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Meri Biwi Priti Aur Roohi Bhabhi Indian Sexi Kahani

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प्रीति की मस्त चुदाई के बाद रूही भाभी उसे मेरा लंड चाटने को कहती है। अब रूही भाभी की गांड पे मेरी नज़र है। इस मजेदार Indian sexi kahani का आखिरी पार्ट पेश है.. Indian Sex Story के अन्य भाग-. पार्ट 1. पार्ट 2. पार्ट 3. पार्ट 4. मैं उसकी कमर को पकड़कर उसे बहुत ही बुरी तरह से चोद रहा था। वो भी अपने चूतड़ आगे पीछे करते हुए मेरा साथ देने लगी थी। दस मिनट उसकी चुदाई करने के बाद मैं झड़ गया। मेरे साथ ही साथ प्रीति भी फिर से झड़. गयी।. मैंने अपना लण्ड बाहर निकाला तो रूही भाभी ने प्रीति से कहा- “अब तुम इसके लण्ड को चाट लो…”. वो बोली- “मैं इनके लण्ड को नहीं चाटूँगी। इनका लण्ड गंदा है…”. रूही भाभी ने कहा- “गंदा कहाँ है? इसके लण्ड पर तुम्हारी चूत का और इसके लण्ड का पानी ही तो लगा है। इसे चाटने से प्यार बढ़ता है। चाट लो इसे…”. वो बोली- “मैं नहीं चाटूँगी। मुझे घिन्न आती है…”. रूही भाभी ने कहा- “मैं ही चाट लेती हूँ। फिर आगे से तुझे ही चाटना पड़ेगा…”. वो बोली- “ठीक है। पहले तुम चाटकर दिखाओ, बाद में मैं चाट लूँगी…” रूही भाभी मेरे लण्ड को चाटने लगी। प्रीति देख रही थी। मेरे लण्ड पर लगा हुआ थोड़ा सा पानी रूही भाभी ने चाट लिया फिर प्रीति से बोली- “अब बाकी का तुम चाट लो…”. प्रीति ने शरमाते हुए मेरे लण्ड को चाटना शुरू कर दिया। उसने मेरे लण्ड पर लगे हुए बाकी के पानी को चाट-चाटकर साफ कर दिया।. रूही भाभी ने प्रीति से कहा- “अब तुम्हें जब ये फिर से चोदेगा तो चिल्लाओगी तो नहीं?”. वो बोली- “अब क्यों चिल्लाऊँगी? अब तो मुझे बहुत मज़ा आने लगा है…”. रूही भाभी ने कहा- “फिर ठीक है, तुम आराम कर लो। जब तुम्हारा मन करेगा तो इसे बुला लेना। मैं इसके साथ अपने कमरे में जा रही हूँ। मुझे इससे कुछ बात करनी है…” वो बोली, ठीक है- “बुला लूँगी…” रूही भाभी बोली- “मैं भी इसके साथ आऊँगी तुम्हारे पास और अपने सामने ही तुम्हारी चुदाई करा दूँगी…” रूही भाभी नंगी ही अपनी सैंडल फर्श पर खट-खट करती हुई बाहर चली गयी तो मैं भी उनके पीछे-पीछे नंगा ही बाहर. चला आया।. मैंने रूही भाभी से कहा- “तुमने मुझसे प्रीति एक सामने ही चुदवा लिया। वो क्या सोचेगी…”. रूही भाभी ने कहा- “उसे कुछ भी नहीं मालूम है। अगर उसे कुछ मालूम होता तो भला वो मुझे चुदवाने को क्यों कहती। चलो अच्छा ही हुआ की अब मुझे और प्रीति को एक दूसरे के सामने तुमसे चुदवाने में कोई दिक्कत नहीं. होगी। हमारा रास्ता पूरी तरह से साफ हो गया। मैं प्रीति से भी इस बारे में बात कर लूँगी…”. मैंने भाभी से पूछा- “गाण्ड कब मरवाओगी?”. वो मुश्कुराते हुए बोली- “क्या मेरी गाण्ड भी फाड़नी है?”. मैंने कहा- “हाँ…”. वो बोली- “कल फाड़ लेना…”. मैंने कहा- “थोड़ा सा आज अंदर ले लो बाकी का कल अंदर ले लेना…”. वो बोली- “जो तेरा जी कहे कर ले। अब तो मैं तेरी बीवी बन गयी हूँ…”. मैं रूही भाभी के बगल में लेटा हुआ उनसे बातें करता रहा और उनकी चूत को सहलाता रहा। वो मुझे तरह-तरह के स्टाइल में चोदना सिखा रही थी और मेरे लण्ड को सहला रही थी। लगभग एक घंटे के बाद मेरा लण्ड फिर से खड़ा. होने लगा। मैंने रूही भाभी से कहा- “प्रीति ने अभी तक मुझे बुलाया ही नहीं। मैं अब तुम्हारी गाण्ड में ही लण्ड घुसाने की कोशिश करता हूँ…”. रूही भाभी और हम दोनों अभी तक नंगे ही थे। मैंने रूही भाभी से घोड़ी बन जाने को कहा तो वो घोड़ी बन गयी। मैंने अपने लण्ड का सुपाड़ा उनकी गाण्ड के छेद पर रखा तो वो बोली- “तेल तो लगा ले…”. मैंने कहा- “नहीं। ऐसे ही…”. वो बोली- “फिर तो बहुत दर्द होगा…”. मैंने कहा- “होने दो। तुम कोई सत्रह-अटारह साल की थोड़े ही हो…”. वो बोली- “ठीक है, जैसी तेरी मरज़ी…” मैंने अपना लण्ड उनकी चूत में डाल दिया और उनकी चुदाई शुरू कर दी। पाँच मिनट में ही रूही भाभी झड़ गयी तो मेरा लण्ड गीला हो गया। अब तेल लगने की जरूरत नहीं थी। मैंने अपने लण्ड का सुपाड़ा उनकी गाण्ड के छेद. पर रखा और थोड़ा सा जोर लगाया। रूही भाभी के मुँह से जोर की आह निकली और मेरे लण्ड का सुपाड़ा उनकी गाण्ड में घुस गया।. मैंने थोड़ा जोर और लगाया तो वो तड़प उठी और बोली- “जरा धीरे से…”. मैंने फिर से जोर लगाया तो उनके मुँह से चीख निकल गयी। मेरा लण्ड रूही भाभी की गाण्ड में अब तक चार इंच घुस चुका था। मैंने और ज्यादा अंदर घुसाने की कोशिश नहीं की। मैंने धीरे-धीरे धक्के लगाने शुरू कर दिये।. दो मिनट में ही रूही भाभी का दर्द जाता रहा तो वो बोली- “थोड़ा और अंदर कर दे…”. मैंने फिर से थोड़ा जोर लगाया तो वो फिर से चीखी और मेरा लण्ड उनकी गाण्ड में पाँच इंच तक घुस गया। तभी प्रीति आ गयी। उसने कपड़े नहीं पहने थे। वो पहले जैसी ही सिर्फ अपनी हाई-हील की सैंडल पहने हुए एकदम. नंगी थी।. उसने हम दोनों को देखा तो बोली- “दीदी, तुम भी मज़ा ले रही हो?” रूही भाभी ने कहा- “ये तेरा बड़ी देर से इंतज़ार कर रहा था लेकिन तूने इसे बुलाया ही नहीं। इसे जोश आ गया और इसने मेरी गाण्ड में अपना लण्ड घुसाना शुरू कर दिया। मैं इसे मना नहीं कर पायी…”. वो बोली- “मुझे भी फिर से चुदवाना है…”. रूही भाभी ने कहा- “तो आ जा…”. प्रीति ने कहा- “लेकिन ये तो आपको चोदने जा रहे हैं?”. रूही भाभी ने कहा- “मेरा क्या है, मैं तो कभी भी चुदवा लूँगी। पहले तू चुदवा ले। तेरा चुदवाना ज्यादा जरूरी है। मैं तो बहुत मज़ा ले चुकी हूँ…” प्रीति रूही भाभी के बगल में ही घोड़ी की तरह बन गयी। मैंने अपना लण्ड रूही भाभी की गाण्ड से बाहर निकालकर प्रीति की गाण्ड में घुसाना शुरू कर दिया। वो दर्द के मारे आहें भरने लगी। धीरे-धीरे मेरा पूरा का. पूरा लण्ड प्रीति की गाण्ड में घुस गया तो मैंने उसकी गाण्ड मारनी शुरू कर दी।. वो बोली- “आगे के छेद में घुसाकर चोदो। मुझे उसमें ज्यादा मज़ा आता है…”. मैंने कहा- “थोड़ी देर पीछे के छेद की चुदाई कर लूँ फिर आगे के छेद में भी चोदूँगा…”. वो बोली- “ठीक है, जैसी तुम्हारी मरज़ी…” मैं प्रीति की गाण्ड मारता रहा। रूही भाभी प्रीति से कहने लगी- “तू तो जानती है की जय के भैया का स्वर्गवास हुए बहुत दिन हो चुके हैं। मैंने बहुत दिनों से चुदवाया नहीं था और मेरी इच्छा भी मर चुकी थी। लेकिन. आज मैंने तेरी खुशी के लिये तेरे कहने पर इससे चुदवा लिया। इससे चुदवाने के बाद मेरी चूत और गाण्ड की आग फिर से भड़क गयी है। मैं जानती हूँ की ये बहुत ही गलत बात है लेकिन मैं अब इससे चुदवाये बिना नहीं रह. सकती। अगर किसी को ये पता चल गया तो मेरी बड़ी बदनामी होगी। अब तू ही बता की मैं क्या करूँ? मैं तो अब मर जाना चाहती हूँ…”. प्रीति बोली- “दीदी, तुम ऐसा क्यों कह रही हो? तुम इनसे जी भरकर चुदवाओ और खूब मज़ा लो। मुझे कोई ऐतजय नहीं है। अगर मैं तुम्हें कभी मना करूँ तो तुम मुझे ही मार डालना। ये बात किसी को नहीं पता चलेगी…”
स्रोत:इंटरनेट