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Mujhse Ho Gayi Nayi Naveli Bahu Ki Chudai 2

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“तुम्हारे कूल्हे बहुत लाजवाब हैं आरती ! आई लाइक दैम !” पता नहीं. मैं कैसे बोल गया और इसी के साथ मेरी आठों उंगलियाँ उसकी निक्कर की. इलास्टिक को खींचते हुए उसके चूतड़ों के नंगे मांस में गड़ गई।. आरती के बदन में जैसी बिजली सी दौड़ गई और थोड़ी लज्जा मिश्रित मुस्कान के साथ बोली- सच में पापा?. हाँ आरती ! तुम्हारे चूतड़ एकदम परफ़ेक्ट हैं ! इससे बढ़िया चूतड़ मैंने. शायद किसी के नहीं देखे !” कहले हुए मैंने अपनी हथेलियाँ कुछ इस तरह नीचे. फ़िसलाई कि सफ़ेद निक्कर उसकी जांघों में लटक गई।. आरती अपनी जगह से हिली नहीं और अब मैं उसके नंगे चूतड़ अपने हाथों में मसल रहा था।. मैंने फ़ुसफ़ुसाते हुए उससे कहा- आरती ! मैंने बहुत सारे चूतड़ इस तरह. नंगे देखे हैं, सहलाए हैं, चाटे भी हैं पर… कहते कहते मैंने अपनी उंगलियों के पोर उन दोनों कूल्हों के बीच की दरार में घुसा दिए।. हाँ पापा ! मैंने सुना है कि आपने खूब… !” कहते हुए वो कामुक मुस्कान के साथ शरमा गई।. “तुम्हें किसने बताया?”. उसके कनखियों से मेरी तरफ़ देखा और अर्थपूर्ण मुस्कुराहट के साथ. बोली- काम्या ने ! वो मेरे साथ कॉलेज में पढ़ती थी, वो मेरी सहेली थी और चटखारे ले ले कर आपकी रसीली कहानियाँ मुझे सुनाया करती थी।. इसी के साथ वो खिलखिला कर हंस पड़ी।. अब यह मेरे लिए परेशानी वाली बात थी, मैंने पूछा- काम्या ने तुम्हें क्या क्या बताया? अब मेरे हाथ खुल्लमखुल्ला आरती के चूतड़ों से खेल रहे थे।. वो फ़िर खिलखिलाई- ये लड़कियों की आपस की बातें हैं ! मैं आपको नहीं बताऊँगी।. “लेकिन ना कभी काम्या ने ना कभी तुमने बताया कि तुम सहेलियाँ थी?”. “रवि से मेरी शादी करवाने में काम्या का ही तो हाथ है ! दो साल. पहले जब एक बार आप लन्दन गये हुए थे तो काम्या मुझे यहाँ इस घर में लेकर आई थी। उस समय सुमन मौसी भी यहीं थी। तो काम्या ने ही मौसी को बीच में डाल कर रवि की शादी मुझसे करवाई।”. “ओह ! तो सुमन भी तुम्हारे साथ मिली हुई है?”. “तो क्या पापा? सुमन मौसी तो आपके साथ भी… है ना?”. “ह्म्म !”. “सुमन मौसी ने ही तो बताया था कि…!!”. “क्या बताया था उसने? बोलो !?!”. “उन्होंने बताया था कि आप किसी भी लड़की को अपने चुम्बन से पागल कर सकते हो !”. “सुमन से भी ना चुप नहीं रहा जाता… तो अब तुम भी पागल…? हंह…?” मैंने उसके टॉप के अन्दर उसकी पीठ पर एक हाथ फ़िराते हुए कहा।. “हाँ पापा, मुझे भी अपने होंठों का जादू दिखाइए ना !” आरती ने अपना चेहरा ऊपर उठा कर अपने होंठों को गोल करते हुए कहा। मैं अपना हाथ उसकी पीठ से सरका कर गर्दन तक ले आया और उसके सिर को पीछे के जकड़ते हुए अपने होंठ उसके रसीले होंठों पर रख दिये।. मेरे हाथ के उसके सिर पर जाने से हुआ यह कि उसका टॉप भी मेरे हाथ के साथ आरती के कन्धों में आकर रुका।. मेरा दूसरा हाथ जो अभी तक उसके चूतड़ों पर था, वो फ़िसल कर उसकी जांघ तक चला गया और उसकी जांघ को उठा कर मैंने अपनी बाजू पर ले लिया। आरती ने अपने को मुझसे छुटवाते हुए कहा- पापा, अन्दर चलते हैं। मैंने उसे छोड़ते हुए कहा- चलो ड्राइंग रूम में चलो !. जैसे ही वो सीधी खड़ी हुई, उसकी निक्कर उसके पैरों में ढेर हो गई। मैंने निक्कर को पकड़ कर उसके पैरों से निकाल कर कहा- चलो, मैं इसे सम्भालता हूँ। वो आगे आगे, मैं पीछे पीछे उसकी निक्कर को हाथ में लेकर सूंघते हुए चल रहा था, उसकी जांघों और योनि की गन्ध उस निक्कर में रमी हुई थी। कपड़ों के नाम पर आरती के गले में उसका टॉप एक घेरा सा बनाए पड़ा था। निक्कर मेरे. हाथ में थी, ब्रा पैन्टी पहनना शायद उसे भाता नहीं था। अन्दर ड्राइंग रूम में जाकर आरती ने ऐ सी और सारी बत्तियाँ जला दी। पूरा कमरा रोशनी से नहा गया।. और जैसे ही आरती बत्तियाँ जला कर मेरी तरफ़ घूमी, उसने अपने गले से वो टॉप निकाल कर मेरे मुँह पर फ़ेंक दिया। लेकिन मेरी नजर तो उसकी नाभि पर थी, उसमें उसने एक बाली पहनी हुई थी। उसके बाद मेरी निगाहें सरक कर नीचे गई तो देखा योनि ने घने सुनहरे-भूरे. बालों का घूंघट औढ़ा हुआ था।. आरती ने मेरी तरफ़ अपनी बाहें फ़ैलाते हुए कहा- आओ ना पापा ! मुझे अपने होंठों से पागल करो ना !. आरती अपने होंठों पर जीभ फ़िरा रही थी, उसके गीले होंठ मुझे निमंत्रण दे रहे थे। मैंने उसके गालों को अपनी हथेलियों में पकड़ कर उसकी गहरी आँखों में झांका और अपने होंठ उसके होंठों पर हल्के से रगड़ दिया।. उसके मुख से सिसकारी फ़ूटी- पापा ! और करो ! प्लीज़ !. “जानू… अब तुम्हारी बारी है !” मैं उसके नंगे चूतड़ों को अपने हाथों में सहेजते हुए फ़ुसफ़ुसाया।. “पापा…प्लीज़ आप करो ना ! प्लीज़ पापा ! करो !” वो एक छोटे बच्चे की तरह मचलते हुए बोली- जन्नत का मजा तो आप ही मुझे देंगे ना पापा !. “ओ… ठीक है ! मेरे सिर को आपने हाथों में थाम लो आरती !”. बिना एक भी शब्द बोले उसने मेरा सिर पकड़ कर अपने चेहरे पर झुका. लिया, हमारे होंठों ने एक दूसरे को छुआ और मैं उसे अपने होंठों से सताने लगा।. आरती का पूरा बदन काम्प रहा था और उसके मुख से कामुक सीत्कारें निकल रही थी।. और तभी अचानक एकदम से उसने मेरे होंठों को चॉकलेट की तरह चूसना-खाना शुरु कर दिया।. आरती की इस हरकत ने मुझे भी पागल सा कर दिया, मैंने उसके चूतड़ों के नीचे अपने दोनों हाथ ले जा कर उसे ऊपर को उठाया तो उसने अपनी टांगें मेरे. कूल्हों के पीछे जकड़ ली।. इससे उसके चूतड़ों के बीच की दरार चौड़ी हो गई और मेरा मध्यमा उंगली उसकी गाण्ड के छिद्र को कुरेदने लगी।. लड़की मेरे बदन पर सांप की तरह लहरा कर रह गई और मेरी उंगली उस कसे छिद्र को भेदते हुए लगभग एक इंच तक अन्दर घुस गई।. आरती हांफ़ रही थी- ऊ… पापा… उह पा…आह… ना…. मुझे याद नहीं हम कितनी देर तक इस हालत में रहे होंगे कि तभी उसका मोबाइल घनघना उठा।. और इस आवाज से हमारे प्यार के रंग में भंग हो गया।. उसने एक हल्के से झटके के साथ अपनी टांगें मेरी कमर से नीचे उतारी और बोली- पापा, जरा उंगली निकालो, मैं फ़ोन देख लूँ ! जैसे ही मैंने अपनी उंगली उसकी गाण्ड से निकाली उसने मेरा हाथ पकड़ा और उसे अपने नाक तक ले जा कर मेरी उंगली सूंघने लगi।. उसने पीछे हटकर फ़ोन उठाकर देखा तो उसके पति यानि मेरे बेटे रवि का फ़ोन. था।. मैंने आरती की आँखों में देखा तो वो शर्म के मारे मुझसे नजरें चुराने लगी।. मैं इसके पास गया और आरती से सट कर फ़ोन पर अपना कान लगा दिया।. रवि उससे पूछ रहा था कि सुबह क्या क्या किया और आरती ने भी अभी आखिर की कुछ घटनाओं को छोड़ कर उसे सब बता दिया।. रवि ने पूछा कि वो हांफ़ क्यों रही है तो आरती ने बताया कि वो नीचे. थी और फ़ोन ऊपर, फ़ोन की घण्टी सुन कर वो भाग कर ऊपर आई तो उसकी सांस फ़ूल गई। सच में मेरी पुत्र-वधू काफ़ी चतुर है ! मैंने मन ही मन भगवान को इसके लिये धन्यवाद किया।.
स्रोत:इंटरनेट