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Nanaji Ka Sex Puran Part 4

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क्या जबरदस्त चूत चाटी थी नानाजी ने हमारी। हम इन्तेजार कर रहे है की कब हमें मौका मिलेगा नानाजी से अपनी चूतों का शुभारम्भ करवाने का। पढ़िए इस जोरदार chudai story का अगला भाग-. Hindi Sex Story के अन्य भाग-. पार्ट 1. पार्ट 3. पार्ट 4. उस रात बहोत अच्छी नींद आयीं। मेरी और पारुल की चूत की आग कुछ हद तक कम हो जायेगी ऐसा मुझे लगा लेकिन ये निगोड़ी चूत कहा शांत बैठती है। इसकी आग तो और भड़क उठी थी।. अगला दिन हमेशा की तरह ही गुजरा। नानाजी की हालत में काफी सुधार था। अब उन्हें जादा तकलीफ नहीं थी। गाँव में से किसी मालिश वाले को मामाजी ले आये थे। उसने तो जैसे जादू ही कर दिया उसकी सुबह और श्याम की. मालिश ने नानाजी दर्द एकदम गायब कर दिया। लेकिन नानाजी जानबुज के बोल रहे थे की मूवमेंट में अभी भी तकलीफ हो रही है क्यू की वो चाहते थेकि हम आज रात फिर उनके कमरे में गुजारे। पारुल दिनभर से बड़ी खुश थी क्यू. की उसे पता था आज चुदाई पक्की है।मेरी भी हालत उससे कुछ अलग नहीं थी। रात को चुदने के ख़याल से ही चूत में दिन भर पानी आता रहा।. श्याम को जब हम खेतो में घुमने गए तब पारुल मुझसे बोली….. पारुल:=श्रुति यार आज दिन भर से ही चूत में बहोत पानी आ रहा है।. मैं:= हा यार मेरी भी हालत ऐसी ही है।. पारुल:= कब होगी रात और कब होगी इस चूत आग ठंडी हाय रे….. श्रुति:= सबर कर …सबर कर सब्र का फल मीठा होता है।. पारुल:= पर इस केस में सब्र का फल नहीं पानी है ….
और वो मीठा तो नहीं पर बहोत टेस्टी है । इस बात पर हम दोनों हंस पड़े। ऐसेही हँसते हुए और घूमते हुए ठंडी हवा का मजा लेते हुए घर आ गए।. लेकिन घर पहोच ते ही हमारे होठो से हँसी गायब हो गयी। हमने देखा की नानाजी के दोस्त उनसे मिलने आ धमके थे। पारुल का चेहरा रोने जैसा हो गया था। मुझे भी बहोत घुस्सा आ रहा था। नानाजी को हमारी हालत समझ आ रही. थी। उन्होंने मौका देख के हमसे कहा”” कोई बात नहीं सिर्फ आज की ही तो बात है”””. पारुल ने उनसे कह दिया की “”उनको गेस्ट रूम में सुला दीजिये”” नानाजी भी उस बात के लिए मान गए। लेकिन शायद हमारी किस्मत आज बहोत ही खराब थी। इस मामले को निपटाया नहीं तो सामने एक और. मुसीबत आ गयी। “”मेरे पापा””. उनका एक कांफ्रेंस मीटिंग थी महाबलेश्वर में कल। तो वो मुझे सरप्राइज देने आज रात को यहाँ पहोच गए।कल सुबह वो मीटिंग के लिए चले जाएंगे। “”हाय रे हमारी किस्मत””. पारुल तो रोने ही लगी थी। मैंने उसे समझाया की चल होता है ऐसे कोई बात नहीं।. रात को हमने खाना खाया। और सब अपने अपने कमरे में सोने के लिए जाने लगे। नानाजी और उनके दोस्त उनके कमरे में सो रहे थे। पापा और ड्राईवर अंकल गेस्ट रूम में। लेकिन… पापा ने मामी से कहा की वो ऊपर छत पे. सोयेंगे।. पापा:= अरे पारुल बेटा मेरा बिस्तर ऊपर छत पे लगा देना।वो क्या है हम मुम्बई में रहने वालो को कहा नसीब होता है खुले आसमान में सोना।. पारुल := हा सच कहा आपने काका।(दोस्तों ये बात मैं बता दू की हमारे मराठी लोगो में मौसी के हस्बैंड को काका ही कहते है). पारुल ने और मैंने पापा का बेड छत पे लगा दिया। और हम दोनों अपने कमरे में चले गए।. पारुल:=क्या यार ऐसा क्या हो रहा है हमारे साथ।. मैं:=हा ना यार… तूने तो भी नानाजी का लंड अपनी चूत में थोडासा ले लिया पर मैंने तो बस एक बार सिर्फ टच करवाया है ।. पारुल:÷सोचा था की आज मस्त खूब जमके चुदुंगी पर सारे अरमानो पे पानी फिर गया। श्रुति यार कुछ कर ना कुछ सोच।. मैं:=(हँसते हुए) हाय रे देखो तो जरा मेरी बहन लंड के कितना तड़प रही है। और में क्या करू यार? मेरे पास लंड होता तो तुम्हे चोद देती।. पारुल:= हा ना यार काश तू लड़का होती….
उतने में रितेश का फ़ोन आया। हमने हमेशा की तरह उसके फ़ोन पे बात करके चूत रगड़ने लगे पर आज मजा नहीं आ रहा था। आएगा भी कैसे एक बार किसीने पकवान का टेस्ट कर लिया तो उसे रूखी सुखी रोटी कहा अच्छी लगती है?. जैसे तैसे पारुल ने फ़ोन रखा….
पारुल:= साला कमीना यहाँ आग लगी है और ये आगया उसपे पेट्रोल डालने।. मुझे बड़ी हँसी आ रही थी पारुल पे। लेकिन मैं कण्ट्रोल कर रही थी।. मैं:= पारुल तू न पागल हो गयी है।. पारुल ने खुद शांत करते हुए आखे बंद करली और लेट गयी। मैं भी कुछ बोल नहीं रही थी बस आखे बंद करके लेट गयी। नींद तो हम दोनों को नहीं आ रही थी। मैंने वाच देखा 11.
30 बज चुके थे। मैंने पारुल से कहा “” चल निचे टीवी देखते है”” लेकिन उसने मना कर दिया। मुझे बिलकुल भी नींद नहीं आ रही थी। मैं उठ के निचे हाल में टीवी देखने लगी। और टीवी देखते देखते कब मेरी आँख लग गयी मुझे पता ही. नहीं चला। मैं वही सोफे पे सो गयी।. रात के करीब 1 बजे किसी चीज के अहसास ने मेरी आखे खुली। कोई सोफे पे मेरे पास बैठा हुआ था। और वो मेरी चुचियो पे धीरे धीरे हाथ घुमा रहा था। हाल में पूरा अँधेरा था। मुझे कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था। मुझे. लगा शायाद नानाजी है इसलिए मैं चुप चाप लेटी रही।और घर में बहोत मेहमान थे इसलिए मैंने कुछ भी बोलना सही नहीं समझा। लेकिन डर भी बहोत लग रहा था। पर मजे भी करने थे।. मुझे उनका टच आज अजनबी लग रहा था। मैंने आखे खोली और गौर से देखा तो वो…..””मामाजी”” थे। ओह गॉड ये क्या हो रहा है। मैंने झट से उनके हाथ को पकड़ा और उठ के बैठ गयी और “”मामाजी ये आप क्या कर् रहे हो?””. मामाजी:=( वो थोडा घबरा गए) वो श्रुति तुम यहाँ सोफे पे सो रही थी तो मैंने तुम्हे जगाया लेकिन तुम बहोत गहरी नींद में थी तो मैं तुम्हे ठीक से सुला रहा था।. मैं:= हा वो शायद मैं टीवी देखते देखते सो गयी। अच्छा ठीक है मैं जाती हु ऊपर।. मामाजी:=क्या हुआ श्रुति। मैंने तुम्हे छुआ तो अच्छा नहीं लगा तुम्हे? उस दिन तो जब बाबूजी तुम्हे छु रहे थे तुम्हे मजा आ रहा था? मामाजी ने मेरा हाथ पकड़ के धीमी आवाज में कहा।. मैं घबरा गयी।. मैं:= नहीं नहीं मामाजी ऐसा कुछ नहीं है अ वो अ…. मामाजी:= घबराओ मत श्रुति मैं जानता हु बाबूजी कैसे है। और उस दिन वो तुम्हारे साथ क्या क्या कर रहे थे और तुम उनके साथ क्या क्या कर रही थी सब देखा मैंने। मैं तो बस तुम्हारी जवानी को एक बार छूना चाहता हु।. जब से तुम यहाँ आयीं हो ये तुम्हारी बड़ी बड़ी चुचिया देख के पागल सा हो गया हु।. और आज जब तुम्हारी ये बड़ी बड़ी चुचिया तुम्हारी साँसों के साथ ऊपर निचे होते देखा तो मैं अपने आप को रोक नहीं पाया। प्लीज श्रुति बस मुझे इन्हे आज जी भर के छु लेने दो मैं तुम्हे कभी दुबारा कुछ नहीं करूँगा।. मुझे खुद पे नाझ होने लगा था। मेरी चुचियो को देख सिर्फ नानाजी ही नहीं तो मामाजी का ईमान डोल गया था। मैं तो थी ही प्यासी सोचा चलो आज नानाजी नहीं टोमामजी ही सही। मैंने घबराने का नाटक करते कहा…. मैं:= मामाजी वो उस दिन मैंने कुछ नहीं किया प्लीज ये बात आप किसीसी कहियेगा मत।। मेरी बात सुनके उनका होसला बढ़ गया।. मामाजी:= नहीं बताऊंगा पर अगर तुम मुझे अपनी चुचियो के साथ जी भर के खेलने डौगी तो….
मैं:= मामाजी प्लीज मुझे शरम आ रही है।. मामाजी समझ गए की चिड़िया फंस गयी। पर उन्हें कोण बताये की चिड़िया ने आपको फसा लिया।. मामाजी := शरम की क्या बात है? तुम जवान हो मजे लो जवानी के खेल के।. मैं मन ही मन सोचने लगी…””इस जवानी के खेल का मजा लेने के लिए आपकी बेटी उतावली है। आज बिचारी तड़प तड़प के सो गयी और मैं यहाँ उसके बाप के साथ रंगरेलिया मनाने जा रही. हु”””. मैं:=ठीक है मामाजी लेकिन सिर्फ छूना ही आगे कुछ नहीं… वादा कीजिये।. मामाजी:= हा श्रुति वादा….
मामाजी खुश होते हुए बोले। मामाजी ने मेरे टॉप के अंदर हाथ डाला औरब्र के उपरसे चुचिया मसलने लगे।. मामाजी:= अहह श्रुति बहोत अछि है उम्म्म. मैं:= थैंक यू … हम फुसफुसाकर ही बात करताह थे।मन में तो बहोत डर लग रहा था की कोई देख ना ले पर दूसरा मन ये कहता कुछ नहीं होगा।. मामाजी मेरी चुचिया अब ब्रा के अंदर से हाथ डालके बारी बारी दबा रहे थे।मैं. आखे बंद करके सोफे अपनी पीठ तिकाके बैठी हुई थी।. मामाजी मेरे नजदीक आके मेरे गालो पे किस्स करते हुएबोले””” श्रुति ब्रा के हुक खोल दू?”””. मैं:=उम्म्म्म आह्ह्ह मामाजी आपने तो आग भड़का दी मेरे अंदर अब आप जो चाहेवो कीजिये पर इस आगको ठंडी कीजिये।. मामाजी:= उम् ठीक है मेरी जान ….
मामाजी ने मेरे ब्रा के हुक खोल दिए और उसे निचे सरका दिया। अब मेरी चुचिया आझाद थी। वो उसे जोर जोर से भींचने लगे और मेरे गले पे गालो पे होठो पे किस्स करने लगे। मैं भी उनका साथ देने लगी। फिर वो मेरे. निप्प्ल्स को मुह में लेके चूसने लगे। और अपना हाथ मेरी चूत की तरफ बढ़ाने लगे।. मैं:= हा मामाजी उम्म्म उफ्फ्फ बहोत अच्छा लग रहाहै अह्ह्ह्ह और चूसिये ना अह्ह्ह उम्म्म. मामाजी मेरी चूत पैंट के ऊपर से ही रगड़ आरहे थे। मुझसे रहा नहीं गया मैंने उनका हाथ पकड़ा और अपने नाईट पैंट के अंदर घुसा दिया और उनका हाथ अपने चूत पे रगड़ने लगी।. मामाजी:= उफ्फ्फ्फ़ श्रुति अहाह्ह्ह तुम तोबहोत उतावली हो रही हो अह्ह्ह उम्म्म उफ्फ्फ तुम्हारी चूत से गरम गरम भाप निकल रही है…. मैं:=( जोर जोरसे साँसे लेती हुई) अहह हा मामाजी उम् मेरी उफ़्फ़सीसीसी अहह चूत में सच में अह्ह्ह सीसीसी आग लगा दी है एअह्ह्ह्ह् आपने उम्म्म. मामाजी मेरी चूत को बिच वाली उंगली से रगड़ने लगे और मेरी चुचिया जी भर के मुह में लेके खाने लगे अह्ह्ह्ह। वो मेरी चूत में उंगली डालने लगेअह्ह्ह्ह्मेरि तो चूत औरभी तड़पने लगी थी मैंने पैर जमींन पे रखा. औरगांडको थोडा हवा में लेके गई जिससे मामाजी को मेरी चूत उंगली घुसाने को आसानी हो गयी। वोअब तेज तेज उंगली अंदर बाहर करने लगे मैं अह्ह्ह्ह स्स्स हां और और हा बहोत अच्छा लग रहा है अह्ह्ह्ह्ह्ह्ह. उईईईमाआआउम्म्म करते हुए अपनी गांड को और ऊपर उठा उठा के उनकी उंगली को चूत में लेने लगी। वो भी अपनी पसंदीदा चुचियो मस्त चूसे जा रहे थे। मैं जादा देरतक टिक नहीं पायी और अपनी गांड धड़ाम से सोफे पे पटक के. झड़ने लगी। मामाजी को ये बात समझ आ गयी उन्होंने अपना हाथ बाहर निकाला और मुझे गालो पे किस्स करते हुए कहा….
मामाजी:= हो गयी तुम्हारी आग ठंडी? अब जरा इसे भी ठंडा करदो ना….
उन्होंने मेरा हाथ अपने लंड पे रखते है कहा। मैंने देखा उनका लण्ड धड़ धड़ करके उड़ रहा था। नानाजी जितना बड़ा नहीं था पर छोटा भी नहीं था।. मैंने उसे पैंट के ऊपर से थोड़ीदेर सहलाया। फिर मामाजी को पैंट निचे करने को कहा। मैंने उसे हाथ में पकड़ा उम्म्म्म बोहोत गरम था। मेरी मुट्ठी में समां रहा था नहीं तो नानाजी का लंड नाही हाथ में पकड़ा जाताहै. और नाही मुह में ठीक से बैठता है। पूरा मुह दर्द करने लगता है। मैं उसे ऊपर निचे कर रही थी उसके प्रीकम को हाथो से पुरे लंड पे फैला रही थी। मैंने उसका प्रीकम टेस्ट करने के लिए हाथ अपने जुबान तक लाया और. उसे चाटने लगी टोमामजी बिल पड़े…. मामाजी:= उम् ऐसे नहीं श्रुति सीधा मुह लगा के टेस्ट करो मजा आएगा।. मैं:=(मन में) हा मामाजी ओ भी करुँगी मुझे पता है लंड का पानी कैसे टेस्ट कराटे है।. मैंने मामाजी का लंड निचे झुक के मुह में भर लिया। अह्ह्ह्ह्ह ऊऊऊओफ़्फ़्फ़्फ़्फ़् श्रुति मामाजी के मुह से आह निकल गयी।. उम्म्म्म सच में मामाजी का लंड मुझे बड़ा पसंद आया मैं उसे अपने मन मिताबिक चूस सकती थी। मैं उसके साथ जुबान से खेलने लगी। उसे चाट चाट के गिला गिला कर दिया। उम्म्म्म्म”” मामाजी अह्ह्ह्ह बहोत. अच्छा है आपका लंड अह्ह्ह्ह”””. मामाजी मेरी पीठ से हाथ निचे ले जा के मेरी गांड के छेद को छेड़ने लगे अह्ह्ह उनके ऐसा करने से मुझमे एक अलगसि लहर दौड़ने लगी।. मैं:= उम्म्म मत कीजिये ना मामाजी….
मेरी चूत फिर से फड़फड़ाने लगी है अह्ह्ह्ह मामाजी:= कोई बात नहीं…अभी उसे ठीक किये देते है।. मामाजी ने मेरी पैंट निकाल दी और मुझे सोफे पे लेटा दिया और उनका लंड मेरी मुह के पास लाके और अपना मुह मेरी चूत के पास ले जा के वो भी सोफे पे लेट गए।. मैंने गप से उनका लंड मुह में लेके चूसने लगी और उसे मुट्ठी में पकड़ के हिलाने लगी। मामाजी भी मेरी चूतको चाटने लगे । वो ऊपर मेरी चूत चाट रहे थे और निचे एक उंगली घुसा के मेरी चूत चोद रहे थे। मैंने उनको. निचे किया और मैं उनके उपरसे आ गयी और उनका लंड मुह में भरके ऊपर निचे करने लगी।औरअपनी चूत उनके मुह पे तेजी से रगड़ने लगी। फिर उन्होंने मुझे निचे किया और वो ऊपर आ गए। ऐसेही हम एक दूसरे को ऊपर निचे करते. करते झड़ गए। मैंने उनका सारा पानी अपने मुह में ही लिया।वो भी मेरा सारा पानी पि गए। मुझे तो बहोत इच्छा हो रही थी की चुदवालु उनसे पर मन में कहा नहीं मेरी चूत में पहला लंड जाएगा तो वो नानाजी का। हमने कपडे. पहने एक दूसरे को किस्स किया।. मामाजी:= श्रुति प्लीज चोदने दो ना। बड़ा मन कर रहा है।. मैं:= नहीं मामाजी आप कैसी बाते कर रहे है? आपने सिर्फ चुचियो को छूने की बात की थी पर आपने चूत भी चाटी और लंड भी चुसवाया। अपना वादा मत तोडिये।. मामाजी:= ठीक है ठीक है….
पर कभी अपने मामा से चुदवाने का मन किया तो जरूर बताना। मैं:= हा ठीक है।….. फिर मैं ऊपर आ गयी रूम में देखा तो पारुल नहीं थी। बाथरूम में भी नहीं थी। मेरा माथा ठनका….
मैं नीरज की रूम में गयी और खिड़की से बाहर देखा तो मैं दंग रह गयी…………………..
स्रोत:इंटरनेट