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Nanaji Ka Sex Puran Part 5 2

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मैंने पलट के देखा तो सच में नानाजी के लंड में फिर से जान आने लगी थी। मैं फिर और जादा सेक्सी अदाएं दिखाने लगी। अपनी गांड के फाको को चौड़ा कर के उसे मटकाते हुए उनके करीब गयी जैसे वो उसे छुने के लिए उठे. मैं आगे आ गयी। फिर मैंने अपने बूब्सको पकड़ के उन्हें मसलने लगी निप्प्ल्स को मुह में लेने की कोशिश करने लगी। साथ साथ उम्म्म्म अह्ह्ह सीसीसीसी ऐसी मादक आहे भरने लगी। ऐसा खुद के साथ खेलते खेलते मैं बहोत. उत्तेजित हो रही थी। उधर नानाजी भी अपना लंड मुठियाने लगे थे। फिर मैं वहा सामने पड़े एक टेबल पे चूत को चौड़ा करके बैठ गयी। और नानाजी की तरफ देख के चूत को रगड़ने लगी। उम्म्म्म्म अह्ह्ह्ह सीसीसीसी मेरे मुह. से ऐसी आवाजे सुन नानाजी भी अब जोश में आ रहे थे। मैंने अपनी चूत में एक उंगली घुसाई और फिर उसे अंदर बाहर करने लगी। फिर मैंने वही उंगली मुह में लेके चूसने लगी। ये देख नानाजी से रहा नहीं गया। वो उठके मेरे. पास आये और मेरे चूत के दाने को अपने लंड से रगड़ने लगे।*. नानाजी:=उफ्फ्फ्फ़ श्रुति मेरी जान सीसीसी तुम सच में कमाल हो आह्ह्ह. मैंने उन्हें अपने पैरो के शिंकजे में कमर से जकड लिया।और उन्हें एक लॉन्ग वेट किस्स किया और…. मैं:=उम्म्म नानाजी उफ्फ्फ्फ़ आपके लंड का यु रगड़ना बहोत अच्छा लग रहा है अह्ह्ह. नानाजी ने मेरे पैरो को अलग किया और चूत को चाटने लगे। मैं उनके बाल पकड़ के उनका सर अपने चूत पे दबाने लगी।*. मैं:=अह्ह्ह्ह उम् और और हहा हहा उम्म्म चाटिये उम्म्म. *नानाजी मेरी चूत सिर्फ चाट नहीं रहे थे बल्कि उसे अंदर तक गिला कर रहे थे।. मैं:= नानाजी अब बस कीजिये नाआअ उम्म्म अब डाल दीजिये अपना लंड चूत में….
बना दीजिये मुझे औरत अह्ह्ह्ह बहोत तड़प रही है उफ्फ्फ्ग्ग नानाजी:=उम्म्म श्रुति यही सुनना चाहता था मैं….
*नानाजी खड़े हुए और अपना लंड मेरे चूत से सटा दिया और धीरे से लंड का सुपाड़ा अंदर डाल दिया। चूत और सुपाड़ा दोनों गीले थे इसके वजह से मुझे दर्द नहीं हुआ। मैं अपनी सांस रोके आखे बंद करके उनकी अगली हरकत का. इन्तजार करने लगी। नानाजी धीरेधीरे अपना लंड मेरी चूत में डाल रहे थे। उनके लंड की गर्माहट मुझे महसूस हो रही थी। और अपनी चूत का फैलाव भी मैं महसूस कर पा रही थी। नानाजी *दबाव थोडा बढ़ा रहे थे। मुझे अब थोडा. दर्द का अहसास ही रहा था। मेरे चहरे से उन्हें ये पता चल रहा था।. नानाजी:= श्रुति बस थोडा और फिर दर्द नहीं होगा।. मई:= उईई माँउफ़्फ़्फ़्फ़्फ़ग आपका लंड है इतना बड़ा नानाजी सीसीसीसी धीरे धीरे डालिये।. नानाजी ने अपना आधा लंड मेरी चूत में था। वो उसे बाहर निकाल के फिर से अंदर डालने लगे। जैसे मेरी चूत थोड़ी ढीली हुई वैसे उन्होंने फिर अपना लंड अंदर डालने लगे। जब उनका थोडा ही लंड बाहर था उन्होंने एक झटका. मारा और पूरा लंड अंदर पेल दिया। आआआआआआआ मर गयी उफ्फ्फ्फ्फ्फ्फ्फ़ मेरे मुह से चीख निकल गयी। नानाजी ने मेरे होठो को अपने होठो में कैद करके मेरी चीख दबा दी। मैंने उन्हें अपनी बाहो में जकड लिया। वो मेरे. पीठ को सहलाते हुए मेरे गालो को चूमने लगे।*. मैं:=उफ़्फ़्फ़ नानाजी आप बड़े गंदे हो इतनी जोर सेकोई झटका देता है क्या?. नानाजी:= उम्म्म्म अभी तुम ऐसे कह रही हो जब तुम्हे मजा आने लगेगा तब तुम ही जोर जोर से चोदने के लिए कहोगी।. नानाजी अब अपनी कमर थोड़ी आगे पीछे करके अपना लंड मेरी चूत में थोडा थोडा अंदर बाहर कर रहे थे। उनके लंड की तपन और कडा पण अब मुझे अच्छा लगने लगा था। मेरा दर्द अब लगभग गायब हो चूका था। मैं भी अब अपनी चूत को. थोडा उनके लंड पे दबा रही थी।. नानाजी भी समझ गए की मुझे मजा आने लगा है। वो अब धीरे धीरे मुझे चोदने लगे। अब वो लंड थोडा जादा बाहर निकालने लगे। जैसे उनका लंड अंदर जाता मेरा मुह अहह करके खुल जाता।. मैं:=ओह्ह्ह्ह नानाजी उम्म्म मैं ये सोच के डर रही थी की आपका इतना बड़ा लण्ड मेरी चूत में कैसे जाएगा। लेकिन देखिए ना आपका पूरा लंड निगल लिया इस निगोड़ी चूत ने अह्ह्ह्ह उम्म्म्म बहोत अच्छा लग रहा है. उफ्फ्फ्फ्फ्फ्फ़ आपके लंड की गर्माहट उम्म्म्म्म्म आखिर आपने मुझे कली से फूल बना ही दिया उम्म्म्म्म्म. नानाजी:= हा मेरी जान सीसीसीसीसी ऐसी कसी हुई चूत उफ्फ्फ्फ़ बहोत दिनों बाद मिली है उम्म्म तुम्हारी चूत का गीलापन मेरे लंड को और भी कडा कर रही है।*. मैं:=और आपके लंड का कडा पण मेरी चूत और भी गीली कर रहा है। सीसीसीसी आह्ह्ह्ह्ह् ओह्ह्ह्ह नानाजी अब समझ आ रहा है की क्यू लोग कहते है की चुदाई से बड़ा कोई सुख नहीं।. नानाजी:=ह्म्म्म सच कहती हो तुम….
और अगर चुदने वाली तुम्हारी जैसी हो तो और भी मजा आता है। मैं:=ओह्ह्ह्ह्ह नानाजी आपके लंड को चूत में लेके मैं कितनी खुश हु मैं बता नहीं सकती। उम्म्म्म्म्म अह्ह्ह्ह्ह ये अंदर बाहर हो रहा है ना तो ऐसे लग रहा है जैसे मेरा बदन हवा में उड़ रहा है। आपके हर धक्के के. साथ जो मीठा दर्द हो रहा है उसके बारे में मैं आपको शब्दों में नहीं बता सकती। उम्म्म्म्म्म अह्ह्ह्ह. नानाजी:= तुम्हे बताने को जरुरत नहीं है मैं तुम्हारे चहरे पे देख सकता हु।. नानाजी अब थोडा जादा स्पीड से मेरी चूत चोद रहे थे। मैं भी अब झड़ने के कगार पे थी।. मैं:= अह्ह्ह्ह्ह हा..हा..अह्ह्ह और उम् हाआआआ चोदिये ना और तेज डालिये ना और अंदर सीसीसीसीसीसीसीसी अह्ह्ह्ह्ह बहोत उछल रही थी ये नानाजी आपके लंड के लिए उम्म्म्म चोदिये ऐसे अह्ह्ह्ह्ह* नानाजी:= हा मेरी रानी उम्म्म्म आज ऐसा चोदुंगा ऐसे की फिर कभी तुम्हे परेशान नहीं करेगी।*. नानाजी ने मेरी टाँगे अपने हाथो में लेके पूरा खोल दिया और बहोत स्पीड से अपना लंड मेरी चूत *में अंदर बाहर करने लगे। उनके लंड की स्किन मेरे चूत के कोने कोने को आंनद पहोचा रही थी।चप चप की आवाज पुरे रूम. में घूम रही थी। नानाजी खप खप खप मुझे चोदे जा रहे थे। मैं आखे बंद किये उनके हर धक्के का पूरा मजा लेरही थी।. मैं:=धीरे ना अह्ह्ह्ह फट जायेगी मेरी चूत उम्म्म्म्म्म अह्ह्ह्ह्ह जोर से उम्म्म्म हा ऐसेही उफ्फ्फ्फ्फ़ और चोदिये एअह्ह्ह्ह् उम्म्म्म्म अह्ह्ह्ह मेरा बस होनेवाला है हा डालिये अपना लंड उफ्फ्फ्फ्फ्फ्फ्फ़. अह्ह्हह्ह्ह्हह्ह. मैं झड़ने लगी थी। मैंने नानाजी की कमर को पकड़ लिया उनसे लिपट गयी। 2 min तक मैं अपनी आखे भी खोल नहीं पायी। जब मैंने आखे खोली तो नानाजी मेरी तरफ देख के मुस्कुरा रहे थे।. मैं:=ओह्ह्ह नानाजी उम्म्म… बस मैं इतना ही बोल पायी। उनका लंड अभी भी मेरी चूत में था। उन्होंने मुझे वैसेही उठाया और बेड पे सुला दिया और मुझे गले पे किस्स करने लगे। मेरे कानो को काटने लगे। निप्पल. को चुटकी में लेके मसलने लगे।वो बहोत माहिर खिलाड़ी थे। उन्हें पता था की लड़की को फिर से उत्तेजित कैसे किया जाता है।. मैं:=नहीं ना प्लीज अह्ह्ह दर्द होता है। मैं सिसकती हुए बोली।. नानाजी:= इस दर्द में भी अपना ही मजा है….
सच कह रहे थे वो ये ऐसा दर्द था जो कोई भी औरत मना नहीं कराती क्यू की इस दर्द के पार ही तो *स्वर्ग का आंनद है।. उनकी इस छेड़ छाड़ से मेरे चूत के छेद में फिर से काम लहर दौड़ने लगी थी। मैं अपनी गांड उचका के उन्हें सिग्नल दिए जा रही थी। वो मेरे सिग्नल समझ गए। और फिर से अपना लंड आगे पीछे करने लगे। अब वो सुरवात से ही. जोर के धक्के लगा रहे थे। मैंने अपनी चूत चौड़ी करके उन्हें और जोरसे चोदने को उकसा रही थी।क्यू किमुझे भी अब जोरदार धक्के अपनी चूत में चाहिए थे।*.
स्रोत:इंटरनेट