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Nanaji Ka Sex Puran Part 5 4

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नानाजी ने अपना लंड मेरे मुह के नजदीक ले आये और मैं उसे अपने मुह में लेके चूसने लगी। उसे और भी टाइट करने लगी। नानाजी मेरी चूत को चाट रहे थे । मेरे क्लिट को जुबान से खेलने लगे और मेरी गांड एक उंगली डाल. दी।. “”” उम्म्म्म्म्म नहीं ना नानाजी आह्ह्ह्ह्ह् औऊच उम्म्म “” मेरे मुह से दर्द और आंनद भरी चीखे निकले लगी। मेरी चूत की आग अब बहोत बढ़ गयी थी। “” आह्ह्ह्ह नानाजी अब. बर्दास्त नहीं होता प्लीज डाल दीजिये ना अपना लंड मेरी चूत में”””. नानाजी:= हा श्रुति अब तो मुझशे भी नहीं रहा जा रहा … तुम मेरे लंड पे बैठ जाओ… मैं बहोत थक गया हु।. मैं उनका लंड पकड़ कर उसे अपनी चूत में लेने लगी मुझे दर्द तो बहोत हो रहा था पर चुदने का इरादा मेरे उस दर्द को सहने की ताकत दे रहा था।।. लंड मेरी चूत में समां चूका था। मैं कुछ पल के लिए रुकी और फिर अपनी गांड उठा उठा के लंड को अंदर बाहर करने लगी। उम्म्म्म्म्म अह्ह्ह्ह्ह सट सट मेरी चूत के अंदर बाहर होता लंड मैं अब मिरर में देख सकती थी।. मैंने जानबुज के गांड नानाजी की तरफ की हुई थी। वो भी मेरी गांड के उभार को दबाते हुए निचे से अपना लंड मेरी चूत दाल रहे थे। मैं पागलो की तरह ऊपर निचे बैठ रही थी आऔऊऊ ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्. 7म्म्म्मम्म्म्मम्म आआआआआआआ मर गयी माआआआ मर गयी अह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह ऐसी आवाजे मेरे मुह से निकल रही थी। दर्द और मजा का अनोखा संगम मैं मेरे जहन में महसूस कर रही थी।आखिर वो पल आ ही गया और मैं नानाजी की जांघो. को पकड़ लिया और झड़ने लगी। नानाजी का नहीं हुआ था। पर सच पूछो तो अब मुझसे उनका लंड अपनी चूत में सहन नहीं हो रहा था।. नानाजी ने मुझे निचे लिटाया और मेरी चूत में लंड दाल दिया। और वो उसे आगे पीछे करने लगे। मेरी चूत और उनका लंड बहोत गीले थे। जिससे उनका लंड अब आसानी से अंदर बाहर हो रहा था।. मैं :~ आआह्ह्ह्ह्ह्ह् नानाजी उम्म्म्म अब खत्म कीजिये ना अह्ह्ह्ह्ह सीक्वव. नानाजी:~नहीं हो रहा है श्रुति एक काम करता हु तुम्हारी गांड के छेद पे घिसता हु और मुठ मारके पानी निकालता हु। घबराओ नहीं गांड में लंड नहीं डालूँगा।. मैं लेटे लेटे ही पैरो को पकड़ा और गांड उनके लंड के सामने कर दी। वो अपना लंड गांड और चूत के छेद पे रगड़ते हुए मुठ मारने लगे। वो इस अदा से अपना लंड रगड़ रहे थे की मैं फिर इत्तेजित हो गयी। उन्होंने मेरी. गांड का छेद बहोत ही गिला कर दिया था। वो अपने लंड का सुपाड़ा मेरी गांड के छेद धीरे से सरका दिया और एक हाथ से मेरी क्लिट मसलने लगे और दूसरे हाथ से मुठ मारने लगे।. नानाजी:= अह्ह्ह्ह्ह्ह्ह उम्म्म्म श्रुति उफ्फ्फ्फ्फ्फ क्या मस्त लग रहा है तुम्हारी गांड में अह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ज्ज्ज् मेरा पानी छुटने वाला है अह्ह्ह्ह्ह्ह उम्म्म्म्म्म. मैं:~ अह्ह्ह्ह हा नानाजी उम्म्म्म मुझे भी बहोत अच्छा लग रहा है उम्म्म्म्म मेरा भी होने वाला है अह्ह्ह्ह्ह्ह्ह रगड़िये मेरी चूत उम्म्म्म. नानाजी ने उनका पूरा पानी मेरी गांड में छोड़ दिया।*. मेरा भी दम निकल चूका था। हम दोनों निढाल हो के बेड पे जोर जोर की साँसे लेते हुए 10 min तक बिना बोले लेटे रहे।. जब हम दोनों नार्मल हुए तो तो एकदूसरे को गले लगा लिया।. मैं :~ नानाजी आज की रात मैं कभी नहीं भूल पाउंगी।. नानाजी:~ मैं भी नहीं मेरी जान।. हम एकदूसरे को किस्स करने लगे। मैंने देखा रात के 2 बज गए थे।. मैं:~ नानाजी ये पारुल तो बहोत ही चुदवा रही है आपके दामाद से।. नानाजी:~ ह्म्म्म्म हा करने दो ऐश दोनों को।. मैं:~ लगता है उसकी चूत की आग पापा का लंड ठंडा नहीं कर पा रहा। उसे तो आपका ये लंड ही ठंडा कर सकता है।. नानाजी:~ देखते है कल उसे भी ठंडा कर देंगे।. मैं:~कहो तो अभी बुला लू?. नानाजी:~मेरी जान लोगी क्या अब?? पारुल को अब कल।ही देखेंगे।. मैं उठने की कोशिश की तो मुझशे उठा भी नहीं जा रहा था।मैंने नानाजी को बताया तो उन्होने उनकी कमर के मालिश का तेल लिया और मेरी चूत के आस पास और पैरो में लगा दिया।जिससे मुझे काफी हद तक राहत हुई। मैं उठी और. दरवाजा खोल दिया। और फिर हमने कपडे पहने और अलग अलग बिस्तर पे सो गए।. दूसरे दिन सुबह जब आँख खुली तो देखा तो सब लोग उठ चुके थे और निकलने की तैयारी करने लगे थे। पारुल पता नहीं कब आयी रात में। मैं भी तैयार होने लगी। फिर हमने रेस्टॉरेन्ट में जाके नाश्ता किया और घर की और. निकल पड़े। हम चारो बहोत थके थके लग रहे थे। लेकिन मैं और पारुल हँसी मजाक करने लगे तो सब थोड़े नार्मल हो गए।. हम घर पहोंचे खाना खाया और फिर रूम में जाके आराम करने लगे।. जैसे हम रूम में पहोंचे पारुल ने मुझे पकड लिया और पूछने लगी”” श्रुति बता ना क्या क्या हुआ रात को?””. मैं ने उसे पूरी बात बतायी और उससे पूछने लगी””अब तू बता तूने क्या क्या किया?””. पारुल:~ अरे चुदाई में होता क्या है? चूत में लंड डालो और पेलते रहो।. मैं:~ तूने कुछ मेरे बारे में तो नहीं बताया ना?. पारुल:~ अरे नहीं पागल है क्या? लेकिन यार एक बात बताऊ तूने जो बताया ना वो सुनके मुझे ऐसा लग रहा है की तूने मुझशे जादा मजा किया।. मैं:~ हा तो क्या हुआ आज तू करले।आज तो मुझमे बिलकुल भी ताकत नहीं की मैं चुदाई सह सकु।. पारुल:~ अरे यार मेरी भी तो हालात ऐसेही है। आज तो मुझसे भी कुछ नहीं होगा।. हमने थोड़ी देर ऐसेही बाते की और सो गयी। शाम को उठ के फ्रेश हो निचे गयी तो देखा नानाजी भी खेतो में नहीं गौए थे। वो भी बहोत थके थके लग रहे थे। उस रात को कुछ नहीं हुआ हम सब आराम से सो गए.
दूसरा दिन हमेशा की तरह गुजरा। शाम को हम खेतो में गए। नानाजी हमारा वेट कर रहे थे। हम तीनो घूमते हुए ठंडी ठंडी हवा का मजा लेने लगे।. पारुल:~ तो दादाजी आखिर आम को पका ही डाला आपने।. नानाजी:~ हा क्या करता बेटी मौसम ह8 कुछ ऐसा है। अबतो तरबूज खाने है रात को….
नानाजी *ने पारुल के गांड पे हाथ फिराते हुए कहा। “कहीँ मेरे दामाद ने तरबूजो का मजा तो नहीं चखा ना रातको? पारुल:~ नहीं दादाजी आप फिकर मत कीजिये आपके लिए तरबूजो को संभाल के रखा है। आप के दामाद भी पीछे पड़े थे पर मैंने मना कर दिया।. दादाजी:~ ह्म्म्म्म चलो आज तुम्हारे तरबुजो का मजा लेंगे।. मैं:~ तो अभी ले लोजिये ना नानाजी रात तक का क्यू इंतज़ार करना?. पारुल:~ नहीं नहीं अभी नहीं रात को ही ले लेना।. मैं:~अरे रात को क्या और अब क्या….
क्या फरक पड़ता है? रात को जागने काम नहीं। देख जरा रात को जाग जाग के मेरी आखो मे डार्क सर्किल ही गए है। पारुल:~चुप कर कामिनी तुझे बड़ी जल्दी हो रही है मेरी गांड फड़वाने की।. मैं:~ही ही ही मुझे कहा जल्दी है? मैं तो नानाजी के खातिर बोल रही थी।. पारुल:~ हा क्या? इतना ही है तो तू देदे अपनी तेरे प्यारे नानाजी को।. मैं:~ नही रे बाबा मुझे नहीं देनी।. पारुल:~क्यू अब क्या हुआ?. नानाजी:~चुप बैठो तुम दोनों ….
रात को ही करेंगे आराम से। मैं:~ हा नानाजी वो तो हम बस ऐसेही मजाक् कररहे थे।.
स्रोत:इंटरनेट