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Mujhse Ho Gayi Nayi Naveli Bahu Ki Chudai 4

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अब हम दोनों बिल्कुल प्राकृतिक अवस्था में थे, मैंने उसके कूल्हे पर एक हाथ रख कर उसे बिस्तर की तरफ़ धकेलते हुए कहा- चलो ! हम दोनों बिस्तर पर आ गए, आरती के हाथ में फ़ोन था, वो बिस्तर पर अपनी टाँगें थोड़ी फ़ैला कर पीठ के बल लेट गई और अपनी जांघों के बीच में. उंगली से इशारा करते हुए मुझसे बोली- पापा, थोड़ा चाटो ना प्लीज़ ! मैंने अपना चेहरा उसकी चिकनी जाँघों के बीच में टिका लिया और अपने होंठों में उसकी झाँटे दबा कर खींचने लगा।. “ओ पापा ! आप बाद में खेल लेना, मेरी … गीली हो रही है, एक बार मेरे अन्दर से चाट लीजिए ! मैं थोड़ा सीधा हुआ और अपनी उंगलियों से बालों के जंगल में उसकी योनि के लबों को खोजने लगा।. “तुम इन्हें साफ़ क्यों नहीं करती आरती?”. “रवि को ऐसे ही पसंद है ना !”. मैंने आरती को जांघों से पकड़ कर ऊंचा उठाया तो उसकी योनि मेरे. होंठों के पास थी और वो खुद अपने कन्धों के ऊपर टिकी हुई थी, उसका सिर और कन्धें बिस्तर पर शेष बदन मेरी बाहों में मेरे ऊपर था।. मैंने अपने दोनों अंगूठों और दो साथ वाली उंगगियों से उसकी योनि के. लबों को अलग अलग किया तो अन्दर गुलाबी भूरी पंखुड़ियाँ काम रस से भीग कर आपस. में चिपक गई थी।. मैंने अपनी जीभ से उन पर लगे रस को चाटा और उनकी चिपकन हटा कर जीभ अन्दर घुसा दी। मेरी जीभ एक इन्च से ज्यादा अन्दर चली गई थी।. आरती के मुख से निकला- पापा… ओ पापा… आपका जवाब नहीं ! अम्मंअह…. मेरी बहू आरती के बदन और योनि की मिली जुली गंध मेरी उत्तेजना को और बढ़ा रही थी।. तभी उसने रवि का नम्बर मिला दिया।. उसने एकदम से फ़ोन उथाया जैसे वो आरती के फ़ोन का ही इन्तजार कर रहा था, वो भी अपनी पत्नी से काम-वार्ता को उत्सुक लग रहा था। मेरी चतुर बहू ने फ़ोन का लाउडस्पीकर ऑन कर दिया ताकि मैं भी उन. दोनों की पूरी बात सुन सकूँ।. रवि ने पूछा- बताओ कि क्या हुआ था?. आरती हंसते हुए बोली- वही हुआ था जानू ! मेरी पैंटी में चींटी घुस. गई थी, वो तो शुक्र है कि काली वाली थी, अगर कहीं लाल चींटी होती तो पता नहीं मेरा क्या हाल होता?. “तुम्हारा या तुम्हारी चूत का?” मेरे बेटे ने पूछा।. “हाँ हाँ ! चूत का ! पता है कि मैंने चींटी को कहाँ से निकाला?”. “कहाँ से?”. “बिल्कुल क्लिट के ऊपर से !””ओह ! साली चींटी ! मेरी घरवाली की चूत. का मजा ले रही थी? आरती… तुमने अच्छी तरह देख तो लिया था ना कि वो चींटी ही. थी? कहीं चींटा हुआ तो? और उसने तुम्हें… हा…हा… !”. “सुनो रवि ! इस समय मैं बिल्कुल नंगी बिस्तर में लेटी हुई हूँ और उस. जगह को रगड़ रही हूँ जहाँ उस चींटी…ना… ना…उस चींटे ने मुझे काटा था !”. ऊओअह्ह ! तो तुम अपने हाथ से अपनी क्लित मसल रही हो? अपनी फ़ुद्दी में उंगली कर रही हो?”. “हाँ मेरे यार ! अगर तुम होते तो उंगली की जगह तुम्हारा लौड़ा होता !. तुम्हारा लण्ड मेरी चूत की खुजली मिटा रहा होता !” मेरी चालू बहू ने कहा।. लेकिन अभी तो मुझे सिर्फ़ उंगली से ही गुजारा करना पड़ेगा !”. “और वो डिल्डो कब काम आएगा जो हमने पेरिस में खरीदा था? तुम उसे इस्तेमाल करो ना !” मेरे बेटे ने सुझाव दिया।. ” अरे हाँ ! वो तो मैं भूल ही गई थी ! अभी निकालती हूँ उसे !” आरती. ने मुस्कुराते हुए मेरी तरफ़ देखा और फ़िर फ़ोन के माइक को हाथ से ढकते हुए. मुझसे फ़ुसफ़ुसाई- आप ही मेरे डिल्डो हो आज ! घुसा दो अपना डिल्डो मेरे अन्दर. ! मैं आपके बेटे से कहूँगी कि मैंने डिल्डो ले लिया अपने अन्दर !. मेरी समझदार बहू ने कनखियों से मुझे देखा और फ़िर कुछ देर बाद फ़ोन में बोली- हाँ जानू ! ले आई मैं ! डाल लूँ अन्दर?. “हाँ… हाँ… घुसा ले ना ! पूरा बाड़ना !”. आरती ने मुझे इशारा किया कि अब घुसाना शुरु करो !. “लेकिन रवि ! यह तो बहुत बड़ा है ! मेरी चूत जरा सी है, यह कैसे पूरा जाएगा अन्दर?” उसने सिसियाते हुए कहा।. “अरे चला जाएगा रानी… पूरा जाएगा… तू कोशिश तो कर ! बड़ा है तभी तो तुझे. असली मज़ा आएगा ना ! घुसा कर देख ! सुमन मौसी के पास तो इससे भी बड़ा डिल्डो. है ! तुमने तो देखा है कि वो कैसे चला जाता है मौसी की चूत में !”. “अरे ! सुमन मौसी की चूत को तो तुम्हारे पापा ने चोद चोद कर फ़ुद्दा. बना रखा है ! मौसी बता रही थी ना कि तुम्हारे पापा का तुमसे भी बड़ा है !. चलो… कोशिश करके देखती हूँ !”. मैं तो रवि और आरती का वार्तालाप सुन कर हतप्रभ रह गया !. मैं तो खुद को ही चुदाई का महान खिलाड़ी समझ रहा था पर यहाँ तो सभी. एक से बढ़ कर एक निकल रहे हैं। लेकिन परिस्थिति कुछ ऐसी थी कि मैं कुछ ना कह. पाया और चुपचाप मैंने बिल्कुल शान्ति से बिना कोई आवाज किए आरती की जाँघों. को फ़ैलाया और अपने लिंगमुण्ड को योनि के मुख पर टिकाया तो आरती ने. लिंगदण्ड को अपने हाथ में पकड़ा और उसे अनुए अन्दर सरकाने का यत्न करने लगी।. आरती की चूत खूब गीली हो कर चिकनी हो रही थी, उसने मेरे लिंग के सुपारे को अपने योनि-लबों के बीच में रगड़ कर उन्हें फ़ैलाया और मेरे हल्के. से दबाव से मेरा सुपारा अन्दर फ़िसल गया।. “अओह…हा…आ…अई…” आरती ने जोर से एक चीख मारी।. उधर से आवाज आई रवि की- वाह आरती ! बहुत अच्छे ! कितना अन्दर गया?. “ऊओह… रवि ! अभी तो बास आगे का मोटा सा नॉब ही अन्दर घुसा है… उफ़्फ़्. कितना मोटा है यह ! तुम्हारे लण्ड से तो डेढ़ गुना मोटा और शायद डेढ़ गुना ही. ज्यादा लम्बा है यह !” आरती मेरी आँखों में झांकते हुए बोली।. और फ़िर एक बार माइक को हाथ से ढकते हुए फ़ुसफ़ुसाई- मैं सही कह रही हूँ पापा ! आपका सच में रवि के से ड्योढ़ा तो है ही !. इस बात से बिल्कुल बेखबर कि उसकी पत्नी उसके पिता के लण्ड की बात कर. रही है, रवि ने उसे और अंदर तक घुसाने के लिये उकसाया- और अन्दर तक ले ना सोनू ! पूरा अन्दर घुसा ले !. “हाँ मेरे राजा हाँ !” आरती हांफ़ते हुए से बोली और मुझे अपना लण्द. उसकी चूत में और अन्दर घुसाने के लिए इशारा किया।. मैंने अपनी जांघों को एक झटका दिया और मेरा आधे से ज्यादा लौड़ा मेरी बहू आरती की चूत के अन्दर था।. “ओ… मा… मर गईइ मैं… पापा जी आह मम्मा !”आरती जोर से सीत्कारते हुए. असली दर्द से चिल्लाई तो उसके मुँह से पापा निकल गया। और शायद अपनी इस भूल. को छिपाने केल इये बाद में मम्मा बोली थी।. उधर मेरे बेटा खिलखिला कर हंसते हुए बोला- अपने मम्मी पापा को क्यों. बुला रही हो? बुलाना है तो मेरे पापा को बुला ले ना ! तेरी फ़ाड़ कर रख. देंगे वो !. “हट… ! बेशरम ! गन्दे कहीं के ! तुम्हारे पापा क्या फ़ाड़ेंगे मेरी. चूत ! अब तो बुड्ढे हो गये वो !” मेरी तरफ़ तिरछी नजर से देख कर आँख़ मारते. हुए आरती बोली।. “अरे ! इस गलत फ़हमी में मत रहना ! मेरे पापा का लौड़ा इस डिल्डो का भी बाप है !”.
स्रोत:इंटरनेट