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Mohalle Ki Hot Doctor Sex 2

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फिर मैंने कहा, “डॉक्टर… क्या करूँ?” वो बेबसी से बोली… “क्या बताऊँ?”. मैने फिर दुख भरा लहजा अपनाया और बोला… “कोई ऐसी दवा दीजिये न… जिससे मेरे लिंग… यानी मेरे पेनिस का साइज़ कम हो जाये…।”. उसके चेहरे पर फिर अजीब से भाव दिखायी दिये। वो बोली, “ये तुम क्या कह रहे हो… लोग तो…” “हाँ डॉक्टर… लोग तो साइज़ बड़ा करना चाहते हैं… लेकिन मैं साइज़ छोटा करना चाहता हूँ… शायद इससे मेरी उलझन कम हो जाये… मतलब ये कि अगर साइज़ छोटा हो जायेगा तो ये पैंट के अंदर आराम से. रहेगा और लोगों की नज़रें भी नहीं पड़ेंगी…।”. वो धीरे से सर झुका कर बोली… “क्या… क्या साइज़ है… इसका?”. “ग्यारह इंच डॉक्टर…” मैंने कुछ यूँ सरलता से कहा, जैसे ये कोई बड़ी बात न हो। उसकी आँखें फट गयीं और हैरत से मुँह खुल गया। “क्या?… ग्यारह इंच???”. “हाँ डॉक्टर… क्यों आपको इतनी हैरत क्यों हो रही है…?”. “ऑय काँट बिलीव इट!!!”. मैंने आश्चर्य से कहा… “ग्यारह इंच ज्यादा होता है क्या डॉक्टर…? आमतौर पर क्या साइज़ होता है…?”. “हाँ?… आमतौर पर …???” वो बगलें झांकने लगी और फिर बोली… “आमतौर पर छः-सात-आठ इंच।”. “ओह गॉड!” मैं नकली हैरत से बोला… “तो इसका मयलब है मेरा साइज़ एबनॉर्मल है! मैं सर पकड़ कर बैठ गया।“. उसकी समझ में भी नहीं आ रहा था कि वो क्या बोले।. फिर मैंने अपना सर उठाया और भर्रायी आवाज़ में बोला… “डॉक्टर… अब मैं क्या करूँ…?”. “ऑय काँट बिलीव इट…” वो धीरे से बड़बड़ाते हुए बोली।. “क्यों डॉक्टर… आखिर क्यों आपको यकीन नहीं आ रहा है… आप चाहें तो खुद देख सकती हैं…दिखाऊँ???”. वो जल्दी से खड़ी हो गयी और घबड़ा कर बोली… “अरे नहीं नहीं… यहाँ नहीं…” फिर जल्दी से संभल कर बोली… “मेरा मतलब है… ठीक है… मैं तुम्हारे लिये कुछ सोचती हूँ… अब तुम. जाओ…”. मैंने अपने चेहरे पर दुनिया जहान के गम उभार लिये और निराश हो कर बोला… “अगर आप कुछ नहीं करेंगी… तो फिर मुझे ही कुछ करना पड़ेगा…” मैं उठ गया और जाने के लिये दरवाजे की तरफ बढ़ा तो वो. रुक-रुक कर बोली… “सुनो… तुम… तुम क्या करोगे?”. मैं बोला… “किसी सर्जन के पा जा कर कटवा लूँगा…”. “व्हॉट??? आर यू क्रेज़ी? पागल हो गये हो क्या?”. मैं फिर कुर्सी पर बैठ गया और सर पकड़ कर मायूसी से बोला… “तो बोलो ना डॉक्टर… क्या करूँ?”. वो फिर बाहर झांक कर देखने लगी कि कहीं कोई पेशेंट तो नहीं आ गया। कोई नहीं था… फिर वो बोली, “सुनो… जब ऐसा हो… तो…” “कैसा हो डॉक्टर?” मैंने पूछा।. “मतलब जब भी इरेक्शन हो…”. “इरेक… क्या कहा?”. “यानी जब भी… वो… तन जाये… तो मास्टरबेट कर लेना…” वो फिर यहाँ-वहाँ देखने लगी।. “क्या कर लेना…?” मैंने हैरत से कहा… “देखिये डॉक्टर, मैं इतना पढ़ा लिखा नहीं हूँ… ये मेडिकल शब्द मेरी समझ में नहीं आते…” वो सोचने लगी और फिर बोली, “मास्टरबेट यानी… यानी मुश्तज़नी… या हाथ… मतलब हस्त…हस्त-मैथुन!” मैं फिर आश्चर्य से उसे देखने लगा… “क्या? ये क्या होता है???”. “अरे तुम इतना भी नहीं जानते?” वो झुंझला कर बोली।. मैं अपने माथे पर अँगुली ठोंकता हुआ सोचने के अंदाज़ में बोला… “कोई एक्सरसाइज़ है क्या?”. वो मुस्कुराने लगी और बोली… “हाँ, एक तरह की एक्सरसाइज़ ही है…” “अरे डॉक्टर!” मैंने कहा… “अब दुकान में कहाँ कसरत-वसरत करूँ?”. वो हँसने लगी और बोली… “क्या तुम सचमुच मास्टरबेट नहीं जानते?”. “नहीं डॉक्टर!”. “क्या उम्र है तुम्हारी?”. “उन्नीस साल!”. “अब तक मास्टरबेट नहीं किया?”. “आप सही तरह से बताइये तो सही… कि ये आखिर है क्या?”. “अरे जब…” वो फिर झेंप गयी और बगलें झाँकने लगी और फिर अचानक उसे कुछ याद आया और वो झट से बोली… “हाँ याद आया… मूठ मारना… क्या तुमने कभी मूठ नहीं मारी…?”. मैं सोचने लगा… और फिर कहा, “नहीं… मैं अहिंसा वादी हूँ… किसी को मारता नहीं…!” “पागल हो तुम…” वो फिर हंस पड़ी… “या तो तुम मुझे उल्लू बना रहे हो… या सचमुच दीवाने हो…!”. मैंने फिर अपने चेहरे पर दुखों का पहाड़ खड़ा कर लिया। वो मुझे गौर से देखने लगी। शायद ये अंदाज़ा लगाने की कोशिश कर रही थी कि मैं सच बोल रहा हूँ या उसे बेवकूफ बना रहा हूँ।. फिर वो गंभीर हो कर बोली… “ये बताओ… जब तुम्हारा पेनिस खड़ा हो जाता है और तुम अकेले होते हो… बाथरूम वगैरह में… या रात को बिस्तर पर… तो तुम उसे ठंडा करने के लिये क्या करते. हो?”. “ठंडा करेने के लिये???”. “हाँ… ठंडा करेने के लिये…!”. “मैं सुमिता आंटी से कहता हूँ कि वो मेरे लिंग को अपने मुँह में ले लें और खूब जोर-जोर से चूसे…!”. वो थूक निगलते हुए बोली… “सुमिता आंटी…??? आंटी कौन?”. “मेरे घर की मालकीन… मैं उनके घर में ही पेइंग गेस्ट के तौर पर रहता हूँ…!”. “अरे, इतनी बड़ी दुकान है तुम्हारी… और पेइंग गेस्ट?” “असल में ये दुकान भी उन ही की है… मैं तो उसे संभालता हूँ…!”. “पर अभी तो तुमने कहा था कि तुम उस दुकान के मालिक हो…!”. “एक तरह से मलिक ही हूँ… सुमिता आंटी का और कोई नहीं है… दुकान की सारी जिम्मेदारी मुझे ही सौंप दी है उन्होंने…!”. “तो वो… मतलब वो तुम्हें ठंडा करती हैं…?”. “हाँ वो मेरे लिंग को अपने मुँह में लेकर बहुत जोर-जोर से रगड़ती हैं और चूस-चूस कर सारा पानी निकाल देती हैं… और कभी-कभी मैं…”. “कभी-कभी….
?” वो उत्सुकता से बोली। “कभी-कभी मैं उन्हें…” मैं रुक गया। वो बेचैनी से मुझे देखने लगी। मैंने बात ज़ारी रखी… “मैं उन्हें भी खुश करता हूँ!”. “कैसे?” वो धीरे से बोली।. मैं इत्मीनान से बोला… “सुमिता आंटी को मेरे लिंग का साइज़ बहुत पसंद है… और जब मैं अपना लिंग उनकी योनी में डालता हूँ… तो वो मेरा किराया माफ कर देती हैं!”. मैंने देखा कि डॉक्टर प्रेरणा हलके-हलके काँप रही है। उसके होंठ सूख रहे हैं।. मैंने एक तीर और छोड़ा… “ग्यारह इंच का लिंग पहले उनकी योनी में नहीं जाता था… लेकिन आजकल तो आसानी से जाने लगा है… अब तो वो बहुत खुश रहती हैं मुझसे… और उसकी एक खास वजह भी. है…!”. “क्या वजह है?” डॉक्टर की आँखों में बेचैनी थी।. “मैं उन्हें लगभग आधे घंटे तक…” मैंने अपनी आवाज़ को धीमा कर लिया और बोला… “चोदता रहता हूँ…!”. डॉक्टर अपनी कुर्सी से उठ गयी और बोली… “अच्छा तो… तुम अब जाओ…!”. “और मेरा इलाज???”. “इलाज??? इलाज वही… सुमिता आंटी!” वो मुस्कुराई।. “दुकान में???”. “मैंने कब कहा कि दुकान में… घर पर…”. “दुकान छोड़ कर नहीं जा सकता… और वैसे भी आजकल आंटी यहाँ नहीं है… बैंगलौर गयी हुई है।”. “तो ऐसा करो… सुनो… अ…”. मैं उसे एक-टक देख रहा था।. वो बोली… “देखो…”. मैंने कहा… “देख रहा हूँ… आप आगे भी तो बोलिये।”. “हुम्म… एक काम करो… जब भी तुम्हारा पेनिस खड़ा हो जाये… तो तुम मास्टरबेट कर लिया करो… और मास्टरबेट क्या होता है वो भी बताती हूँ…”. वो दरवाजे की तरफ देखने लगी, जहाँ कंपाऊंडर खड़ा किसी से बात कर रहा था। वो मेरी तरफ देख कर धीरे से बोली… “अपने पेनिस को अपने हाथों में ले कर मसलने लगो… और तब तक मसलते रहना… जब तक कि सारा पानी ना निकल जाये और तुम्हारा पेनिस ना ठंडा हो जाये…!”. मैंने अपने सर पर हाथ मारा और कहा… “अरे मैडम! ये ग्यारह इंच का कबूतर ऐसे चुप नहीं होता। मैंने कईं बार ये नुस्खा आजमाया है… एक-एक घंटा लग जाता है, तब जा कर पानी निकलता है।” वो मुँह फाड़कर मुझे देखने लगी। उसकी आँखों में मुझे लाल लहरिये से दिखने लगे।.
स्रोत:इंटरनेट