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Nanaji Ka Sex Puran Part 2 2

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अगला दिन भी रोज की तरह ही गुजरा।श्याम को हम खेतो में गए। नानाजी वहा नहीं थे। हमें लगा की शायद फिर से वाही औरत को चोद रहे होंगे। हम खेतो में इधर उधर उन्हें ढूंढने लगे। लेकिन वो कही दिखाई नहीं दिए। और. खेत इतने दूर दूर तक फैले हुए थे की उनको ढूंढना थोडा मुश्किल ही था। हम थक हार के कुवे के पास आ गए। तभी नानाजी हमें कुवे के पास वाले गोडाउन से बाहर आते दिखाई दिए।*. नानाजी:= अरे आज बहोत लेट हो गए तुम लोग।. पारुल:= नहीं तो हम तो बहोत देर से आ गए और आपको ही ढूंड रहे थे।. पारुल के मुह से निकल गया। नानाजी को समझ आ गया। वो मुस्कुराने लगे।. नानाजी:= मुझे खेतो में क्यू ढूंड रहे थे। मैं टी यहाँ गोडाउन में इलेक्ट्रीशियन से काम करावा रहा था। अभी गया वो। अच्छा तुम दोनों अंदर आओ थोडा काम है। वो मालती भी नहीं आयी आज।. पारुल:= (टॉन्ट टाइप) तो क्या मालती चाची वाला काम हमसे करवाओगे आज दादाजी?. नानाजी:= हा अगर तुम लोग रेडी हो तो मुझे क्या प्रॉब्लम हो सकती है!!!. पारुल:= लेकिन हमारी अ अ अ…मतलब हम तो बहोत छोटे है और मालती चाची बहूऊओत बड़ी…तो कैसे होगा?. नानाजी:= पहले मालती भी छोटी ही थी काम कर करके बड़ी हो गयी तुम भी सिख जाओगी। अब जादा बाते मत बनाओ यहाँ आओ थोड़ी हेल्प करो मेरी ये सामन थोडा ढंग से रखना है।. उपस्स्स क्या चल रहा था ये मैं शर्म से पानी पानी हो रही थी। हम लोग अंदर गए। सब्जिया और दूसरा सामान बिखरा हुआ था वो सब हमने सही से रखने में नानाजी की हेल्प की और फिर घर आ गए।. नानाजी भी हमारे पीछे आ रहे थे। पारुल अपनी मस्त गांड हिला हिला के चलरही थी। जब हम घर पहोंचे तो हमने देखा मामाजी नीरज को छोड़ने बस स्टैंड जा रहे थे। वो 10 दिन के लिए समर कैंप जा रहा था पुणे में। ये सब. अचानक ही तय हुआ था।. हमने उसे बाय बोला और वो चला गया। रात को खाने के बाद नानाजी ने मामी से कहा की वो छत पर सोयेंगे। मैंने पारुल की तरफ देखा वो भी मेरी तरफ देखके मुस्कुरा रही थी।. रात को टीवी देखने के बाद हम रूम में गए। पारुल बोली चल दादाजी से मिलके आते है। ऊपर दो ही रूम थी एक नीरज की और एक हमारी। और सामने पूरा ओपन था। नानाजी ने वही निचे अपना बिस्तर लगाया हुआ था। हम लोग नानाजी. के पास गए। वो सोये नहीं थे। कोई किताब पढ़ रहे थे।. मैं:= अरे नानाजी आप सोये नहीं अबतक? क्या पढ़ रहेथे?. नानाजी:= अरे कुछ नहीं… बस ऐसेही।( और उन्होंने किताब निचे रख दी)*. पारुल को शक हुआ उसने वो किताब उठाई और देखने लगी। वो सेक्सी नॉवेल थी। पारुल ने थोडा पढ़ा नानाजी ने उसे रोकने की कोशिश भी की लेकिन शायद वो चाहते थे की हम वो पढ़े।. पारुल:= उम्म्म्म बहोत अछि है नॉवेल।. मैं:= अच्छा बता मुझे।*. मैंने पढना सुरु किया। मैंने वो पन्ना पढ़ा जिसमे साफ़ शब्दों में चुदाई की बाते थी।. मैं := बापरे ये क्या है? और तू साली ये अच्छी है?. पारुल:= हा मुझे तो अच्छी लगी। लगता है तूने बुरा वाला पन्ना पढ़ा।. जरा पढ़ के सुना तो क्या पढ़ा तूने?. मैं:=छी मुझे नहीं पढना। और नानाजी आप?….
मैं आगे कुछ बोल ही नहीं पायी।*. नानाजी:= क्या करू बेटी? तन्हाई में कुछ तो चाहिए करने को।( अपना लंड़ दबाते हुए इस तरह की हम देख सके) और तेरी नानी की बहोत याद आती है।. मेरे मुह से अनजाने में निकल गया। “”क्यू मालती चाची है ना”””. नानाजी:=( मुस्कुराते हुए) हा है तो पर अब उसमें वो बात नहीं।. पारुल:=वो बात मतलब?. नानाजी:= वो जो तुम दोनों में है…!!!. मेरे तो होश ही उड़ गए। लेकिन पारुल बड़ी बेशरम हो के बात कर रही थी।. पारुल:= हम दोनों में क्या है?. नानाजी कुछ बोल पाते इससे पहले मैंने पारुल का हाथ पकड़ा और उसे खीचते हुए कहा “”चल न यार मुझे बहोत नींद आ रही है।””. और मैं उसे खीचते हुए रूम में ले आयीं। पारुल ने मुझपर ग़ुस्सा करते बोला. पारुल:=क्या कराती है पागल मस्त मजा आ रहा था।. मैं:= पागल है क्या तू मुझे बड़ा अजीब लग रहा था। हम अकेले में भले ही बहोत बाते करते है पर यार उनसे खुले आम ऐसे बात करना बड़ा अजीब लगता ।. पारुल:= हा पर बड़ा मजा आ रहा था।. उतने में कुणाल का फ़ोन आया। पारुल ने उसे बोल दिया की निंद आ रही है।. पारुल ने अपने कपडे उतारे और आज उसने स्कर्ट पहना पॅंटी निकाल दी।ऊपर एक ढीला सा शर्ट टाइप टॉप पहन लिया। मैंने अपने रेगुलर नाईट ड्रेस पहना था।. मैं:= पारुल तू ये कया पहना है?. पारुल:= कुछ नहीं थोड़े ढीले कपडे पहने है।. मैं समझ गयी की इसके दिमाग में कोई प्लान चल रहा है।. हम बिस्तर पे लेट गए।नींद हमसे कोसो दूर थी। फिर भी हम आखे बंद करके लेटे हुए थे। करीब आधे घंटे बाद दरवाजे पे टकटक हुई। पारुल और मैं उठे। पारुल ने मुझे इशारे से सोने को कहा और दरवाजा खोला।. नानाजी:= पारुल जरा पानी देना तो।. पारुल ने उनको पानी दिया। वो पारुल को देखे जा रहे थे।. नानाजी:= श्रुति सो गयी लगता है? अगर तुम्हे नींद नहीं आ रही होगी तो मेरे पैर और पीठ ‘कल’ की तरह दबा दो ना. पारुल:= जी अभी आती हु।. मैं उठी और पारुल से पूछा क्या हुआ?. पारुल ने बताया और कहा की मैं आती हु थोड़ी देर में। तू मत आना उधर।. पारुल चली गयी। मुझसे नहीं रहा जा रहा था। मैं पैट से उठ के सामने नीरज की रूम में चली गयी। वहा उसके रूम का लाइट ऑफ था।उसकी रूम की खिड़की को थोडा खोलके मैं बाहर देखने लगी। उन्होंने लाइट बंद कर दिया था पर. चाँद की रोशनी में मैं साफ़ साफ देख सकती थी और उनकी बाते भी सुन सकती थी।. नानाजी सिर्फ अंडरवियर में उलटे लेटे हुए थे। पारुल अपनी स्कर्ट उठा के अपनी नंगी चूत और गांड उनके गांड पे रगड़ती हुयी उनकी पीठ दबा रही थी।. नानाजी:= उम्म्म्म बहोत अच्छा लग रहा है ।. पारुल:=क्या दादाजी?. नानाजी:= तुम्हारे नरम हाथ और नरम नरम ….
वो चुप हो गए। पारुल:=और क्या दादाजी….
पारुल की आवाज भारी और मादक हो गयी थी। नानाजी:=कुछ नहीं….
एक काम कर थोड़ी ऊपर आ जा और कंधे भी दबा दे। पारुल ऊपर सरकी जिससे उसकी नंगी गांड और चूत नानाजी के कमर पे लग रही थी।पारुल मस्त रगड़ के उनको मजा दे रही थी।. पारुल := अब ठीक है? अब कैसा लग रहा है?. नानाजी:= ह्म्म्म अब सही है….
अह्ह्ह्ह अब सब अछेसे महसूस हो रहा है। थोड़ी देर बाद नानाजी सीधे हुए और पारुल को जांघे दबाने को कहा। उनका लंड बहोत तना हुआ था। पारुल की आखे उसपे से हट ही नहीं रही थी।. वो धीरे धीरे उनकी दोनों जांघे दबा रही थी। जब वो जांघे चेंज कराती वो उनका लंड छु लेती। नानाजी एक टक पारुल को देखे जा रहे थे।फिर नानाजी ने उससे कहा की उनके हाथ और कंधे सामने से दबा दे।पारुल ने एक पल के. लिए सोचा और वो अपनी स्कर्ट उठा के नानाजी के लंड पे बैठ गयी। उफ्फ्फ्फ्फ्फ इसकी उम्मीद तो मुझे नहीं थी और शायद नानाजी को भी न होगी।. अब उसकी चूत और नानाजी के लंड में सिर्फ अंडरवियर थी। पारुल पूरी तरह से पागल हो चुकी थी। वो नानाजी के लंड पे अपनी चूत और गांड रगड़ रगड़ के उनके कंधे दबा रही थी।और अपनी चुचिया बिलकुल नानाजी के मुह के पास. ले जा रही थी। नानाजी भी अब खुद पर से काबू खो चुके थे। उन्होंने अपने हाथ उसकी स्कर्ट में से आगे बढ़ाये और उसकी नंगी गांड को पकड़ कर सहलाने लगे। और निचे से अपनी गांड उचका के अपना लंड पारुल की चूत पे रगड़ने. लगे। पारुल की गांड पहली बार नंगी उनके हाथो में थी। जिसकी वो कल्पना करते थे अक्सर।. पारुल:= अह्ह्ह्ह दादाजी आप ये क्या कर रहे है? प्लीज छोड़ दीजिये।. नानाजी:= क्यू अच्छा नहीं लग रहा ?. पारुल:= हा अच्छा तो लग रहा है पर श्रुति आ जायेगी तो?. नानाजी ने अपना एक हाथ निकाला और उसकी पीठ पे रखा और उसे अपने ऊपर गिरा लिया। और वापस अपना हाथ उसकी गांड पे ले जा के उसे सहलाते हुए बोले. नानाजी:= तो आने दो उसे भी मजे दे देंगे।. पारुल आखे बंद करके नानाजी का लंड औरहाथो का स्पर्श एन्जॉय कर रही थी।. नानाजी ने उसके होठो को अपने होठो में जकड लिया ओस उसे चूसने लगे। पारुल भी अपनी चूत उनके लंड पे रगड़ रगड़ के उनका साथ दे रही थी।. नानाजी:= एक बात बताओ(पारुल के ओंठो को छोड़ते हुए) कभी किसीसे चुदी हो?. उफ्फ्फ्फ़ नानाजी के मुह से ये बात सुनके पारुल की उत्तेजना और बढ़ गयी। वही हालात मेरी भी थी। मेरी चूत बहोत गीली हो चुकी थी। मैंने अपनी नाईट पैंट निचे कर दी थी और लगातार चूत के दाने को मसल रही थी।. पारुल:=उम्म्म क्या दादाजी आप भी…!!! नहीं दादाजी आज तक मैंने कभी किसीको छूने तक नहीं दिया।. नानाजी:= तभी इतनी तड़प है तुम्हारी चूत में…. पारुल:= उम्म्म चुप कीजिये ना… ऐसी बाते मत कीजिये मुझे कुछ होता है।. नानाजी:=कहा ?. नेह:= यहाँ निचे (वो एकदम नानाजी के आखो में आखे डालके धीरेसे बोली). नानाजी:=निचे कहा …बताओ..। पारुल= मुझे नहीं पता… पारुल शरमाके अपनी आखे बंद करली।. नानाजी:=(नानाजी उसका चेहरा चीन से पकड़ के ऊपर उठाते हुए) बताओ सिर्फ एक बार…. पारुल:= अपनी आखे खोलके बड़ी ही सेक्सी अदाओ से देखते हुए धीरे से….
मेरी चूत में…अह्ह्ह्ह्ह्ह्ह नानाजी:=उफ्फ्फ्फ्फ्फ स्सस्सह्ह्ह् कहते हुए उसे जकड़ लिया और पलट केउसके ऊपर आ गए। क्या मस्त लगा तुम्हारे मुह सेसुनके।. और फिर नानाजी उसे बेतहासा चूमने लगे।पारुल भी उनको ऐसे लिपट गयी जैसे नागिन चन्दन के झाड़ से लिपट ती है। नानाजी ने उसके शर्ट के बटन खोल दिए। और उसके बड़े बड़े आम देख के नानाजी के होश उड़ गए। वो उसे हाथो में. लेके बोले “” आह्ह्ह उम्म्म ऐसी चुचिया तो पहली बार देख रहा हु उम्म्म मजा आ गया””. पारुल:=अह्ह्ह्ह धीरे ना दर्द होता है….
आपके लिए ही है कही भागी नहीं जा रही। नानाजी:= हाय मेरी जान ऐसा कड़क माल देख के किसको सब्र होता है।. नाना जी पारुल की चुचियो पे किसी भूके जानवर की तरह टूट पड़े। वो चुचियो को जोर जोर से भींचने लगे। पारुल अह्ह्ह्ह स्स्स्स्स्स्सस्सस्स करके उस मीठे दर्द का मजा लेने लगी। नानाजी ने उसकी चुचिया बारी से चूसना. सुरु किया उसके निप्पल्स को जैसे नानाजी ने अपने होठो में पकड़ा पारुल आआह्ह्ह्ह्ह्ह् ऊऊऊईईए माआआआ करके नानाजी का सर पकड़ के जोर से अपनी छातियो पे दबाने लगी। पारुल अब पूरी तरह मधहोश हो चुकी थी। उत्तेजना. में वो किसी बिन पानी के मछली जैसे तड़प रही थी। और नानाजी के होठ उसके लिए आग में घी का काम कर रहे थे।. पारुल:= उफ्फ्फ आह्ह्ह्ह दादाजी अह्ह्ह उम्म्म बहोत अच्छा लग रहा अह्ह्ह्ह और चूसिये ना अह्ह्ह. नानाजी ने अब अपना मोर्चा उसकी चूत की और ले गए।उन्होंने उसका स्कर्ट उठाया और टाँगो को फैलाके उसकी गुलाबी चूत को देखने लगे।चाँद की रोशनी में उसकी भीगी गुलाबी चूत किसी मोती की तरह चमक रही थी। नानाजी उसकी. उस मदमस्त कुवारी चूत को देखे जा रहे थे।. पारुल:= उम्म्म्म्म क्या देख रहे हो दादाजी?. नानाजी:= उफ़्फ़ग क्या क़यामत है तुम्हारी चूत अह्ह्ह्ह आज तो जन्नत जैसा मजा आ गया।. पारुल:= सिर्फ देखकर ही….
उसे छुओगे तो क्या होगा आपका? नानाजी:= आज तो मैं इसे छुवुंगा भी और अपने लंड से चोदुंगा भी। देख कैसे हिचकोले खा रहा है अपनी पोती की चूत देखकर कमीना कही का।. ऐसा बोलके नानाजी ने अपनी अंडरवियर निकाल दी और अपना तना हुआ लंड लेके पारुल के पास गए पारुल उठ के बैठ गयी और उसे पकड़ते हुए कहा….
पारुल:=उम्म्म ऐसे कमीना मत कहिये ना कामिनी तो मेरी चूत है जो जब से इसे देखा है तब से मु में पानी लिए इसके पीछे पड़ी है।. पारुल ने उनका लंड हाथ में पकड़ा हुआ था वो इतना बड़ा था की उसके हाथ में भी नहीं समां रहा था। वो उसकी स्किन को पीछे करके अपनी नाक उसके पास ले गयी उसकी खुशबू से पारुल पागल हो उठी । नानाजी भी उसके कोमल हाथो. का स्पर्श अपने लंड पे पाके मधहोश हो गए।. इधर मैं भी होश खो चुकी थी। नानाजी का लंड देखके मेरे होश उड़ गए। मेरी चूत अब नायग्रा फॉल बन चुकी थी। मन तो किया की जाऊ और मैं भी उनमे शामिल हो जाऊ। पर हिम्मत नहीं जुटा पायी।. नानाजी := हा कामिनी तो है ही तेरी चूत कल थोडा सा पानी चखा के भाग गयी। आज तो इसे निचोड़ निचोड़ के चखूंगा।….. नानाजी पारुल की चूत को सहलाते हुए कहा। पारुल:=अह्ह्ह्ह सीसीसीसी उम्म्म हा दादाजी आज इसका सारा रस निचोड़ लीजिये अह्ह्ह्ह आज नहीं भागेगी ये।. नानाजी अब उठे और पारुल चूत के पास आके बैठ गए। उसको चौड़ा करके अपना लंड उसकी चूत के पास ले गए और उंगिलयों से उसके लिप्स को अलग किया और लंड का सुपाड़ा उसकी चूत के अंदर के गुलाबी हिस्से पे रगड़ने लगे उसकी. चूत का गिलापण और अपने लंड का गीलापन मिक्स करने लगे।. पारुल:=अह्ह्ह उम्म्म्म स्स्सस्ससीसीसी अहह मर गयी उफ्फ्फ आउच अह्हब्बहोत अच्छा लग रहा है उम्म्म्म. नानाजी थोड़ी देर ऐसे ही करते रहे। मैं सांस रोके ये सब देख रही थी मुझे लगा की नानाजी अब अपना लंड पारुल की चूत में डाल देंगे। लेकिन वो अपना लंड वहा से हटा लिया और अपनी जुबान से चाटने लगे। नानाजी पारुल की. चूत को उंग्लियोसे फैला के चाट रहे थे चपचप चप ऐसी आवाज निकल रही थी। वो कभी ऊपर से निचे और फिर निचे से ऊपर अपनी जुबान चला रहे थे। वो पारुल के क्लिट को होठो में पकड़ क़र चूसते तो कभी काटते।. पारुल:=इस्स्स्स ऊऊह्हह्हह म्मम्म माँ मर गयी अह्ह्ह्ह्ह हां उम् ऐसेही ह धीरे ना अह्ह्ह्ह और और हा अह्ह्ह्हबहोत अच्छा अजह्ह्ह् लग राहाआआआ है उम्म्म काटिये मत ना उम्म्म्म डालिये ना अन्दरह्ह्ह्ह्ह्. नानाजी बड़े प्यार से अपनी पोती की चूत का रसपान कर रहे थे। अपनी जुबान पारुल की चूत में अंदर तक डाल दी और चोदने लगे अह्ह्ह्हूम्मम्ममआऔऊम्मम सपसप. पारुल ऐसी कलाबाजी के आगे टिक नहीं पायी और नानाजी का सर अपने चूत में जोर से दबा के उनके मुह में ही झड़ने लगी।. पारुल:=हाआआआ उम्म्म और तेज अह्ह्ह्ह मई तो गयी अह्ह्ह्ह्ह्ह. नानाजी उठे और पारुल के पास गए और उसे किस्स करने लगे। जब पारुल नार्मल हुई तो उसने आखे खोली।. पारुल:=ओह्ह्ह दादाजी आज तो मजा आ गया। उफ्फ्फ्फ्फ़ कमाल के हो आप सच में।. नानाजी:= ह्म्म्म अभी तो सुरवात है। आगे आगे देखो और भी मजा आएगा।. ऐसा बोल के नानाजी ने पारुल का सर अपने लंड की और धकेल दिया। पारुल समज गयी उसे क्या करना है। उसने नानजी को लेटाया और उनका लंड अपने मुह भर लिया और उसे आराम से चूसने और जुबान से चाटने लगी। लंड इतना लंबा. था की जब पारुल उसे मुह में लेती आधा ही अंदर जा पाता। पारुल अब सिर्फ उसका सुपाड़ा ही मुह में लेके चूस रही थी और बाकी हिस्से को अपने मुट्ठी में पकड़ कर ऊपर निचे कर रही थी।. नानाजी:= उम्म्म अह्ह्ह्ह पारुल ऐसेही मेरी जान उम्म्म क्या मस्त चूस रही हो तुम अह्ह्ह्ह. नानाजी ने अपना हाथ आगे बढ़ाया और पारुल की चूत को सहलाने लगे। फिर उन्होंने पारुल को अपने मुह पे बिठा लिया और फिरसे उसकी चूत चाटने लगे अह्ह्ह्ह्ह्ह कितना भी चाटो पारुल तुम्हारी चूत को मन ही नहीं भरता. अह्ह्ह्ह और तुम्हारी गांड अह्ह्ह्ह इसको तो मैं जिंदगी भर सहलाता राहु तो भी मन नहीं भरेगा।. पारुल:=उम्म्म्म्म हा दादाजी आपका लंड भी बहोत अच्छा है। इतना लंबा और गरम अह्ह्ह्ह्ह चूस के तो मेरा रोम रोम चहक उठा है। दादी बड़ी खुशकिस्मत थी जो रोज इस लंड से चुदती थी अह्ह्ह्ह्ह. दोनों अब वासना की आंधी में घिर गए थे।पारुल नानाजी का लंड और नानाजी पारुल की चूत पागलो की तरह चूसे जा रहे थे। पारुल फिर एक बार पानी छोड़ चुकी थी। नानाजी भी बस अब झड़ने वाले थे। उन्होंने पारुल को लेटाया. और उसके मुह में ऊपर लंड डाल उसका मुह चोदने लगे। और 4 5 झटको में मेही अपना सारा पानी पारुल के मुह पे छोड़ने लगे। और जब सारा पानी निकल गया तो निढाल हो के बाजू में गिर पड़े। पारुल के मुह पे इतना वीर्य छोड़ा. था नानाजी ने उसकें मुह फिसलता हुआ उसकेचूचियो पे आ रहा रहा था।. मैं इधर उनके चूत चटाई और लंड चुसाई खेल में अपनी चूत रगड़ रगड़ के दो बार झड़ चुकी थी। मैंने आखे बंद की और सोचने लगी जैसे नानाजी ने मेरे चहरे पे उनका पानी गिराया हो।. मेरी तंद्रि टूटी नानाजी के फ़ोन की कर्कश रिंगटोन ने। किशन चाचा का फ़ोन था। नानाजी के खेत के बाजू के खेत में जंगली सूअर और दूसरे जानवर घुस गए थे। नानाजी ने फट से कपडे पहने और पारुल को कहा की “मुझे. जाना पड़ेगा क्यू की किशन के पास बन्दुक नहीं है तुम्हारी चूत को बोलना की उसकी चुदाई उधर से आने के बाद होगी””. नानाजी चले गए और पारुल उनके वीर्य में नहाईं नंगी वही पे लेटी रही।. पर.. Desi Kahani के अन्य भाग-.
स्रोत:इंटरनेट