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Meri Biwi Priti Aur Roohi Bhabhi Bhabhi Ki Chudai

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मेरी बीवी प्रीति के रोने पे रूही भाभी ने मेरा लंड देखा। मेरा जानदार औजार देख कर भाभी की भी नीयत डौल गयी। लग रहा था वो मुझसे चुदवाना छह रही थी। इस मस्त bhabhi ki chudai ki kahani का अगला भाग-. Hindi Sex Story के अन्य भाग-. पार्ट 1. पार्ट 2. पार्ट 3. पार्ट 4. मैं कमरे में आ गया और मैंने अपनी लुंगी उतार दी। मैंने प्रीति से अपनी साड़ी उतारने को कहा तो उसने इस बार खुद ही अपनी साड़ी उतार दी। साड़ी उतारने के बाद प्रीति खुद ही बेड पर सैंडल पहने हुए पेट के बल लेट. गयी। मैंने अपने लण्ड पर ढेर सारा तेल लगाया और उसके ऊपर आ गया। उसके बाद मैंने जैसे ही अपने लण्ड का सुपाड़ा उसकी गाण्ड के छेद पर रखा तो उसने अपना मुँह दबा लिया। उसके बाद मैंने थोड़ा सा जोर लगाया तो इस. बार वो ज्यादा जोर से नहीं चीखी।. मेरे लण्ड का सुपाड़ा उसकी गाण्ड में घुस गया। मैंने अपने लण्ड के सुपाड़े को उसकी गाण्ड में अंदर-बाहर करना शुरू कर दिया तो वो आहें भरने लगी। थोड़ी देर के बाद जैसे ही मैंने थोड़ा सा जोर लगाया तो उसने जोर. की आह भरी और मेरा लण्ड उसकी गाण्ड में दो इंच तक घुस गया। मैंने थोड़ा जोर और लगाया तो वो जोर-जोर से चिल्लाने और रोने लगी। मेरा लण्ड बहुत मोटा था ही। अब तक उसकी गाण्ड में तीन इंच ही घुस पाया था। मैं रुक. गया लेकिन वो दर्द के मारे अभी भी बहुत जोर-जोर से चिल्ला रही थी। मुझे गुस्सा आ गया तो मैंने जोर का एक धक्का लगा दिया। इस धक्के के साथ ही मेरा लण्ड उसकी गाण्ड में चार इंच तक घुस गया।. वो और ज्यादा जोर-जोर से चिल्लाने लगी- “दीदी, बचाओ मुझे। मैं मर जाऊँगी…” उसके चिल्लाने की आवाज़ सुन्कर रूही भाभी ने बाहर से पूछा- “अब क्या हुआ?”. वो रोते हुए कहने लगी- “दीदी, मुझे बचा लो नहीं तो मैं मर जाऊँगी…” रूही भाभी ने कहा- “अच्छा तुम दोनों बाहर आ जाओ…”. मैंने अपना लण्ड उसकी गाण्ड से बाहर निकाला और हट गया। मेरे लण्ड पर ढेर सारा खून लगा हुआ था। उसके बाद हम दोनों ने कपड़े पहने और बाहर आ गये। प्रीति ठीक से चल नहीं पा रही थी। मैं उसे सहारा देकर बाहर ले. आया।. बाहर आने के बाद रूही भाभी प्रीति को समझाने लगी- “देखो प्रीति अगर तुम ऐसे ही चिल्लाओगी तो काम कैसे बनेगा। हर औरत को पहली-पहली बार दर्द होता है और उसे उस दर्द को बर्दाश्त करना पड़ता है…”. प्रीति रो रो कर कहने लगी- “दीदी, मैंने अपने आपको संभालने की बहुत कोशिश की। लेकिन मैं दर्द को बर्दाश्त नहीं कर पायी, इसलिये मेरे मुँह से चीख निकल गयी। इनका औज़ार भी तो बहुत बड़ा है…” रूही भाभी ने कहा- “औज़ार तो सबका बड़ा होता है। लेकिन एक बार जब अंदर घुस जाता है फिर कभी भी बड़ा नहीं लगाता। उसके बाद हर औरत को मज़ा आता है और तुम्हें भी आयेगा…”. प्रीति बोली- “दीदी, मेरी बात पर विश्वास करो, इनका औज़ार बहुत बड़ा है। मैंने बहुत से आदमियों को पेशाब करते समय देखा है लेकिन इनके जैसा औज़ार मैंने आज तक कभी नहीं देखा। तुम चाहो तो खुद ही देख लो, तुम्हें मेरी बात पर विश्वास हो जायेगा…”. रूही भाभी के हाथ में शराब का भरा ग्लास था। उन्होंने एक घूँट पीते हुए मुझसे कहा- “जय, दिखा तो सही अपना औज़ार। जरा मैं भी तो देखूँ कि ये बार-बार क्यों तेरे औज़ार को बहुत बड़ा कह रही है…” मैंने कहा- “भाभी, मुझे शरम आती है…” रूही भाभी ने कहा- “मैं तो तेरी भाभी हूँ, मुझसे कैसी शरम… अपना औज़ार बाहर निकालकर दिखा मुझे। “ मैंने शरमाते हुए अपनी पैंट खोल दी। मेरा लण्ड पहले से ही खड़ा था। मेरा नौ इंच लंबा और खूब मोटा लण्ड फनफनाता हुआ बाहर आ गया। उसपर खून भी लगा हुआ था।. रूही भाभी ने जैसे ही मेरा लण्ड देखा तो उन्होंने अपना हाथ मुँह पर रख लिया और बोली- “बाप रे… तेरा औज़ार सचमुच बहुत ही बड़ा है। मैंने भी ऐसा औज़ार तो कभी देखा ही नहीं था। अब मेरी समझ में आया की प्रीति. क्यों इतना चिल्लाती है…”. मैंने देखा की रूही भाभी की आँखें जो पहले से नशे में लाल थीं, अब मेरे लण्ड को देखकर चमक उठी थीं। उन्हें भी जोश आने लगा था क्योंकी मेरा लण्ड देखने के बाद उन्होंने गटागट अपना ग्लास खाली किया और अपना एक हाथ अपनी चूत पर रख लिया था।. मैंने कहा- “भाभी, तुम ही बताओ मैं क्या करूँ। मैं अपना औज़ार छोटा तो नहीं कर सकता…” रूही भाभी ने प्रीति से कहा- “इसका औज़ार तो सच में बहुत बड़ा है। तुम्हें दर्द को बर्दाश्त करना ही पड़ेगा नहीं तो बड़ी बदनामी होगी…” रूही भाभी ने प्रीति को बहुत समझाया तो वो मान गयी।. रूही भाभी ने प्रीति से कहा- “अब तुम अपने कमरे में जाओ। मैं इसे समझा बुझाकर तुम्हारे पास भेज देती हूँ…”. प्रीति कमरे में चली गयी। रात के दो बज रहे थे। रूही भाभी ने फिर अपने ग्लास में शराब ले ली और दो घूँट पीकर मुश्कुराते हुए मुझसे कहने लगी- “देवर जी, तुम्हारा औज़ार तो वाकयी बहुत ही बड़ा है और शनदार भी। मैंने आज तक अपनी ज़िंदगी में ऐसा औज़ार कभी नहीं देखा था। मेरा मन इसे हाथ में पकड़कर देखने को कह रहा है, देख लूँ?” उनकी आवाज़ नशे में काँप रही थी। मैंने कहा- “भाभी, आप क्या कह रही हो? आज आपने बहुत ज्यादा पी ली है और आप नशे में हो…” वो बोली- “तुम्हारे भैया को गुजरे हुए एक साल हो गया। आखिर मैं भी तो औरत हूँ और जवान भी। मेरा मन भी कभी-कभी इधर-उधर होने लगाता है। तुम तो मेरे देवर हो। हर औरत अच्छे औज़ार को पसंद करती है। मुझे भी. तुम्हारा औज़ार बहुत ही अच्छा लग रहा है। अगर मैं तुमसे लग जाती हूँ तो मेरी भी इच्छा पूरी हो जायेगी और किसी को कुछ पता भी नहीं चलेगा…” इतना कहकर उन्होंने मेरा लण्ड पकड़ लिया और सहलाने लगी।. मैं भी आखिर मर्द ही था। मुझे रूही भाभी का लण्ड सहलाना बहुत अच्छा लगने लगा इसलिये मैं कुछ नहीं बोला।. थोड़ी देर तक मेरा लण्ड सहलाने के बाद वो बोली- “तुमने अभी तक सुहागरात का मज़ा भी नहीं लिया है और मैं समझती हूँ की तुम भी एकदम भूखे होगे। मेरी इच्छा पूरी करोगे?”. मैंने कहा- “अगर तुम कहती हो भला मैं कैसे इनकार कर सकता हूँ। आखिर मैं भी तो मर्द हूँ और तुम्हारे सिवा मेरा इस दुनिया में और कौन है…”. वो बोली- “फिर तुम यहीं रुको, मैं अभी आती हूँ…” इतना कहकर रूही भाभी प्रीति के पास चली गयी। मैंने देखा की वो काफी नशे में थीं और उनके कदम लड़खड़ा रहे थे। ऊँची एंड़ी के सैंडलों में उन्हें डगमगाते देखकर मेरे लण्ड में एक लहर सी दौड़ गयी। उन्होंने प्रीति से कहा- “अब तुम सो जाओ। रात बहुत हो चुकी. है। मैं जय को सब कुछ समझा दूँगी। उसके बाद मैं उसे सुबह तुम्हारे पास भेज दूँगी। मैं बाहर से दरवाजा बंद कर देती हूँ…”. प्रीति बोली- “ठीक है, दीदी…” रूही भाभी प्रीति के कमरे से बाहर आ गयी और उन्होंने प्रीति के कमरे का दरवाजा बाहर से बंद कर लिया। उसके बाद वो मुझे अपने कमरे में ले गयी। मेरे बदन पर कुछ भी नहीं था। लूँगी तो मैंने पहले ही उतार दी थी।. कमरे में पहुँचते ही रूही भाभी ने कहा- “देवर जी, तुमने अपना औज़ार इतने दिनों तक कहाँ छिपा रखा था। बड़ा ही प्यारा औज़ार है तुम्हारा…”
स्रोत:इंटरनेट