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Nanad Bhabhi Ki Ek Sath Chudai Sexy Kahani

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प्रेरणा भाभी की तो मैंने छोड़ छोड़ के तबियत खुश कर दी। वो मस्ती से चुद रही थी, तभी हमने देखा उनकी ननद कनिका दरवाजे पे कड़ी थी। लगता है कनिका को भी अपने खेल में शामिल करने वास वक़्त आ गया था। पेश है इस sexy kahani की आखिरी कड़ी-. Hindi Sex Story अन्य भाग-. एक प्रमोशन की खातिर. ननद-भाभी की एक साथ चुदाई – I. ननद-भाभी की एक साथ चुदाई – II. ननद-भाभी की एक साथ चुदाई – III. ————————. मैंने उन्हें चूमते हुए सोफे पर वापस बिठाया और खुद एक पैग पीने के बाद अपने कपड़े उतार कर नंगा हो गया। इतने में प्रेरणा भाभी ने भी अपनी कमीज़ और ब्रा उतार कर एक तरफ फेंक दी और पैरों में सैंडलों के अलावा. मादरजात नंगी हो कर फिर मुझसे लिपट गयीं। फिर हमारी चुदाई सोफ़े पर ही शुरू हो गयी। मैं सोफे पर पीछे टिक कर लेटा था और मेरे पैर ज़मीन पर थे। प्रेरणा भाभी मुझ पर सवार हो गयी थी। मेरा ज़ालिम लंड उनकी चूत में. घुस कर फंसा हुआ था। वो कुल्हे उठा-गिरा कर मेरा लंड अपनी चूत में अंदर-बाहर कर रही थी। उनकी चूचियाँ मेरे मुँह के ऊपर थीं और मैं उनके निप्पल चूस रहा था। शराब के नशे और चुदाई की मस्ती में प्रेरणा भाभी. जोर-जोर से सिसकारियाँ भर रही थीं।. इतने में मेरी नज़र दरवाज़े की तरफ पड़ी तो देखा कनिका वहाँ खड़ी-खड़ी हैरानी से स्तंभित सी हमें देख रही थी। मैंने चुदाई नहीं रोकी और बोला, “अरे कनिका जी… आप कब आयीं?” प्रेरणा भाभी ने भी उसे देखा तो चुदाई चालू रखते हुए कहा, “आजा कनिका… शरमा मत!” हमारी बात सुनकर कनिका जैसे अचानक होश में आयी और भाग कर उसके कमरे में चली गयी। हमने अपनी चुदाई ज़ारी रखी और शाम तक ऐश करते रहे। इस दौरान कनिका अपने कमरे से नहीं निकली। फिर बाद में हम दोनों मेरे कमरे में. जाकर नंगे ही सो गये।. अगले दिन सुबह जब हम उठे तो प्रेरणा भाभी बोली कि वो कनिका को समझा देंगी। फिर हम तीनों अपने-अपने दफ्तर, स्कूल ओर यूनिवर्सिटी निकल गये। उस दिन मुझे दफ्तर में देर तक रुकना पड़ा। शाम को जब प्रेरणा भाभी और कनिका अकेले थे तो प्रेरणा भाभी और कनिका साथ बैठ कर एक-एक पैग पीने लगीं। तब कनिका ने प्रेरणा भाभी से कहा, “भाभी जान! मुझे माफ़ कर देना, मैं अंजाने में जल्दी आ गयी थी… मुझे मालूम नहीं था कि आप और वो…!”. प्रेरणा भाभी बीच में ही बोली, “देख, कनिका! सैक्स के मामले में मैं और तेरे भाईजान बिल्कुल खुले ख्यालात के हैं। चोदने-चुदवाने में हम शरम-हया नहीं रखते हैं। हम दोनों के बीच अंडरस्टैंडिंग भी है कि तेरे भाईजान किसी और को चोद सकते हैं और मैं भी किसी भी मनचाहे मर्द से चुदवा सकती हूँ! लेकिन हम किसी एरे-गैरे के साथ चुदाई नहीं करते!”. कनिका बोली, “विक्की कैसा है? आप दोनों क्या रोज़-रोज़…!” प्रेरणा भाभी ने तपाक से कहा,“हाँ! रोज़ रोज़! विक्की मुझे रोज़ चोदता है और वो भी कईं कईं दफा। तू बता कि तू चुदवाती है कि नहीं या सूखी ज़िंदगी गुज़ार रही है?” कनिका बोली, “नहीं भाभी जान! नवीन को गुज़रे हुए छः साल हो गये… तब से बस ऐसे ही… दिल तो बहुत करता है… पर हिम्मत नहीं हुई कभी… जब कभी दिल ज्यादा ही मचलता है तो… यू नो.. केला या बैंगन वगैराह डाल कर अपनी प्यास बुझा लेती हूँ!”. प्रेरणा भाभी बोली, “छोड़ ये बेकार की बातें! कब तक सोसायटी की बेकार की पाबंदियों से डर-डर के जवानी बर्बाद करती रहेगी… जस्ट टेल मी क्लियरली… चुदवाना है विक्कीसे?” “दिल तो करता है मगर…” कनिका ने हिचकिचाते हुए कहा तो प्रेरणा भाभी फिर बोली, “ये अगर मगर कुछ नहीं… जस्ट से येस ओर नो…!”कनिका ने सिर हिला कर हाँ कह दिया। उस दिन मैं दफ्तर से काफी लेट आया था। रात को सोते वक्त अपनी और कनिका की बातें प्रेरणा भाभी ने मुझे बाद में बतायीं। मैं तो खुद कनिका को चोदने के लिये बेकरार था। अगले दिन शाम को दफ्तर से आने के बाद मैं. प्रेरणा भाभी के साथ बैठ कर शराब पी रहा था तो उन्होंने कनिका को भी कंपनी देने के लिये बुला लिया। कनिका आयी तो मैं उसके हुस्न को देखता ही रह गया।. जब से कनिका चंडीगढ़ आयी थी मैंने तो उसे हमेशा जींस और कुर्ता-टॉप में ही देखा था। आज शायद प्रेरणा भाभी की सलाह से उसने हल्के गुलाबी रंग की पतली सी स्लीवलेस नाइटी पहनी हुई थी जिसमें से उसका बेपनाह हुस्न. छलक रहा था। होंठों पे लाल लिपस्टिक और गालों पे गुलाबी रूज़ और पैरों में सफेद रंग के ऊँची पेंसिल हील के कातिलाना सैंडल पहने हुए थे। कनिका भी हमारे साथ बैठ कर ड्रिंक करने लगी लेकिन कनिका मुझसे नज़र नहीं. मिला रही थी। मैं और प्रेरणा भाभी ही बातें कर रहे थे और कनिका चुपचाप अपना पैग पी रही थी। हमने दो-दो पैग खतम किये तो कनिका के हावभाव से साफ था कि उसे अच्छा खासा नशा होने लगा। प्रेरणा भाभी ने जानबूझ कर. कनिका के लिये तगड़े पैग बनाये थे। अब कनिका हमारी बातों पे खुल कर खिलखिलाते हुए हंस रही थी। मुझे भी हल्का सुरूर था और खुद प्रेरणा भाभी भी नशे में झूम रही थीं। कातिलाना मुस्कुराहट के साथ उन्होंने मुझे. आँख मार कर इशारा किया तो मैंने बेशरम होकर कनिका से पूछा, “क्या खयाल है कनिका जी? पसंद आया आपको मेरा लंड? कल तो आप शरमा कर अंदर ही भग गयी थीं!” कनिका ने शरमा कर मुस्कुराते हुए अपनी भाभी की तरफ देखा तो प्रेरणा भाभी हंसते हुए बोली, “हाय अल्लाह… देखो कैसे शर्मा रही है…! अरे शरम हया छोड़… नहीं तो बस केले-बैंगन से काम चलाती रहेगी तमाम ज़िंदगी… सच में विक्की! कनिका तो बेकरार है तुम्हारा लंड लेने के लिये!”. “हाँ विक्की! छः साल से अपनी तमन्नाओं को दबा रखा था… अब और बर्दाश्त नहीं होता… भाभी जान की तरह प्लीज़ मेरी प्यास भी बुझा दो!” कनिका ज़रा खुलते हुए बोली।. मैं बोला, “क्यों शर्मिंदा कर रही हैं मुझे, बेकरार तो मैं हूँ इतने दिनों से आप जैसी ख़ूबसूरत हसीना को चोदने के लिये!” ये सुनते ही कनिका के गालों पर लाली आ गयी। हमने एक-एक पैग और पिया तो प्रेरणा भाभी ने उनके बेडरूम में चलने का इशारा किया। मैं बाथरूम में पेशाब करके प्रेरणा भाभी के बेडरूम में पहुँचा और दो मिनट के बाद वो. दोनों भी सैंडल खटखटती हुई नशे में झुमती कमरे में आयीं। नशे में होने की वजह से कनिका की चाल में लड़खड़ाहट साफ नज़र आ रही थी।. दोनों बेड पर बैठ गयीं। मैं उठ कर कनिका के पास आया और उसके गालों को चूमने लगा। नशे की मस्ती के बावजूद उसे बहुत शरमा आ रही थी। मैं अपने पैर लंबे करके पलंग पर बैठ गया और कनिका को अपनी गोद में खींच लिया. और उसका चेहरा घुमा कर उसके होंठों को चूमा। फिर मैंने जीभ से उसके होंठ चाटे और जीभ मुँह में डालने का प्रयास किया लेकिन उसने मुँह नहीं खोला। “क्या हुआ कनिका जी? आपको अच्छा नहीं लग रहा क्या?”मैंने पूछा।. कनिका हंसते हुए धीरे से बोली, “नहीं-नहीं विक्की! बस थोड़ा ऑउट ऑफ प्रैक्टिस हो गयी हूँ ना!” मैंने फिर उसके होंठों पे अपने होंठ रख दिये और उसका नीचे वाला होंठ अपने होंठों के बीच ले कर चूसा तो कनिका के जिस्म में झुरझुरी फ़ैल गयी और उसके दोनों निप्पल खड़े होने लगे। कनिका भी अब मेरा साथ देने लगी. और मैंने अपनी जीभ उसके मुँह में डाल दी और हम दोनों एक दूसरे की जीभें चूसने लगे। फिर मैं अपना हाथ उसके पेट से उसके मम्मों पर ले गया और नाइटी के ऊपर से सहलाने लगा। उसके मम्मों को सहलाते हुए मैं बोला, “कनिका जी, मम्मे तो बहुत बड़े-बड़े हैं और कठोर भी हैं!”
स्रोत:इंटरनेट