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हमारे पिताजी गाँव के मुखिया थे.
फेमिली में मैं माताज़ी केसर्बा और मुझ से दो साल छोटी अंकिता इतने थे.
गाँव बीच बड़ा मकान है जहाँ हम रहते थे.
इस के अलावा गाँव बाहर दूसरा महेमन घर था जहाँ हमारे महेमन रहते थे.
अस्सी बीघा ज़मीन की किसानी थी हमारी.
ये घटना घटी तब मैं 19 साल का था और नया नया मेडिकल कॉलेज में भरती हुआ था.
उस वक़्त मेरे लिए चुदाई अनजानी चीज़ नहीं थी क्यूं की तब तक मैं मज़दूरों की तीन लड़कियों को चोद चुका था पढ़िए मस्त sexy kahani hindi.
कालेज से जब पहला वेकेशन मिला तब मैं घर आया.
उस वक़्त हमारे घर कुछ मेहमान भी आए हुए थे: माताज़ी की चाची साकार बा, उन की लड़की सुलोचना और उन की बड़ी बहन शांता बा.
माताज़ी के चाचा मेरे नाना से 15 साल छोटे थे और साकार बा उन की तीसरी पत्नी थी इसी लिए वो माताज़ी से उमर में छोटी थी.
कविता मौसी उन की सब से छोटी लड़की होने से अंकिता के बराबर थी, 17 साल की.
चाचा कई साल से मर चुके थे लेकिन साकार बा इंदौर के नज़दीक एक छोटे शहर में अच्छा सा बिझनेस चलाती थी और काफ़ी पैसेदार थी.
कविता मौसी को मैं ने बचपन से देखा था लेकिन जवान कविता की बात ही और थी.
पाँच फ़ीट चार इंच लंबा पतला और गोरा बदन, हेमा मालिनी जैसा चहेरा और काले काले लंबे बाल थे उस के.
सीने पर गोल गोल स्तन थे जो इतने बड़े नहीं थे लेकिन छुप भी नहीं सकते थे.
वो जब चलती थी तब स्तन और चौड़े नितंब थीरक जाते थे.
किसी नामर्द का लंड भी खड़ा कर दे ऐसा उस का हौसला था.
मैने तो पहले ही दिन बाथरूम में जा कर उस के नाम हस्त मैथुन कर लिया था और उसे चोद ने का निर्धार कर लिया था.
कविता मौसी और अंकिता हिल मिल गयी थी और सारा दिन खुसड़ पुसड़ बातें किया करती थी.
एक बार कविता मुज़े गौर से देख रही थी की में ने उसे पकड़ लिया.
नज़र चुरा के वो मुस्कुरा ने लगी फिर जब हमारी नज़रें मिली तो वो शर्मा गयी मेरे दिल में आशा जगी की कभी ना कभी ये डाल गल ने वाली है एक बार सीने से दुपट्टा गिरा के नीचे ज़ुक कर उस ने मुझे अपने स्तनों की झाँखी करवाई.
में ने पेंट के अंदर खड़ा हुआ मेरा लंड दिखाया.
बनावती ग़ुस्सा किए उस ने मुँह फेर लिया.
उस के होठों पर की मुस्कान मुझ से छुप ना सकी.
एक दिन मौक़ा देख कर में ने अंकिता को पकड़ा और पूछा :तुम दोनो आपस में क्या खुस पूस बातें करती रहती हो ?. मुँह पर उंगली रख के चुप रहने का इशारा कर ते हुए अंकिता बोली : भैया, आप सुनेंगे तो ताज्जुब रह जाओगे, ग़ुस्से ना हो तो.
मैं : ऐसी भी क्या बात है ?. अंकिता : वो की बात करती है. मैं : वो क्या? साफ़ साफ़ बता वरना मैं माताज़ी से बोल दूँगा.
अंकिता : ना, ना भैया, ऐसा मत करना, पिताजी ऐसी बातें सुन पाएँगे तो मुझे मार डालेंगे.
मैं : ऐसा तू ने क्या किया है जो इतना डरती हो ?. अंकिता : कसम खाई ये मेरे सर पे हाथ रख के, किसी से नहीं बोलेंगे आप.
में ने कसम खाई.
वो बोली : भैया, सारा दिन वो चु —– चु ——.
अंकिता आगे बोल ना सकी, शर्म से उस का चहेरा लाल लाल हो गया.
मैने कहा : —— चुदाई की बातें करती है ?. अंकिता : हाँ हाँ, बस ये ही.
मैं : इस में डर ने की क्या बात है ? तू तो जानती है की चुदाई क्या है और कैसे की जाती है और दूसरे, तू अक्सर अपनी उंगलियों से भोस के साथ खिलवाड़ करती हो ये में जानता हूँ है ना ? अंकिता ने अपना चहेरा ढक दिया और बोली : आप भी क्या भैया ? वैसे मैं भी जानती हूँ की आप स्नान के वक़्त आप के —- के —- वो जो है ना आप का ? —— जो लंबा और मोटा हो जाता है. —– ?. मैं : बस कर, मैं समझ गया.
क्या कहती है कविता मौसी ? अंकिता : कहती है की उसे हमेशा चु —— वो करवाने को दिल बना रहता है हमेशा उस की —— की —- जो दो पाँव के बीच है ना वो गीली गीली रहती है और उस की पेंटी बिगड़ी रहती है कभी कभी. वो रबड़ का बनाया ल —– छी , छी मैं नहीं बोल सकती.
मैं : —- रबड़ का लंड इस्तेमाल करती है ये ना ? इस को डिलडो कहतें हें.
अंकिता : भैया ! आप ने देखा है ये डी —– डिलडो ?. मैं : मुझे क्या ज़रूरत डिलडो देख ने की ? मेरे पास तो इन से अच्छा असली है तू ने देख भी लिया है है ना ?. अंकिता फिर शरमाई और बोली : भैया, कैसी बातें करतें हें आप ? हाँ, वाकई आप का वो —– .
मैं : वो बो नहीं, साफ़ साफ़ बोल, लंड.
बोल ल —- न्ड.
शर्म से सिमट ती हुई अंकिता बोली : छी, छी —– भैया, कँवारी लड़की ऐसा नहीं बोलती.
वाकई आप का वो बहुत अच्छा है मेरी भाभी बड़ी ख़ुश-नसीब होगी.
मैं : एक बात बता, कविता ने तेरे साथ कुछ किया है ? मैं ख़ुश हो गया और बोला : अंकिता, तू उसे बता देना की वो भी मुझे ख़ूब पसंद है और मैं उसे चोद ना चाहता हूँ शरारती हसते हुए वो बोली : मैं क्यूं बता उन ? मुझे क्या फ़ायदा ?. मैं : फ़ायदा ? चलो तू जो मांगोगी वो दूँगा.
अंकिता : अच्छा ? जो चाहे सो माँगूँ ?. मैं : माँग के देख तो सही.
अंकिता : अच्छा तो मांगती हूँ आप और मौसी जब वो करें तब —— .
मैं : फिर वो वो बोली ? मागना हो तो साफ़ बोल ना पड़ेगा.
अंकिता : हाँ , आप और मौसी जब चुदाई करें तब मुज़े वहाँ हाज़िर रहेने देना.
मैं : तू क्या करेगी हाज़िर रह कर ?. अंकिता : मुझे देखना है की मेरे भैया का तगड़ा —— तगड़ा —— वो —- वो —– लंड मौसी की चूत में आते जाते कैसे चोद ता है. मैं : और देखते देखते तुज़े भी चुदवाने का दिल हो गया तो ?. अंकिता : तो आप का दूसरा वरदान इस्तेमाल करूंगी.
मैं : दूसरा वरदान ? कौन सा ?. दूसरे ही दिन शाम का खाना खा के हम सब महेमान घर गये अंकिता ने कहा : फ़िल्म किस को देखनी ही ?. सब ने हा कही.
रात के दस बजे अंकिता ने वीडियो कसेट लगाई और ब्लेक एंड व्हाइट इंग्लिश पीककर शुरू हुई.
हम तीन जवानो को प्लान का पता था इसी लिए कुछ नहीं बोले लेकिन थोड़ी ही देर में साकार बा और शांता बा थक गयी साकार बा ने कहा की वो बोर हो रही है और सो जाना चाहती है हमने कहा की हमें फ़िल्म देखनी है नतीजा ये आया की वो दोनो बुज़र्गों गाँव वाले घर को चली गयी हम तीन को अकेला छोड़ के.
बस हमें और क्या चाहिए था ?.
स्रोत:इंटरनेट