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Meri Maa Ka Lund Part 2 5

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मम्मी फिर से खडी हो गई और अपने ब्लाउस को पहनने लगी । फिर उसने अपने पेटीकोट को नीचे किया और बांध लिया । फिर साडी पहन कर व वहीँ बैठ के अपने भीगे कपडोँ को साफ कर के तैयार हो गई । फिर हम दोनोँ वापस घर की. और निकल पडे । घर पहुंचने तक मम्मी एकदम चुप रही न कुछ बोली और न कुछ मुझसे पुछी । शायद राज खुलने से मम्मी ऑपसेट थी । पर जब तक मम्मी मेरी और देखी मैँ घुम चुका था । और मेरे बर्ताव देखकर शायद मम्मी को यकिन. हो रहा था कि मैँने कुछ नहीँ देखा । घर पहुंच कर मम्मी ने पहले जैसा ही मेरे साथ बातचीत करने लगी, जैसे कुछ हुआ ही नहीँ । अब मम्मी को पुरी यकिन हो गया था कि मैँ कुछ देखता, इससे पहले ही व अपनी पेटीकोट पहन चुकी थी ।. अगले दिन डॉक्टर साहब अपने पत्नी और मौसी के साथ सुबह को ही किसी रिस्तेदार के यहां चले गए थे । उन्होँने मम्मी को भी चलने को कहा पर मम्मी मना कर दिया बोली, बहुत सारे कपडे साफ करने हैँ । घर पर मैँ और मम्मी रहे । मम्मी रसोई करने लगी । मैँने सोचा क्योँ न आज मेला घुम लिया जाये । मैँने मम्मी को बताया तो उसने कहा-. “बेटा मुझे बहुत काम है, तु ही चला जा ।” फिर मैँने कुछ नस्ता करने के बाद निकल गया और मम्मी को बताके आया कि शाम को लौटुंगा ।. मैँने मजे से मेले मेँ घुमने लगा । मेला बहुत छोटा था तो दो घंटे मेँ ही मैँ पुरा मेला दर्शन कर लिया फिर सोचा की घर ही लौट जाउं । घर मेँ मम्मी अकेली भी है, यहां शाम होने तक समय क्योँ नष्ट करुं । यही सोचकर मैँ वापस लौट आया । घर पहुंचने पर देखा मुख्य दरवाजा अंदर से बन्द था । मैँने मम्मी को आवाज लगाया । पर अंदर से कोई जवाब न आने पर मैँ पिछे के रास्ते से अंदर आ गया । मम्मी कहीँ दिखाई नहीँ दी । तभी. कुएं के पास से आवाजेँ आई तो मैंने उधर जाकर देखा तो मेरे होश उड गए ।. कुएं के पास मम्मी नहाने लगी थी । एक पुराने साडी को लपेट कर बाथरुम जैसा बनाया गया था, जिसका निचला हिस्सा से डेढ फुट के करीब खाली था । और निचे का सब कुछ साफ दिखाई दे रहा था । मम्मी बैठ के नहा रही थी । मुझे मम्मी के बडे-बडे चुतड साफ दिखाई दे रहे थे । मम्मी को नंगे नहाने की आदत पड चुकी थी, इसिलीए व अकेली होने पर सारे कपडे उतार के नहा रही थी । शायद मम्मी कपडे धो चुकी थी, अब नहाने लगी थी । मम्मी की गांड बैठने से और ज्यादा फैल गई थी, उसकी गांड थिरक रही थी । मैं बगीचे में अपने आपको छुपाते हुए निचे मम्मी की मस्त गांड देख रहा था । क्या उभरी हुई चौड़ी गांड थी मम्मी की । तभी मम्मी खडी हो गई, अब मुझे मम्मी की सिर्फ दो पैर ही दिखाई दे रहे थे । मेरा बैचनी बढ़ने लगा, जल्द से जल्द मम्मी फिर से बैठ जाये । मैंने अपनी नजरें गडाए रखा । तभी फिर से मम्मी बैठ गई, लेकिन अब की बार मम्मी मुड गई थी और मम्मी की लम्बा और मोटा लंड साफ दिखाई देने लगा था । मेरा तो उत्तेजना के मारे हालत ख़राब हो रहा था । बैठने से मम्मी की लंड निचे जमीन को छू रहा था । कितना लम्बा था मम्मी की लंड और साथ. में उतने ही बड़े अंडकोष । मम्मी की भारी गांड और साथ में विशाल लंड और अंडकोष । तभी मम्मी लंड की चमड़ी को निचे खिंच कर सुपाडा को बाहर किया और साबुन लेकर लंड पर रगड़ के खूब झाग बनाई और एक भीगे कपडे से. रगड़-रगड़ के लंड और गांड को साफ करने लगी ।. शहर में मम्मी नंगी बाथरूम में नहाती थी, इसीलिए जब उसे मौका मिला, गाँव में अकेली जी भर के नंगी हो कर नहा रही थी । मैं अब ज्यादा देर तक अपने आप को रोक नहीं पाया और धीरे से अपने कमरे में जाकर लंड का सारा मॉल खलास कर दिया । कुछ देर बाद मम्मी नहाना ख़तम करके अन्दर चली गई ।. इसी तरह गाँव में दिन बड़े मजे में गुजर रहा था की एक दिन रात को मेरी नीँद खुल गई, मुझे बडी प्यास लग रही थी । मैँने रसोई घर जाकर पानी पी ली । जब मैँ रसोई घर से लौट रहा था तो मुझे मम्मी के कमरे से कुछ बातेँ सुनाई दी । मुझे बडी हैरानी हुई, आधी रात को मम्मी किससे बात कर रही है ? मैँ मम्मी के कमरे की और गया । मम्मी का कमरा अंदर से बन्द था, मैँने दरवाजे के एक छेद से अंदर झांका । अंदर रोशनी लगी थी और ये क्या मम्मी के साथ कोई औरत बैठी हुई थी । मैँने उस औरत को पहचान लिया व कोई और नहीँ डॉक्टर साहब की पत्नी रामकली आंटी थी । पर रामकली आंटि इतनी रात गए मम्मी के कमरे मेँ क्या कर रही है ? अचानक ये सोचकर मेरा. शरीर उत्तेजना मेँ कांपने लगा कि कहीँ मम्मी रामकली को चोदनेवाली तो नहीँ है ? क्योँकि पिछले कुछ दिनोँ से मम्मी और रामकली आंटी वापस मेँ बहुत ज्यादा धुल-मिल गई थीं ।. मेरा निंद एकदम उड गया था और मैँने अंदर का नजारा देखने लगा । मम्मी और रामकली वापस में कुछ बातें कर रहे थे, मम्मी ने अपने दोनों हथेलियो में रामकली आंटी की चुचियों भर ली थी और उन्हें खूब कस कस के दबाने लगी । उसके मोटे मोटे निपल भी ब्लाउस के उपर से पकड में आ रहे थे । मम्मी दोनो निपल के साथ साथ पूरी चुचि को ब्लाउस के उपर से पकड कर दबाए जा रही थी । रामकली की मुंह से अब सिस्कारियां निकलने लगी थी और. मम्मी उसकी उत्साह बढाती जा रही थी । फिर मम्मी ने अपने कांपते हाथों को रामकली आंटी के चिकने जांघों पर रख दिया और थोडा सा झुक गई । उसके बुर के बालों के बीच एक गहरी लाल लकीर से चीरी हुई थी । मम्मी ने. अपने दाहिने हाथ को जांघ पर से उठा कर रामकली आंटी की चूत के उपर रख दिया । कुछ देर बुर को मसलने के बाद मम्मी और निचे झुकते हुए अपनी जीभ निकल ली और रामकली आंटी की बुर पर अपने ज़ुबान को फिरना शुरू कर दिया. ।. अंदर का नजारा देख कर मेरा लंड कबसे कडा हो चुका था । फिर पूरी चूत के उपर मम्मी की जीभ चल रही थी और रामकली आंटी की फूली हुई गद्देदार बुर को अपनी खुरदरी ज़बान से उपर से नीचे तक चाट रही थी । अपनी जीभ को. दोनों फांको के उपर फेरते हुए मम्मी ठीक बुर के दरार पर अपनी जीभ रखी और धीरे धीरे उपर से नीचे तक पूरे चूत की दरार पर जीभ को फिराने लगी । रामकली की बुर से रिस रिस कर निकालता हुआ रस जो बाहर आ रहा था उसका. नमकीन स्वाद मम्मी को मिल रही थी । जीभ जब चूत के उपरी भाग में पहुच कर क्लिट से टकराती थी तो रामकली आंटी की सिसकियां और भी तेज हो जाती थी । पूरी बुर को एक बार रसगुल्ले की तरह से मुंह में भर कर चूसने के. बाद मम्मी ने अपने होंठों को खूल कर बुर के चोदने वाले छेद के सामने टिका दी और बुर के दोनों फांकों को फैला कर अपनी जीभ को रामकली की बुर में पेल दी ।.
स्रोत:इंटरनेट