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Meri Biwi Priti Aur Roohi Bhabhi Bhabhi Ki Chudai 2

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मैंने कहा- “मैंने कहाँ छिपाया था, यहीं तो था तुम्हारे पास…” वो स्टूल से शराब की बोतल उठा उसपे सीधे मुँह लगाकर पीते हुए बोली- “मेरे पास आओ…”. मैं उनके नज़दीक चला गया और बोला “भाभी… आपको मैंने इतनी ज्यादा शराब पीते हुए पहले नहीं देखा। मुझे भी एक पैग दो ना…”. उन्होंने मेरा लण्ड पकड़ लिया और सहलाते हुए बोली- “देवर जी। आज तो बहुत ही खास दिन है। मैं बस मदहोश हो जाना चाहती हूँ पर तुझे नहीं दूँगी। मुझे पता है तू पहले से पीकर आया था। और तू मर्द है। थोड़ी सी भी. ज्यादा हो गयी तो तेरा ये बेहतरीन औज़ार ठंडा पड़ जायेगा…” फिर वो कहने लगी- “मैंने आज तक ऐसा औज़ार कभी नहीं देखा था। हर औरत अच्छा औज़ार पसंद करती है। मुझे तो तुम्हारा औज़ार बहुत पसंद आ गया है। आज मैं. तुमसे लग जाती हूँ। तुमसे चुदवाने में मुझे बहुत मज़ा आयेगा। लेकिन जैसे तुमने प्रीति के साथ किया था उस तरह मेरे साथ मत करना नहीं तो मुझे भी बहुत तकलीफ होगी और मेरे मुँह से भी चीख निकल जायेगी। प्रीति पास. के ही कमरे में है, इसका ख्याल रखना…” मैंने कहा- “अच्छा…”. थोड़ी देर तक रूही भाभी मेरा लण्ड सहलाती रही और शराब पीती रही। उसके बाद उन्होंने भी अपने कपड़े उतार दिये और एकदम नंगी हो गयी। रूही भाभी भी बहुत ही खूबसूरत थी। वो अपने सैंडल उतारने लगी तो मैंने उन्हें. रोका।. वो मुश्कुराते हुए बोली- “तो तू भी अपने भैया की तरह औरतों के ऊँची एंड़ी के सैंडल देखकर उत्तेजित होता है?”. मैं थोड़ा सा शरमाया।. तो वो बोली- “शमार्ता क्यों है। ज्यादातर मर्दों को ऊँची एंड़ी के सैंडल पहनी औरतें उत्तेजक लगती हैं। इसीलिये तो मैं हरदम ऊँची एंड़ी के सैंडल पहने रहती हूँ…” उसके बाद वो सैंडल पहने हुए ही बेड पर लेट गयी. और बोली- “अब थोड़ा सा तेल अपने लण्ड पर लगा लो और आ जाओ…”. मैंने कहा- “क्या भाभी, आपने तो भैया से बहुत बार चुदवाया है, आप मुझसे तेल लगाने को कह रही हैं। बिना तेल के ज्यादा मज़ा आयेगा…” वो बोली- “फिर देर किस बात की। आ जाओ…”. मैं रूही भाभी के पैरों के बीच आ गया।. रूही भाभी ने कहा- “आराम से घुसाना, जल्दी मत करना। जब मैं रोकूँगी तो रुक जाना…” मैंने कहा- “ठीक है…”. वो बोली- “चलो अब धीरे-धीरे अंदर घुसाओ…”. मैंने अपने लण्ड का सुपाड़ा रूही भाभी की चूत के मुँह पर रख दिया और धीरे-धीरे अपना लण्ड रूही भाभी की चूत में घुसाने लगा। जैसे ही मेरे लण्ड का सुपाड़ा रूही भाभी की चूत में घुसा तो उनके मुँह से आह निकल. गयी। उनकी चूत मुझे ज्यादा टाइट लग रही थी। मेरा लण्ड आसानी से घुस नहीं पा रहा था। मैं जोर लगाकर धीरे-धीरे अपना लण्ड रूही भाभी की चूत में घुसाने लगा। रूही भाभी आहें भरती रही। जब मेरा लण्ड पाँच इंच तक. घुस गया तो दर्द के मारे उनका बुरा हाल होने लगा लेकिन उन्होंने मुझे रोका नहीं। उन्होंने अपने होंठों को जोर से जकड़ लिया था। मैं जोर लगाता रहा।. जब मेरा लण्ड रूही भाभी की चूत में छः इंच तक घुस गया तो वो बोली- “अब रुक जाओ…”. मैं रुक गया तो वो बोली- “बहुत दर्द हो रहा है। अब बर्दाश्त करना मुश्किल है। कितना बाकी है अभी?”. मैंने कहा- “तीन इंच…”. वो बोली- “अब और ज्यादा अंदर मत घुसाना। धीरे-धीरे चुदाई करना शुरू कर दो…”. मैंने धीरे-धीरे रूही भाभी की चुदाई शुरू कर दी। उनकी चूत ने मेरे लण्ड को बुरी तरह से जकड़ रखा था। वो आहें भरती रही। मुझे भी खूब मज़ा आ रहा था। आज मैं किसी औरत को पहली बार चोद रहा था। पाँच मिनट की चुदाई. के बाद रूही भाभी झड़ गयी। उन्होंने बहुत दिनों से चुदवाया नहीं था इसलिये उनकी चूत से ढेर सारा जूस निकला। उनकी चूत और मेरा लण्ड एकदम गीले हो गये तो उन्होंने कहा- “अब धीरे-धीरे बाकी का भी घुसा दो…”. मैंने इस बार थोड़ा ज्यादा ही जोर लगा दिया तो वो अपने आपको रोक नहीं पायी। उनके मुँह से चीख निकल ही गयी लेकिन उन्होंने तुरंत ही खुद को संभाल लिया। मैंने इस बार एक धक्का लगा दिया तो वो दर्द के मारे. तड़पने लगी और बोली- “अब कितना बाकी है?”. मैंने कहा- “एक इंच…”. वो बोली- “अब चोदो मुझे, बाकी का चुदाई करते समय घुसा देना…” मैंने रूही भाभी की चुदाई शुरू कर दी। मुझे खूब मज़ा आ रहा था। रूही भाभी दर्द के मारे आहें भर रही थी। जैसे-जैसे समय गुजरता गया वो शाँत होती गयी। अब उन्हें भी मज़ा आने लगा था। तभी मैंने एक धक्का लगाकर. बाकी का लण्ड भी उनकी चूत में घुसा दिया।. मैंने रूही भाभी की चुदाई शुरू कर दी। मुझे खूब मज़ा आ रहा था। रूही भाभी दर्द के मारे आहें भर रही थी। जैसे-जैसे समय गुजरता गया वो शाँत होती गयी। अब उन्हें भी मज़ा आने लगा था। तभी मैंने एक धक्का लगाकर. बाकी का लण्ड भी उनकी चूत में घुसा दिया।. वो चीख उठी और बोली- “पूरा घुस गया?”. मैंने कहा- “हाँ…”. वो बोली- “अब जोर-जोर से चोदो। तुम तो गाँव में कुश्ती लड़ा करते थे न?”. मैंने कहा- “हाँ…”. वो बोली- “अब तुम मेरी चूत के साथ कुश्ती लड़ो। मेरी चूत को अपने लण्ड का दुश्मन समझ लो और मेरी चूत पर अपने लण्ड से खूब जोर-जोर से वार करो। फाड़ देना आज इसको…”. मैंने कहा- “अगर फाड़ दूँगा तो बाद में मज़ा कैसे आयेगा?”. वो बोली- “तुम इसका मतलब नहीं समझे। मैं सचमुच फाड़ने को थोड़े ही कह रही हूँ…”. मैंने बहुत ही जोर-जोर के धक्के लगाते हुए रूही भाभी को चोदना शुरू कर दिया। रूही भाभी तो बहुत ही सेक्सी निकलीं। वो हर धक्के के साथ अपने चूतड़ उछाल-उछालकर मुझसे चुदवा रही थी। पूरा बेड जोर-जोर से हिल रहा. था। कमरे में धपधप की आवाज़ हो रही थी। उनकी चूत से से भी चप-चप की आवाज़ निकल रही थी। मैं भी पूरे जोश में था और वो भी। पाँच मिनट की चुदाई के बाद वो फिर से झड़ गयी लेकिन मैं रुका नहीं। मैं खूब जोर-जोर के. धक्के लगाते हुए उनकी चुदाई कर रहा था। वो पूरी तरह से मस्त हो चुकी थी और अपनी चूचियों को अपने हाथों से मसल रही थी। थोड़ी देर की चुदाई के बाद मैं झड़ गया। रूही भाभी भी मेरे साथ ही साथ फिर से झड़ गयी।. मैंने अपना लण्ड उनकी चूत से बाहर निकाला तो मेरे लण्ड पर खून भी लगा हुआ था।. रूही भाभी ने कहा- “देख लिया तुमने अपने लण्ड की करतूत। इसने मुझ जैसी चुदी चुदाई औरत की चूत से भी खून निकाल दिया…” उन्होंने मेरे लण्ड को कपड़े से साफ कर दिया।. उसके बाद मैं उनके बगल में लेट गया। वो मेरे होंठों को चूमने लगी और बोली- “देवर जी, आज तो तुमने मुझे ऐसा मज़ा दिया है की मैं क्या बताऊँ। ऐसा मज़ा तो मुझे आज तक कभी नहीं मिला…” मैंने कहा- “भाभी। आप इतने नशे में हो। इसलिये इतनी तारीफ कर रही हो…”. भाभी बोलीं- “अरे मेरे बेवकूफ देवर जी, नशे में जरूर हूँ पर गलत नहीं कह रही। बल्कि नशे में तो मज़ा दोगुना हो गया…” मैंने फिर कहा- “मैं प्रीति का क्या करूँ?”. वो बोली- “मैंने तुम्हारे भैया से इतने सालों तक चुदवाया था। फिर भी मुझे तुम्हारा लण्ड अपनी चूत के अंदर लेने में बहुत तकलीफ हुई। प्रीति अभी बहुत छोटी है। जरा सोचो की उसे कितनी तकलीफ होती होगी…”.
स्रोत:इंटरनेट