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Meri Hawas Pyaar Me Badli Desi Story

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नमस्ते मित्रों, मैं उसको चोदना चाहता था| बस किसी भी तरह.. वो चीज़ ही ऐसी थी| लेकिन मैं उसे पाने के नशे में बहुत गिर गया था पर आज वो हवस प्यार में बदल चुकी है| मैं इस desi story में आपको उसी दास्ताँ के बारे में बताऊंगा| अब में desi story शुरू करता हूँ.. मेरा एक दोस्त था सागर ! वो देखने में उतना ख़ास नहीं था पर लड़कियाँ पटा कर चोदने में उस्ताद था। वो हर वक्त इसी फिराक में रहता कि कैसे कोई लड़की पटे और उसको नई चूत चोदने के लिए मिल जाए। वो लड़की पटाने. के लिए किसी भी हद तक जा सकता था।. जब हमारा बी.
एस.
सी का अन्तिम वर्ष था तब एक नई लड़की हमारी ही क्लास में आई। उसके पिताजी का तबादला हमारे शहर में हो गया था। उसका नाम था स्नेहा। स्नेहा देखने में थी बला की खूबसूरत ! गोरा रंग, उस पर लंबे काले बाल, बाएँ गाल पर डिम्पल और होंठों के दाईं ओर एक छोटा सा तिल। फिगर ऐसा कि कोई मॉडल भी शरमा जाए। वो एक गजब की गायिका भी थी। वो कई सारे एल्बम में गा चुकी थी। जिस दिन से उसको सागर ने देखा, उसी दिन से उसको चोदने के सपने देखने लगा। कई बार उसने मुझे भी अपने सपनों के बारे में बताया कि कैसे उसने स्नेहा को जमकर चोदा सपने में। उसके बाद उसने स्नेहा के आगे पीछे घूमना शुरु कर दिया। स्नेहा तो पहले पहले किसी भी लड़के को भाव नहीं देती थी, लेकिन एक दिन अचानक सागर ने कुछ ऐसा किया कि वो उसके जाल में फंसती चली गई। वो उसके लिए नोट्स ला देता, हमेशा उसकी कुछ ना कुछ मदद करता रहता। एक दिन तो हद ही हो गई- जब स्नेहा ने अपनी स्कूटी से एक बच्चे को ठोक दिया, तभी पास में जा रहा सागर वहाँ आकर स्नेहा का कसूर अपने सर ले गया कि स्कूटी असल में वो ही चला रहा था। उसको एक दिन जेल में बितानी पड़ी, मगर इससे उसको स्नेहा के दिल में एक ख़ास जगह मिल गई। उसके बाद स्नेहा हफ़्ते में एक दो बार हमारे हॉस्टल में भी आने लगी। क्योंकि मैं सागर का रूममेट था इसलिए जब स्नेहा आने के लिए फ़ोन करती तो वो मुझे किसी बहाने से बाहर भेज देता। कुछ दिन बाद सागर ने स्नेहा. को प्रोपोज़ कर दिया और स्नेहा मान भी गई। अब वो दोनों घंटो फ़ोन पर बातें करने लगे। अब तो सागर सिर्फ़ उसको चोदने के लिए मौके के इन्तजार में रहने लगा।. एक दिन जब स्नेहा सागर से मिलने हमारे हॉस्टल आई तो सागर ने मुझे बाहर जाकर बाहर से दरवाजा बंद कर देने को कहा और मैंने वैसा ही किया। मेरे मोबाइल पर दो घंटे बाद सागर का कॉल आया और मैंने दरवाजा खोल दिया और. स्नेहा चली गई।. अगले एक महीने में ऐसा कई बार हुआ। तब मेरे मन में उत्सुकता बढ़ने लगी कि आख़िर ये लोग बंद कमरे में दो दो घंटे तक करते क्या हैं ?. तभी मेरे मन में एक योजना आई। मैंने मेरे एक दोस्त से एक हैन्डीकैम मांग कर अपने पास रख लिया। एक दिन जब सागर स्नेहा से फ़ोन पर बातें कर रहा था तब मुझे पता चला कि स्नेहा आज हॉस्टल आने वाली है। मैंने मौका. मिलते ही सागर से छुपाते हुए कैम को सेट कर दिया जिससे कि सागर का बेड पूरा उस पर रिकॉर्ड हो सके। और उसे ऑन करके इन्तजार करने लगा।. कुछ देर बाद स्नेहा आई और पहले की तरह मैं बाहर चला गया और दरवाजा बाहर से बंद कर दिया।. करीब ढाई घंटे बाद सागर का कॉल आया, मैंने दरवाजा खोल दिया और स्नेहा चली गई। कुछ देर बाद सागर भी उठा और कहीं घूमने चला गया। तब मैंने कैम निकाला और उस पर जो रिकॉर्ड हुआ था उसे देखते ही दंग रह गया।. स्नेहा उस दिन बला की सुंदर लग रही थी, काले रंग के टॉप पर टाइट जींस गजब ढा रहे थे। उसका गोरा बदन जैसे कि कोई सफ़ेद मोती धूप में रखा हो। उसके गुलाबी लब जैसे गुलाब की पंखुड़ियाँ सुबह की ओस में भीगे हुई ! उसके गोरे रंग पर काले घने बाल क़यामत लग रहे थे। उसके कसे टॉप से उसके स्तन झाँक रहे थे जैसे दो पहाड़ियों के बीच में एक खाई हो।. स्नेहा को पहले सागर ने बेड पर बिठाया और कुछ स्नैक्स खाने के लिए दिए। फिर पानी दिया। उसके बाद सागर उसकी पीठ की तरफ़ आ गया और पीछे से ही गले पर चूमने लगा। स्नेहा थोड़ी अंगडाईयाँ लेने लगी। फिर सागर ने. उसका चेहरा अपनी तरफ़ घुमाया और उसके लबों पर अपने होंठ सटा लिए। स्नेहा ने अपने आँखें बंद कर ली और जोर-जोर से सांसें लेने लगी। इसी बीच सागर ने अपना हाथ धीरे से उसके पेट पर रखा जो कि संगमरमर की तरह लग. रहा था।. फिर हाथ सरकाते हुए वो उसके वक्ष तक पहुँच गया और जोर जोर से टॉप के ऊपर से ही स्तन दबाने लगा। स्नेहा सिसकारियाँ भरने लगी।. फिर सागर ने उसके चेहरे को हर जगह चूमा-चाटा। कुछ देर बाद उसने अपने होंठ उसके गले की तरफ़ सरकाए और धीरे से बोबों के उभारों को चाटने लगा। फिर उसने अपना शर्ट उतार दिया और स्नेहा का भी टॉप ऊपर से खींच कर. निकाल दिया। स्नेहा के स्तन ब्रा के बंधन में जकड़े हुए आजाद होने का इन्तजार करते हुए से लग रहे थे। फिर सागर ब्रा के ऊपर से ही उसके वक्ष को मसलता रहा और स्नेहा सिसकारियाँ लेती रही।. कुछ देर बाद सागर ने उसकी पीठ की तरफ़ हाथ लेजाते हुए उसकी ब्रा का हुक खोल दिया।. स्नेहा की चूचियाँ आजाद होकर झूम उठी। वो न तो बड़ी, न ही छोटी, सही आकार की और बिल्कुल ही मक्खन की तरह लग रही थी। बीच में गोलाकार चुचूक थे जो कि भूरे रंग के थे। स्नेहा के चुचूक ज्यादा बड़े नहीं थे लेकिन उन्हें देखकर ऐसा लग रहा था मानो उनमें से मधु निकल रहा हो और उसे पीने के लिए किसी का भी मन मचल उठे।. फिर सागर ने उन नाजुक बोबों को अपने दोनों हाथों में लिया और मसलने लगा। उसके हाथों की जकड़न से बोबे के आकार कई तरह से बदल रहे थे। स्नेहा इसी बीच जोर जोर से सिसकारियाँ भर रही थी। वो सागर के बालों में. अपने हाथ फेरते हुए उसके चेहरे को अपने मोमों में दबा रही थी।. तभी सागर ने अपने हाथ नीचे सरकाए और स्नेहा की जींस की चैन खोलने लगा और कुछ ही देर में वो स्नेहा को सिर्फ़ पैंटी में ले आया। स्नेहा का गदराया बदन किसी अप्सरा सा लग रहा था। जी कर रहा थी कि तभी उसको अपनी. बाँहों में भर लूँ।. स्नेहा ने सागर का लंड जींस के ऊपर से ही सहलाना चालू कर दिया था। सागर का लंड जींस को फाड़ कर बाहर आने को बेताब हो रहा था।. सागर ने फिर अपनी जींस खोल दी और अंडरवियर भी निकाल फेंका। उसका 6″ का लंड अब पूरे दम से खड़ा था। सागर ने अब स्नेहा की पैंटी भी उतार फेंकी। स्नेहा की चूत एक नन्हे गुलाब सी कोमल और रस से भरी हुई सी. लग रही थी। वो दोनों अब एक दूसरे में समाने के लिए पूरी तरह से तयार थे।. तभी सागर नीचे सरक गया और स्नेहा के चूत में एक गहरा चुम्बन लिया। स्नेहा का पूरा बदन झूम उठा। फिर सागर ने अपने उंगली से स्नेहा की चूत को बहुत सहलाया और काफी देर तक दुलारता रहा। स्नेहा तो जैसे इस दुनिया. में ना होकर किसी और ही दुनिया में चली गई थी।.
स्रोत:इंटरनेट