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Nanaji Ka Sex Puran Part 5 3

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मैं:=ओह्ह्ह्ह हा उम्म्म उफ्फ्फ्फ़ क्या लंड है आपका नानाजी उम्म्म्म और जैसे आप चोद रहे हो हाय रे उम्म्म्म ऐसा लगता है बस आप युही मेरी चूत चोदते रहो जिंदगी भर उम्म्म्म ये रात कभी खत्म ही ना हो।. नानाजी:=श्रुति स्स्स्स अह्ह्ह तुम सच में बहोत ही सेक्सी हो। जिस तरह से तुमने मेरे लंड को जकड़ा है उफ्फ्फ्फ्फ्फ और तुम्हारी चूत की अंदर की गर्मी मेरे लंड को ऐसे लग रही है जैसे मैंने किसी भट्टी में लंड. दाल दिया है।. मैं:=उम्म्म्म आपने ही तो उसे इतना गरम किया है….
अब भुगतो। आप ने ही आग लगायी है अंदर और आप के फायर ब्रिगेड का पानी ही उसे शांत कर सकताहै उम्म्म्म नानाजी शायद थक रहे थे अब उनके धक्के थोड़े कम हो रहे थे। लेकिन मेरी चूत में तो शोले भड़क रहे थे। मैंने नानाजी को रोका और उन्हें निचे लेटाके मैंने उनका लंड अपनी चूत में ले लिया अह्ह्हह्ह्ह्हह्ह उनका सीधा. खड़ा लंड मेरी चूत में किसी खुटे की तरह महसूस हो रहा था। मैं अपनी गांड पटक पटक के उसे अपनी चूत की गहराई में लेने लगी। मैं:=अह्ह्ह्ह्ह सीसीसीसीसी उम्म्म वाओ नानाजी उम्म्म ये पोजीशन तो बहोत ही अछि है. सीसीसीसी अह्ह्ह्ह लंड चूत में अंदर तक महसूस हो रहा है उफ्फ्फ्फ्फ्फ्फ़ अह्ह्ह्ह्ह्ह्ह क्या मजा है ये….
कही मर ही न जाउ। नानाजी:= उम्म्म श्रुति अह्ह्ह्ह तुम्हारी चूत में अदर बाहर होता लंड और तुम्हारी फैली हुई चूत को देखने में बहोत मजा आ रहा है।. मैं तेजी से उसे अंदर लेने लगी। उसकी रगड़ मेरे चूत में एक अलग ही आंनद की अनुभूति करा रही थी। नानाजी भी अपनी गांड उठाकेउनका लंड मेरी चूत में पेले जा रहे थे।*. अब नानाजी मुझे अपने घुटनो के सहारे आगे की तरफ झुकाया और पीछे जाके मेरी गांड के फाको को फैलाने लगे। मुझे लगा की शायद वो मेरी गांड मारना चाहते है।*. मैं:= नहीं नानाजी प्लीज गांड में नहीं…. नानाजी:= अरे नहीं बेटा गांड नहीं चोद रहा।. उन्होंने पिछेसे मेरी चूत में अपना लंड डाला और मेरी गांड को पकड़ कर खप खप अपना लंड मेरी चूत में डालने लगे।. मैं:=उफ़्फ़ग़ाफ़ अह्ह्ह्ह उम्म्म एअह्ह्ह्ह् चोदो अह्ह्ह और तेज उम्म्म फाड़ दो मेरी चूत उम्म्म्म बहोत अच्छा लग रहा है अह्ह्ह्ह*. नानाजी:=हा सीसीसीसी आज तो फाड़ ही डालूँगा उफ्ग्फ्फ्ग्ग सीसीसी. नानाजी किसी जंगली जानवर जैसे मेरी चूत चोदे जा रहे थे।मैं झड़ चुकी थी। लेकिन आज मैं बहोत चुदना चाहती थी।इसलिए उनके लंड की चोटे सहे जा रही थी। और उन्हें चोदने के लिए उकसाए जा रही थी। मेरी चूत फिर से सट. सट करने लगी थी। उढ़ा नानाजी भी अब किसी मशीन की तरह लगातार धक्के दिये जा रहे थे।. नानाजी:= उम्म्म्म्म अह्ह्ह्ह श्रुति *मेरा छूटने वाला है उफ्फ्फ. मैं:=हा नानाजी चोदिये जोर से और और उम्मम्मम्माह्ह्ह्ह्ह् आज मेरी भी चूत का भोसड़ा बना दीजिये अपने लंड से उम्म्म्म्म्म्म्म दाल दीजिये अपना पानी मेरी चूत में उफ्फ्फ्फ्फ्फ अह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह. नानाजी एक तेज धक्के के साथ अपना लंड मेरी चूत में दबा दिया और अंदर ही पिचकारी छोड़ने लगे। उनकी पिचकारी का स्पीड ऐसा था की वो मुझे अंदर तक महसूस हो रहा था। उनके वीर्य की गर्माहट ने मेरी चूत की सारि गर्मी. निकाल दी। उनका पानी मेरी चूत में एसतरह से रेंग रहा था की उसकी सरसराहट ने मुझे भी झड़ने पे मजबूर कस्र दिया।. मैं नानाजी के छाती पे सर रखकर उनके पेट को सहला रही थी। आज अपनी विर्जिनिटी मैं खो चुकी थी। कुछ खोने से भी इतनी ख़ुशी मिलती है वो आज पता चला। नानाजी अब बहोत थके हुए लग रहे थे। पर मुझे एक बार और चुदना था।. मैं नानाजी का नरम लंड को पकड़ कर सहलाने लगी। लेकिन उसमे कुछ भी बदलाव नहीं आ रहा था।. मैं:= नानाजी ये अभी इतना छोटा और नरम क्यू हो गया? और अब खड़ा क्यू नहीं हो रहा ?. नानाजी:=अरे पागल मैं अब जवान थोड़े रह गया हु? अभी अभी दो बार झड़ चूका हु। अब मुझे नहीं लगता की ये खड़ा होगा।. मैं:=ऐसा मत बोलिये नानाजी ….
मुझे एक बार और चोदिये ना।…मैं उन्हें बहोत ही मादक अदा से बोली। नानाजी:= ह्म्म्म्म लगता है तुम्हारी चूत को अब रहा नहीं जा रहा। ऐसा ही होता है एक बार चूत के मुह को लंड का पानी लग जाता है तो उसे बस बार बार पिने के उतावली हो जाती है।. मैं:= अगर ऐसा है तो आपने पहले क्यू नहीं बताया? मुझे कुछ नहीं पता बस मुझे एक बार उसे अपने चूत में लेना है।. नानाजी:= ठीक है देखो कोशिश करके…. मैं उसे अपने नाजुक हाथो से धीरे धीरे सहलाने लगी। फिर उसे अपने होठो से चूमने लगी। *उनके लंड के उस पॉइंट को जुबान से छेड़ रही थी। पर उसका कुछ ख़ास फायदा नहीं हो रहा था। मुझे याद आया की नानाजी को पारुल की. गांड बहोत पसंद है।. मैं:= नानाजी आपको पारुल की गांड बहोत पसंद है ना?. नानाजी:= हा क्यू?. मैं:=मेरी अच्छी नहीं है क्या?. नानाजी:=ऐसा कुछ नहीं है तुम्हारी भी अच्छी है।. मैं:=नहीं आप झूठ बोल रहे है …आपको सिर्फ पारुल की ही पसंद है।. नानाजी:= नहीं सच में… तभी नहीं देखा कैसे तुम्हारी गांड देखके मेरा लंड उफान पे चढ़ गया था।. मैं:= तो अभी मैं फिरसे आपको अपनी गांड के जलवे दिखाती हु। देखते है आपका लंड फिरसे खड़ा होता है क्या?. नानाजी पीछे सरक कर बैठ गए। मैंने उनकी और अपनी गांड की और घुटनो पे चली गयी। अपनी गांड हिला के उनके चहरे के पास लेके जाने लगी। दोनों हाथो से अपने नितम्ब दबाने लगी। फाको को अलग करके उन्हें अंदर तक दिखाने. लगी। मुह से आअह्ह्ह्ह्ह सीसीक्वक उम्म्म्म्म्म ऐसी आवाजे निकालने लगी। इसका असर अब नानाजी पे होने लगा था था।वो आखे फाड़े सब देख रहे थे। उनका लंड भी अब खड़ा होने लगा था। मैं उनके पास गयी और उनके चहरे को. पकड़ कर अपनी चुचियो पे दबाने लगी। उनके होठो से गांड घिसने लगी। पर जब भी वो अपनी तरफ से कुछ करना चाहते मैं उन्हें रोक देती।. मैं बेड पे लेट गयी और घुटनो को मोड़ के अपने पेट के पास ले लिए जिससे मेरी चूत और गांड के छेद उन्हें एक साथ दिखने लगे।. मैंने उनकी आखो में देखते हुए अपनी बिच वाली उंगली मुह में लेके चूसने लगी। और फिर उसे अपनी चूत में डाल दिया उसे अंदर बाहर करते हुए बोली”” अह्ह्ह्ह उम्म्म नानाजी ऐसेही चोद रहे थे ना आप अभी. मेरी चूत उम्म्म्म्म बड़ा मजा आया उफ्ग्ग्ग”””. फिर मैंने उंगली फिर से मुह में ली और इस बार उंगली गांड के छेद में डाल दी।. उस्सस्सस्स उफ्फ्फ्फ्फ़ आउच बहोत अजीब सा फील हो रहा था। लेकिन मैंने देखा की मेरी इस हरकत से नानाजी बहोत उत्तेजित हो रहे थे। उनका लंड अब पहले की तरह टाइट हो चूका था। सो मैंने उंगली अंदर बाहर करते हुए. बोला””” आह्ह्ह्ह नानाजी उम्म्म्म आप मेरी गांड ऐसेही चोदना चाहते है ना?”””. नानाजी:=अपना लंड मुठियाते हुए….
हा मेरी जान उफ़्फ़्फ़्फ़ क्या मस्त लग रही हो… आखिर अपनी अदाओं से मेरा लंड खड़ा कर ही दिया तुमने। मैं:=उम्म्म्म नानाजी आईये ना चाटिये न मेरी चूत अह्ह्ह्ह मेरी गांड भी उम्म्म्म. नानाजी उठ के मेरी चूत और गांड चाटने लगे.
वो इसतरह से गांड के छेद को छेड़ रहे थे की अब तो मेरी गांड में भी खुजली होने लगी थी। लेकिन मुझे गांड नहीं चुदवानी थी। मैं:= नानाजी उफ़्फ़फ़फ़फ़ अह्ह्ह्ह्ह मुझे भी तो दीजिये ना कुछ चूसने के लिए उम्म्म्म.
स्रोत:इंटरनेट