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“अरे पर आज कितना मीठा मसल रही है , मेरे दाने को छिनाल जालिम , कहाँ से सीखा ऐसा दाना रगड़ना”?, माँ करहाते हुए बोली।
“राजू सीख कर आया है, शहर से शायद वो ब्लू फिल्म देख कर आया है , कल रात को मुझे चोदने के पहले बहुत देर तक मेरा दाना मसलता रहा हरामी , इतना झड़ाया मुझे कि मै पस्त हो गयी,” चमेली की आवाज़ आई।
तभी कल मुझे चोदने नहीं आया बदमाश , अपनी माँ को ही चोदता रहा,।तू तो दिन रात चुदती है अपने बेटे से तेरा मन नहीं भरता ? रोज रात को पहले मेरे ले आया कर उसे , तुझे तो मालूम है कि उसकी रात की ड्यूटी मेरे कमरे में है , तू भी रोज आ जाया कर , सब मिलकर चुदाई करेंगे, हफ्ते में एक बार चुद कर मेरा मन नहीं भरता चमेली बाई , चल अब चूस मेरी चूत ज्यादा ना तडपा।
. “मैं तो रोज आ जाऊं मालकिन , पर अब मुन्ना आ गया है , जरा छुपा कर करना पड़ता है”, चमेली बोली।
“अरे वो बच्चा है , जल्दी सो जाता है , अब चूस ले मेरी चूत को, मत तडपा मेरी रानी, अपनी मालकिन को”, माँ करहाते हुए बोली।
यह सब सुनकर मैं बहुत गर्म हो गया था। दरवाजे से अन्दर झाँकने की कोशिश की , पर कोई छेद या दरार नहीं थी। आखिर अपने कमरे में जाकर दो बार मुठ मारी। तब शान्ति मिली। एक दो बार मैंने लेस्बियन वाली कहानियां पढी थी। पर चित्र नहीं देखे थे। इसलिए मन ही मन में कल्पना कर रहा था कि माँ और चमेली की रति कैसी दिखती होगी।. अब मैं इस ताक में रहता था कि रात को कौन माँ के कमरे में आता है। यह देखूं राजू कभी ना कभी आएगा और माँ को चोदेगा। इस बात से मैं ऐसा गरमाता कि समझ में नहीं आ रहा था , कि क्या करूं? माँ के साथ साथ अब चमेली बाई के नंगे बदन की कल्पना भी करने लगा। चालीस साल उम्र होने के बावजूद चमेली बाई का शरीर काफी छरहरा और तंदरुस्त था। सांवली जरुर थी, पर दिखने में काफी ठीक लगती थी। दोपहर को उसके नाम की भी मैंने मूठ मार ली।.
दुसरे दिन भी रात में चमेली माँ के कमरे में आई पर अकेले। उस रात मैं चुपचाप माँ के कमरे तक गया और कान लगाकर अन्दर की बातें सुनने लगा।. “कल ले आउंगी राजू को अपने साथ बहू रानी , वो जरा काम में था , खेतों को भी तो देखना पड़ता है , अब चुपचाप मेरी चूत चूसो, खुद तो चुसवा लेती हो , मैं क्या मूठ मारूं? कल राजू ने भी नहीं चोदा” , चमेली बोली।
. कुछ देर की खामोशी के बाद चमेली बोली , “हाँ ऐसे चूसो मालकिन , अब आया मजा , जरा जीभ अन्दर तक डालो, देखो आपकी नौकरानी की चूत में क्या माल है, तुम्हारे लिए और तुम्हें पसंद है, यह मुझे मालूम है , कई बार तो चख चुकी हो”।. मैं समझ गया। राजू के लंड का लालच देकर आज चमेली माँ से खूब चूत चुसवा रही थी। कुछ ही देर में चमेली के कराहने की आवाज आने लगी और फिर वो चुप हो गई। साली झड गयी थी शायद।. . “अच्छा लगा मेरी चूत का पानी मालकिन? मैं तो पहले ही कहती थी कि रोज चखा करो , अब रोज चूसवाउंगी आप से” , बोलकर चमेली फिर सिस्कारियां भरने लगी।
. कुछ देर बाद चमेली बोली, “बहू रानी अब मुन्ना भी आ गया है , उससे भी चुदवा के देखो , घर का लड़का है , कब काम आएगा? अब मैं या राजू , किसी दिन ना हों आपकी सेवा के लिए , फिर भी प्यासा रहने की जरुरत नहीं है तुम्हें”।. . मेरे कान खड़े हो गए। मेरी बातें हो रही थी। लंड भी उछलने लगा था। माँ कुछ देर चुप रही। फिर थोड़ी शर्मा कर बोली, “अरे अभी छोटा है प्रणव , बच्चा है और फिर मेरे बेटे से ही मैं कैसे चुद्वाऊं” ?
. . “वाह मालकिन , मेरे बेटे से चुदती हो, मेरे और मेरे बेटे की चुदाई में बड़ा रस लेती हो और खुद के बेटे की बात आयी तो शर्मा रही हो , मुझे देखो अपने बेटे से चुदाकर क्या सुख पाती हूँ , बड़ा प्यारा छोकरा है अपना मुन्ना और छोटा वो तो कुछ नहीं है, रोज सडका लगाता है बदमाश, मुझे पता है , मैं कपडे धोती हूँ उसके और तुम्हारे भी , तुम्हारी ब्रा कई बार कड़ी रहती है, उसमें दाग भी रहते हैं , कौन मूठ मारता होगा उसमें? राजू तो नहीं मारता , यह मैं जानती हूँ और उस दिन तुम मुझ पर चिला रही थी , तुम्हारी ब्रा और पैंटी नहीं मिले , इसलिए कौन बदमाश उन्हें ले गया था बताओ तो” ? चमेली हँसते हुई बोली।
. कुछ देर कमरे से सिर्फ चूसने और चूमा चाटी की आवाजें आई। फिर माँ वासना भरी आवाज में बोली,”बदमाश है बड़ा , अपनी माँ की ब्रा में मूठ मारता है , अब तो उससे चुद्दा ही लूं चमेली , अभी लंड छोटा होगा मेरे बेटे का , पर होगा बड़ा रसीला री, मेरा मन हो रहा है चूसने का”।
. कुछ देर बाद चमेली बोली “और उससे चूत चुस्वाने का मन नहीं होता मालकिन? एक माँ के लिए इससे मस्त बात क्या हो सकती है , कि वो अपने बेटे को अपनी चूत का रस पिलाए, जिसमें से वो बाहर आया है , यह बेटे बड़े बदमाश होते हैं बहू रानी , अपनी माँ पर मरते हैं , इनसे तो कुछ भी करा लो, माँ के गुलाम होते हैं यह बच्चे और छोटा भले हो मुन्ना का लंड , एक दम लोहे जैसा कड़क होगा , आखिर अभी अभी जवान होने को है” ,।
. “तुम्हें शर्म आती है, तो मुन्ना को मेरे हवाले कर दो , मैं और राजू मिलकर उसे सब सिखा देंगे , फिर जब पूरा चोदू बन जाये तुम्हारा बेटा , तो तुम उसे अपनी सेवा में रख लेना” चमेली बोली।
. माँ बोली, “तेरी बात तो समझ में आती है , पर इसमें राजू क्या करेगा?
. चमेली बोली, “बहू रानी राजू महाहरामी है , शायद उसे मुन्ना अच्छा लगता है , बचपन में भी वही तो संभालता था मुन्ना को , नह्लाता भी था , तुम खुद राजू से क्यों नहीं बात कर लेती , कल तो आएगा ही वो तुम्हे चोदने , तब पूछ लेना , वैसे बड़ा रसिक है मेरा लाल , खट्टा मीठा दोनों खाना चाहता है और मुन्ना से ज्यादा मस्त मीठा स्वाद उसे कहाँ मिलेगा? अब यह बताओ , बहु रानी कि मेरी चूत का पानी पसंद आया कि नहीं , वैसे पानी नहीं , शहद है तुम्हे पक्का माल चखाने के चक्कर में आज मैं राजू से चुदाया भी नहीं और मूठ भी नहीं मारी , सीधा आपके मूंह में झड रही हूँ , कल रात के बाद”।
. माँ चमेली की चूत चूसते हुई बोली, “अरे यह भी कोई पूछने वाली बात है? तेरी चूत का माल है या खोआ? गाढ़ा गाढ़ा सफ़ेद सफ़ेद मलाईदार कितना चिपचिपा है देख! तार तार छूट रहे हैं , राजू बड़ा नसीब वाला है , बचपन से चखता आया है यह मावा, अब मेरे लिए भी रखा कर और प्रणव बेटे को भी चखा देना कभी”।
स्रोत:इंटरनेट