलंग की ओर ले गयी.
उसने मेरे कंधे पकड़कर मुझे निचे बिठाया.
मैं एक नयी नवेली दुल्हन की तरह शर्म से लाल हो गई.
चारू ने धीरे से पुछा “काम्या मेरी जान ….. कैसा लगा?” मैं तो शर्म से मरी जा रही थी , मैंने अपना चेहरा चारू की छातियो में छुपाना चाहा.
उसने फिर से मेरा चेहरा हाथो में लेकर एक चुम्बन जड़ दिया और फिर से पुछा. “मेरी भोली रानी ….
कैसा लगा यह खेल?” मैंने मुस्कुराकर निचे देखा.
चारू : ” देखो काम्या , अगर तुम जवानी का यह अद्भुत खेल सीखना चाहती हो तो शर्मना छोडो और बताओ की तुम्हे ये सब कैसा लगा?” मैं: “क्या कैसा लगा?”. चारू : “ओह , तो तूमको अच्छा नहीं लगा …… ठीक है मैं चलती हूँ अपने घर ….
” मैं घबरा गयी ….
मैंने उसका हाथ पकड़ कर उसे जबरदस्ती निचे बैठाते बोला “चारू मैंने ऐसा तो नहीं बोला यार” उसने फिर से मेरा चेहरा पकड़कर एक जोरदार चुम्बन जड़ दिया और बोली. “तो तुम्हे जवानी का अद्भुत खेल खेलना है ?”. जवाब मे इस बार मैंने खुद को समर्पित करते हूए चारू के होटो पर अपने होट रख दिए.
चारू ने ख़ुशी के मारे मुझे अपने सिने से लगाया और बोली. ” चलो मेरी जान अब इस खेल की शुरुवात करते है ”. चारू ने बतया “देखो काम्या इस खेल के कुछ नियम है उनका पालन कठोरता से करना. १ मेरी सभी बाते बिना हिचक माननी होगी. २ कोई भी शंका अभी नहीं पूछनी (बाद मे कोई भी शंका बाकि नहीं रहेगी). मैंने कहा “मुझे तुम्हारी हर शर्त काबुल है चारू ….
लेकिन जल्दी शुरू करो ” चारू ने हसते हुए मेरे निप्पल को उमेठा …….
स्स्स्सस्स्स्स …… हाय मेरी तो जान ही निकल गयी .
चारू ने मेरी टॉप को निचे से पकड़ा और उसे खीचकर मेरे सर से निकाल दिया.
मैं सिर्फ समीज पहनकर बैठी थी.
दोस्तों इस के पहले मैं किसी के सामने सिर्फ समीज में नहीं गयी.
मुझे शर्म आ रही थी, मैंने हाथो से अपनी छातियो को ढकना चाहा पर चारू ने मेरे हाथो को पकड़ कर मन कर दिया.
चारू बड़े प्यार से मेरे रूप को देख रही थी.
मैंने शर्मा के नजरे नीची कर ली .
चारू ने फिर से मेरी ठोड़ी पकड़कर मेरा चेहरा ऊपर किया और बोली. “मेरी जान शर्मना छोडो और मेरी आंखो मे आँखे डाल कर देखो ”. मैंने उसकी आग्या का पालन करते हूए उसी की आँखों में देखा चारू मेरी तरफ तारीफ भरी नजरे से देख रही थी .
उसने मेरी समीज को निचे से पकड़ा , मैं उसका इरादा भाप गयी, और उसके हाथ पकड़ लिये.
उसने भी जोर लगा कर समीज को ऊपर की तरफ खीचना चालू किया समीज को ऊपर खीचते वो बोली. ” मेरी जान तुम मेरी सारी शर्ते काबुल कर चुकी हो ….
अब ये शर्माने का नाटक छोड़ दो ” मैंने हार कर अपने हाथ ढीले छोड़ दिए.
चारू ने एक झटके में मेरी समीज को मेरे सर से निकल दिया.
अब मैं ऊपर से पूरी तरह नंगी थी.
मैंने देखा मेर संतरे जैसे स्तन कठोर हो गए थे मेरे गुलाबी निप्पल पूरी तरह फुल चुके थे. मैंने इसके पहले कभी अपने आपको भी इतना गौर से नहीं देखा था.
इधर चारू अपनी आँखे बड़ी-बड़ी करके मेरी सौन्दर्य का पान कर रही थी.
मेरी नजरे उससे मिली तो वह प्यार से मुस्कुरा दी .
फिर चारू ने एक पल में अपना भी टॉप निकल फेका.
उसने टॉप के निचे कुछ भी नहीं पहना था .
टॉप के निकलते ही उसके दो बड़े संतरे जैसे स्तन मेरी आँखों के सामने उछल पड़े.
मैं मंत्रमुग्ध सी उन दो संतरों को देखने लगी, मन ही मन मैं अपने और उसके स्तन की तुलना करने लगी .
चारू की रंगत सावली है जबकि मैं गोरी चट्टी , दोस्तों मेरा रंग दूध में हल्का केसर मिक्स करन के बाद होता है वैसा है .

स्रोत:इंटरनेट