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Meri Pyasi Saali Virgin Sex Stories 2

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थोड़ी देर में कल्पना आई और बोली- आप ऊपर आ कर क्यों बैठ गए?. मैंने मुँह फुला कर कहा- आपको तो हमारी कोई फ़िक्र है नहीं ! इसलिए क्या करें ? आप जाईये और अपना काम कीजिये !. इतना कहते ही उसका मुँह उतर गया, वो मेरे पास आई और मेरा हाथ पकड़ कर बोली- जीजाजी, आप तो नाराज हो गए ! अब आप जैसा कहेंगे, मैं वैसा ही करूंगी ! मैंने कहा- वो तो हमने देख लिया ! हम तो सिर्फ आपको प्यार करना चाहते थे, लेकिन आपने मेरा मूड ही ख़राब कर दिया है, क्या यह सब आपको अच्छा नहीं लगता है? वो एकदम मेरे पास आई और मेरे गले में बांहें डाल कर बोली- सॉरी जीजाजी ! मुझे अच्छा तो लगता है लेकिन डर भी लगता है कि कुछ हो गया तो या फिर दीदी को पता लग गया तो क्या होगा?. मैं बोला- जीजा और साली तो ऐसे मौके की तलाश में रहते हैं ! और एक तुम हो कि भाव खा रही हो?. तो वो बोली- सॉरी बाबा ! गलती हो गई ! अब आपको जो अच्छा लगे !. यह कह कर उसने मेरे होठों को चूमना शुरू कर दिया।. मेरा दिल तो बाग़ बाग़ हो गया, मैंने पहली बार सीधे उसकी कुर्ती में हाथ डाला और ब्रा के ऊपर से उसके मम्मे को दबाने लगा। उसने कुछ नहीं कहा तो मैंने अपना एक हाथ पीठ के पीछे ले जाकर उसकी ब्रा का हुक खोल दिया और उसकी कुर्ती को ऊपर उठा दिया।. वाह ! क्या नजारा था !. उसके दूधिया मम्मों को देख कर तो मैं पागल हो गया, मैंने उसे वहीं लिटाया और उसके एक मम्मे को मुँह में और दूसरे को हाथ से मसलने लगा। मेरा लंड तो एकदम फुफकारें मारने लगा। मैंने उसका एक हाथ पकड़ कर अपने लंड पर रख दिया। उसने कांपते हाथों से उसे पकड़ लिया। मैंने दूसरा हाथ सीधा उसकी चूत पर रखा और सलवार के ऊपर से ही उसकी चूत को सहलाने लगा।. उसके मुँह से सिसकारियाँ निकलने लगी। उसकी सलवार भी गीली होने लगी।. चूँकि मेरी बीवी के वापस आने का वक्त हो गया था, इसलिए मैंने उसे कहा- कल्पना, तुम्हारी दीदी के आने का वक्त हो रहा है,चूँकि बीवी के वापस आने का वक्त हो गया था, इसलिए मैंने उसे कहा- कल्पना, तुम्हारी दीदी के आने का वक्त हो रहा है, जल्दी जल्दी में मजा भी नहीं आएगा इसलिए कल मौका निकाल कर तैयार रहना ! साली साहिबा पहली पहली बार अपने जीजा से अपनी चूत का उदघाटन करवाने जा रही हैं, तो आराम से फीता काटेंगे ! उसने मेरे होठों को चूमा और बोली- आई लव यू जीजाजी !. और अपने कपड़े ठीक करने लगी तो मैंने कहा- मैडम ! जाने से पहले इन लंड महाराज को तो शांत करती जाओ !. ऐसा कहकर मैंने अपना लंड निकाल कर उसके हाथों में थमा दिया।. उसने लंड देख कर कहा- जीजाजी, कल तो मेरा काम तमाम होने वाला है ! तो मैंने कहा- एक बार स्वाद चखने के बाद दूसरा पसंद ही नहीं आएगा !. तो उसने कहा- देखेंगे कि कितना दम है ?. उसने अपने नाजुक नाजुक हाथों से लंड को मसलना शुरू किया। थोड़ी ही देर में मेरे लंड ने पिचकारी मारना शुरू ही किया था कि दरवाजे की घंटी बजी। उसने जल्दी से अपने कपड़े व मेकअप ठीक किया और नीचे भाग गई।. मैं भी सोने का नाटक करने लगा।. दूसरे दिन मैं मौके की तलाश में था कि कब बीवी और सास का कहीं जाने का कार्यक्रम बने और कब मुझे साली की चुदाई करने का अवसर मिले !. दोपहर तक मैं कुछ नहीं कर पाया, लेकिन जैसे ही सास ने कहा कि कल तो आप लोग चले जायेंगे इसलिए मैं नीता (मेरी बीवी) को लेकर सब स्थानीय रिश्तेदारों से मिला लाती हूँ। मैंने कहा- ठीक है, लेकिन जल्दी आना ! तो मेरी सास ने कहा- फिर भी 2-3 घंटे तो लग ही जायेंगे।. यह कहकर वो लोग चले गए और मुझे तो जैसे मन मांगी मुराद मिल गई।. मैंने साली को आँख मारी और ऊपर आने का इशारा किया तो उसने शरमा कर इशारा किया कि अभी पांच मिनट में आती हूँ।. इन्तजार में मेरी हालत ख़राब हो रही थी क्योंकि लंड महाराज फुंफकार रहे थे कि उन्हें जल्दी से जल्दी बिल में जाना है।. तभी साली साहिबा का आगमन हुआ।. कसम खुदा कि क्या सज धज कर आई थी !. कमरा परफ्यूम की महक से भर गया। मैंने उसका हाथ पकड़ कर सीधा अपने ऊपर गिरा लिया और उसके होठों को चूमने लगा।. उसने भी अपनी बाहें मेरे गले में डाली और अपनी जीभ मेरे मुँह में डाल कर प्यार से चुसवाने लगी। मैंने हाथ नीचे करके उसके दोनों मम्मों को पकड़ा और जोर जोर सें मसलने लगा तो उसने कहा- जीजा जी ! जरा प्यार से. !. मैंने उसे बैठाया और उसके टॉप के बटन खोल कर उसके बदन से अलग किया। उसने काले रंग की ब्रा पहनी थी, उसके गोरे बदन पर काले रंग की ब्रा क़यामत लग रही थी। मैंने अपने हाथ पीछे ले जाकर उसकी ब्रा का हुक खोलकर उसके दोनों कबूतरों को आजाद कर दिया, उसके दोनों मम्मे स्प्रिंग की तरह उछल कर बाहर आ गए। मैंने सीधे उसका एक मम्मा मुँह में लिया और दूसरे को हाथ से सहलाने लगा। उसका चुचूक एकदम लाल और दाना छोटे मटर के आकार का था। मैं चूस चूस कर उसके पूरे मम्मे पर लाल-लाल निशान बनाता रहा और वो सिसकारियाँ भरती हुई मेरे बालों को सहलाती रही।. जब बोबे पीकर मन भर गया तो मैंने उसको छोड़ा।. तो उसने अपने दोनों मम्मों को देख कर कहा- उफ़ जीजाजी ! यह आपने क्या किया? पूरे मम्मों पर निशान बना दिए? किसी ने देख लिया तो क्या होगा?. मैंने हंसकर कह कहा- घबराओ मत ! ये तो तीन चार दिन में मिट जायेंगे ! लेकिन जब भी इन्हें देखोगी तो मेरी याद तो आयेगी।. तो उसने शरमा कर कहा- आपको तो हम वैसे भी कभी नहीं भूलेंगे !. यह कह कर मुझसे लिपट गई। मैं उसकी पीठ पर हाथ फिराते हुए धीरे धीरे उसकी उसकी मस्त गांड को दबाने लगा फिर उसे सीधा किया और उसकी जींस के बटन खोलने लगा।. उसने शरमा कर अपना मुँह मेरे सीने में छुपा लिया, उसकी सांसें तेज तेज चल रही थी। मैंने धीरे धीरे उसकी जींस को उसके पैरों से निकाला, वो आँखें बंद करके मुझसे लिपटी हुई थी, उसका दिल बुरी तरह धड़क रहा था, जींस निकाल कर मैंने उसकी चड्डी में हाथ डाल कर उसकी चड्डी भी निकाल दी। वो बुरी तरह सें कांप रही थी।. मैंने धीरे से उसकी पीठ पर हाथ फिराया तो वो बोली- जीजाजी, मुझे बहुत डर लग रहा है। मैंने कहा- इसमें डरने की क्या बात है? तुम यह सब पहली बार करवा रही हो इसलिए ऐसा सोच रही हो ! एक बार आनंद-सागर में गौता लगा लोगी तो मुझे बार बार याद करोगी !. यह कहकर मैंने भी अपने कपड़े निकाले और उसका हाथ पकड़ कर अपने लंड पर रख दिया।. उसने कांपते हाथों से उसे पकड़ लिया और धीरे धीरे सहलाने लगी।. मैंने अपना एक हाथ नीचे ले जाकर उसकी चूत पर रखा। वाह ! क्या गद्दीदार चूत थी ! एकदम चिकनी और पूरी तरह से गीली !. मैंने धीरे-धीरे उसकी चूत सो सहलाते हुए उसके दाने को चुटकी में पकड़ कर दबाया तो वो चिहुंक कर मुझसे और जोर से लिपट गई।.
स्रोत:इंटरनेट