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Nanaji Ka Sex Puran Part 5 5

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रात के खाने के बाद हम सब टीवी देख रहे थे। मामाजी मुझपे और पारुल पे किसी जासूस की तरह नजर गड़ाये हुए थे। वो हमारी हर बात नोट कर रहे थे। मैंने पारुल के कान में कहा की मामाजी को शायद शक हो गया है। वो घबरा. गयी। उसने मुझे तुरंत ऊपर ले गयी। मैंने उसे मामाजी वाली बात बता दी।. पारुल:~ अरे यार ये तो बड़ी मुसीबत हो गयी…अगर उन्होंने हमें पकड़ लिया तो मुसीबत हो जायेगी।. मैं:~ कुछ नहीं होगा।अगर वो आ भी गए तो मैं सभाल लुंगी उनको।. पारुल:~ हाय रे मेरी जान बड़ी बहादुर हो गयी है तू तो।पर मेरे पापा की भी नजर तुझपे है ये मैंने कभी एक्सपेक्ट नहीं किया था।. मैं:~ मैं भी चौक गयी थी उस दिन।. उतने में रितेश का फ़ोन आया। पारुल ने फिर से उसे कटा दिया।. पारुल:~जब सच्ची वाली चुदाई होने वाली है तो ये फ़ोन वाली कौन करना चाहेगा?. मैं:~ पारुल बिचारे को क्यू तड़पा रही है लेले उसका भी।. पारुल:~ हा यार मैं भी यही सोच रही हु। पर अभी तो कॉलेज सुरु होने में काफी दिन बाकी है।. मैं:~तो क्या हुआ बुला ले उसको खेतो में।. पारुल:~देखते है फिलहाल तो दादाजी का लेने के लिए तड़प रही हु।. मै:~हा यार मुझे भी अब रहा नहीं जा रहा।. पारुल:~ तो आ जा दादाजी नहीं आते तब तक मैं तेरी खुजली मिटा देती हु।. मैं:~चुप कर….
अब क्या तू मेरे साथ भी करेगी क्या? पारुल:~हा तो क्या हुआ….
बहोत सी लडकिया कराती है हम भी करेंगे। मैं:~मुझे नहीं करना।. पारुल:~आजा ना मेरी जान दादाजी से बढ़कर मजा दूंगी।. मैं:~चल भाग शैतान…. उतने में दरवाजे पे टकटक हुई। पारुल ने दरवाजा खोला। वो नानाजी ही थे। नानाजी अंदर आये और दरवाजा बंद कर लिया।. नानाजी:~ह्म्म्म्म क्या चल रहा था तुम दोनों का?. पारुल:~ कुछ नहीं मैं श्रुति से कह रही थी की आज मैं उसकी चुदाई करुँगी।. नानाजी:~अच्छा? तो करो मेरे सामने मैं भी तो देखु तू बिना लंड के कैसे चुदाई कराती है?. पारुल मेरे पास आयी और मुझे बाहों में कस लिया और मैं कुछ समझ पाती उससे पहले उसने मुझे किस्स करना सुरु कर दिया। मैं उसे छुटने की कोशिश कर रही थी पर उसने मेरे होठो को इस तरह से अपने होठो में कैद किया हुआ. था की मैं चाह कर भी कुछ नहीं कर पा रही थी।. सुरु में मुझे अजीब लग रहा था पर थोड़ी देर बाद मैं भी उसका साथ देने लगी।. नानाजी:~उम्म्म्म्म क्या बात है…लगता है तुम दोनों को अब मेरी जरुरत नहीं।. पारुल ने मुझे किस्स करना बंद करते हुए कहा””अरे दादाजी आप बस अब देखते जाईये आपको भी मजा आने लगेगा।. पारुल ने उसके और मेरे सारे कपडे निकाल दिए। उसने मुझे बेड पे लिटा दिया और मेरी टांगो को फैलाके मेरी चूत पे उंगली रगड़ने लगी।. मैं:~उम्म्म्म्म पारुल पागल क्या कर रही है उफ़्फ़्फ़ग. पारुल:~ लंड का स्वाद तो देख लिया अब चूत का स्वाद देखना चाहती हु। दादाजी आप क्या देख रहे है? आपके प्यारे आम आपके सामने है टूट पड़िये।. पारुल ने मेरी चूत चाटना सुरु कर दिया और नानाजी मेरे बोबे दबाने लगे एक निप्पल मुह में लेके चूसने लगे। पारुल उधर मेरी चूत बहोत ही प्यार से चाट रही थी। दो लोग मेरे जिस्म के साथ एक साथ खेल रहे थे। मैं. पागल सी हुई जा रही थी।. मैं:~औऊऊउछ्ह्ह्ह् उम्म्म्म्म आह्ह्ह्ह पारुल मेरी बहन अह्ह्ह्ह हा ऐसेही उफ्फ्फ्फ्फ्फ्फ़ नानाजी अह्ह्हब धीरे से दबाये ना अह्ह्ह काटिये मत उफ्फ्फ्फ्फ्फ्फ़ उईईईईई माँ मर गयी अह्ह्ह्ह्ह्ह. नानाजी:~ उम्म्म्म आज क्या हुआ ? कल तो बहोत उड़ उड़ के चुदा रही थी….
पारुल कैसा है टेस्ट ? श्रुति के चूत का पानी उम्म्म्म सच में बहोत टेस्टी है.
पारुल:~हा दादाजी उम्म्म्म्म सच में बहोत अच्छा है।. मैं सब कुछ ना कुछ टेस्ट कर रहे है अह्ह्ह्ह्ह मुझे भी तो दो कुछ उम्म्म्म्म. नानाजी:~ ह्म्म्म्म तो तुम मेरा लंड चूस लो मेरी जान।. नानाजी ने अपना लंड मेरे मुह में ठूस दिया। मैं उनका लंड जुबान से ऊपर से निचे तक चाटने लगी होंठो में पकड़ के चूसने लगी। नानाजी हलके से से मेरे निप्पल चुटकियो में मसल रहे थे जिससे एक अजीब सी कामुक लहर. मेरे बदन में कोहराम मचाने लगी थी।. पारुल भी अब मस्ती में आ चुकी थी। उसने नानाजी से कहा की वो उसकी चूत चाटे। हम तीनो एक circle बनाके लेट गए थे। नानाजी पारुल की चूत पारुल मेरी चूत और मैं नानाजी का लंड चूसने लगे थे। काफी देर तक हम ऐसेही. एक दूसरे को मजा देने में लगे हुए थे।. नानाजी:~उम्म्म्म्म पारुल अह्ह्ह्ह्ह तुम्हे खेत में किया वादा याद है ना? आज तो सबसे पहले मैं तुम्हारी गांड ही चोदुंगा।. पारुल:~उम्म्म्म्म हा दादाजी उफ्फ्फ्फ़ मैं भी आज गांड चुदवाने के मूड में हु।. मैं:~ उम्म्म्म नहीं नानाजी अह्ह्ह्ह मेरी चूत की आग पहले मिटाइये फिर पारुल की खुजली उफ्फ्फ्फ़. नानाजी:~ हा ठीक है मेरी जान…पहले तुम्हारी चूत फिर पारुल की गांड।. पारुल:~उम्म्म्म्म तब तक मैं क्या करू?. मैं:~तू आजा मुझे भी तेरी चूत का स्वाद चखा दे । मैं भी तू देखु मेरी बहन की चूत का स्वाद कैसा है जिसने मेरे पापा और नानको दीवाना बना दिया है।. पारुल उठके मेरे बगलमे आ गयी नानाजी उधर अपना लंड मेरे चूत पे सेट कर चुके थे।नानाजी धीरे धीरे करके अपना लंड मेरी चूत में डालने लगे।. पारुल:~ह्म्म्म्म दादाजी आपने तो एक रात में ही श्रुति की चूत खोल दी। कितनी आसानी से अंदर जा रहा है।. मै:~उम्म्म्म अह्ह्ह्ह्ह धीरे नानाजी अह्ह्ह्ह्ह उम्म्म… कहा यार आज भी दर्द हो रहा है।. नानाजी:~अरे एक बार में कहा खुलती है चूत इसे कम से कम 15 दिन लगातार चोदेंगे तभी खुलेगी।. नानाजी लंड पूरा डाल दिया था वो अब अपना लंड अंदर बाहर कर रहे थे।मैंने पारुल को अपने मुह पे बिठा लिया और उसकी चूत में जुबान घुसा दी।. मैं:~उम्म्म्म्म अह्ह्ह्ह चूत चाटने में भी मजा है अह्ह्ह्ह्ह उम्म्म नानाजी अह्ह्ह्ह और जोर से अह्ह्ह बहोत मजा आ रहा है।. पारुल:~अह्ह्ह्ह श्रुति उम्म्म मेरी बहन अह्ह्ह्ह और डाल अंदर अपनी जुबान उम्म्म्म्म्म. पारुल अपनी गांड हिला हिला के अपनी चूत रगड़े जा रही थी। उधर नानाजी खपा खप लंड मेरी चूत में पेले जा रहे थे।. मैं:~अह्ह्ह्ह्ह नानाजी उम्म्म्म्म चोदिये ना और हा हा हा ओफ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़् मर गयी।. पारुल:~उम्म्म श्रुति क्या कर रही है चाट ना उम्म्म्म्म।. थोड़ी देर हम ऐसेही सुरु था। हम तीनो उत्तेजना में पागल से ही चुके थे।. नानाजी :~ पारुल यहाँ आओ तुम्हे एक नया स्वाद चखाता हु।. पर।.  . Hindi Sex Story के अन्य भाग-. पार्ट 1. पार्ट 3. पार्ट 4. पार्ट 5.
स्रोत:इंटरनेट