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Naukrani Alhad Jawani Mast Desi Kahani 2

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 . राकेश ने उसका कोई जवाब न देते हुए एक हल्का धक्का और मारा की उसका आधा लण्ड मंजरी की चूत में घुस गया। मंजरी के मुंहसे आह.. निकल पड़ी पर वह और कुछ न बोली। राकेश ने फिर अपना लण्ड वापस खींचा और फिर एक धक्का और दिया। उस बार मंजरी ने अपनी आँखें जोर से भिंच दीं। शायद उसने सोचा जो होता है होने दो। राकेश ने जब एक आखिरी धक्का और दिया और तब उसका फैला हुआ मोटा लण्ड मंजरी की चूत में करीब करीब घुस ही गया तब मंजरी. के मुंह से कई बार “आह… आह… आह…” निकल गयी पर उस “आह..” में दर्द कम और रोमांच ज्यादा लग रहा था।  . जब राकेश ने मंजरी को चोदने ने की गति थोड़ी सी बढ़ाई तो मंजरी के मुंह से बार बार “आह… आह… उँह…” निकलने लगा। वह दर्द की पुकार नहीं बल्कि मंजरी को अपनी पहली चुदाइ का जो अद्भुत. अनुभव हो रहा था उसका जैसे पुष्टिकरण था। शायद उसके मनमें यह भाव आरहा होगा की तब तक उसने राकेश को उकसाने की जेहमत की थी, वह इस चुदवाने के उन्मत्त अनुभव से सार्थक नजर आ रही थी। एक लड़की जो पहली बार चुदने में अद्भुत अनुभव पाने की आशा रखती है, जब उसे चुदने के समय वैसा ही अनुभव होता है तो उसके मन का जो हाल हो रहा होगा वह मंजरी की यह “आह.. हम्फ … उँह…” से प्रतिपादित हो रहा था।  . राकेश की शक्ल भी देखते ही बनती थी। वह आँखें मूंदे मंजरी की चिकनाहट भरी गीली चूत में अपना मोटा लण्ड पेले जा रहा था। वह भी मंजरी को चोदने का अद्भुत अनुभव का आनन्द ले रहा था। उसके हाथ मंजरी के दोनों पके. हुए फल सामान गोलाकार स्तनों को कस के दबा रहे थे। मंजरी के स्तनों को राकेश इतनी ताकत से पिचका रहा था जो उसकी उत्तेजना और आतंरिक उत्तेजित मनोदशा का प्रतिक था। मुझे लगा की कहीं राकेश के नाख़ून मंजरी के. स्तनों को काट न दे। मंजरी के स्तन राकेश के दबाने से एकदम लाल दिख रहे थे। मंजरी के स्तनों की निप्पलं फूली हुई और राकेश की हथेली से बाहर निकलती साफ़ दिख रही थीं।.  . राकेश का पूरा फुला हुआ लण्ड मंजरी की चूत में ऐसे अंदर बाहर हो रहा था की देखते ही बनता था। दोनों के रस से लिपटा हुआ राकेश का लण्ड सुबह के प्रकाश में चमक रहा था। मंजरी की चूत दोनों के रस से भरी हुई थी।. राकेश का लण्ड जैसे ही मंजरी की चूत में जाता तो एकदम उनका रस चूत में से बाहर निकल पड़ता। मैं जहां खड़ा था वहाँ से मंजरी की चूत की ऊपर वाली गोरी पतली त्वचा जो लण्ड के बाहर निकलने पर बाहर की और खिंच आती थी. और जब राकेश का लण्ड मंजरी की चूत में घुसता था तो वह पतली सी त्वचा की परत वापस मंजरी की चूत में राकेश के लण्ड के साथ साथ चली जाती थी।.  . मेरा कमरा उन दोनों की चुदाइ की “फच्च फच्च” आवाज से गूंज रहा था। दोनों की “उन्ह… आह… ओफ्….. हम्म… ” की आवाज “फच्च फच्च” की आवाज से मिलकर मेरे कमरे में एक अद्भुत ड्रम के संगीतमय आवाज जैसी सुनाई दे रही थी।.  . मैं अपने जीवन में पहली बार किसी की चुदाई का दृश्य देख रहा था। मुझे पता नहीं था की किसी औरत की चुदाइ देखना इतना उत्तेजक हो सकता है। राकेश और मंजरी दोनों के चेहरे के भाव अनोखे थे। राकेश उत्तेजना से भरा. अपनी सहभोगिनि को कैसे ज्यादा से ज्यादा उन्माद भरे तरीके से चोद सके उस उधेड़बुन में था और साथ साथ स्वयं भी उसी उन्माद का अनुभव भी कर रहा था। जब की मंजरी पलंग पर लेटी हुई, राकेश के करारे लण्ड का उसकी चूत की गहराईयों में होते हुए प्रहार का आनंद अपनी आँखें मूँदे ले रही थी। उन दोनों में सो कौन ज्यादा उत्तेजित था यह कहना नामुमकिन था।.  . जैसे जैसे राकेश ने अपने लण्ड को मंजरी की चूत में पेलने की गति बढ़ाई वैसे ही मंजरी के मुंह से आह… आह… ओह… हूँ… आअह्ह्ह… इत्यादि आवाजें जोर से निकलने लगी। मंजरी को किसी भी. तरह के दर्द का एहसास नहीं हो रहा था यह साफ़ लगता था। राकेश के इतने मोटे लण्ड ने मंजरी की चूत को पूरा फैला दिया था और उसका लण्ड अब आसानी से मंजरी की चूत में भाँप चालक कोयले के इंजन में चलते पिस्टन की. तरह अंदर बाहर हो रहा था। इतना ही नहीं, ऐसा लग रहा था जैसे मंजरी भी अपना पेडू उछाल उछाल कर राकेश के लण्ड को अपनी चूत के कोने कोने से वाकिफ कराना चाहती थी।  . धीरे धीरे मंजरी की आह… की सिसकारियां बढ़ने लगीं। राकेश का लण्ड जैसे जैसे मंजरी की चूत की गहराईयों को भेदने लगा वैसे वैसे मंजरी की चीत्कारियाँ और बुलंद होती चली गयीं।.  . मंजरी जोर से राकेश को “हाय… ओफ्फ… ओह… ऊँह…” के साथ साथ “ऊँह…साले…”.  . तो कभी “ओह…क्या चोदता है।”.  . और फिर थोड़ी देर बाद फिरसे, ” ओफ्फ… गजब का चोदू निकला तू तो यार।”  . ” चोद, और जोर से चोद। आह…मजा आ गया।” की आवाजें और तेज होने लगी।  . “ऊई माँ….. मर गयी रे….. यह मुझे क्या हो गया है….
? अरे बापरे….
आह….
ऑय….. ” मंजरी की आवाजें सुनकर ऐसा लग रहा था की वह झड़ने वाली थी। उधर राकेश के माथे से पसीने की बूंदें बहनी शुरू हो गयी थी। राकेश ने भी अपनी आँखें मुंद ली थीं और वह बस अपने पेंडू को जोर से धक्का देकर अपना लण्ड फुर्ती से पेल रहा था और उसके ललाट पर बनी सिकुड़न से यह साफ़ लग रहा था की वह भी. अपने चरम पर पहुँचने वाला था।.  . थोड़ी ही देर में राकेश भी, “आह….. मंजरी रे….. आह… ऑफ….
मैं झड़ रहा हूँ रे… अब रोका नहीं जा रहा….
” ऐसी आवाज के साथ ऐसा लगा जैसे अपने वीर्य का एक बड़ा फव्वारा उसके लण्ड से पिचकारी सामान छूट पड़ा। उधर मंजरी भी, “हाय रे… मैं भी….. गयी काम से….. जाने दे… छोड़ साले… जो होगा देखा जाएगा….
” कहते ही मंजरी एकदम थरथराती हुई बिस्तर पर मचलने लगी। उसके मुंह से हलकी सी सिसकारियां निकलने लगी।.  . राकेश ने अपना लण्ड मंजरी की चूत में ही रखते हुए अपना सर निचे झुका कर मंजरी के होठों पर अपने होंठ रख दिए और मंजरी को अपनी बाहों में लेकर वह उसे बेइंतेहा चूमने लगा।.  . ऐसा लग रहा था जैसे अपने प्रेम का महा सागर मंजरी की चूत में उंडेलकर राकेश मंजरी को अपने से अलग करना नहीं चाहता था। मंजरी भी अपनी गोरी गोरी नंगी टाँगें राकेश के कमर को लपेटे हुए उसके पुरे बदन को ऐसे. चिपक रही थी जैसे एक बेल गोल घूमते हुए एक पेड से चिपक जाती है। दोनों पाँवको कस कर दबाने से राकेश का लण्ड मंजरी की चूत में और घुसता जा रहा था। मंजरी की कमर से निचे की और राकेश के लण्ड की मलाई बह रही थी. और मेरी चद्दर को गीला कर रही थी।.  . दोनों झड़ चुके थे और अत्यंत उत्तेजना पूर्ण चुदाई करने से साफ़ थके हुए भी थे और गहरी साँसे ले रहे थे। राकेश का बदन गर्मी में परिश्रम के कारण पसीने तरबतर था। मंजरी राकेश को अपने से अलग नहिं करना चाहती थी।.  . अपनी नंगी टांगों के अंदर राकेश के धड़ को अपने अंदर और दबाते हुए मंजरी बोली, “साले, अब तूने जब अपनी मलाई मेरे अंदर ड़ाल ही दी है तो मैं तेरे बच्चे की माँ भी बन सकती हूँ। अब तो मैं तुझे नहीं छोडूंगी। पहले मैं तुझे पास फटकने नहीं देती थी। अब मैं तुझे दूर जाने नहीं दूंगीं। अब तो मैं तेरे बच्चे की माँ ही बनना चाहती हूँ। अगर आज नहीं बनी तो फिर सही। पर मैं अब तेरे बच्चे की ही माँ बनूँगी। तू. क्या बोलता हे रे?”.
स्रोत:इंटरनेट