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Nanaji Ka Sex Puran 3

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मैं और पारुल घर आ गए थे। नीरज और बाकी बच्चे हमारा वेट कर रहे थे। हमने फिर खूब मस्ती की। रात को पारुल मामी की खाना बनाने में हेल्प कर रही थी। और मैं मामा और नानाजी के पास बैठ के उनसे बाते कर रही थी।. हमने साथ बैठ के खाना खाया टीवी देखा और फिर सोने चले गए।. रात में फिरसे कुणाल का फ़ोन आया। और पारुल ने कल रात जैसा ही फ़ोन स्पीकर पे डाला हुआ था। उनकी चुदाई वाली बाते सुरु हो गई। मैं भी उनकी बातो का मजा लेके अपनी चूत रगड़ रही थी। लेकिन आज जब मैंने आखे बंद की तो. देखा की नानाजी मेरी चूत चाट रहे है मैं उनका लंड चूस रही हु। और जब पारुल की बाते चूत चोदने तक पहोची तो मुझे ये दिखाई दे रहा था की नानाजी मुझे अपने लंड से खच खच चोद रहे है। और मुझे ये सोच के जादा. उत्तेजना हो रही थी। मुझे उसमे कोई बुराई नजर नहीं आ रही थी। उत्तेजना में अंधी हो चुकी मैं बड़े चाव से नाना जी के लंड के बारे में सोच के चूत में उंगली चला रही थी। उफ्फ्फ्फ्फ्फ ये मुझे क्या हो रहा था। तब. भी जब हम निचे खाना खाने से पहले बाते कर रहे थे तब नानाजी जब मेरे चीन को हाथ लगा रहे थे तब उनका हाथ मेरी चुचियो को लग रहा था और मेरा हाथ पकड़ कर नानाजी कैसे मेरी कोहनी अपने लंड की और धकेल रहे थे।. उफ्फ्फ्फ्फ़ कितना कड़क हो चूका था वो। मैंने तब इतना माइंड नहीं किया था क्यू की मुझे लगा था शायद गलती से हो रहा होगा। लेकिन क्या नानाजी जानबूझ कर ऐसा कर रहे थे। मैंने सोचा अब मैं देखूंगी की ये गलती से हो. रहा था या जानबुज के? क्या नानाजी सच में मुझे चोदने के बारे में सोच रहे है? सोचते सोचते मैं कब सो गयी पता ही नहीं चला।. इधर पारुल भी उसके दादाजी के लंड के बारे में सोच सोच कर चूत में उंगली कर रही थी। अब उसे कुणाल नहीं उसके दादाजी नजर आ रहे थे। उसे अब अपने दादाजी का लंड अपनी चूत में चाहिए था। वो किचेन से देख रही थी कैसे. दादाजी श्रुति के साथ हरकते कर रहे थे। हो ना हो वो अब वो भी हमारी जवानी का मजा लेना चाहते थे। तभी कैसे वो किचन में आके मेरी कमर पे हाथ रखकर मुझे फ्राई को कैसे करते है बता रहे थे। और उनका हाथ कब मेरी. कमर से निचे मेरी गांड पे आ गया था ये यकीनन गलती से नहीं हुआ था। उम्म्म्म्म जब उनका हाथ मेरी गांड से टच हुआ तब कैसी लहर सी दौड़ी थी मेरे शरीर में।. इधर नानाजी का भी हालत बहोत ख़राब थी। वो अपना लंड पैजामे में से निकालके उसे मुठ मार रहे थे। श्रुति और पारुल की जवानी बिना कपड़ो के कैसे लगेगी ये सोच सोच के उनका लंड किसी रॉड की तरह ताना हुआ था। पारुल की. गांड क्या मुलायम थी। सीसीसीसी अह्ह्ह जब मैं उसे नंगी करके छुऊँगा तो क्या मजा आएगा स्सस्सह्ह्ह् और श्रुति के चुचिया उफ्फ्फ्फ़ उसके सलवार से क्या लगाती है जब नंगी देखूंगा तो आह्ह्ह्ह ये सोच के अपना लंड. तेजी से हिलाने लग गए और फिर सरसरसर करके पिचकारी छोड़ने लगे। ऐसी उत्तेजना पहले कभी नहीं हुई थी उन्हें। उन्होंने अब मन ही मन सोच लिया था की किसी एक को जरूर चोदेंगे या फिर. दोनोंको………….. सुबह के 5 बजे होंगे की मामी के आवाज से हम दोनों की खुली।. मैंने दरवाजा खोला तो वो बोल पड़ी….
मामी:=पटापट तयार हो जाओ मंदिर जाना है।. मैं:=मंदिर??नहीं मामी मैं नहीं आ रही मंदिर मुझे सोना है।. मामी :=अरे आज पोर्णिमा है ये पोर्णिमा 10 साल में एक बार आती है और अपने गाव के मंदिर में आज बहोत बड़ी पूजा होती है और आज के दिन जो भी मुराद मांगोगे वो पूरी होती है।. पारुल भी उठ चुकी थी।. पारुल:=हा श्रुति माँ सच कह रही है। चल चलते है. मामी:=चलो जल्दी तैयार हो जाओ बाबूजी तुम्हारा इन्तजार कर रहे है। मुझे तो मंदिर मना है इसलिए मैं नहीं आ पाऊँगी।. हम लोग तैयार हुए और नानाजी और नीरज के साथ मंदिर पहुचे। बहोत भीड़ थी और लंबी लाइन हम लाइन में लग गए।सामने नीरज उसके पीछे मै पारुल और नानाजी लाइन में भी बहोत लोग आगे पीछे धकेल रहे थे। इधर पारुल की हालात. ख़राब थी। क्यू की पिछेसे नानाजी का लंड उसकी गांड पे लग रहा था। नानाजी तो थे दीवाने पारुल की गांड के वो भी भीड़ का फायदा लेके मजे से अपना लंड उसकी गांड पे रगड़ रहे थे। सुरु सुरु में पारुल को घबराहट हुई पर. बादमे वो नानाजी से चिपके खड़ी हो गयी और नानाजी के तगड़े लंड का मजा अपनी गांड को दिलाने लगी। नानाजी की मुराद तो जैसे मंदिर जाने से पहले ही पूरी हो चुकी थी। उन्हें भी सुरु सुरु में थोडा झिझक हो रही थी पर. जब उन्हें पारुल की और रेसपोंस मिलाने लगा तो वो भी बिनधास्त हो के अपना लंड पारुल की गांड से रगड़ने लगे थे।मुझे तो इस बात का अंदाजा पारुल का चेहरा देख के ही चल चूका था। मैं उन्हें डिस्टर्ब नहीं करना. चाहती थी सो मैं नीरज के साथ बाते करने लगी।. लाइन बहोत बड़ी थी अभी और आधा घंटा लगने वाला था। और लाइन भी बड़ी अजीब थी एक साथ चार चार रो थी। इसके वजह से पारुल और नानाजी में क्या चल रहा है ये कोई देख नहीं सकता था। जैसे ही कोई पीछे से धकेलता नानाजी. जोर से अपना लंड पारुल की गांड पे रगड़ देते। और जैसे कोई आगे से धकेलता तो मैं पारुल को जोर से पीछे धकेल देती जिससे पारुल अपनी गांड नानाजी के लंड पे दबा देती। इधर पारुल की तरफ से आता रिस्पांस देख नानाजी. ने अपना लंड खड़ा करके पारुल की गांड के दरारों में घुसा दिया था।जैसे लाइन आगे बढाती नानाजी अपना लंड पीछे लेके हल्का सा धक्का दे देते। पारुल इधर अपने गांड में फसे लंड का भरपूर आनंद उठा रही थी। कभी कभी. लंड सरक के निचे जाता तो सीधा उसके चूत के पास चला जाता जैसे उसकी चूत पे दस्तक दे रहा हो। उसकी चूत पानी पानी हो चुकी थी। नानाजी ने अब अपना हाथ भी पारुल के गांड पे फिरना और हलके हलके दबाना सुरु कर दिया. था जिसकी पारुल को जरा भी उम्मीद नहीं थी। एक बार तो नानाजी ने अपना हाथ फिसला कर सीधा चूत से टच कराने की कोशिश की पर पारुल एकदम से चोकी तो उन्होंने हाथ पीछे हटा लिया। नानाजी मस्त हो चुके थे पारुल की नरम. नरम मांसल गांड से लंड रगड़ के पारुल भी पहली बार रियल लंड का टच महसूस करके निहाल हो चुकी थी। दोनों भी भूल चुके थे की वो कहा है। सच कहते है लोग वासना अंधी होती है उसे ना रिश्ता समज आता है और नाही. मंदिर….
हम सब लोग दर्शन करके घर पहोंचे। मैं लगभग खीचते हुए पारुल को ऊपर ले गयी और उससे सारी बाते डिटेल में पूछी। उसने वर्ड तो वर्ड सब बताया।. मै := क्या बात है तूने तो बड़े मजे किये यार अपने दादाजी के लंड से अपनी गांड घिसाई करावा ली।. पारुल:= तो तू आ जाती मेरी जगह तू भी कर लेती मजा।. मैं:= मुझे नहीं करनी मजा…अब आगे क्या? कब ले रही है उनका लंड चूत में?. पारुल :=हाय रे क्या बताऊ दिल तो करता है अभी ले लू।. मैं:=तू न बावरी हो गयी है बेशरम….
हम दोनों हँसने लगी। और फिर ऐसेही छेड़छाड़ हँसी बाते होती रही।. नानाजी हमारी हरकते बड़ी गौर से देख रहे थे। उनके चहरे पे एक अलग तरह की ख़ुशी झलकने लगी थी। वो खाना खाके खेत में चले गए। हम भी खाना खाके थोड़ी मस्ती की और थोडा सुस्ता लिया । फिर श्याम को फिर खेतो की और. निकल पड़े। सोचा आज भी कुछ देखने को मिल जाय पर नानाजी कुछ काम करावा रहे थे। हमें देख के वो हमारी तरफ आये। हमे तो बड़ी मायूसी हुई। नानाजी आप यही है??मेरे मुह से यकायक निकल गया।. नानाजी:=क्यू कही और होना चाहिए था क्या मुझे ?उस खेत में?. मेरे और पारुल के होश उड़ गए हमने एक दूसरे की और देखा हम दोनों की आखो में इक ही सवाल था कही नानाजी ने कल हमें देख तो नहीं लिया?. नानाजी:=ऐसे क्या एक दूसरे की और देख रहे हो। चलो आओ इधर ।. हम नानाजी के पीछे पीछे चलने लगे।. मैं:= यार लगता है नानाजी ने हमें कल देख लिया।. पारुल:=मुझे भी ऐसा लगता है। देख न कल से ही तो वो हमसे कैसे बर्ताव कर रहे तुझे और मुझे छूने की कोशिश और सुबह भी तो….
मैं:= हा यार सही कह रही है तू।पहले कभी उन्होंने ऐसा नहीं किया। शायद पेड़ के निचे बैठ के जो बाते हम कर रहे थे वो भी सुन ली।. पारुल:= अगर ऐसा है तो ठीक है न यार मैं तो रेडी हु उनसे चुदने को बिस सालकी हो गयी हु यार बहोत तड़पती है (उसने चूत की और इशारा किया) बोल तू भी चाहती है ना?. मैं:==नहीं बाबा मैं नहीं……मैं इस मामले में थोड़ी शर्मा रही थी पर मन ही मन मई भी यही चाहती थी क्यू की आग लगी पड़ी थी चूत में उसे बुझानी तो पड़ेगी।. हम कुवे के पास आ गए नानाजी एक टोकरी में आम और तरबूज लेके आ गए। दोनों हाथो आम पकड़ कर मेरी चुचियो की और देखते हुए बोले….
नानाजी:= कितने बड़े बड़े है अंदर से कितने मीठे होंगे?. मैं तो शर्मा के लाल लाल हो गयी।पारुल को समज आ गयी बात । हम एक दूसरे की तरफ देखा फिर पारुल ने कहा. पारुल:= तो देख लीजिये ना खाके आपको रोका किसने है? वो मेरे कंधो पे दोनों हाथ रखके और अपनाचेहरा हाथो पे रख के कुछ अलग ही अंदाज से बोली।. नानाजी:=खाऊंगा बेटी पर थोडा पकाना पड़ेगा।. मैं शर्मा के निचे देख के मुस्कुराती रही और उनकी बाते सुनने लगी।. पारुल:= तरबूज तो खा ही सकते हो ना दादाजी।. नानाजी:= ह्म्म्म हा सुबह बस छुआ था तरबूज को बड़ा मजा आ रहा था। अब तो खाके देखना ही पड़ेगा। ये तो यकीनन पक गए है। बड़ा मजा आएगा इनको खाने में।. अब शरमाने की बारी पारुल की थी। वो झटके से खड़ी हुई और नाखून एक दूसरे पे घिसते हुए निचे देखने लगी।ये डबल मीनिंग बाते सुनके बड़ा मजा आ रहा था।. मैं:= नानाजी इस साल गन्ना क्यू नहीं लगाया हमें भी तो मजा आता गन्ना खाके?. नानाजी:= लगा दूंगा बेटी फिर मजे करना गन्ना चूस के. बापरे इसके बाद न मैं और पारुल कुछ बोल पायी। हमने वो आम और तरबूज लिए और घर की और निकल पड़े।. .. Desi Kahani के अन्य भाग-.
स्रोत:इंटरनेट