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Meri Biwi Priti Aur Roohi Bhabhi Hindi Desi Kahani

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रूही भाभी ने खुद चुदने के बाद प्रीति को भी मुझसे गांड मरवाने को तैयार कर लिया। प्रीति की गांड के बाद चूत की भी बारी है। रूही भाभी तो होगी ही रेफरी की तरह इस hindi desi kahani में.. Hindi Sex Story के अन्य भाग-. पार्ट 1. पार्ट 2. पार्ट 3. पार्ट 4. जब मेरा लण्ड प्रीति की गाण्ड में सात इंच तक घुस गया तो मैंने पूरी ताकत के साथ दो बहुत ही जोरदार धक्के लगा दिये।. वो जोर-जोर से चिल्लाने लगी- “दीदी, तुमने मुझे कहाँ फँसा दिया। मैं मरी जा रही हूँ और तुम सुन ही नहीं रही हो, बचा लो मुझे, नहीं तो ये मुझे मर डालेंगे…” मैंने कहा- “अब चुप हो जाओ। मेरा पूरा लण्ड अब घुस चुका है…”. वो कुछ नहीं बोली, केवल सिसक-सिसक कर रोती रही। मैं अपना लण्ड उसकी गाण्ड में ही डाले हुए थोड़ी देर तक रुका रहा। धीरे-धीरे वो कुछ हद तक शाँत हो गयी। तभी कमरे के बाहर से ही रूही भाभी ने पूछा- “काम हो गया?”. मैंने कहा- “अभी तो मैंने केवल अपना औज़ार ही पूरा अंदर घुसाया है…”. वो बोली- “ठीक है, अब जल्दी से अपना पानी भी निकाल दो और बाहर आ जाओ…” मैंने धीरे-धीरे धक्के लगाने शुरू कर दिये तो प्रीति फिर से चीखने लगी। वक्त गुजरता गया और वो धीरे-धीरे शाँत होती गयी। दस मिनट में वो एकदम शाँत हो गयी तो मैंने अपनी स्पीड बढ़ानी शुरू कर दी। अब उसके मुँह. से केवल हल्की-हल्की सी आह ही निकल रही थी। मैंने अपनी स्पीड और तेज कर दी। तेल लगा होने की वजह से मेरा लण्ड उसकी गाण्ड में सटासट अंदर-बाहर हो रहा था। मुझे खूब मज़ा आ रहा था। प्रीति को भी अब कुछ-कुछ मज़ा. आने लगा था।. मैं भी पूरे जोश में आ चुका था और तेजी के साथ उसकी गाण्ड मार रहा था। दस मिनट तक मैंने उसकी गाण्ड मारी और फिर झड़ गया। लण्ड का सारा पानी उसकी गाण्ड में निकाल देने के बाद भी मैंने उसकी गाण्ड में ही अपना. लण्ड डाले रखा और उसके ऊपर लेट गया।. मैंने प्रीति से पूछा- “कुछ मज़ा आया?”. वो बोली- “बहुत दर्द हो रहा है और तुम पूछ रहे हो की मज़ा आया…”. मैंने कहा- “मेरी कसम है तुम्हें, सच-सच बताओ। क्या तुम्हें जरा सा भी मज़ा नहीं आया?” उसने शरमाते हुए कहा- “पहले तो बहुत दर्द हो रहा था लेकिन बाद में मुझे थोड़ा थोड़ा सा मज़ा आने लगा था कि तुम रुक गये…”. मैंने कहा- “अभी थोड़ी देर में मेरा लण्ड फिर से खड़ा हो जायेगा। उसके बाद मैं फिर से तुम्हारी गाण्ड मारूँगा…”. वो बोली- “नहीं, अभी रहने दो…” तभी रूही भाभी ने पूछा- “क्यों जय, काम हो गया?” मैंने कहा- “हाँ, मैंने अपना पानी इसके छेद में निकाल दिया है। अभी थोड़ी ही देर में मैं फिर से अपना पानी निकालने वाला हूँ…” रूही भाभी ने कहा- “ठीक है, जब दोबारा पानी निकाल देना तो बाहर आ जाना…” मैंने कहा- “ठीक है…”. मैंने अपना लण्ड प्रीति की गाण्ड में ही रखा और उसकी चूचियों को मसलता रहा। 15 मिनट में ही मेरा लण्ड फिर से खड़ा हो गया तो मैंने उसकी गाण्ड मारनी शुरू कर दी। अब उसके मुँह से केवल हल्की हल्की सी आह ही. निकल रही थी। थोड़ी ही देर में उसे मज़ा आने लगा तो वो सिसकारियां लेने लगी।. मैंने पूछा- “अब कैसा लग रहा है?”. वो बोली- “अब अच्छा लग रहा है…”. मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी तो थोड़ी ही देर में वो जोर की सिसकारियां भरने लगी। मुझे भी उसकी गाण्ड मारने में खूब मज़ा आ रहा था। बीस मिनट तक मैंने उसकी गाण्ड मारी और फिर झड़ गया। मैंने अपना लण्ड उसकी गाण्ड. से बाहर निकाला और उसके बगल में लेट गया।. मैंने उसके होंठों को चूमते हुए पूछा- “कैसा लगा?”. वो बोली- “इस बार कुछ ज्यादा ही मज़ा आया। अच्छा हुआ तुमने मुझे शराब पिला दी। कड़वी तो थी पर अब काफी अच्छा लग रहा है…”. मैंने कहा- “धीरे-धीरे तुम्हें ज्यादा मज़ा आने लगेगा। चाहो तो जब भी मैं तुम्हारे छेद में अपना औज़ार डालूँ, तुम थोड़ी शराब पी लिया करना। तुम्हें ज्यादा मज़ा आयेगा…” मैं प्रीति के पास से उठकर बाहर चला आया।. रूही भाभी बाहर बैठी थी। नशे और पूरी रात ना सोने के कारण उनकी आँखें लाल और बुझी हुई सी थीं। उन्होंने मुझसे पूछा- “काम हो गया?”. मैंने कहा- “हाँ…”. वो बोली- “मैं गरम पानी से उसकी चूत की सिकायी कर देती हूँ। इससे उसका दर्द कम हो जायेगा…”. मैं चुप रह गया क्योंकी मैंने तो प्रीति की चूत को अभी तक छुआ ही नहीं था। मैंने तो उसकी गाण्ड मारी थी। मैं प्रीति के पास चला गया।. रूही भाभी पानी गरम करके ले आयीं। वो बोली- “मैं पानी गरम करके लायी हूँ, अंदर आ जाऊँ…” मैंने कहा- “आ जाओ…”. प्रीति बोली- “मैं एकदम नंगी हूँ और तुम दीदी को यहाँ बुला रहे हो। क्या सोचेंगी वो… मैं नंगी और बिस्तर पे सैंडल पहने हुए…”. मैंने कहा- “तो क्या हुआ?”. वो कुछ नहीं बोली। रूही भाभी अंदर आ गयी। उन्होंने प्रीति से कहा- “लाओ मैं तुम्हारे छेद की सिकायी कर दूँ। इससे तुम्हारा दर्द कम हो जायेगा…”. प्रीति ने करवट बदल ली तो रूही भाभी ने कहा- “तुमने करवट क्यों बदल ली। अब मैं कैसे तुम्हारे छेद की सिकायी करूँगी?”. उसने अपनी गाण्ड के छेद की तरफ इशारा करते हुए कहा- “इसी में तो इन्होंने अपना औज़ार घुसाया था…”. रूही भाभी के मुँह से निकला- “क्या?”. रूही भाभी की नज़र प्रीति की गाण्ड पर पड़ी। उसकी गाण्ड खून से लथपथ थी। मैंने अभी तक अपना लण्ड साफ नहीं किया था। मेरा लण्ड भी खून से भीगा हुआ था। रूही भाभी आँखें फाड़े कभी मेरे लण्ड को और कभी प्रीति की. गाण्ड को और कभी मेरे चेहरे को देखने लगी। रूही भाभी ने गरम पानी से प्रीति के गाण्ड की सिकायी की। उसके बाद उन्होंने मुश्कुराते हुए प्रीति से कहा- “प्रीति तुमने एक मैदन तो मार लिया है। अब दूसरा मैदन. मारना और बाकी है…”. वो बोली- “दीदी, मैं समझी नहीं…” रूही भाभी ने प्रीति की चूत पर हाथ लगाते हुए कहा- “अभी तो तुम्हें इस छेद में भी इसका औज़ार अंदर लेना है…”. प्रीति को बहुत दर्द हो रहा था। रूही भाभी की बात सुनकर वो गुस्से में आ गयी। उसने अपनी चूत की तरफ इशारा करते हुए कहा- “एक छेद के अंदर इनका औज़ार लेने में ही मेरा इतना बुरा हाल हो गया और आप कह रही हो की. अभी इस छेद में भी अंदर लेना है। मैं अब किसी छेद में इनका औज़ार अंदर नहीं लूँगी। मुझे बहुत दर्द होता है। आप खुद ही इनका औज़ार अपने छेद में ले लो…”. रूही भाभी ने मुश्कुराते हुए कहा- “मेरे अंदर लेने से क्या होगा। आखिर तुम्हें भी तो इसका औज़ार अपने इस छेद में अंदर लेना ही पड़ेगा। जैसे एक बार तुमने दर्द को बर्दाश्त कर लिया है उसी तरह से एक बार और. दर्द को बर्दाश्त कर लेना…”. प्रीति ने रूही भाभी की चूत की तरफ इशारा करते हुए कहा- “पहले तुम इनका औज़ार अपने इस छेद में अंदर लेकर दिखाओ। उसके बाद ही मैं इनका औज़ार अपने इस छेद में अंदर लूँगी…”. रूही भाभी मुझे देखने लगी और मैं उनको।. प्रीति बोली- “क्यों अब क्या हुआ? आप मुझे फँसा रही थी लेकिन मैंने आपको ही फँसा दिया। दिखाओ इनका औज़ार अपने छेद के अंदर लेकर…”.
स्रोत:इंटरनेट