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Nanaji Ka Sex Puran Part 4 2

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पारुल और पापा” दोनों रजाई में एक दुसरे से चिपक के सो रहे थे। मैं ये देख के दंग रह गयी। उनके चहरे से पता चल रहा था की अभी अभी दमदार सेक्स सेशन हुआ है और वो आराम कर रहे है। मुझे बहोत अजीब लगा। पर. अगले पल दिमाग में वो बात आयी जो अभी अभी मैं पारुल के पापा के साथ करके आयीं थी। सोचा चलो अच्छा है पारुल को आखिर लंड तो मिला।. * * * * * * * * * * * * * * *मुझे बहोत नींद आ रही थी सो मैं सोने चली गयी। सुबह पारुल ने मुझे जगाया।. पारुल:= श्रुति उठ ना ….. चल जल्दी हमें महाबलेश्वर जाना है। चल उठ। मैं:=महाबलेश्वर? ये कब तय हुआ?( मैंने आखे मसलते लेटे लेटे ही पूछा). पारुल:= वो काका ने कहा की चलो तुम लोग भी वहा दिन भर घूमना शौपिंग करना रात को रुकेंगे और कल वो हमें यहाँ लाके छोड देन्गे।. मैं:= हा हा घूमेंगे फिरेंगे और रात कों तू उनसे मस्त चुदवायेगी नहीं?. * * पारुल को मेरी बात को कोई आश्चर्य नहीं हुआ उल्टा वो बेशर्मी से बोली…. पारुल:= हा वो भी कर लुंगी… तू चल जल्दी।. मैं:= साली कामिनी नानाजी नहीं मिले तो मेरे पापा को ही फसा लिया तूने।. पारुल:= हा यार बस हो गया…. मैं:= तू ना बहोत चालु है… बता जल्दी क्या क्या हुआ?. पारुल:= वो सब बादमे बताउंगी….
तू चल जल्दी कर। मैं:= मैं नहीं आ रही तू वहा मस्त चुदवायेगी और मैं क्या मंजीरे बजाऊ?. पारुल:= मेरी जान तूने क्या अपनी बहन को इतना मतलबी समझा है? मैंने नानाजी की तबियत का बहाना बना के उनको भी अपने साथ चलने को कह दिया।. मैं:= सच? नानाजी आ रहे है?. पारुल := हा …। तू उनके साथ मजे करना मैं काका के साथ। अब जल्दी कर उठ।. मैं:= हा मेरी माँ….
सॉरी सॉरी मेरी सौतेली माँ। * *ये बात सुनके पारुल और मैं दोनों हँसने लगे। मैं पटापट तैयार हुई और हम सब महाबलेश्वर के लिए निकल गए। वहा दिन भर हमने बहोत मस्ती की। पापा उनकी मीटिंग में बिजी थे। श्याम को जब हम होटल पहोंचे तो पापा का. मेसेज था वो डिनर के बाद 9 बजे आएंगे।. *फिर मैंने पारुल को पकड़ा और बोला बता अब क्या क्या हुआ रात को?. नानाजी:=रात को क्या हुआ?. मैं:= आप नहीं जानते पारुल ने क्या किया है नानाजी….
इसने आपके दामाद को ही फसा लिया और रात को मस्त चुदी है उनसे। नानाजी:= क्या??? तुम सच कह रही हो?. पारुल:= हा दादाजी …वो आ बस हो गया।. मैं:= चल अब डिटेल में बता. पारुल:==== अरे तू जब निचे गयी तो थोड़ी देर बाद मैं भी निचे आने के लिए निकली तो मैंने देखा की काका छत पे टहल रहे थे। उन्होंने मुझे देखा तो पूछ ने लगे”” अरे पारुल क्या हुआ ? सोई नहीं अब तक?. श्रुति सो गयी क्या?””. मैं:=वो काका श्रुति निचे है उसीको बुलाने जा रही थी। नींद नहीं आ रही। आप सोये नहीं?. काका:= नहीं बस खुली हवा का मजा ले रहा हु।. मैं फिर उनसे बात करने को चली गयी और उनके साथ टहल ते हुए बात करने लगे।. काका:=और बताओ अगले साल ग्रेजुएशन हो जाएगा फिर क्या करने वाली हो पढाई करोगी आगे या शादी? अगर कोई देख रखा है तो बताना मुझे मैं हेल्प करूँगा तुम्हारी।. मैं:= नहीं काका ऐसी कोई बात नहीं।. काका:= चलो अच्छा है।*. * * फिर हम एक जगह दिवार से सट के खड़े हो गए। उन्होंने मेरे कंधो पे हाथ रखा। वो तो हमेशा ही रखते है पर रात को एक तो मेरी चूत में खलबली मची हुई थी। और फिर एक मर्द का स्पर्श उफ्फ्फ मेरी आग फिर भड़कने लगी. थी। लेकिन मैंने अपने आप को कण्ट्रोल किया हुआ था।. काका:=तुम चिंता मत करो मैं तुम्हारे लिए एक से एक अच्छे लडके ढूंढ के लाऊँगा।. पारुल:= ठीक है लेकिन अपने जैसा ही ढूंढना।. काका:= वो क्यू? मैं तुम्हे इतना अच्छा लगता हु?. मैं:= हा … मैं जब भी शादी के बारे में सोचती हु तो आप जैसे लडके के बारे में ही सोचती हु।….
मैं बोल गयी। * *काका ये सुनके बहोत खुश हुए। वो अब मुझे कुछ अलग नजरो से देखने लगे। मैं ये बात समझ गयी।. काका:= तो मुझसे ही कर लो शादी।. मैं:= हा ठीक है आप मौसी को मना लो मै तैयार हु।. ये सुनके हम दोनों हँसने लगे। काका ने अब मेरे कंधे और बाह सहलाना सुरु कर दिया था। शायद उनको मेरी बातो से उत्तेजना होने लगी थी। उनका पैंट में उनके खड़े होते हुए लंड का उभार दिख रहा था। अब मेरी भी हालात. खराब होने लगी थी। मन में तय कर लिया की अगर काका भी यही चाहते है तो मैं मना नहीं करुँगी।. काका:= मौसी को मनाने की क्या जरुरत है हम भाग चलते है।. मैं:= ठीक है मैं कपडे लाती हु…।ऐसा बोल के मैं जाने के लिए आगे बढ़ी तो उन्होंने मुझे पकड़ना चाहा लेकिन मेरे बाह को पकड़ते पकड़ते उनका हाथ मेरी चूची को लग गया।. काका:= हा हा हा तुम तो बिलकुल तैयार हो।. पारुल:= हा मैं तो तैयार ही हु बस आप देर कर रहे हो।. *मैंने कुछ ऐसे कहा की उन्हें समझ जाय की मैं किस बारे में बात कर रही हु। और उनको समझ भी गया। अब वो उन्होंने अपना हाथ मेरी कमर पे रख दिया था। मैंने कुछ नहीं कहा तो उनका हौसला बढ़ गया। वो धीरे धीरे मेरे. पेट और कमर को सहलाने लगे। मैं आगे कुछ बोल पाती की कही एक चूहा मेरे पैरो पर से गया मैं घबरा के पलट के उनके सिने से चिपक गयी। उनका लंड और मेरी चूत आपस में टकरा गए। उनका लंड खड़ा था।उम्म्म्म्म मेरी चूत अब. पनियाने लगी थी। मै वापस अपनी जगह आके खड़ी हो गयी।. काका:= अरे तुम एक चूहे से दर गयी।. मैं:= हा कितना बड़ा था वो चूहा।… मैंने उनके लंड की तरफ देखते हुए कहा। काका को अब यकीं हो गया था की मैं उनसे क्या चाहती हु।. काका:= हा बड़ा तो था… पर बेचारा इतना इधर उधर उड़ इसलिए रहा है क्यू की उसे अपने बिल की तलाश है।….. ऐसा बोल के काका ने मेरी कमर दबाई। मैं:= तो जाए ना बिल में रोका किसने है? क्या पता बिल भी यही चाहता हो की चूहा जल्दी से अंदर आ जाय।. काका:=हा लेकिन उसे बिल दिखे तो अंदर जाय।….
काका ने अपना हाथ अब साइड से मेरीगांड को टच कर रहा था। मैं:= पर काका इतना बड़ा चूहा इतने छोटे बिल में कैसे जाएगा? उसे दर्द नहीं होगा?. काका:= सुरु में होगा फिर तो मजे ही मजे है।. मैं:= तो आज देखते है ना चूहे को बिल में उतार के।. काका:= उसके लिए तुम्हे चूहे को पकड़ना होगा पहले।. मैं:= लेकिन मैं कैसे?. काका:=( मेरा हाथ पकड़ के अपने लंड पे रखा) ये लो पकड़ो अपने चूहे को।. * *मैंने शरमाते हुए अपना हाथ पीछे किया।. मैं:= उए तो आपका पर्सनल चूहा है।. काका:=हा …तो उतार लो ना इसे अपने बिल में।. मैं:= काका आपक्या बोल रहे है?. काका:=मुझे पता है तुम ऐसे अपने बिल में लेने के लिए उतावली हो रही हो। और तुम्हारी बातो ने और तुम्हारी जवानी की खुशबु ने पागल कर दिया है।. मैं:= वो तो मैं.. मैं… * *मेरी बात पिरि होने से पहले ही उन्होंने मुझे जकड लिया। अपने दोनों हाथो से मेरी गांड के दोनों फाको को पकड़ के और खुद थोडा निचे झुक के अपना लंड मेरी चूत पे रगड़ते हुए बोले””मैं मैं क्या?. मुझे पता है तुम जवानी का मजा लेने के लिए उतावली हो रही हो। ओह्ह्ह्ह पारुल मैंने कभी नहीं सोचा था की मैं तुम्हारे साथ ये सब करूँगा।.
स्रोत:इंटरनेट