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Mohalle Ki Hot Doctor Sex 3

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“तुम झूठ बोलते हो…”. “इसमें झूठ की क्या बात है…? ये कोई अनहोनी बात है क्या?”. “मुझे यकीन नहीं होता कि कोई आदमी इतनी देर तक…”. “आपको मेरी किसी भी बात पर यकीन नहीं आ रहा है… मुझे बहुत अफसोस है इस बात का…” मैंने गमगीन लहज़े में कहा। फिर कुछ सोच कर मैंने कहा… “आपके हसबैंड कितनी देर तक सैक्स करते हैं?”. उसका चेहरा शर्म से लाल हो गया और वो कुछ ना बोली… मैंने फिर पूछा तो वो बोली… “बस तीन-चार मिनट!”. “क्या?????”अब हैरत करने की बारी मेरी थीजोकि असलियत में नाटक ही था।. “इसीलिये तो कह रही हूँ…” वो बोली, “कि तुम आधे घंटे तक कैसे टिक सकते हो? और मास्टरबेट.. एक घंटे तक???” फिर थोड़ी देर खामोशी रही और वो बोली… “मुझे तुम्हारी किसी बात पर यकीन नहीं है… ना ग्यारह इंच वाली बात… और ना ही एक घंटे… आधे घंटे वाली बात…”. मैं बोला… “तो आप ही बताइये कि मैं कैसे आपको यकीन दिलाऊँ?”. वो चुप रही। मैं उसे एकटक देखता रहा। फिर वो अजीब सी नज़रों से मुझे देखती हुई बोली… “मैं देखना चाहती हूँ…”. मैंने पूछा…“क्या… क्या देखना चाहती हैं?”. वो धीरे से बोली… “मैं देखना चाहती हूँ कि क्या वाकय तुम्हारा पेनिस ग्यारह इंच का है… बस ऐसे ही… अपनी क्यूरियोसिटी को मिटाने के लिये…”. मुझे तो मानो दिल की मुराद मिल गयी… मैंने कहा… “तो… उतारूँ पैंट…?”. वो जल्दी से बोली… “नहीं… नहीं… यहाँ नहीं… कंपाऊंडर है और शायद कोई पेशेंट भी आ गया है…”. “फिर कहाँ?” मैंने पूछा।. “तुमने कहा था कि तुम्हारी आंटी घर पर नहीं है… तो… क्या मैं…?”. “हाँ हाँ… क्यों नहीं…” मैं अपनी खुशी को दबाते हुए बोला। “तो कब?”. “बस क्लिनिक बंद करके आती हूँ…”. “मैं बाहर आपका इंतज़ार करता हूँ…” मैंने कंपकंपाती हुई आवाज़ में कहा और क्लिनिक से बाहर आ गया। फौरन अपनी दुकान पर पहुँच कर मैंने नौकर से कहा कि वो लंच के लिये दुकान बंद कर दे और दो घंटे बाद खोलेऔर. मैं क्लिनिक और दुकान से कुछ दूर जा कर खड़ा हो गया। मेरी नज़रें क्लिनिक के दरवाजे पर थीं।. आखिरी पेशेंट को निपटा कर डॉक्टर प्रेरणा बाहर निकली। कंपाऊंडर को कुछ निर्देश दिये और दायें-बायें देखने लगी। फिर उसकी नज़र मुझ पर पड़ी।नज़रें मिलते ही मैं दूसरी तरफ देखने लगा। उसने भी यहाँ-वहाँ देखा और फिर. मेरी तरफ आने लगी। जब वो मेरे करीब आयी तो मैं बिना उसकी तरफ देखे आगे बढ़ा। वो मेरे पीछे-पीछे चलने लगी।. जब मैं अपने फ्लैट का दरवाजा खोल रहा था तो मुझे अपने पीछे सैंडलों की खटखटाहट सुनायी दी। मुड़ कर देखा तो डॉक्टर ही थी।जल्दी से दरवाज़ा खोल कर मैं अंदर आया। वो भी झट से अंदर घुस गयी। मैंने सुकून की साँस ली. और डॉक्टर की तरफ देखा। मुझे उसके चेहरे पर थोड़ी सी घबड़ाहट नज़र आयी। वो किसी डरे हुए कबूतर की तरह यहाँ-वहाँ देख रही थी।. मैंने उसे सोफ़े की तरफ बैठने का इशारा किया। वो झिझकते हुए बोली… “देखो, मुझे अब ऐसा लग रहा है कि मुझे यहाँ इस तरह नहीं आना चाहिये था… पता नहीं, किस जज़्बात में बह कर आ गयी।” मैंने कहा, “अब आ गयी हो… तो बैठो… जल्दी से चेक-अप कर लो और चली जाओ।” “हाँ… हाँ…” उसने कहा और सोफे पर बैठ गयी।. मैंने दरवाजा बंद कर लिया और सोचने लगा कि अब क्या करना चाहिये। वो भी मुझे देखने लगी।. “कुछ पीते हैं…” मैंने कहा और इससे पहले कि वो कुछ कहती, मैं किचन की तरफ बढ़ा। मैंने सॉफ्ट ड्रिंक की बोतल फ्रिज से निकाली और फिर ड्रॉइंग रूम में पहुँच गया।. वो बोली….
“कुछ बियर वगैरह नहीं है?” ये सुनकर तो मैं इतना खुश हुआ कि क्या बताऊँ। जल्दी से किचन में जा कर फ्रिज से हेवर्ड फाइव-थाऊसैंड बियर की बोतल निकाल कर खोली और साथ में गिलास ले कर बाहर आया और फिर गिलास में बियर भर के उसे दी।|. अचानक उसकी नज़र सामने टीपॉय पर पढ़ी एक किताब पर पड़ी, जिसके कवर पेज पर एक नंगी लड़की की तस्वीर थी। मैंने कहा, “मैं अभी आता हूँ…” और फिर से किचन की तरफ चला गया। किचन की दीवार की आड़ से मैंने चुपके से देखा तो मेरा अंदाज़ा सही निकला। वो किताब उसके हाथ में थी। किताब के अंदर नंगी औरतों और मर्दों की चुदाई की तस्वीरें देख कर उसके माथे पर पसीना आ गया। ये बहुत ही बढ़िया किताब थी। चुदाई के इतने क्लासिकल फोटो. थे उसमें कि अच्छे-अच्छों का लंड खड़ा हो जाये और औरत देख ले तो उसकी सोई चूत जाग उठे। मैंने देखा कि बियर पीते हुए वो पन्ने पलटते हुए बड़े ध्यान से तस्वीरें देख रही थी। उसके गालों पर भी लाली छा गयी थी।. मैं दबे कदमों से उसके करीब आया और फिर अचानक मुझे अपने पास पा कर वो सटपटा गयी। उसने जल्दी से किताब टीपॉय पर रख दी। वो बोली… “कितनी गंदी किताब!”. मैं बोला… “आप तो डॉक्टर हैं… आपके लिये ये कोई नई चीज़ थोड़े ही है…”. मेरी बात सुनकर वो मुस्कुरा दी। मैं भी मुस्कुराता हुआ उसके पास बैठ गया। इतनी देर में उसका गिलास खाली हो चुका था। शायद उत्तेजना की वजह से उसने बियर काफी कुछ ज्यादा ही तेज़ पी थी। खैर मैंने फिर उसका गिलास. भर के उसे पकड़ाया। मैंने देखा कि उसकी नज़र अब भी किताब पर ही थी। मैंने किताब उठायी और उसके पन्ने पलटने लगा। वो चोर नज़रों से देखने लगी। मैं उसके थोड़ा और करीब खिसक आया ताकि वो ठीक से देख सके।. वो बियर पीते हुए बड़ी दिलचस्पि से चुपचाप देखने लगी| मैंने पन्ना पलटा जिसमें एक आदमी अपना बड़ा सा लंड एक औरत की गाँड की दरार पर घिस रहा था। फिर एक पन्ने पर एक गोरी औरत दो हब्शियों के बहुत बड़े-बड़े काले. लंड मुठियों में पकड़े हुए थी और उस तसवीर के नीचे ही दूसरी तस्वीर में वो औरत एक हब्शी का तेरह-चौदह इंच लंबा लंड मुँह में लेकर चूस रही थी और दूसरे का काला मोटा लंड उसकी चूत में घुसा हुआ था। फिर जो पन्ना. मैंने पलटा तो डॉकटर प्रेरणा की धड़कनें तेज़ हो गयीं। एक तस्वीर में एक औरत घोड़े के मोटे लंड के शीर्ष पर अपने होंठ लगाये चूस रही थी और दूसरी तस्वीर में एक औरत गधे के नीचे एक बेंच पर लेटी हुई उसका विशाल. मोटा लंड अपनी चूत में लिये हुए थी।. मैंने अपना एक हाथ डॉक्टर के कंधों पर रखा। उसने कोई आपत्ति नहीं की। फिर धीरे से मैंने अपना हाथ उसके सीने की तरफ बढ़ाया। वो काँपने लगीऔर पानी की तरह गटागट बियर पीने लगी।धीरे-धीरे मैं उसकी छातियों को. सहलाने लगा। उसने आँखें बंद कर लीं। उस वक्त वो सलवार और स्लीवलेस कमीज़ पहने हुई थी। मेरी अंगुलियाँ उसके निप्पल को ढूँढने लगीं। उसके निप्पल तन कर सख्त हो चुके थे।मैंने उसके निप्पलों को सहलाना शुरू किया।. वो थरथराने लगी।. अब मेरा हाथ नीचे की तरफ बढ़ने लगा। उसकी कमीज़ ऊपर उठा के जैसे ही मेरा हाथ उसकी नंगी कमर पर पहुँचा तो वो हवा से हिलती किसी लता की तरह काँपने लगी। अब मेरी एक अँगुली उसकी नाभि के छेद को कुरेद रही थी। वो. सोफे पर लगभग लेट सी गयी। उसका गिलास खाली हो चुका था तो मैंने गिलास उससे ले कर टेबल पर रख दिया।. मैंने अपने हाथ उसकी टांगों और पैरों की तरफ बढ़ाये तो मेरी आँखें चमक उठीं। उसके गोरे-गोरे मुलायम पैर और उसके काले रंग के ऊँची ऐड़ी के सैंडलों के स्ट्रैप्स में से झाँकते, उसकी पैर की अँगुलियों के लाल नेल-पॉलिश लगे नाखुन बहुत मादक लग रहे थे। उसकी सलवार का नाड़ा खोल कर मैंने सलवार उसकी टाँगों के नीचे खिसका दी। उसकी गोरी खूबसूरत टांगें और जाँघें जिन पर बालों का नामोनिशान नहीं था, मुझे मदहोश करने लगीं। जैसे सगमरमर से तराशी हुई थीं उसकी टांगें और जाँघें। मैंने अपने काँपते हाथ उसकी जाँघों पर फेरे तो वो करवटें बदलने लगी। मुझे ऐसा लगा जैसे मैं पाउडर लगे कैरम-बोर्ड पर हाथ फ़ेर रहा हूँ। पैंटी को छुआ तो. गीलेपन का एहसास हुआ। पिंक कलर की पैंटी थी उसकी जो पूरी तरह गीली हो चुकी थी। अँगुलियों ने असली जगह को टटोलना शुरू किया। चिपचिपाती चूत अपने गर्म होने का अनुभव करा रही थी। मैंने आहिस्ते से पैंटी को नीचे. खिसका दिया।. ओह गॉश!!! इतनी प्यारी और खूबसूरत चूत मैंने ब्लू-फिल्मों में भी नहीं देखी थी। उसकी बाकी जिस्म की तरह उसकी चूत भी बिल्कुल चिकनी थी। एक रोंये तक का नामोनिशान नहीं था। मुझसे अब सहन नहीं हो रहा था। मैंने. दीवानों की तरह उसकी सलवार और पैंटी को पैरों से अलग करके दूर फेंक दिया। पैरों के सैंडलों को छोड़ कर अब वो नीचे से पूरी नंगी थी। उसकी आँखें बंद थीं। मैंने संभल कर उसकी दोनों टाँगों को उठाया और उसे अच्छी. तरह से सोफे पर लिटा दिया। वो अपनी टाँगों को एक दूसरे में दबा कर लेट गयी। अब उसकी चूत नज़र नहीं आ रही थी। सोफे पर इतनी जगह नहीं थी कि मैं भी उसके बाजू में लेट सकता। मैंने अपना एक हाथ उसकी टाँगों के नीचे. और दूसरा उसकी पीठ के नीचे रखा और उसे अपनी बाँहों में उठा लिया। उसने ज़रा सी आँखें खोलीं और मुझे देखा और फिर आँखें बंद कर लीं।.
स्रोत:इंटरनेट