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Meri Hawas Pyaar Me Badli Desi Story 2

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सागर स्नेहा के सारे बदन को चूमता जा रहा था और स्नेहा उसके बालों को सहलाती जा रही थी।. स्नेहा जोर जोर से सिसकारियाँ भर रही थी और सागर उसके एक बोबे को चूमता और दूसरे को हाथ से पुचकार रहा था। उसके बाद स्नेहा का धीरज जवाब दे गया और उसने अपनी दोनों टांगों को फ़ैला कर सागर के लिए जन्नत का. रास्ता खोल दिया और बोलने लगी- जानू, अब तो मेरे अन्दर समां जाओ जल्दी ! मैं और इन्तजार नहीं कर पाऊंगी ! सागर तब पूरी तरह से स्नेहा के ऊपर आ गया। अपना 7″ का लंड स्नेहा की चूत के ऊपर रखा और धीरे से धक्का दिया तो लंड धीरे धीरे अन्दर जाने लगा। स्नेहा के मुँह से आःह निकल पड़ी। फिर वो अपना लंड धीरे धीरे. अन्दर- बाहर करने लगा। बीच-बीच में बोबों को चूम लेता और चूस लेता। कभी कभी लबों को चूम लेता। कुछ देर बाद सागर ने अपनी गति बढ़ाई और जोर जोर से चोदने लगा। स्नेहा अपने कमर को जुम्बिश देती सागर का भरपूर साथ. देने लगी। करीब आधे घंटे बाद सागर और तेजी से चोदने लगा फिर अचानक अपना लंड निकाल के स्नेहा के पेट पर सारा माल गिरा दिया। फिर करीब पाँच मिनट तक वो दोनों चूमा-चाटी करते रहे।. फिर सागर उठा और एक कपड़े से स्नेहा के पेट से सारा माल पौंछ डाला। फिर दोनों ने कपड़े पहन लिए।. इस वीडियो को मैंने एक सीडी में उतार लिया और हैंडीकैम अपने दोस्त को लौटा दिया।. तब से हर वक्त स्नेहा का गदराया बदन मेरे सामने नाचता रहता। मैं भी स्नेहा को चोदने के सपने देखने लगा।. तभी से मैं स्नेहा को पाने के लिए योजना बनाने लगा। कुछ दिन बाद सागर कुछ काम से अपने घर चला गया। यही मेरे लिए सोने पे सुहागा जैसा था। तो मैंने स्नेहा को चोदने की सारी योजना पर अमल करने लगा।. उस दिन मैं सुबह के करीब नौ बजे ही कॉलेज पहुँच गया और स्नेहा के आने का इन्तजार करने लगा। लगातार उसकी स्कूटी की आवाज की तरफ कान खड़े हुए थे। जैसे ही उसकी स्कूटी की आवाज आई, मैं कॉलेज के लाइब्रेरी में उसका इन्तजार करने लगा क्योंकि वो कॉलेज आते ही हर रोज पहले लाइब्रेरी जाती थी।. जब वो लाइब्रेरी आई तो मैं जाकर उसकी मेज़ पर उसके आगे बैठ गया। वो हमेशा की तरह एक मोम की गुड़िया जैसी लग रही थी। उसके गहरे नीले टॉप से उसकी चूचियों के उभार बाहर झाँक रहे थे। उसकी खूबसूरती के आगे जैसे. मेरे मुँह में ताला लग गया था।. फिर मैंने उससे पूछा,” स्नेहा, क्या पढ़ रही हो ?” ” मैथ्स !”. ” मुझे तो मैथ्स का कुछ भी नहीं आता, क्या तुम मुझे कुछ प्रोब्लम्स समझा दोगी, जिससे मैं पास हो जाऊं?” ” हाँ, समझा तो दूँगी, मगर कब और कहाँ ?” ” अरे तुम हॉस्टल में आकर मुझे समझा देना।”. ” ठीक है, कल तो सन्डे है, मैं सुबह पहुँच जाउंगी, ओके !” ” थैन्क्स, तो मैं कल तुम्हारा इन्तजार करूँगा, ओके बाय !” तब मैं हॉस्टल चला आया और स्नेहा को चोदने के ख्याल से ही बेचैन हो रहा था। मेरा लंड तभी से खड़ा हो गया था और रोंगटे खड़े होने लगे थे। मैंने रात जैसे- तैसे काटी।. सुबह-सुबह मैं बाजार गया और कंडोम ले कर आया। फिर नहा कर फ्रेश होकर स्नेहा का इन्तजार करने लगा। करीब नौ बजे मेरे कमरे के दरवाजे के दस्तक हुई। मैंने जाकर दरवाजा खोला तो स्नेहा को अपने आगे पाया जिसको. चोदने के सपने मैं करीब एक महीने से देख रहा था और आज वो सपना पूरा होने जा रहा था। यही सोच के सारे बदन पर अजीब सी मस्ती छा रही थी।. आज स्नेहा दूसरे दिनों से कुछ ज्यादा ही खूबसूरत नजर आ रही थी। उस दिन उसने पीले रंग का सलवार-सूट पहन रखा था। उस पर काले रंग का दुपट्टा ! उसे देख कर मैं तो यह भी भूल गया कि उसे अन्दर भी बुलाना है। करीब. दस सेकंड बाद मुझे पता चला और मैंने स्नेहा को अन्दर बुला लिया।. उसे कुर्सी पर बैठने को कहा। वो आराम से बैठ गई। फिर मैंने उसे चाय पानी पूछा। उसने मना कर दिया।. तब स्नेहा ने मेरी तरफ देखा और मैथ्स की किताब लाने को कहा। मैं मैथ्स की किताब ले आया तो वो मुझे कुछ प्रोब्लम्स समझाने लगी। करीब 15 मिनट बाद मैंने बोला,” काफी बोरिंग है ये मैथ और मैंने जाकर लैपटॉप ऑन कर दिया और उसे लाकर टेबल पे स्नेहा के सामने रख दिया।. तब मैं स्नेहा से बोला,”आज मैं तुम्हें कुछ दिखने जा रहा हूँ !” और मैंने लैपटॉप पर वो फ़िल्म चला दी। खुद को वीडियो में देख के स्नेहा भौंचक्की सी रह गई। फिर जब सागर ने उसके कपड़े उतारने शुरु किए तो उसका चेहरा लाल हो गया। उसने शर्म के मारे अपना हाथ अपने चेहरे पर रख दिया। कुछ देर बाद वो फूट फूट के रोने. लगी। उसने मेरे पैर पकड़ लिए और रोते हुए बोली,” देव, तुमने तो मुझे कहीं का नहीं छोड़ा, मेरे मम्मी पापा यह जान गए तो खुदकुशी कर लेंगे। ये तुम और किसी को मत दिखाना प्लीज़ ! तुम्हें हमारी दोस्ती की कसम !”. “दोस्ती है, तभी तो अब तक किसी को नहीं दिखाया, लेकिन अगर तुमने वो नहीं किया जो मैं चाहता हूँ तो कल तक यह वीडियो सारी दुनिया देखेगी।” ” क्या करना होगा मुझे? मैं कुछ भी करने के लिए तैयार हूँ !”. ” तुम्हें मेरे साथ वही करना होगा, जो तुमने सागर के साथ इस वीडियो में किया है।” ” क्या? तुम इतने गिरे हुए इंसान हो, मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था !” ” मुझे और नीचे गिरने में ज्यादा देर नहीं लगेगी !”. तब स्नेहा कुछ देर खामोश रही जैसे पत्थर की मूरत बन गई हो और फिर मेरे बिस्तर पर आकर बैठ गई, अपना दुपट्टा नीचे गिरा कर बोली,” कर लो जो करना है !” मैं तो पूरा मज़ा लूटने के मूड में था, इसलिए बोल दिया,” तुम्हें मेरा पूरा साथ देना होगा, जैसे तुमने सागर का साथ………” तब मैं आगे बढ़ा और अपना हाथ स्नेहा के लबों पर रख दिया, वो फूल से कोमल तो थे लेकिन शोलों सी गर्मी थी उनमें ! मुझे लग रहा था जैसे वो रस के भंडार हैं और मैं उसकी बूँद बूँद पीने के लिए बेताब हुआ जा रहा था। फिर मैंने अपने लब उसके लबों पे रख दिए और धीरे धीरे लबों को काटने और चूसने लगा। मेरी और उसकी जबान टकराने. लगी।. जैसा कि मैंने पहले ही उसे बोल दिया था, उसे भी साथ देना पड़ा। वो मेरे बालों को सहलाती जा रही थी। फिर मैंने अपना दायाँ हाथ उसके भरे हुए सीने के ऊपर रख दिया तो वो जैसे चौंक सी गई। दूसरे हाथ से मैं उसकी पीठ सहलाता जा रहा था। मैं उसकी मदमस्त जवानी को पूरी तरह से अपने रोम-रोम में महसूस करना चाहता था।. कुछ देर बाद मैंने धीरे से उसका कमीज़ उतार दिया। अन्दर स्नेहा की चूचियों को एक काले रंग की ब्रा जकड़े हुए थी। उसके बोबे ब्रा के बंधन से छूटने के लिए उतावले मालूम पड़ रहे थे। मैं उन पहाड़ियों की कोमल और. रेशमी दुनिया में खो जाना चाहता था।. लेकिन मैंने जल्दबाजी ना करते हुए धीरे धीरे आगे बढ़ने का फ़ैसला किया।. मैंने फिर उसकी ब्रा के उपरी हिस्से से झांकती चूचियों को चूम लिया और चाटने लगा। फिर मैंने ब्रा के ऊपर से ही चूचियों को खूब मसला। स्नेहा की सिसकारियाँ छूटनी शुरु हो गई थी। वो ना चाहते हुए भी मेरी इस. हरकतों से धीरे धीरे गर्म होने लगी थी।.
स्रोत:इंटरनेट