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Meri Maa Ka Lund Part 2 4

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गांव मेँ अब केवल मम्मी के एक दूर के मौसी अकेली रहती थी । मौसी के बच्चे बाहर रहते थे । गांव का एक डॉक्टर अपनी पत्नी के साथ हमारे घर किराए मेँ रह रहा था । अब वे दोनोँ मौसी की थोडी बहुत देखभाल कर लेते. हैँ । आने से पहले मम्मी ने उन्हेँ सूचित कर दिया था तो हमेँ देख कर उन्हेँ बहुत अच्छा लगा । डॉक्टर साहब और उनकी पत्नी कोलकाता के रहने वाले थे, उन दोनोँ की उम्र भी चालीस पार कर चुकी था । वे मौसी को बुआ कह कर पुकारते थे तो मम्मी उन दोनोँ को भैया भाभी और मैँ उन दोनोँ को बडे पापा और बडी मां कह कर पुकारने लगे । गांव शहर से काफी दूर था, इसीलिए गांव के लोग अभी भी पुराने खयालात के थे । गांव मेँ बिजली तो था, पर लोग स्नान और शौच के लिए बाहर तालाब या पास वाले नदी पर निर्भर थे । घर काफी बडा था । डॉक्टर साहब दिन भर मरीजोँ को देखने मेँ लगे रहते थे । उनकी पत्नी और मम्मी कुछ ही दिनोँ मेँ अच्छे सहेली बन गए । व मम्मी को बहू कह कर पुकारती थी । डॉक्टर की पत्नी का नाम रामकली थी, उसकी उम्र 48 के आस पास था । उनके दो लडके थे जो बाहर रह कर पढाई कर रहे थे ।. वैसे रामकली आंटी भी काफी आकर्षक महिला थी, उनकी उम्र 48 के आसपास थी । मम्मी से व काफी बडी थी । व मम्मी को बहू कह कर पुकारने लगी थी । इस उम्र मेँ भी रामकली की मोटी-मोटी जांघेँ और भारी गांड बहुत मस्त लग रहे थे । रामकली आंटी की स्तन और गांड मम्मी से भी भरे और उभरे थे । मैँने आते ही रामकली आंटी की भारी चुतड पेशाब करते वक्त देख लिया था । क्योँकि यहां टॉयलेट नहीँ था घर के सारे लोग पिछवाडे के किसी कोने पर. पेशाब बगैरा करते हैँ । क्या मस्त गांड थे आंटी के । जब रामकली आंटी पेशाब करने बैठती तो पिछे से उनकी गांड पूरा नंगा हो जाता था । और मैँ रोज मौका मिलने पर इस द्रुश्य का मजा उठाने लगा था ।. एक दिन मम्मी नदी मेँ स्नान करने का मन बना लिया । मुझे भी नदी मेँ डुबकी लगाने का मन कर रहा था । और फिर दुसरे दिन हम दोनो कपडे वगैरा लेकर नदी पर पहुच गये और फिर अपने काम में लग गए । फिर हम दोनोँ ने. नहाने की तैइय्यारी शुरू कर दी, तब मम्मी उठ कर खडी हो गई । अपने साडी के पल्लू को और ब्लाउज को ठीक किया और अपने जांघो के बिच साड़ी को हल्के से दबाया और साड़ी को उपर से ऐसे रगडी जैसे की लंड मसल रही हो । मैं उसकी इस क्रिया को बडे गौर से देख रहा था । मम्मी मेरी और देख कर बोली “मैं ज़रा पेशाब कर के आती हुं तु यहीँ रुक ।” मैं हल्के से अपना सर हिलाया ।. मम्मी पास के एक झाडी की और चल दी । मैँ तुरंत मम्मी के पिछे चल पडा । पिछले घटना के बाद मैँ हमेशा मम्मी की नंगी बदन देखना चाहता था खास कर मम्मी की लंड । मैँने जाकर एक बडा सा पत्थर की आड मेँ अपने आप को. छिपाते हुए मम्मी को देखने लगा । जब मम्मी झाडीयों के पास पहुंच गयी तो एक बार पीछे मुड कर इधर-उधर देखा और फिर अपने साड़ी को पेटीकोट समेत उठा कर पेशाब करने बैठ गई । उसकी दोनो गोरी गोरी जांघेँ उपर तक नंगी. हो चुकी थी और उसने अपने साड़ी को पीछे से उपर उठा के पकड रखा था जिस के कारण मम्मी के दोनोँ चुतड भी नुमाया हो रहे थे । ये सीन देख कर मेरा लंड फिर से फुफ्करने लगा । मम्मी की गोरे-गोरे उभरी हुई गांड बडे. कमाल के लग रहे थे । बैठने से गांड और भी फैल गई थी । मम्मी ने अपनी गांड को थोडी सी उचकायी हुई थी जिस के कारण उसकी गांड की दरार भी दिख रही थी साथ मेँ अंडकोष भी । हल्के भूरे रंग की गांड की छेद देख कर दिल. तो यही कर रहा था की पास जा उस गांड की छेद में धीरे धीरे उंगली अंदर कर दुं । तभी मम्मी पेशाब कर के उठ खडी हुई और मेरी तरफ घूम गई । उसने अभी तक साडी को अपने जांघोँ तक उठा रखी थी । अब मम्मी की लंड फिर से. मेरे सामने थी । घने झांटोँ से भरी थी मम्मी की लंड, कितना लम्बा और मोटा था । फिर मम्मी ने लंड को दो-तीन बार निचोड लिया जिससे कुछ बुंदेँ पेशाब निकली ओर फिर अपने साडी को छोड दिया और नीचे गिरने दिया । फिर एक हाथ को अपनी लंड पर साडी के उपर से ले जा के मसलने लगी जैसे की पेशाब पोछ रही हो । ये देख कर मेरा हालत एकदम खराब हो गया, फिर एक बार मैँने सारा माल वहीँ निकाल दिया । वापस आने के बाद मम्मी नहाने की तैयारी करने लगी । नहाने के लिए मम्मी सबसे पहले अपनी साडी को उतार दी, फिर अपने पेटीकोट के नाडे को खोल के पेटीकोट उपर को सरका कर अपने दांत से पकड ली । इस तरीके से उसकी पीठ तो दिखती थी मगर आगे से ब्लाउस पूरा ढक गया था । फिर व पेटीकोट को दांत से पकडे हुए ही अंदर हाथ डाल कर अपने ब्लाउस को खोल कर उतार दी । और फिर पेटीकोट को उरोजोँ के उपर बांध दी, जिस से उसकी स्तन पूरी तरह पेटीकोट से ढक गई थी और कुछ भी नज़र नहीँ आया और घुटनोँ तक पूरा बदन ढक गया था ।. तभी मम्मी नदी में उतर के एक डुबकी लगाई ऐसे में उसकी पेटीकोट जो कि उसके बदन चिपका हुआ होता था गीला होने के कारण मेरी हालत और ज़यादा खराब गया । पेटीकोट चिपकने के कारण मम्मी की बडी-बडी चुचियां नुमाया हो. जाती थी । पेटीकोट के उपर से उसकी मोटे-मोटे निपल तक दिखने लगे । पेटीकोट मम्मी की उभरी नितम्बोँ से चिपक कर उसकी गांड के दरार में फस गया था और मम्मी की चौडी गांड साफ दिखाई देने लगे थे । सामने से मम्मी की. लंड भी गीले पेटीकोट से साफ नजर आने लगा था । मम्मी की दोनोँ जांघोँ के बिच एक बडा काला सा उभार दिखाई दे रही थी जो उसका लंड था । मम्मी भी कमर तक पानी में मेरे ठीक सामने अपने चुचियों को साफ किया और फिर. अपने बदन को रगड-रगड के नहाने लगी । मैं भी बगल में खडा उसको निहारते हुए नहाता रहा । मम्मी अपने हाथोँ को पेटीकोट के अंदर डाल के खूब रगड-रगड के नहाना चालू रखा ।. थोडी देर बाद मम्मी ने एक दो डुबकियां लगाई और फिर हम दोनोँ बाहर आ गये । मैँने अपने कापडे चेंज कर लिए ।. मम्मी ने भी पहले अपने बदन को टॉवेल से सूखाया फिर अपने पेटीकोट के इज़रबंद को जिसको की व छाती पर बांध के रखी थी पर से खोल लिया और अपने दांतोँ से पेटीकोट को पकड लिया । आदत न होने से मम्मी को इस प्रकार. कपडे बदलना दिक्कत हो रही थी । जैसे ही मम्मी अपना हाथ ब्लाउस में घुसाने जा रही थी की पता नहीँ क्या हुआ उसकी दांतोँ से उसकी पेटीकोट छुट गई । और सीधे सरसराते हुए नीचे गिर गई । और मम्मी की पूरी की पूरी. नंगी बदन एक पल के लिए मेरी आंखोँ के सामने दिखने लगा । उसकी बडी-बडी चुचियां और उसकी भारी बाहरी नितम्ब और उसकी मोटी मोटी जांघोँ के मध्य झांटोँ से भरे मूषल लंड, सब एक पल के लिए मेरी आंखोँ के सामने नंगे हो गये । पेटीकोट के नीचे गिरते ही उसके साथ ही मम्मी भी है….
करती हुई तेज़ी के साथ लंड पर एक हाथ जमा ली, फिर भी मम्मी की 8 इंच का लम्बा और मोटा लंड का आधा हिस्सा दिखाई दे रही थी । लंड को हाथ मेँ छिपाती हुई मम्मी नीचे बैठ गई । मैं जल्द ही पिछे घुम गया ताकि मम्मी को बुरा न लगे । मम्मी नीचे बैठ कर अपने पेटीकोट को फिर से समेटती हुई बोली ” ध्यान ही नहीँ रहा मैं तुझे कुछ बोलना चाहती थी और ये. पेटीकोट दांतोँ से छुट गया ।”. मैं कुछ नहीँ बोला ।.
स्रोत:इंटरनेट