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Meri Maa Ka Lund 4

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अंदर का नजारा देखते ही मेरा लंड कडा होना शुरु हो गया । मम्मी की बदन पे सिर्फ पेटीकोट थी उनकी उभरी चौडी गांड पेटीकोट में समा नहीं रहे थे और व मनोज को बाहों में भरकर चुम्मे ले रही थी । एक अधेड सी औरत को. देखते ही मरा लंड एकदम खडा हो गया । उसकी उम्र लगभग 50 के आसपास होगी और बिल्कुल अब के पचपन साल की हिन्दी सिनेमा के अभीनेत्री जयाप्रदा जैसी दिखाई दे रही थी । मैं क्या ! कोई भी उसे देखेगी तो धोखा खा जाएगी. । बिल्कुल जयाप्रदा जैसी भारी चौडी गांड, चेहरा और स्तन । शायद वही संगीता देवी है जो मम्मी के लिए ही रुकी हुई थी । व एक सोफे पर अपनी पेटीकोट समेत साडी को कमर तक सरका ली थी और अपनी मांसल जांघों को फैलाकर बैठी थी और उन दोनों को देखकर अपनी झांटों से भरी बुर के गुलाबी छेद को सहला रही थी । तभी मनोज ने मम्मी को पिछे से. बाहों में भर लिया और मम्मी की गर्दन को चुमते हुए दोनों चुचियों को मसलने लगा । मम्मी आँख बंद किए आहे भर रही थी । संगीता देवी उन दोनों की रमांस देख कर और अपनी रसीली बुर में उंगली पेल रही थी । तभी मनोज. ने मम्मी की पेटीकोट को एकदम कमर तक उठा ली, मम्मी पैंटी भी खोल रखी थी । अब मम्मी कमर से निचे नंगी हो गई थी, मोटी मोटी चिकनी जांघों के बिच मम्मी की झांटों से भरा मोटा सा लंड आधा तन कर था । मनोज ने एक हाथ से चुचियों को मसलने और दुसरी हाथ से मम्मी की तने लंड को मुठी में भर कर लाल सुपाडा को अंदर बाहर करने लगा और संगीता देवी की और मुस्कराते हुए बोला –. “हमारी मैडम की लंड कैसी लगी माँ जी ?”. “इतना बडा लंड ! और व भी एक औरत की, आज मैंने पहली बार देखी ।” संगीता बोली । “आखिर ये औरत की लंड है माँ जी ।” मनोज मम्मी की होंठ चुमते हुए बोला ।. मम्मी मस्ती में आ…उई.
ईईई… करने लगी थी । ये सब देख कर मेरा लंड पैंट के अंदर टाईट हो गया । थोडी देर बाद मनोज मम्मी को छोड दी और बोला – “आप दोनों गेम चालु रखो, मैँ रात के लिये सामान लेकर आता हुं ।” और व तैयार हो कर बाहर चला गया । अब कमरे में मम्मी और संगीता देवी रह गए । तभी में दोनों को बातें करते सुन अंदर झाँका । दोनों केवल पेटीकोट में थे और मम्मी एक सिगारेट लगाई थी । संगीता मम्मी को बोल रही थी –. ” में मनोज की दूर के बहन की सास लगती हुं । इसीलिए व मुझे माँ जी कह कर बुलाता है । तुम भी चाहो तो उसी से बुला सकती हो ।”. “ठिक है ।” मम्मी एक कश लेती हुई बोली ।. “मुझे मनोज ने तुम्हारे बारे में सब कुछ बता दिया है ।” संगीता बोली ।. “क्या बताया मनोज ने आपको मेरे बारे में ?” मम्मी पुछने लगी ।. “यहि की कैसे तुम औरोतों के शौकीन यानि एक लेसबियन थी । तुम्हें औरोतों के बुर और भारी गांड बहुत पसंद था ।”. “हाँ मेरे पति तो फौज में थे, इसीलिए मेरी ये आदत बढती चली गई ।” मम्मी बोली । “और विदेश की नौकरी तुम्हें आजाद जिन्दगी जीने का मौका दे दिया ।”. “हाँ ये बात सच है, विदेश में आकर ही मैंने जाना जिन्दगी के मजे । वरना हमारे देश में एक विधवा की जीवन गुजारना बहुत मुश्किल है । इसीलिए जब मुझे मालुम पडा कि इसी नौकरी में मुझे विदेश जाने का मौका मिलेगा तो मैं बहुत खुश हुई थी ।” मम्मी ने बताई ।. मैं बडे ही ध्यान से दोनों की बातें सुन रहा था ।. “पर तुम्हें इतनी जानकारी कहाँ से मिली ?” संगीता ने पुछी ।. “विदेश में जाते ही मैंने वहां के लोगों जैसा जीना शुरु कर दी थी ।” मम्मी बोली ।. “और तुम्हारे मैनेजर के साथ चक्कर चला ।” संगीता बोली ।. “यही तो इस नौकरी की शर्त था । पर मुझे कोई ऐतराज नहीं था । और एक दिन उसने मुझे एक ब्लु-फिल्म दिखा कर मुझे चोद रहा था ।”. “कैसी फिल्म ?” संगीता ने पुछी ।. ” फिल्म के तीसरा भाग में मैंने एक खुबसुरत औरत को देखा जिसकी गांड बहुत भारी था और उसकी बुर के जगह एक बडा सा लंड था और फिर उसने दुसरे औरत और मर्दों को भी अपनी लंड से जम के चुदाई की, और ये बात मुझे बहुत उत्तेजित कर दिया ।” मम्मी ने. बताई ।. “क्या कह रही हो तुम !” संगीता आश्चर्य होकर बोली ।. “हाँ, और उसी दिन के बाद मेरे दिमाग में हर वक्त यही खयाल आता था कि काश ! मेरी भी उसके जैसे….
। पति का तो स्वर्गवास हो चुका था । कोई बाधा नहीं था । और हर वक्त इसी चिन्ता के कारण मेरी शरीर में पुरूषों के हरमोन क्षरण शुरु हो गया था ।” मम्मी बताई ।. “और तुम डाँक्टर के पास गई तो पता चला कि तुम पुरुष बनने जा रही हो ।” संगीता बोली ।. “हाँ, ये बात मुझे बहुत परेशान में डाल दिया था । बदलाव तो में चाहती थी मगर पुरे मर्द जैसा नहीँ । में एक बेटे की माँ भी थी । तो मैंने डाँक्टर की सलाह ली ।” मम्मी कहती गई । “डाँक्टर ने क्या बताया ?”. मम्मी अब पेटीकोट को उपर कर मुरझे लंड को मसलना शुरु कर दी और कही – ” डाँक्टर ने मुझे तीन उपाय बताए ।”. “क्या उपाय बताए ।”. “एक तो में मर्द बन जाउँ और दुसरा था- मुझे सर्जरी करके वापस औरत बनना था और तीसरा था- बिच में बन्द करना ।” मम्मी बताई ।. “बिच में रोक देना मतलब ?” संगीता पुछी ।. “मतलब शरीर को पुरी तरह बदलने से रोका जाए, मतलब जितनी बदल गई है व रहेगा आगे और नहीं बदलेगा ।” मम्मी ने बताई । “व कैसे ?”. “हरमोन थेरापी करना होगा जो मैंने किया । पर लंड आधा निकल चुका था इसिलीये मैंने उसे बढ़ने दिया क्योंकि मैं तो लंड चाहती थी और वाकी अंग पहले जैसा ही रहा । दवा लेने से वाकी अंग नहीं बदले और इस तरहा. औरत तो बनी रही मगर लंड के साथ और मैँ अपनी लंड को लम्बा, मोटा और पूरी तरह से चोदने लायक बनाने के लिए दो साल तक testosterone लेती रही ।” मम्मी बोली । “ये testosterone क्या होता होता है ?”. “ये लेने से लंड ठीक से बढ़ता है और लंड मेँ ताकत के साथ साथ पुरुष जैसे वीर्य भी आता है ।” मम्मी ने अपनी बात पूरी की ।. “पर तुम्हारी लंड इतनी लम्बा और मोटा कैसे बन गया ?” संगीता देबी ने मम्मी से पूछी ।. “मम्मी ने थोड़ी मुस्कुराई और अपनी लंड को सुपाडा पर ऊँगली फिरती हुई बोली – बात दरअसल ये है की, बचपन में मुठ मरने से या गन्दी आदत की वजह से लड़कों का लंड ठीक से बढ़ नहीं पता । और मेरी तो कोई गन्दी या ख़राब आदत नहीं थी, इसीलिए मेरा लंड पूरी तरह से बढ़ कर इतना लम्बा और मोटा हुआ है । लेकिन मेरा अंडकोष थोडा ज्यादा बड़ा हो गया है ।” मम्मी ने बताई । “क्यूँ इतना बड़ा हो गया है ।”. “मैं थोड़ी न मर्द थी, औरोतों की पैंटी में ये सब नहीं समां रहे थे, ज्यादा उछलने से मेरा अंडकोष बड़ा हो गया । ” मम्मी बोली ।
स्रोत:इंटरनेट