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Mere Lesbian Jeevan Ki Shuruat

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दोस्तों, मैं आज My Hindi Sex Stories पर अपने पहले lesbian experience या यूँ कहूँ की पहले sex experience के बारे में बताने जा रही हूँ.. ये lesbian kahani लिखते लिखते मैं तो नीचे से पूरी गीली हो चुकी हूँ, आशा है आप पे ही उतना ही असर हो| तो अब आप मेरी lesbian kahani पढ़िए और कमेंट्स में बताइए की आपको कैसा लगा.. मेरा नाम काम्या है, मैं २५ साल की हूँ .
मैं और मेरा परिवार एक छोटे से कसबे में रहते थे.
मेरा परिवार बहोत ही छोटा है, जिसमे मेरे पिता, माँ और मेरा छोटा भाई और मैं ये चार ही लोग रहते थे.
मेरे दादाजी का देहांत मेरे बचपन में ही हो गया था.
मेरे पिता एक मेहनती किसान है.
हमारी फार्म सारे इलाके में जानी पहचानी है.
पिताजी एक पढ़े लिखे किसान है जो नए तरीके से खेती करने में विश्वास करते. है.
मेरी माँ एक मेहनती गृहिणी है, वो घर के साथ साथ खेती के कामो में भी हाथ बाटती हैं .
मेरा छोटा भाई मेरे से सिर्फ दो साल छोटा है.
मेरी ये कहानी वहा से शुरू होती है जब मेरा दसवी कक्षा. का नतीजा आया था .
मुझे पुरे ८५ प्रतिशत मार्क्स मिले थे, माँ पिताजी दोनों बहोत ही खुश थे.
मेरे गाँव में १० के बाद पढाई की सुविधा नहीं थी.
पिताजी चाहते थे की मैं खूब पढू, बहोत सोच विचार के बाद ये फैसला हुवा की मुझे मामाजी के यहाँ आगे की पढाई के लिए भेजा जाये.
मेरे मामाजी शहर में रहते थे.
मामाजी के शादी माँ से पहले हो चुकी थी पर मामाजी अभी तक बेऔलाद थे.
मामाजी और मामिजी दोनों मुझे और मेरे भाई से बेहद प्यार करते थे.
मैं पिताजी के साथ शहर आ गई , मेरे मामाजी का बहोत बड़ा मकान था, और रहने वाले सिर्फ दो लोग.
मामिजी ने कहा “अच्छा हुवा तुम यहाँ आ गई , अब हमारे घर में थोड़ी रौनक आएगी” मामीजी ने मेरे लए ऊपर वाला कमरा ठीक कर दिया.
ताकि मेरी पढाई में कोई डिस्टर्ब ना हो .
शुरुवात में कुछ दिनों तक मुझे घर की बहोत याद आती थी.
लेकिन फिर मै ये सोच के खुश होती थी की अगले साल मेरा भैया भी वही आने वाला है.
दोस्तों तब तक मै सेक्स से पूरी तरह से अपरिचित थी.
जबकि मुझमे कुछ जिस्मानी तब्दीलिया आनी शुरू हो गई थी, जैसे मेरी छाती के उभार बड़े होने लगे थे, अब ये छोटे संतरे की तरह थे.
पर अब तक मै ब्रा नहीं पहेनती थी.
मैं अन्दर से समीज पहनती थी.
मेरी कांख में भी बाल उगने शुरू हो गए, और वैसे ही बाल मेरी योनी पर भी आने लगे थे.
मेरी माहवारी तो पिछले साल ही आना शुरू हुई थी.
पर माँ ने इस बारे में जादा कुछबताया नहीं था.
लेकिन शहर में आने के कुछ दिनों बाद मेरी सेक्स की जानकारी बढ़ने लगी.
मेरी क्लास में जो लडकिया थी उन सबकी छाती मुझसे काफी बड़ी लगती थी.
और वो लडकिया काफी फेशनेबल भी थी उनमे से एक लड़की थी चारू जो की मेरे घर से थोडा पास ही रहती थी, उससे मेरी अच्छी दोस्ती हो गयी.
चारू मेरे घर पढाई करने आने लगी, कभी कभार मै उसके घर जाती थी .
एक दिन जब चारू मेरे घर आई थी, हम उपर वाले कमरे में पढाई करने बैठे थे, मै कुर्सी पर और चारू टेबल से टिक कर बैठे थे .
अचानक मैं उठ के खड़ी हो गयी, और उसी समय चारू भी सीधी होने जा रही थी, परिणामवश हम दोनो जोरो से टकरा गई.
मेरी कोहनी चारू की छाती से जा टकराई … चारू : उई माँ …….. मर गई ….. मै: सॉरी चारू ….
बहोत लगा क्या चारू छाती से हाथ लगाये बैठ गई मैंने उसे फिर पूछा”बहोत दर्द हो रहा है. क्या? और मैंने उसकी छाती पर हाथ रखा, चारू ने पटक से मेरा हाथ अपने सिने पे दबाते हूए लाबी साँसे लेना शुरू किया .
मैंने सोचा की मालिश करने से उसे कुछ राहत मिलेंगी इसलिए मैंने धीरे से उसकी छाती को मसलना शुरू किया. अब चारू ने आपनी आँखे बंद कर ली थी और उसने मेरा दूसरा हाथ पकड के अपने दुसरे स्तन पर रख दिया , और मेरे हथो को उपर से ही दबाने लगी.
मैंने भी अनजाने में उसके स्तानो का मर्दन करना शुरू किया.
थोड़ी देर बाद मैंने रुकना चाहा, तो चारू बोली “प्लीज काम्या , रुक मत यार …… और जोरो से दबा ….
प्लीज़ ” और उसने अपना टॉप थोडा खिसका कर मेरे हाथो को अपनी टॉप के अन्दर खीचा, अन्दर समीज या ब्रा कुछ भी नहीं था, उसकी नंगी छतिया मेरे हाथो में थी .
मैं असमंजस में थोड़ी देर रुक गई चारू फिर बोली ” प्लीज़ यार काम्या …… दबा इनको ….
जोर से दबा दे इनको ” मैं फिर अपने काम में लग गई (दबाने के ) , दोस्तों अब मुजे भी अजीब सा मजा आने लगा था.
चारू तो अपनी आखें बंद करके पूरी मस्ती में झूम रही थी, मैंने महसूस किया की चारू के निप्पल एकदम कड़े होने लगे, उसने आँखे खोली तो उसकी आँखे गुलाबी लगने लगी , उसने एक झटके से मुझे अपनी और खीचा और मेरे होटो पे अपने होट रख कर पागलो की तरह चूमने लगी.
मैं कसमसाई, ताकत लगाकर मैंने उसे दूर धकेला मैं: ये क्या कर रही हो ….. चारू मुझे फिर से आमने पास खीचते हुए बोली “मेरी जान आजा मेरी प्यास बुझा दे , मेरे बदन में आग लगी है…… आजा मेरी जान” मै: “ये क्या पागलो जैसी हरकत कर रही हो चारू ….. छोडो मुझे….
” और मैंने उसे जबरदस्ती अपने से अलग किया .
चारू: प्लीज यार काम्या ….. प्लीज ….
फिर से दबा दे …… देख मैं कैसी जल रही हूँ….
मेरा बदन कैसे ताप रहा है……” इतना कह के उसने मेरा हाथ फिर से उसकी टॉप के अन्दर डाल दिया.
मैंने महसूस किया की उसका बदन भट्टी की तरह तप रहा था.
उसकी आँखे लाल हो गई थी.
घबराकर मैं बोली ” अरे तेरा बदन तो बहोत ज्यादा गरम लग रहा है….
बुखार आया क्या ?”. चारू : ” हा मेरी जान ….
ये जवानी का बुखार चढ़ा है मेरे पे ….
जल्दी से इसे ठंडा कर दे….
” और फिर से वो मेरे हाथो से उसकी छतिया दबाने लगी .
मैं: “चारू रुक मैं मामी से मांग के कुछ मेडिसिन लाती हूँ” मैंने फिर से अपने आप को छुडाने का असफल प्रयास किया.
चारू मेरे हाथ जबरदस्ती से भिचते हूए बोली ” हाय रे मेरी भोली डॉक्टर ….. मेरी मेडिसिन तो तेरे ही पास है” मैं: ” मैं समझी नहीं चारू….. ये तुम क्या बोल रही हो …….
” चारू: ” मैं सब समझाती हूँ मेरी भोली काम्या ….
तू बस इनको दबाती जा ……” मैंने हथियार डालते हुए उसके स्तनों को दबाना शुरू किया ……. मेरे लिए भी ये नया अनुभव था .
मुझे कुछ कुछ अच्छा भी लगने लगा था …..चारू ने फिर से मुझे आपने पास खीचा और मेरे होटो पे चुम्बन जड़ दिया .
चारू: ” क्या तुमने अभी तक ऐसा नहीं किया ?”. मैं :”ऐसा यानी ….. मै समझी नहीं ” चारू: ” मेरी भोली बन्नो ….. क्या आज तक तुमने किसी को चुम्मा नहीं दिया….. ” मैं: “छि ….
गन्दी कही की ……”
स्रोत:इंटरनेट