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Meri Randi Saheli Forced Sex Story

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हेल्लो दोस्तों, ये forced sex story मेरे साथ हुई ज्यादती की कहानी है। कैसे मेरी सहेली अपनी लाइफ बनाने के लिए मेरी लाइफ को बर्बादी की तरफ ले जाती है। एक बहुत की रोचक sex kahani.. Hindi Sex Story के अन्य भाग-. पार्ट 1. पार्ट 2. पार्ट 3. पार्ट 4. मैं प्रतिमा हूँ। तैंतीस साल की बहुत ही खूबसूरत महिला। मेरे पति राघव बिज़नेस-मैन हैं। मैं आपको उस घटना के बारे में बताना चाहती हूँ जो आज से कोई दस साल पहले घटी थी। इस घटना ने मेरी ज़िंदगी ही बदल दी। मेरे. जिसमानी सम्बंध मेरी सहेली के पति से हैं और इसके लिये वो ही दोषी है। मेरे दो बच्चों में एक का पिता मेरे पति नहीं बल्कि मेरी सहेली का पति है। उस समय मैं पढ़ाई कर रही थी। मेरी एक प्यारी सी फ्रैंड थी, नाम था रिटा। वैसे आजकल वो मेरी ननद है। राघव रिटा का ही भाई है। रिटा के भाई से शादी करने के लिये मुझे एक बड़ी कीमत चुकानी पड़ी।. हम दोनों कॉलेज में साथ-साथ पढ़ते थे। हमारी जोड़ी बहुत मशहूर थी। दोनों ही बहुत खूबसूरत और छरहरे बदन की थी। बदन के कटाव बड़े ही सैक्सी थे। मेरे चूचियाँ रिटा से भी बड़ी-बड़ी थी। लेकिन एक दम टाईट थी। हम अक्सर. एक दूसरे के घर जाती थीं। मेरा रिटा के घर जाने का मक्सद एक और भी था… उसका भाई राघव। वो मुझे बहुत अच्छा लगता था। उस समय वो बी-टेक कर रहा था। बहुत ही हेंडसम और खूबसूरत शख्सियत का मालिक था। मैं उससे. मन ही मन प्यार करने लगी थी। राघव भी शायद मुझे पसंद करता था। लेकिन मुँह से कभी कहा नहीं। मैंने अपना दिल रिटा के सामने खोल दिया था। हम आपस में लड़कों की बातें भी करती थी। मुसीबत तब आयी जब रिटा केशव के. प्यार में पड़ गयी। केशव कॉलेज युनियन का लीडर था। उसमें हर तरह की बुरी आदतें थी। वो एक अमीर बाप की बिगड़ी हुई औलाद था। उसके पिताजी एक जाने माने उद्योगपति थे। अनाप शनाप कमाई थी। और बेटा उस कमाई को अपनी. अय्याशियों में खर्च कर रहा था। दो साल से फेल हो रहा था। मैं उससे बुरी तरह नफ़रत करती थी। केशव मुझ पर भी गंदी नज़र रखता था। मगर मैं उससे दूर ही रहती थी। रिटा पता नहीं कैसे उसके प्यार में पड़ गयी। मुझे पता. चला तो मैंने काफी मना किया लेकिन उसने मेरी बात की बिल्कुल भी परवाह नहीं की। वो तो केशव की लछेदार बातों के भुलावे में ही खोयी हुई थी। एक दिन उसने मुझे बताया कि उसके साथ केशव के शारीरिक सम्बंध भी हो. चुके हैं। मैंने उसे बहुत बुरा भला कहा मगर वो थी मानो चिकना घड़ा। उस पर कोई भी बात असर नहीं कर रही थी।. एक दिन मैं अकेली स्टूडेंट रूम में बैठी कुछ तैयारी कर रही थी। अचानक केशव वहाँ आ गया। उसने मुझ से बात करने की कोशिश की मगर मैंने अपना सिर घुमा लिया। उसने मुझे बाँहों से पकड़ कर उठा दिया।. “क्या बात है क्यों परेशान कर रहे हो।”. “तू मुझे बहुत अच्छी लगती है।”. “मैं तेरे जैसे आदमी के मुँह पर थूकना भी पसंद नहीं करती।” मैंने कहा तो वो गुस्से से तिलमिला गया। उसने मुझे खींच कर अपनी बाँहों में ले लिया और तपाक से एक चुंबन मेरे होंठों पर दे दिया। मैं एक. दम हकबका गयी। मुझे विश्वास नहीं था की वो किसी कॉमन जगह पर ऐसा भी कर सकता है। इससे पहले कि मैं कुछ संभलती, उसने मेरे दोनों बूब्स पकड़ कर मसल दिये। मैं फोरन होश में आयी। मैंने एक जबरदस्त चाँटा उसके गाल पर रसीद कर दिया। पाँचों अँगुलियाँ छप गयी थीं गाल पर। वो तिलमिला गया। “कुत्ते मुझे कोई बाजारू लड़की मत समझना जो तेरी बाँहों में आ जाऊँगी” उसे भी मुझसे ऐसी हरकत की शायद उम्मीद नहीं थी। वो अभी. अपने गाल सहलाता हुआ कुछ कहता कि तभी किसी के कदमों की आवाज सुनकर वो वहाँ से भाग गया।. मेरा उस पूरे दिन मूड खराब रहा। ऐसा लग रहा था जैसे वो अभी भी मेरे बूब्स को मसल रहा हो। बहुत गुस्सा आ रहा था। दोनों बूब्स छूने से ही दर्द कर रहे थे। घर पहुँच कर अपने कमरे में जब कपड़े उतार कर अपनी गोरी. छातियों को देखा तो रोना आ गया। छातियों पर मसले जाने के नीले-नीले निशान दिख रहे थे।. शाम को रिटा अयी। “आज सुना है तू केशू से लड़ पड़ी?” उसने मुझसे पूछा।. “लड़ पड़ी? मैंने उसे एक जम कर चाँटा मारा। और अगर वो अब भी नहीं सुधरा तो मैं उसका सैंडलों से स्वागत करूँगी… साला लोफर”. “अरे क्यों गुस्सा करती है? थोड़ा सा अगर छेड़ ही दिया तो इस तरह क्यों बिगड़ रही है। वो तेरा होने वाला नंदोई है। रिश्ता ही कुछ ऐसा है कि थोड़ी बहुत छेड़छाड़ तो चलती ही रहती है,” उसने कहा। “थोड़ी छेड़ छाड़… मॉय फ़ुट। देखेगी क्या किया उस तेरे आवारा आशिक ने?” मैंने कहकर अपनी कमीज़ ऊपर करके उसे अपनी छातियाँ दिखायीं। “चचचच कितनी बुरी तरह मसला है केशू ने” वो हँस रही. थी। मुझे गुस्सा आ गया मगर उसकी मिन्नतों से मैं आखिर हँस दी। लेकिन मैंने उसे चेता दिया “अपने उस आवारा आशिक को कह देना मेरे चक्कर में नहीं रहे। मेरे आगे उसकी नहीं चलनी”. बात आयी गयी हो गयी। कुछ दिन बाद मैंने महसूस किया कि रिटा कुछ उदास रहने लगी है। मैंने कारण जानने की कोशिश की मगर उसने मुझे नहीं बताया। मुझ से उसकी उदासी देखी नहीं जाती थी। एक दिन उसने मुझ से कहा. “तेरे प्रेमी के लिये लड़की ढूँढी जा रही है।”. मैं तो मानो आकाश से जमीन पर गिर पड़ी “क्या?”. “हाँ। भैया के लिये रिश्ते आने शुरू हो गये। जल्दी कुछ कर नहीं तो उसे कोई और ले जायेगी और तू हाथ मलती रह जायेगी।”. “लेकिन मैं क्या करूँ?”. “तू भैया से बात कर”. मैंने राघव से बात की। लेकिन वो अपने मम्मी पापा को समझाने में अस्मर्थ था। मुझे तो हर तरफ अँधेरा ही दिख रहा था। तभी रिटा एक रोशनी की किरण की तरह आयी। “बड़ी जल्दी घबड़ा गयी? अरे हिम्मत से काम. ले।”. “मगर मैं क्या करूँ? राघव भी कुछ नहीं कर पा रहा है।”. “मैं तेरी शादी राघव से करवा सकती हूँ।” रिटा ने कहा तो मैं उसका चेहरा ताकने लगी। “लेकिन… क्यों?”. “क्यों? मैं तेरी सहेली हूँ… हम दोनों ज़िंदगी भर साथ रहने की कसम खाती थीं। भूल गयी?”. “मुझे याद है सब लेकिन तुझे भी याद है या नहीं मैं देख रही थी।” उसने कहा, “मैं मम्मी पापा को मना लुँगी तुम्हारी शादी के लिये मगर इसके बदले तुझे मेरा एक काम करना होगा” “हाँ बोल ना क्या चाहती है मुझसे” मुझे लगा जैसे जान में जान आयी हो।. “देख तुझे तो मालूम ही है कि मैं और केशव सारी हदें पार कर चुके हैं। मैं उसके बिना नहीं जी सकती” उसने मेरी और गहरी नज़र से देखा, “तू मेरी शादी करवा दे मैं तेरी शादी करवा दुँगी।” “मैं तेरे मम्मी पापा से बात चला कर देखुँगी” मैंने घबड़ाते हुए कहा।. “अरे मेरे मम्मी पापा को समझाने की जरूरत नहीं है। ये काम तो मैं खुद ही कर लुँगी,” उसने कहा। “फिर क्या परेशानी है तेरी?”. “केशव!” उसने मेरी आँखों में आँखें डाल कर कहा, “केशव ने मुझसे शादी करने की एक शर्त रखी है।”
स्रोत:इंटरनेट