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Meri Randi Saheli Forced Sex Story 2

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“क्या?” मैंने पूछा।. “तुम!” उसने कहा तो मैं उछल पड़ी। “क्या? क्या कहा?” मेरा मुँह खुला का खुला रह गया।. “हाँ उसने कहा है कि वो मुझ से तभी शादी कर सकता है जब मैं तुझे उसके पास ले जाऊँ”. “और तूने… तूने मान लिया?” मैं चिल्लाई।. “धीरे बोल मम्मी को पता चल जायेगा। वो तुझे एक बार प्यार करना चाहता है। मैंने उसे बहुत समझाया मगर उसे मनाना मेरे बस में नहीं है।”. “तुझे मालूम है तू क्या कह रही है?” मैंने गुर्रा कर उस से पूछा।. “हाँ… मेरी प्यारी सहेली से मैं अपने प्यार की भीख माँग रही हूँ। तू केशव के पास चली जा… मैं तुझे अपनी भाभी बना लुँगी।”. मेरे मुँह से कोई बात नहीं निकली। कुछ समझ में ही नहीं आ रहा था कि ये क्या हो रहा है।. “अगर तूने मुझे बर्बाद किया तो मैं भी तुझे कोई मदद नहीं करूँगी।”. मैं चुपचाप वहाँ से उठकर घर चली आयी। मुझे कुछ नहीं सूझ रहा था कि क्या करूँ। एक तरफ कुआँ तो दूसरी तरफ खायी। राघव के बिन मैं नहीं रह सकती और उसके साथ रहने के लिये मुझे अपनी सबसे बड़ी दौलत गँवानी पड़ रही. थी। रात को काफी देर तक नींद नहीं आयी। सुबह मैंने एक फैसला कर लिया। मैं रिटा से मिली और कहा, “ठीक है तू जैसा चाहती है वैसा ही होगा। केशव को कहना मैं तैयार हूँ।” वो सुनते ही खुशी से उछल पड़ी। “लेकिन सिर्फ एक बात और… किसी को पता नहीं चलना चाहिये… एक बात और…।”. “हाँ बोल जान तेरे लिये तो जान भी हाजिर है।”. “उसके बाद तू मेरी शादी अपने भाई से करवा देगी और तेरी शादी होती है या नहीं मैं इसके लिये जिम्मेदार नहीं होऊँगी” मैंने उससे कहा। वो तो उसे पाने के लिये कुछ भी करने को तैयार थी।. रिटा ने अगले दिन मुझे बताया कि केशव मुझसे होटल ललित में मिलेगा। वहाँ उसका सुइट बुक है। शनिवार शाम आठ बजे वहाँ पहुँचना था। रिटा ने मेरे घर पर चल कर मेरी मम्मी को शनिवार की रात को उसके घर रुकने के लिये. मना लिया। मैं चुप रही। शनिवार के बारे में सोच-सोच कर मेरा बुरा हाल हो रहा था। समझ में नहीं आ रहा था की मैं ठीक कर रही हूँ या नहीं।. शनिवार सुबह से ही मैं कमरे से बाहर नहीं निकली। शाम को रिटा आयी। उसने मम्मी को मनाया अपने साथ ले जाने के लिये। उसने मम्मी से कहा कि दोनों सहेलियाँ रात भर पढ़ाई करेंगी और मैं उसके घर रात भर रुक जाऊँगी।. उसने बता दिया कि वो मुझे रविवार को छोड़ जायेगी। मुझे पता था कि मुझे शनिवार रात उसके साथ नहीं बल्कि उस आवारा केशव के साथ गुजारनी थी।. हम दोनों तैयार होकर निकलीं। मैंने हल्का सा मेक-अप किया। एक सिम्पल सा कुर्ता पहन कर निकलना चाहती थी मगर रिटा मुझसे उलझ पड़ी। उसने मेरा सब से अच्छा सलवार-कुर्ता निकाल कर मुझे पहनने को दिया और मुझे खूब. सजाया और ऊँची हील के सैंडल अपने हाथों से मुझे पहनाये। फिर हम निकले। वहाँ से निकलते-निकलते शाम के साढ़े सात बज गये थे। “रिटा मुझे बहुत घबड़ाहट हो रही है। वो मुझे बहुत जलील करेगा। पता नहीं मेरी क्या. दुर्गती बनाये।” मैंने रिटा का हाथ दबाते हुए कहा।. “अरे नहीं मेरा केशू ऐसा नहीं है!”. “ऐसा नहीं है… साला लोफर… मैं जानती हूँ कितनी लड़कियों से उसके संबंध हैं। तू वहाँ मेरे साथ रहेगी। रात को तू भी वहीं रुकेगी। नहीं तो मैं नहीं जाऊँगी।”. “अरे नहीं मैं तेरे साथ ही रहूँगी। घबड़ा मत… मैं उसे समझा दुँगी। वो तेरे साथ बहुत अच्छे से पेश आयेगा।”. हम ऑटो लेकर होटल ललित पहुँचे। वहाँ हमें सुइट नम्बर दौ-सौ-आठ के सामने पहुँचा दिया गया। रिटा ने डोर-बेल पर अँगुली रखी। बेल की आवाज हुई और कुछ देर बाद दरवाजा थोड़ा सा खुला। उसमें से केशव का चेहरा दिखा।. “गुड गर्ल!” उसने मुझे ऊपर से नीचे तक देखा और अपने होंठों पर जीभ फ़िरायी। मुझे लगा मानो मैं उसके सामने नंगी ही खड़ी हूँ। “आओ अंदर आ जाओ” उसने दरवाजे को थोड़ा सा खोला। मैं अंदर आ. गयी। मेरे अंदर आते ही दरवाजे को बँद करने लगा।. रिटा ने आवाज लगायी “केशू मुझे भी तो आने दो।”. “तेरा क्या काम है यहाँ। चल भाग जा यहाँ से… कल सुबह आकर अपनी सहेली को ले जाना” कह कर भड़ाक से उसने दरवाजा बँद कर दिया। मैंने चारों और देखा। अंदर अँधेरा हो रहा था। एक डेकोरेटिव स्पॉट. लाईट कमरे के बीचों बीच गोल रोशनी का दायरा बना रही थी। कमरा पूरा नज़र नहीं आ रहा था। उसने मेरी बाँह पकड़ी और खींचता हुआ उस रोशनी के दायरे में ले गया।. “बड़ी शेरनी बनती है। आज तेरे दाँत ऐसे तोड़ुँगा कि तेरी कीमत दो टके की भी नहीं रह जायेगी।” मैं अपने आप को समेटे हुए खड़ी हुई थी। उसने मुझे खींच कर अपने सीने से लगा लिया और मेरे होंठों पर अपने. मोटे होंठ रख दिये। उसकी जीभ मेरे होंठों को एक दूसरे से अलग कर मेरे मुँह में प्रवेश कर गयी। शराब की तेज बू आ रही थी उसके मुँह से। शायद मेरे आने से पहले पी रहा होगा। वो मेरे मुँह का कोई कोना अपनी जीभ. फिराये बिना नहीं छोड़ना चाहता था। एक हाथ से मेरे बदन को अपने सीने पर भींचे हुए था और दूसरे हाथ को मेरी पीठ पर फेर रहा था। अचानक मेरे चूत्तड़ों को पकड़ कर उसने जोर से दबा दिया और अपने से सटा लिया। मैं. उसके लंड को अपनी चूत के ऊपर सटा हुआ महसूस कर रही थी। मैं उस के चेहरे को दूर करने की कोशिश कर रही थी मगर इसमे सफल नहीं हो पा रही थी। उसने मुझे पल भर के लिये छोड़ा और मेरे कुर्ते को पकड़ कर ऊपर कर दिया।. मैं सहमी सी हाथ ऊपर कर खड़ी हो गयी। उसने कुर्ते को बदन से अलग कर दिया। फिर मेरी ब्रा में ढके दोनों बूब्स को पकड़ कर जोर से मसल दिया। इतनी जोर से मसला कि मेरे मुँह से “आआआआहहहह” निकल गयी।. उसने मेरी दोनों चूचियों के बीच से ब्रा को पकड़ कर जोर से झटक दिया। ब्रा दो हिस्सों में अलग हो गयी। मेरे बूब्स उसकी आँखों के सामने नग्न हो गये। उसने मेरे बदन से ब्रा को उतार कर फेंक दिया और दोबारा मेरे. निप्पलों को पकड़ कर जोर-जोर से मसलने लगा। “ऊओफफफफ प्लीज़ज़ज़….
प्लीज़ धीरे करो” मैंने दर्द से तड़पते हुए कहा। “क्यों भूल गयी अपने झापड़ को। आज भी मैं भूला नहीं हूँ वो बे-इज्जती। आज तेरे परों को ऐसे कुतर दुँगा कि तू कभी अपना सिर उठा कर बात नहीं कर पायेगी। सारी ज़िंदगी मेरी राँड बन कर रहेगी” कह कर वो. मेरी एक छाती को अपने मुँह में लेकर चूसने लगा।. उसने मेरी सलवार के नाड़े को एक झटके में तोड़ दिया। सलवार सरसराती हुई मेरे कदमों पर ढेर हो गयी। “मैं ऐसा ही हूँ। जो भी मेरे सामने खुलने में देर लगाती है उसे मैं तोड़ देता हूँ।” उसने मेरी एक. बाँह पकड़ कर उमेठ दी। मैं दर्द के मारे पीछे घूम गयी। उसने जमीन से मेरी चुन्नी उठा कर मेरे दोनों हाथ पीछे की और करके सख्ती से बाँध दिये। अब मैं उसे रोकने की स्तिथि में भी नहीं रही। उसने लाईट का स्विच ऑन. कर दिया। पूरा कमरा रोशनी से जगमगा उठा। सामने सोफे पर एक और आदमी बैठा हुआ था। “इसे तो तुम पहचानती होगी। मेरा दोस्त सुरेश। आज तेरा गुरूर हम दोनों अपने कदमों से कुचलेंगे।”.
स्रोत:इंटरनेट